1. किसी धातु या काँच की सुराही या अन्य पात्र जिसमें यात्री हरिद्वार आदि से गंगा नदी का जल ले आते हैं।
2. बंगालियों में सहेलियाँ परस्पर एक दूसरे को इस प्रकार पुकारती हैं। विश्रुत उपन्यासकार शरत्चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यासों में यह प्रयोग पाया जाता है। (सर्वदानंद)
1 -
2 -
3 -
1 -
2 -
लेटेस्ट अपडेट्स के लिए हमारे व्हाट्सऐप चैनल को फॉलो करें