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चक्रवाती वर्षा (Cyclonic Rainfall) क्या है? इसका अर्थ, परिभाषा और प्रक्रिया

Author : इंडिया वाटर पोर्टल

चक्रवाती वर्षा (Cyclonic Rainfall) वह वर्षा है जो वायुमंडल में निम्न वायुदाब वाले क्षेत्रों या चक्रवातों के निर्माण और उनके प्रभाव के कारण होती है। जब गर्म और आर्द्र वायु किसी निम्न दाब क्षेत्र की ओर बढ़ती है, तो वह ऊपर उठती है। ऊंचाई पर पहुंचने पर वायु ठंडी होकर संघनित होती है और बादलों का निर्माण करती है, जिससे वर्षा होती है।

सरल शब्दों में, चक्रवात या निम्न दाब तंत्र के कारण होने वाली वर्षा को चक्रवाती वर्षा कहा जाता है।

चक्रवाती वर्षा की परिभाषा

चक्रवाती वर्षा वह मौसमीय प्रक्रिया है जिसमें निम्न वायुदाब क्षेत्र के चारों ओर वायु का अभिसरण होता है, जिसके कारण नम वायु ऊपर उठती है, संघनित होती है और वर्षा के रूप में जल पृथ्वी पर गिरता है।

मौसम विज्ञान में यह वर्षा उष्णकटिबंधीय चक्रवातों, पश्चिमी विक्षोभों और समशीतोष्ण चक्रवातों से जुड़ी होती है।

चक्रवाती वर्षा के उदाहरण

कुछ प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं -

  • बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवातों से होने वाली वर्षा

  • अरब सागर से आने वाले चक्रवाती तूफानों की वर्षा

  • पश्चिमी विक्षोभों के कारण उत्तर भारत में होने वाली वर्षा

  • मानसून के दौरान बनने वाले निम्न दाब क्षेत्रों की वर्षा

  • उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के प्रभाव से तटीय क्षेत्रों में भारी वर्षा

चक्रवाती वर्षा बनने की प्रक्रिया

चक्रवाती वर्षा निम्न चरणों में विकसित होती है -

  • निम्न वायुदाब का निर्माण - जब किसी क्षेत्र में वायुदाब कम हो जाता है, तो आसपास की वायु उस क्षेत्र की ओर प्रवाहित होने लगती है।

  • नम वायु का ऊपर उठना - गर्म और आर्द्र वायु निम्न दाब क्षेत्र में पहुंचकर ऊपर उठती है।

  • संघनन - ऊंचाई पर तापमान कम होने से जलवाष्प संघनित होकर बादलों का निर्माण करती है।

  • वर्षा - संघनित जलकण बड़े होकर वर्षा के रूप में पृथ्वी पर गिरते हैं।

चक्रवाती वर्षा के प्रमुख प्रकार

  • उष्णकटिबंधीय चक्रवाती वर्षा (Tropical Cyclonic Rainfall) - यह वर्षा समुद्रों के ऊपर बनने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के कारण होती है।

  • समशीतोष्ण चक्रवाती वर्षा (Temperate Cyclonic Rainfall) - यह मध्य अक्षांशों में बनने वाले चक्रवातों और वाताग्रों से संबंधित होती है।

  • पश्चिमी विक्षोभ जनित वर्षा - उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान पश्चिमी विक्षोभों के कारण होने वाली वर्षा भी चक्रवाती वर्षा का एक रूप है।

चक्रवाती वर्षा का महत्व

  • जल संसाधनों की पूर्ति -  नदियों, झीलों, तालाबों और भूजल स्रोतों को पुनर्भरण में सहायता मिलती है।

  • कृषि के लिए लाभदायक - फसलों को आवश्यक नमी प्राप्त होती है और सिंचाई की आवश्यकता कम हो सकती है।

  • जलविद्युत उत्पादन - बांधों और जलाशयों में जल संग्रह बढ़ने से विद्युत उत्पादन में मदद मिलती है।

  • पारिस्थितिक संतुलन - वनों, आर्द्रभूमियों और प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों को जल उपलब्ध होता है।

  • पेयजल उपलब्धता - जलाशयों में जल स्तर बढ़ने से पेयजल आपूर्ति मजबूत होती है।

चक्रवाती वर्षा के दुष्प्रभाव

  • बाढ़ - अत्यधिक वर्षा के कारण नदियों और नालों में बाढ़ आ सकती है।

  • भूस्खलन -  पर्वतीय क्षेत्रों में मिट्टी के खिसकने की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

  • फसल क्षति -  तेज वर्षा और हवाओं से कृषि फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।

  • अवसंरचना को नुकसान - सड़क, पुल, बिजली और संचार नेटवर्क प्रभावित हो सकते हैं।

  • जन-धन की हानि -  गंभीर चक्रवातों के दौरान बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है।

चक्रवाती वर्षा को प्रभावित करने वाले कारक

  • समुद्र की सतह का तापमान

  • वायुमंडलीय आर्द्रता

  • वायु दाब में अंतर

  • पवनों की दिशा और गति

  • भौगोलिक स्थिति

  • जलवायु परिवर्तन

भारत में चक्रवाती वर्षा

भारत में चक्रवाती वर्षा मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले चक्रवातों के कारण होती है। पूर्वी तट के राज्यों जैसे ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में इसका प्रभाव अधिक देखा जाता है।

सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभों के कारण पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी चक्रवाती प्रकृति की वर्षा होती है।

चक्रवाती वर्षा और जलवायु परिवर्तन

वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण समुद्रों का तापमान बढ़ रहा है, जिससे अधिक तीव्र चक्रवात बनने की संभावना बढ़ रही है। इसके परिणामस्वरूप कम समय में अत्यधिक वर्षा, शहरी बाढ़ और तटीय क्षेत्रों में जलभराव की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

इसलिए चक्रवाती वर्षा को समझना आपदा प्रबंधन, जल संसाधन योजना और जलवायु अनुकूलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।

चक्रवाती वर्षा के उपयोग

  • कृषि उत्पादन में सहायता

  • भूजल पुनर्भरण

  • जलाशयों का भराव

  • पेयजल आपूर्ति

  • जलविद्युत उत्पादन

  • पारिस्थितिक तंत्र संरक्षण

  • जल संसाधन प्रबंधन

चक्रवाती वर्षा पृथ्वी के जल चक्र का एक महत्वपूर्ण भाग है, जो जल संसाधनों की उपलब्धता, कृषि उत्पादन और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हालांकि अत्यधिक चक्रवाती वर्षा बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का कारण भी बन सकती है। बदलती जलवायु के दौर में चक्रवाती वर्षा के स्वरूप और प्रभावों को समझना सतत जल प्रबंधन और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए आवश्यक है।

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