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पादप हिंदी और संस्कृत में पौधों या वनस्पतियों के लिए प्रयोग किया जाने वाला शब्द है। यह शब्द उन सभी जीवों को दर्शाता है जो जमीन में जड़ पकड़कर उगते है और सूर्य के प्रकाश, जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड की मदद से अपना भोजन स्वयं बनाते है। पादप पृथ्वी पर जीवन के आधार है चाहे वह खाद्य सुरक्षा हो, जल चक्र हो या जलवायु संतुलन हो।
पादप की परिभाषा
पादप वे स्वपोषी जीव हैं जो प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के माध्यम से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं और ऑक्सीजन का उत्सर्जन करते है।
पादप जल और पर्यावरण प्रणाली के केंद्र में होते है।
पेड़-पौधे वर्षा चक्र को प्रभावित करते हैं और भूजल पुनर्भरण में मदद करते हैं
वनस्पति मिट्टी के कटाव को रोकती है
नदियों और जलाशयों के किनारे उगने वाले पादप जल गुणवत्ता को बनाए रखने में सहायक होते हैं
उदाहरण के लिए, भारत में पश्चिमी घाट और हिमालयी क्षेत्रों के वन जल स्रोतों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वृक्ष - जैसे नीम, पीपल
झाड़ियाँ - जैसे गुलाब
घास - जैसे गेहूं, धान
जल पादप - जैसे जलकुंभी, कमल
उदाहरण , राजस्थान में खेजड़ी का पेड़ सूखा प्रतिरोधी पादप का उदाहरण है। केरल और कर्नाटक के धान के खेत जल और पादप के संतुलन को दर्शाते है। गंगा के किनारे उगने वाली वनस्पतियाँ मिट्टी के कटाव को रोकती हैं
ऑक्सीजन प्रदान करते है और कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते है
खाद्य श्रृंखला (food chain) की नींव है
जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में मदद करते है
जैव विविधता को बनाए रखते है
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है
फसल उत्पादन (गेहूं, चावल, दालें)
औषधीय पौधे (तुलसी, अश्वगंधा)
वानिकी और सामाजिक वानिकी कार्यक्रम
पशुपालन के लिए चारा
पादप केवल हरियाली का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि जीवन के लिए अनिवार्य घटक है। जल संरक्षण, जलवायु संतुलन और सतत कृषि के लिए पादपों का संरक्षण और संवर्धन अत्यंत आवश्यक है।
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