सहभागी भूजल प्रबंधन की अवधारण 
भूजल

सहभागी भूजल प्रबंधन की अवधारण, आवश्यकता एवं औचित्य 

सहभागी भूजल प्रबंधन का अर्थ है भूजल प्रणाली के प्रत्येक स्तर पर भूजल प्रबंधन में किसानों एवं विभाग की वित्तीय, प्रशासनिक तथा तकनीकी भागीदारी । प्रत्येक स्तर से अर्थ है कि डिमाण्ड को कम करना जैसे कृषि में स्प्रिंकलर, ड्रिप, अन्डर ग्राउन्ड पाइप, पाइप से सिंचाई तथा घरेलू कार्यों में पानी को बचाना जैसे गाड़ी को साफ करने के लिए पाइप के स्थान पर कपड़े का उपयोग, औद्योगिकों में पानी का कम उपयोग आदि ।

Author : अटल भूजल योजना, राज्य टीम

सहभागिता व सहयोग परस्पर समानार्थी हैं लेकिन हैं एकदम अलग-अलग । सहयोग की प्रक्रिया में जहां व्यक्ति एक-दूसरे की सहायता करते हैं जो क्षणिक भी हो सकता है, वहीं सहभागिता मिलजुलकर जिम्मेदारियां बांटकर निर्णय लेने और साथ काम करने की प्रक्रिया है, इसमें सभी पक्षों की जिम्मेदारियां, अधिकार व लाभ तय होते हैं। सहभागिता में सभी पक्ष एक साझे और सकारात्मक उद्देश्य की प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील रहते हैं, जिसमें लागत व प्राप्त लाभ में सभी भागीदार होते हैं। सहभागिता के लिए आवश्यक है कि प्रबंधन में सभी पक्षों की साझेदारी हो, उसके प्रति मानसिक व भावनात्मक लगाव हो तथा कुछ सकारात्मक कार्य करने की इच्छा हो तथा सहभागिता से अपनत्व का बोध होता है।

  • पारदर्शिता बढ़ती है। 
  • कार्य, खर्च व नुकसान का बोझ सभी में बराबर बंट जाता है। 
  • सभी सहभागियों को समानता के आधार पर लाभ होता है।
  • लोगों के ज्ञान, कौशल तथा संसाधनों का सही उपयोग होता है। 
  • साझी कठिनाईयां आसानी से दूर होती हैं। 
  • सबको संतोष मिलता है, अच्छा सामाजिक वातावरण पैदा होता है।

सहभागी भूजल प्रबंधन का अर्थ है भूजल प्रणाली के प्रत्येक स्तर पर भूजल प्रबंधन में किसानों एवं विभाग की वित्तीय, प्रशासनिक तथा तकनीकी भागीदारी । प्रत्येक स्तर से अर्थ है कि डिमाण्ड को कम करना जैसे कृषि में स्प्रिंकलर, ड्रिप, अन्डर ग्राउन्ड पाइप, पाइप से सिंचाई तथा घरेलू कार्यों में पानी को बचाना जैसे गाड़ी को साफ करने के लिए पाइप के स्थान पर कपड़े का उपयोग, औद्योगिकों में पानी का कम उपयोग आदि ।

किसान की भाषा में कहें तो किसानों के लिए, किसानों का, किसानों के द्वारा संचालित भूजल व्यवस्था ही सहभागी भूजल प्रबंधन है, जिसमें भूजल विभाग इस हेतु मार्ग निर्देशन व जरुरी सहयोग प्रदान करने के लिए वचनबद्ध है। वित्तीय, प्रशासनिक तथा तकनीकी भागीदारी से तात्पर्य भूजल प्रणालियों के योजना एवं निर्माण, चालन, मरम्मत एवं रख-रखाव, जल प्रबंधन, वितरण, जल के किफायती उपयोग को प्रोत्साहन देने, वित्तीय संसाधन जुटाने, व्यय करने, लेखा-जोखा रखने, विवादों के निराकरण की व्यवस्था बनाने आदि से है। भागीदारी का मतलब भूजल विभाग एवं कृषकों द्वारा आपस में विचार-विमर्श कर निर्णय लेने तथा उस पर संयुक्त रुप से कार्य करने से है। अपने निर्धारित दायित्वों के अन्तर्गत सहभागी भूजल प्रबंधन में शासन की स्पष्ट समझ है कि कृषि व जल से किसानों का अटूट नाता है और भूजल किसानों की जीवन रेखा है । भूजल प्रणाली की उचित देखभाल व चिरस्थाई भूजल व्यवस्था का निर्माण तभी संभव है जब इसमें किसानों को भूजल के नियोजन, संचालन तथा अनुश्रवण में अग्रणी भूमिका दी जाये। सहभागी भूजल प्रबंधन में भूजल जल का उपभोग करनेवाले लाभार्थियों के संगठनों का गठन किया जाता है जिन्हें जल उपभोक्ता समिति के नाम से जाना जाता है।

समस्याओं के समाधान के लिए संगठित रूप में किसानों का भूजल विभाग के साथ मिलकर काम करना अत्यंत आवश्यक है। सामूहिक सक्रियता से कई समस्याओं का उपयुक्त हल निकल सकता है। भूजल में किसानों एवं भूजल विभाग का यह संयुक्त प्रबंध "सहभागी भूजल प्रबंधन" के नाम से जाना जाता है।

हमारे देश में सहभागिता कोई नई बात नहीं है। खेती-किसानी और रोजमर्रा के कामों में किसान हमेशा से सहयोग और एक-दूसरे की मदद करते आये हैं। खेती-किसानी का काम तो ऐसा है कि बिना सहभागिता के हो ही नहीं सकता। बात चाहे फसल की रोपाई और कटाई की हो या छप्पर की हो, गांवों में आज भी कई काम जैसे शादी-विवाह इत्यादि में लोग एक-दूसरे के काम में हाथ बंटाते हैं और इसके फायदे सब जानते हैं।

  • किसानों को उनकी कृषि योग्य भूमि के अनुपात में पानी मिलता है।
  • कुछ निश्चित मामलों में कुछ निश्चित व्यक्तियों द्वारा पानी का उपयोग प्रतिबंधित भी किया जाता है।
  • भूजल के लिए स्थानीय नियम बनेंगे । 
  • भूजल की बचत के लिए भी नियम बनेंगे । 
  1. अंग्रेजों के आने से पूर्व मराठों के शासन में भी भूजल प्रणाली का कुछ हिस्से की देख रेख शासन द्वारा की जाती थी और कुछ हिस्सा जनसमुदाय द्वारा देखा जाता था। अब भी उस क्षेत्र में शासन द्वारा देखे जाने वाले  हिस्से को "सरकार" कहते हैं जबकि भूजल प्रणालियों के जिस हिस्से की देख- रेख की जिम्मेदारी किसानों की होती थी उसे "खुदीमरम्मत" कहते हैं।
  2. प्रदेश के बलरामपुर जिले में कई जलाशय जमींदारी जलाशय के नाम से आज भी जाने जाते हैं। इन्हें पुराने जमीदारों ने बनवाया था और उसे जनता को संचालन व रखरखाव हेतु सौंप दिया था।
  3. उत्तराखण्ड व हिमांचल प्रदेश में आज भी निजी गूलें मिल जायेंगी जिन्हें किसान आपसी सहभागिता से चला रहे हैं।
  • वर्तमान परिस्थिति, मुद्दे, समस्या का विश्लेषण और उस पर चर्चा करके सर्वसम्मति का प्रयास करना।
  • सही विकल्प चुनना ।
  • परिणामों का अंदाजा लगाना तथा वित्तिय जरुरतों का आंकलन करना और सबसे अच्छे विकल्प को चुनना ।
  • चयनित विकल्प को कार्यान्वित करना तथा जिम्मेदारियाँ तय करना।
  • पूरी प्रक्रिया तथा निर्णय की समीक्षा करना ।
  • सभी निर्णयों का दस्तावेजीकरण करना तथा निर्णय लेने के कारणों को लिखना ।
  • भूजल प्रबंधन की पादर्शिता में बढ़ोत्तरी ।
  • भूजल आदि हेतु धन की सुलभ उपलब्धता ।
  • प्रत्येक स्रोतों की आवश्यक मरम्मत ।
  • भूजल की देख-रेख के लिए अधिक हाथ ।
  • जल का समानुपातिक वितरण एवं उसका समुचित उपयोग ।
  • फसल प्रबंधन में सुलभता ।
  • परिसम्पतियों की सुरक्षा ।

1 . घरेलू कार्यों एवं उपकरणों से सम्बन्धित 

  • अपने बर्तन एवं अन्य सामग्रियों को सिंक या बड़े पात्र में कुछ पानी भरकर धोयें, बजाय कि नल से पानी बहाकर ।
  • बाथरूम में पानी की लाईन चालू करने के पहले उसका प्लग लगा दें।
  •  वॉश बेसिन में हवादार नल टोंटी का इस्तेमाल सुनिश्चित करें। 
  • दाँत साफ करते समय टोंटी बन्द रखें तथा प्रतिमिनट 4 गैलन पानी बचायें । तात्पर्य यह है कि एक सप्ताह में एक परिवार 200 गैलन पानी बचा सकता है। 
  • सेविंग करने के दौरान पानी की टोंटी बन्द रखें। इससे आप प्रति सप्ताह 100 गैलन पानी बचा सकते हैं।
2.  

लॉन एवं गार्डन की सिंचाई से सम्बन्धित

 
  • पौधारोपण मानसून  अथवा वर्षा ऋतु के दौरान करें जब सिंचाई की आवश्यकता कम रहे ।
  • सिंचाई का कार्य प्रातःकाल की शुरुआत में करें, जब तापमान कम रहता है ताकि वाष्पीकरण कम हो ।
  • अपने लॉन में पानी तभी डालें जब आवश्यक हो । 
  • गार्डन की सिंचाई के लिए वर्षा जल का संग्रहण करें।
  • पौधा रोपने के पूर्व एक छोटा गड्ढा बनायें तथा पौधा रोपने के समय उसमें नमी युक्त जैविक खाद मिट्टी के साथ मिलाकर डालें।
3.

पाईप लाइन एवं आउटडोर फिटिंग से सम्बन्धित 

  • यदि आपके स्वीमिंग पूल में पानी के पुनर्भरण के लिए ऑटोमेटिक यंत्र लगा हुआ है तो उसकी अवधिक निरीक्षण करें।
  • बाहरी लीकेज की शिकायत शीघ्र ही सम्बन्धित जलापूर्ति एवं पाईपलाइन्स प्राधिकरण को करें।
  • पूल्स एवं स्पॉस में कव्हर की व्यवस्था करें और अपने पम्पों के ज्वाइंट टाइट रखें ताकि कहीं लीकेजन रहे।

4. सामान्य आदत एवं व्यवहार से सम्बन्धित 

  • अपने पानी मीटर और बिल को चेक करें तथा अपने जल उपयोग का जायजा लें।
  • नये उपकरण की खरीदी के समय हमेशा यह दिमाग में रखें कि वह कम उर्जा और कम पानी खपत वाला हो । 
  • रोड एवं किनारे के रास्तों की सफाई के लिए होज पाईप चलाने के बजाय झाडू का उपयोग करें ताकि 80 गैलन पानी की बचत हर बार हो। 
  • कार धोने के लिए कामर्शियल कार वॉश का उपयोग करें क्योंकि वहाँ पानी का पुनर्रपयोग होता है। 
  • पालतू जानवरों को उसी जगह नहलायें जहाँ नहलाने के बाद बहे पानी का उपयोग हो सके ।

स्रोत :- अटल भूजल योजना, राज्य टीम

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