काली मृदा
प्रायद्वीपीय भारत (दकन ट्रैप) के उत्तरी-पश्चिमी भाग में पायी जाने वाली काली मिट्टी (अवशिष्ट मिट्टी) जिसकी उत्पत्ति लावा द्वारा निर्मित बेसाल्ट शैल से हुई है। जल से मिलने पर यह मिट्टी चीका या मृत्तिका (clay) जैसे मुलायम हो जाती है किन्तु सूखने पर कठोर हो जाती है और इसमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं। इसे रेगड़ (regur) भी कहते हैं। यह उपजाऊ मिट्टी है जो कपास उत्पादन के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
एक प्रकार की काली मृदा जो बेसाल्ट के अपरदन से उत्पन्न होती है।
दक्षिणी भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग में पाई जाने वाली गहरे काले रंग की सामान्यतः चूनेदार उष्णकटिबंधी मृदा जो नमी पाने पर फूलती है और जिसमें सूखने पर गहरी दरारें पड़ जाती हैं। यह रुई की उपज के लिए उपयोगी है। इसी से इसे काली कपास मृदा कहते हैं।
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