फ़ोटो - विकिकॉममंस
Fuel को हिंदी में ईंधन कहते है, ईंधन (Fuel) वह पदार्थ है जो जलने या रासायनिक प्रतिक्रिया के माध्यम से ऊर्जा प्रदान करता है। यह ऊर्जा खाना पकाने, परिवहन, उद्योग, बिजली उत्पादन और सिंचाई जैसी गतिविधियों में उपयोग होती है। ग्रामीण भारत से लेकर बड़े शहरों तक, ईंधन हमारी दैनिक जीवन प्रणाली का आधार है।
ईंधन वह ठोस, द्रव या गैसीय पदार्थ है, जो ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करके ऊष्मा (heat) और ऊर्जा उत्पन्न करता है, जिसे विभिन्न कार्यों में उपयोग किया जाता है।
जल संसाधन पर प्रभाव- थर्मल पावर प्लांट्स में कोयला जैसे ईंधनों के उपयोग से बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत होती है।
कृषि में उपयोग- डीज़ल पंपसेट, ट्रैक्टर और हार्वेस्टर ईंधन पर निर्भर हैं।
जलवायु परिवर्तन- जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित होती है, जो ग्लोबल वार्मिंग का प्रमुख कारण है।
जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels)- कोयला (Coal), पेट्रोलियम (Petroleum), प्राकृतिक गैस (Natural Gas), लाखों वर्षों में बने, लेकिन सीमित और प्रदूषणकारी
जैव ईंधन (Biofuels)- बायोगैस, एथेनॉल, बायोडीज़ल, नवीकरणीय (renewable) और अपेक्षाकृत पर्यावरण-अनुकूल
स्वच्छ/नवीकरणीय ईंधन (Clean/Renewable Energy Sources)- सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जलविद्युत,जलवायु परिवर्तन को कम करने में सहायक
भारत के सन्दर्भ में -
उज्ज्वला योजना (PMUY)- ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी (LPG) को बढ़ावा देकर पारंपरिक ईंधनों (लकड़ी, गोबर) पर निर्भरता कम की गई।
एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम- भारत सरकार पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर जीवाश्म ईंधन की खपत कम करने की दिशा में काम कर रही है।
बायोगैस प्लांट- बिहार, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में ग्रामीण परिवार ऊर्जा और खाद दोनों के लिए इसका उपयोग करते है।
ऊर्जा सुरक्षा- देश की आर्थिक प्रगति के लिए जरूरी
कृषि उत्पादकता- सिंचाई और मशीनरी के लिए आवश्यक
पर्यावरणीय प्रभाव- जीवाश्म ईंधन से प्रदूषण, नवीकरणीय ऊर्जा से कम उत्सर्जन,जलवायु परिवर्तन, कार्बन उत्सर्जन का सीधा संबंध
भारत सरकार और अन्य संस्थाएं जैसे International Energy Agency ऊर्जा उपयोग और ईंधन नीति पर रिपोर्ट जारी करती है। जल-ऊर्जा-खाद्य (Water-Energy-Food Nexus) में ईंधन की भूमिका महत्वपूर्ण है। ग्रामीण विकास योजनाओं में स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
ईंधन आधुनिक जीवन का आधार है, लेकिन इसका चयन पर्यावरण और जल संसाधनों पर गहरा प्रभाव डालता है। स्वच्छ और नवीकरणीय ईंधनों की ओर बढ़ना ही सतत विकास और जलवायु संतुलन के लिए आवश्यक है।
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