बिहार के दरभंगा में दर्ज़नों तालाबों पर भूमाफिया और बिल्‍डरों की कुदृष्टि के चलते इनमें से कई तालाबों को मिट्टी से भरकर ज़मीनों को बेच दिया गया है। 

 

स्रोत : विकी कॉमंस

नदी और तालाब

दरभंगा के 27 तालाबों की सूची - मिट्टी से पाट कर बिल्‍डरों को बेचे गए ये जल स्रोत

बिहार के दरभंगा जिले में प्रशासनिक साठगांठ से एक के बाद एक कई तालाबों को मिट्टी से पाट कर की बेची जा रहीं ज़मीनें

Author : कौस्‍तुभ उपाध्‍याय

बीते माह सुप्रीम कोर्ट ने दरभंगा के तीन प्रमुख तालाबों - दिग्घी, हराही और गंगासागर पर कथित तौर पर किए जा रहे सौंदर्यीकरण पर रोक लगा दी और प्रशासन को कड़ी फटकार लगायी। तालाबों का शहर कहे जाने वाले दरभंगा में अभी तमाम और तालाब हैं जो अतिक्रमण की भेंट चढ़ गए हैं। जिनमें मिट्टी भर कर प्रॉपर्टी डीलरों और बिल्‍डरों को ज़मीन के रूप में बेच दिए गए। इनमें से 27 तालाब ऐसे हैं, जिनके नाम कोर्ट एनजीटी को भेजे जा चुके हैं। 

दरभंगा में तालाबों की संख्‍या कितनी है? 

बिहार का दरभंगा शहर कभी अपने तालाबों की समृद्ध विरासत के लिए मशहूर था। मध्‍य काल से लेकर मुगल और ब्रिटिश काल तक यहां के शासकों और जागीरदारों ने बड़ी संख्‍या में तालाबों का निर्माण कराया था। इसकी बदौलत आज भी दरभंगा में ऐसे 225 से अधिक तालाब हैं, जिनका निर्माण इतिहास के अलग-अलग कालखंडों में उस समय के शासकों ने कराया। 

इन तालाबों पर प्रॉपर्टी डीलरों और बिल्‍डरों की काली नज़र के कारण इनमें से ज्‍़यादातर अब केवल कागज़ पर ही बचे हैं। असल में ज्‍़यादातर तालाबों को प्रदूषित करके या कचड़े से भर कर खत्‍म कर दिया गया है या किया जा रहा है। इन तरीकों को अपना कर और प्रशासनिक अधिकारियों की साठगांठ करके बिल्‍डरों ने बड़ी संख्‍या में दरभंगा के तालाबों पर कब्‍ज़ा जमा रखा है। 

'तालाब बचाओ अभियान' जैसी संस्‍थाओं और पर्यावरण कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध किए जाने के बावजूद कई तालाबों को पूरी तरह और कई के कुछ हिस्‍सों को बेंच भी दिया गया है। इन तालाबों की सूची इस प्रकार है। 

पूरी तरह बेच दिए गए तालाब

यह सूची उन तालाबों की है जो अब सिर्फ़ नक्शे पर ही रह गए हैं, जिन्हें मिट्टी से भरकर पूरी तरह बेच दिया गया है। हम आपको वार्ड संख्‍या भी बताएंगे जहां ये तालाब स्थित हैं:

क्र. संतालाब का नाम वार्ड संख्‍या कितने प्रतिशत मिट्टी
1फकीरा खान तालाब 30100%
2दुमदुमा तालाब 32100%
3जलील बाबू तालाब 22100%
4जलील बाबू तालाब 21100%
5तुलु खान तालाब (पुराना अंचल के पीछे)29100%
6डॉ. जुबेर साहब तालाब 30100%
7गुदर राय का पहला तालाब30100%
8गुदर राय का दूसरा तालाब31100%
9डॉ. अब्दुल बहावल के पूरब का तालाब 29100%
10दल पोखर 24100%
11मिल्लत कॉलेज हॉस्टल के उत्तर का तालाब31100%
12इमामबाड़ी तालाब, विनोद शाह के घर के पूरब में NA100%
13दुमदुमा इमामबाड़ा के पास तालाब NA100%
14नाका 6 से करमगंज रोड पर तालाब (उत्तर)33100%
15बाबा सागर दास पोखर, नाका 6 के पास, शेखर नेत्रालय के पूरब मेंNA100%
16उर्दू कब्रिस्तान के पास का तालाब 3075%
17कामास्तारी पोखर, पुराने मुंशी के पास (50 रुपये में बेचा गया)2575%
18पूर्व नेशनल इंग्लिश स्कूल के पश्चिम में तालाबNA75%
19बल्लापुर पोखर, बहादुरपुर ब्लॉक, ग्रामीण क्षेत्रNA60%
20मिरग्यास चक, मस्जिद के पीछे 3190%
21नूरी मस्जिद के सामने तालाब (निल्लत कॉलेज के पास)3175%
22मिरग्यास चक, हैदर खान के घर के उत्तर में, 100% पेमेंट पर बेचा गयाNANA
23लाल पोखर, नाका 5 के पास (लगभग 2 से 3 एकड़ ज़मीन पर कब्ज़ा) NANA
24डिग्घी तालाब (लगभग 3 से 4 एकड़ ज़मीन पर कब्ज़ा)NANA
25 मिर्ज़ा खान तालाब (लगभग 3 से 4 एकड़ ज़मीन पर कब्ज़ा)NANA
26गंगा सागर तालाब (लगभग 3 से 4 एकड़ ज़मीन पर कब्ज़ा)NANA
27वार्ड 33, पूर्व विधायक सुल्तान अंसारी के घर के पूर्व में स्थित तालाब, 50% बेचा गया।3350%

इंडिया वाटर पोर्टल ने तालाबों की यह सूची तालाब बचाओ आंदोलन की लीगल टीम से से प्राप्त की है। सूची मुहैया कराते हुए कॉरपस जूरिस इंडिया (लॉ फर्म) की अधिवकता एडवोकेट रेणु ने कहा कि कोर्ट में इन तालाबों के लिए लड़ाई जारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में तालाबों और पर्यावरण को बचाने की उनकी मुहिम जरूर सफल होगी।  


हाल ही में हमने अपनी एक रिपोर्ट सुंदरीकरण के नाम पर दरभंगा के तीन ऐतिहासिक तालाबों 'खात्‍मे’ पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर में सुंदरीकरण और पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर दरभंगा के तीन बड़े तालाबों को खत्‍म करने की कोशिशों के बारे में बताया था। यह मामला दरभंगा के तीन ऐतिहासिक तालाबों दिग्घी, हराही और गंगासागर से जुड़ा है। तीनों तालाब के कथित सुंदरीकरण के नाम पर सरकारी एजेंसी बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) ने इनके बड़े हिस्‍सों को पाटकर वहां निर्माण कार्य चालू कर दिया था। स्‍थानीय लोगों व पर्यावरण प्रेमियों द्वारा तीनों प्राचीन तालाबों पर मनमाने ढंग से किए जा रहे इस निर्माण कार्य का विरोध किए जाने के बावजूद सरकारी महकमा  मिट्टी भराई और निर्माण कार्य पर रोक लगाने को राज़ी नहीं हुआ।

 इसके चलते यह लड़ाई राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), पटना उच्च न्यायालय होते हुए देश की अब सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंची थी। इस मामले में 'तालाब बचाओ अभियान' की ओर से दायर याचिका की अगली सुनवाई कोर्ट में 11 मई को होनी है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से शहर के तीन महत्‍वपूर्ण तालाबों का भविष्‍य तय होना है। 

लेटेस्ट अपडेट्स के लिए हमारे व्हाट्सऐप चैनल को फॉलो करें

SCROLL FOR NEXT