जल एक आम रासायनिक पदार्थ है, जो कि जीवन के सभी ज्ञात रूपों के अस्तित्व के लिए आवश्यक है.ज्यादातर, जल शब्द का उपयोग केवल इसकी तरल अवस्था या रूप के लिए ही किया जाता है, लेकिन इस पदार्थ की एक ठोस अवस्था, बर्फ और एक गैसीय अवस्था जल वाष्प या भापभी है. जल पृथ्वी की सतह के 71% भाग को ढकता है[1].पृथ्वी पर, यह अधिकांशतः महासागरों और अन्य बड़े जल निकायों में पाया जाता है, साथ ही 1.6 प्रतिशत जल भूमिगत जल स्रोतों में और 0.001 प्रतिशत जल वायु में वाष्प, बादल (वायु में निलम्बित ठोस और द्रव जल कणों से निर्मित), और अवक्षेपण के रूप में पाया जाता है.[2] सतही जल का 97% भाग लवणी समुद्र, 2.4% ग्लेशियरऔर ध्रुवीय बर्फ की टोपी, और 0.6% अन्य सतही जल स्रोत जैसे नदी, झील और तालाब हैं.
पृथ्वी के पानी की एक बहुत छोटी राशि जैविक निकायों और विनिर्मित उत्पादों के भीतर निहित है. शेष पानी बर्फ की टोपियों, ग्लेशियरों, जल स्रोतों, या झीलों में, पाया जाता है, कभी कभी धरती पर जीवन के लिए साफ पानी उपलब्ध कराता है.
जल लगातार वाष्पीकरण या वाष्पोत्सर्जन (जल वाष्प का उत्सर्जन), अवक्षेपण, औरप्रवाह के चक्रसे गुजरता हुआ आम तौर पर समुद्र में पहुँच जाता है. हवाएं उसी दर से जल को भूमि के ऊपर प्रवाहित करती हें जिस दर से समुद्र में जल का प्रवाह होता है.
भूमि के ऊपर, वाष्पीकरण और वाष्पोत्सर्जन, भूमि पर अवक्षेपण में योगदान देते हैं.
स्वच्छ, ताजा पीने का पानी मानव और अन्य जीवन के लिए आवश्यक है. दुनिया के लगभग हर हिस्से में पिछले दशकों के दौरान सुरक्षित पेय जल की उपलब्धि में निरंतर सुधार हुआ है.[3][4] प्रति व्यक्ति सकल घरेलु उत्पाद और सुरक्षित जल की उपलब्धि के बीच स्पष्ट सम्बन्ध है.[5] हालांकि, कुछ पर्यवेक्षकों ने अनुमान लगाया है कि 2025 तक दुनिया की आधी से अधिक जनसंख्या जल पर आधारित जोखिम का सामना कर रही होगी.[6] जल दुनिया की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि यह रासायनिक पदार्थों की अधिकाश किस्मों के लिए एक विलायक का काम करता है, और औद्योगिक शीतलन व परिवहन को सहज बनता है. ताजे जल का लगभग 70 प्रतिशत भाग कृषि के द्वारा प्रयुक्त किया जाता है.[7]
1 - OECD जल आँकड़े