1. वह मृदा जो जल से इस प्रकार संतृप्त रहती है कि उसका रंध्रावकाश जल से पूरी तरह भर जाता है। जड़ों को श्वसन के लिए पर्याप्त आक्सीजन न मिल पाने के कारण वे पादपों की वृद्धि के किए अनुपयुक्त हो जाते है।
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