हीटवेव और उमस भरी गर्मी में हाई ब्‍लड प्रेशर यानी हाइपर टेंशन की समस्‍या बढ़ जाती है। इसलिए गर्मी में इसके प्रति सावधानी बरतना जरूरी है।

 
स्रोत : इंडिया वाटर पोर्टल
स्वास्थ्य और स्वच्छता

बढ़ती गर्मी बढ़ा रही Hypertension का खतरा, पानी पीकर इस तरह कंट्रोल करें हाई ब्‍लड प्रेशर

बैठे रहने वाली शहरी जीवनशैली और क्‍लाइमेट चेंज व ग्‍लोबल वॉर्मिंग के असर से बढ़ती जा रही है ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या

Author : कौस्‍तुभ उपाध्‍याय

गर्मी बढ़ने पर लू लगने, दस्‍त, उल्‍टी, मौसमी बुखार आदि के अलावा जो स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या लोगों को सबसे ज्‍यादा परेशान करती है वह है उच्‍च रक्‍तचाप यानी हाई ब्‍लड प्रेशर। इसे Hypertension भी कहा जाता है। बदलती जीवनशैली, असंतुलित आहार, तनाव, और शारीरिक गतिविधियों की कमी के अलावा जलवायु परिवर्तन के कारण भी लोगों में उच्च रक्तचाप की समस्या बढ़ रही है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस बीमारी से निपटने में पानी पीना बहुत कारगर साबित हो सकता है। 

हाई ब्‍लड प्रेशर के कारण और प्रभाव

हाई ब्‍लड प्रेशर की वजहों की बात करें तो आज की दौड़भाग भरी जिंदगी, तनाव, आर्थिक चिंताएं, पारिवारिक जिम्मेदारियां, मोबाइल व सोशल मीडिया के बढ़ते डिजिटल ओवरलोड और बैठे रहने वाली जीवनशैली (sedentary lifestyle)  वजहें हाई ब्लड प्रेशर का कारण बनती हैं।

खानपान की बिगड़ी आदतें, जैसे कि ज्यादा नमक, चीनी और प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड खाना और भोजन में ताजे फल, हरी सब्जियों की कमी ब्लड प्रेशर को असंतुलित करती है। अनियमित नींद भी हाई ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या की एक बड़ी वजह बनती है, क्‍योंकि रात को 6-8 घंटे की अच्‍छी नींद शरीर को शारीरिक और मानसिक थकान से उबरने में मदद करती है। इसक अभाव में शरीर का भीतरी संतुलन बिगड़ जाता है।

गर्मी में हाइपर टेंशन की व्‍यापकता को देखते हुए ही हर साल 17 मई को 'विश्व उच्च रक्तचाप दिवस' यानी World Hypertension Day मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) के खतरों और इसके रोकथाम के उपायों के प्रति जागरूक करना है।

भीषण गर्मी और लू के थपेड़े (हीटवेव) सेहत के लिए कई तरह से नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। इसलिए गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडा रखना जरूरी हो जाता है। 

उच्च रक्तचाप से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े 

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार आज  दुनिया भर में करीब 1.28 अरब वयस्क (18–79 वर्ष) हाई ब्‍लड प्रेशर से पीड़ित हैं। 

  • दुनिया भर में हृदय रोगियों में से 46% को यह पता भी नहीं कि उन्हें यह समस्या है। इससे उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती जाती है। 

  • ICMR-NCDIR India की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर 5 में से लगभग 1 वयस्क (20%) को उच्च रक्तचाप है। शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 25% से ऊपर तक है। 

  • यदि समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह हृदय रोग, स्ट्रोक, और किडनी फेल्योर जैसी गंभीर समस्‍या पैदा कर देता है। 

  • 70% स्ट्रोक और 50% हार्ट अटैक के मामलों के पीछे हाई ब्‍लड प्रेशर ही कारण बनता है।

गर्मी में हाइपरटेंशन बढ़ने की क्‍या है वजह?

भीषण गर्मी का असर केवल शरीर के तापमान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह रक्तचाप और हृदय स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। आमतौर पर माना जाता है कि सर्दियों में ब्लड प्रेशर अधिक बढ़ता है, लेकिन अत्यधिक गर्मी और हीटवेव की स्थिति में भी हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ सकता है। 

तेज गर्मी के दौरान शरीर को ठंडा रखने के लिए रक्त वाहिकाएं फैलने लगती हैं और पसीने के जरिए शरीर से पानी व इलेक्ट्रोलाइट तेजी से बाहर निकलते हैं। इससे डिहाइड्रेशन की स्थिति पैदा हो सकती है, जिसके कारण रक्त संचार प्रभावित होता है और हृदय को रक्त पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

डिहाइड्रेशन के कारण शरीर में सोडियम-पोटैशियम का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे ब्लड प्रेशर अचानक ऊपर-नीचे होने लगता है। पहले से हाई बीपी, हृदय रोग, मधुमेह या किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों में यह जोखिम और अधिक बढ़ जाता है। कई बार गर्मी में अत्यधिक पसीना आने के कारण लोग कमजोरी या चक्कर को सामान्य समझ लेते हैं, जबकि यह अस्थिर रक्तचाप का संकेत हो सकता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गर्मियों में पर्याप्त पानी पीना, अत्यधिक धूप से बचना, नमक और कैफीन का संतुलित सेवन करना तथा ब्लड प्रेशर की नियमित जांच कराना जरूरी है। खासकर बुजुर्गों और हाइपरटेंशन के मरीजों को हीटवेव के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

राज्यपुरुषों में (%)महिलाओं में (%)
सिक्किम41.634.5
पंजाब37.731.2
गोवा33.627.5
केरल31.126.5
अरुणाचल प्रदेश28.924.3
तेलंगाना28.623.9
दिल्ली (NCT)28.022.8
मणिपुर28.022.5
अंडमान व निकोबार27.321.9
कर्नाटक27.221.7

जलवायु परिवर्तन से कैसे बढ़ रहा हाइपरटेंशन का खतरा?

जलवायु परिवर्तन अब केवल एक पर्यावरणीय संकट नहीं रह गया है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार बढ़ता वैश्विक तापमान यानीग्‍लोबल वॉर्मिंग 

हीटवेव और वायु प्रदूषण हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर के मामलों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। लगातार बढ़ती गर्मी के कारण शरीर को अपने तापमान को नियंत्रित करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे हृदय और रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

हीटवेव के दौरान डिहाइड्रेशन, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और तनाव हार्मोन में वृद्धि ब्लड प्रेशर को अस्थिर बना सकती है। लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी के संपर्क में रहने से हृदय गति बढ़ जाती है और रक्त संचार प्रणाली पर दबाव पड़ता है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रहा वायु प्रदूषण भी हाइपरटेंशन के खतरे को बढ़ाता है। हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (PM2.5) रक्त वाहिकाओं में सूजन पैदा कर सकते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बुजुर्ग, हृदय रोगी, मधुमेह के मरीज और बाहरी वातावरण में काम करने वाले लोग जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। यही वजह है कि अब हाइपरटेंशन को जलवायु परिवर्तन से जुड़ी उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों में भी गिना जाने लगा है।

घरों के भीतर गर्मी कम करने के उपाय करना भी जरूरी है। बीते साल अहमदाबाद की झुग्‍गी बस्‍ती में चल रहे अध्‍ययन के तहत घर की छत को सफेद पेंट करके गर्मी से राहत दिलाने का ऐसा ही एक 'कूल रूफ प्रोजेक्‍ट' चलाया गया था।

कब जरूरी है सतर्कता ?

हाइपरटेंशन के प्रति अगर सावधानी न बरती जाए और सही समय पर इसे नियंत्रित करने के उपाय न किए जाएं तो कई बार यह जानलेवा भी साबित होता है। डॉक्‍टरों के मुताबिक -

  1. ब्‍लड प्रेशर 120/80 mmHg से अधिक, तो हो जाएं सतर्क 

  2. नॉर्मल ब्लड प्रेशर: 120/80 mmHg

  3. 120-129 / <80: Elevated

  4. 130-139 / 80-89: Stage 1 Hypertension

  5. ≥140 / ≥90: Stage 2 Hypertension

क्या पानी पीने से ब्‍लड प्रेशर कंट्रोल होता है?

पानी हमारे शरीर के लिए सबसे जरूरी चीज है। इसका सीधा संबंध हमारे ब्‍लड प्रेशर से है। चूंकि हमारे खून में लगभग 90% पानी होता है, इसलिए पानी की कमी (डिहाइड्रेशन ) से रक्त की मात्रा कम हो सकती है और रक्त का घनत्व भी बढ़ जाता है। 

इससे दिल को खून पंप करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है। परिणामस्वरूप ब्‍लड प्रेशर बढ़ सकता है। इसके अलावा, डिहाइड्रेशन से वेसोप्रेसिन नामक हार्मोन का स्राव होता है, जो रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देता है, जिससे  ब्‍लड प्रेशर बढ़ जाता है।

Verywellhealth की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रतिदिन 6 से 8 गिलास (लगभग 1.5 से 2 लीटर) पानी पीने से हाई ब्‍लड प्रेशर के जोखिम को कम किया जा सकता है। पानी अधिक पीने से शरीर से अतिरिक्त सोडियम मूत्र के माध्यम से बाहर निकलता है, जिससे ब्‍लड प्रेशर कम होता है। 

इस तरह ब्‍लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए पानी पीना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, लेकिन जरूरत से ज्‍यादा पानी पीना भी अच्‍छा नहीं है। इससे ओवरहाइड्रेशन हो सकता है, जिससे इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए, अपने शरीर की आवश्यकताओं के अनुसार ही पानी पीना चाहिए।

हाई ब्‍लड प्रेशर से बचाव के उपाय

दिन की शुरुआत सुबह एक गिलास पानी पीकर करें। दिन भर में 6-8 गिलास सादा पानी पिएं। गर्म मौसम मेंऔर एक्सरसाइज के बाद पानी की मात्रा बढ़ाएं। ध्‍यान रखें पानी की इस खपत में चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक इसमें शामिल नहीं हैं।

डॉक्टर की सलाह लेकर कुछ हर्बल विकल्प या घरेलू नुस्‍खे भी अपनाए जा सकते हैं। जैसे- मेथी, धनिया या तुलसी के बीजों को रात भर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट पीने से ब्लड प्रेशर संतुलन में मदद मिल सकती है। हाई ब्‍लड प्रेशर से बचने के लिए नमक की मात्रा पर भी नियंत्रण रखना बेहद जरूरी है। WHO की गाइडलाइन के अनुसार, एक वयस्क को दिन में अधिकतम 5 ग्राम (एक चम्मच) नमक खाना चाहिए, लेकिन भारतीय लोग औसतन 10-12 ग्राम प्रतिदिन खाते हैं। इसके अलावा धूम्रपान और शराब पीने से भी न केवल रक्तचाप बढ़ाता है, बल्कि यह ब्लड वेसल्स को कठोर और संकरा कर देता है।

बुजुर्गों में अकसर प्यास को महसूस करने की क्षमता कम हो जाती है। इसलिए उन्हें नियमित अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहना चाहिए। इसके अलावा डायबिटिक लोगों को भी पानी पीने केा लेकर काफी सजग रहना चाहिए। इन्‍हें पानी के साथ इलेक्ट्रोलाइट संतुलन पर भी ध्यान देना चाहिए। किडनी और हार्ट रोगियों को अपने डॉक्टर से सलाह के मुताबिक पानी पीना चाहिए। इन्‍हें डिहाइड्रेशन और ओवर हाइड्रेशन दोनों ही स्थितियों से बचना चाहिए ।

हाई ब्‍लड प्रेशर एक आम तौर पर पाई जाने वाली स्वास्थ्य समस्या है, पर उचित जीवनशैली अपना कर और पर्याप्त पानी पीकर इससे बचा जा सकता है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम करना और तनाव पर नियंत्रण इसकी रोकथाम में सहायक हो सकते हैं। आइए, इस विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर हम सभी अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हों और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की ओर कदम बढ़ाएं।

हीटवेव की मार शहरी इलाकों में ज्‍यादा पड़ती है, इसलिए घर से निकलने पर कड़ी धूप से बचाव के उपायों को अपनाना जरूरी हो जाता है। 

विश्व उच्च रक्तचाप दिवस (World Hypertension Day) कब मनाया जाता है और इसका क्या उद्देश्य है?

विश्व उच्च रक्तचाप दिवस (World Hypertension Day) हर साल 17 मई को 'विश्व उच्च रक्तचाप दिवस' मनाया जाता है । इसकी शुरुआत 2005 में हुई थी। पहली बार यह दिवस 14 मई 2005 को मनाया गया था। पहला आयोजन विश्व हाइपरटेंशन लीग (WHL) द्वारा किया गया था। हालांकि इसके अगले ही साल, यानी 2006 से, इसे हर साल 17 मई को स्थायी रूप से मनाया जाने लगा। तब से लेकर आज तक यह हर वर्ष 17 मई को ही मनाया जाता है।

विश्व उच्च रक्तचाप दिवस (World Hypertension Day) मनाने का उद्देश्‍य क्‍या है? 

विश्व उच्च रक्तचाप दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को हाइपरटेंशन यानी उच्च रक्तचाप बढ़ते के खतरों के प्रति लोगों को जागरूक करना है। साथ ही इससे बचाव व रोकथाम के उपायों के बारे में जानकारी देना भी इसका मकसद है ।

बढ़ती गर्मी, जलवायु परिवर्तन और हाइपर टेंशन के बीच क्‍या संबंध है? 

भीषण गर्मी में से हाइपर टेंशन का सीधा संबंध है। गर्मी बढ़ने पर हमारी रक्त वाहिकाएं शरीर को ठंडा रखने के लिए फैलने लगती हैं और पसीने के माध्यम से पानी व इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से बाहर निकल जाते हैं । इससे शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) हो जाती है, जो हाइपर टेंशन का प्रमुख कारण है। हाल के दशकों में जलवायु परिवर्तन और ग्‍लोबल वॉर्मिंग की वजह से धरती का तापमान में वृद्धि और गर्मी की प्रचंडता  बढ़ने इसमें बढ़ोतरी हुई है।

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