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पर्यावरण क्या है? अर्थ, परिभाषा, घटक और महत्व

Author : इंडिया वाटर पोर्टल

पर्यावरण (Environment) हमारे चारों ओर मौजूद सभी जैविक और अजैविक तत्वों का समग्र समूह है, जो जीवन को प्रभावित करते हैं। इसमें वायु, जल, भूमि, वनस्पति, जीव-जंतु, जलवायु तथा मानव द्वारा निर्मित संरचनाएं और गतिविधियां शामिल होती है।

सरल शब्दों में, मनुष्य और अन्य जीवों के आसपास मौजूद प्राकृतिक तथा मानव निर्मित परिस्थितियों के समूह को पर्यावरण कहा जाता है।

पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व पर्यावरण पर निर्भर करता है। यह जीवों को भोजन, पानी, हवा, आवास और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराता है।

पर्यावरण का अर्थ

'पर्यावरण' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है -

  • परि = चारों ओर

  • आवरण = घेरा या आवरण

अर्थात, जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है, उसे पर्यावरण कहा जाता है। अंग्रेजी में पर्यावरण को Environment कहा जाता है।

पर्यावरण की परिभाषा

जीवों को प्रभावित करने वाले सभी भौतिक, रासायनिक, जैविक और सामाजिक कारकों के समुच्चय को पर्यावरण कहा जाता है।

एक अन्य परिभाषा के अनुसार, जीव और उनके आसपास के वातावरण के बीच होने वाली पारस्परिक क्रियाओं का संपूर्ण तंत्र पर्यावरण कहलाता है।

पर्यावरण के प्रमुख घटक

पर्यावरण मुख्य रूप से दो प्रमुख घटकों से मिलकर बना है।

  • जैविक घटक - इसमें सभी जीवित प्राणी शामिल होते हैं। जैसे- मनुष्य, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे, सूक्ष्मजीव, कीट-पतंगे शामिल होते है।  

  • अजैविक घटक -  इसमें निर्जीव तत्व शामिल होते हैं। जैसे - वायु, जल, मिट्टी, सूर्य का प्रकाश, तापमान, खनिज पदार्थ शामिल होते है। 

पर्यावरण के प्रकार

  • प्राकृतिक पर्यावरण - यह प्रकृति द्वारा निर्मित होता है। इसमें पर्वत, नदियां, जंगल,  महासागर, जलवायु आते है।

  • मानव निर्मित पर्यावरण - यह मानव गतिविधियों द्वारा निर्मित होता है। इसमें भवन, सड़कें, बांध, उद्योग व कृषि क्षेत्र शामिल होता है।

  • सामाजिक पर्यावरण -  यह समाज और मानव संबंधों से संबंधित वातावरण होता है। इसके अंतर्गत संस्कृति, परंपराएं, शिक्षा, सामाजिक संस्थाएं, आर्थिक गतिविधियां आती है।

पर्यावरण का महत्व

पर्यावरण पृथ्वी पर जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसका प्रमुख महत्त्व निम्न प्रकार है -

  • स्वच्छ वायु उपलब्ध कराता है।

  • पेयजल और खाद्य संसाधन प्रदान करता है।

  • जैव विविधता को संरक्षण देता है।

  • जलवायु संतुलन बनाए रखता है।

  • प्राकृतिक संसाधनों का स्रोत है।

  • मानव स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।

पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र

पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जिंसमे  पर्यावरण की भूमिका निम्न प्रकार है -

  • ऊर्जा प्रवाह को बनाए रखना

  • पोषक तत्वों का चक्रण

  • जीवों के लिए आवास उपलब्ध कराना

  • खाद्य श्रृंखला का संचालन

  • प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना

पर्यावरण को प्रभावित करने वाले कारक

कई प्राकृतिक और मानवीय गतिविधियां पर्यावरण को प्रभावित करती हैं। जिनमें -

प्राकृतिक कारक

  • जलवायु परिवर्तन

  • बाढ़

  • सूखा

  • भूकंप

  • ज्वालामुखी विस्फोट

मानवीय कारक

  • वनों की कटाई

  • औद्योगीकरण

  • शहरीकरण

  • प्रदूषण

  • प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन

पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार 

जब पर्यावरण में हानिकारक पदार्थों की मात्रा बढ़ जाती है, तो पर्यावरण प्रदूषण उत्पन्न होता है। इसके प्रमुख प्रकार - 

  • वायु प्रदूषण

  • जल प्रदूषण

  • मृदा प्रदूषण

  • ध्वनि प्रदूषण

  • प्रकाश प्रदूषण

पर्यावरण संरक्षण का महत्व

बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण पर्यावरण संरक्षण आज वैश्विक आवश्यकता बन गया है। पर्यावरण  संरक्षण के उपाय निम्न प्रकार है - 

  • वृक्षारोपण

  • जल संरक्षण

  • प्रदूषण नियंत्रण

  • जैव विविधता संरक्षण

  • नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग

  • सतत विकास को बढ़ावा देना

पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन पर्यावरण के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, समुद्र स्तर में वृद्धि और चरम मौसम घटनाएं पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित कर रही है।

पर्यावरण के उदाहरण

  • जंगल और वन क्षेत्र

  • नदियां और झीलें

  • पर्वतीय क्षेत्र

  • समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र

  • कृषि भूमि

  • शहरी क्षेत्र

पर्यावरण के उपयोग

  • जीवन समर्थन - जीवों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना।

  • कृषि - फसल उत्पादन के लिए आधार प्रदान करना।

  • उद्योग - कच्चा माल और ऊर्जा उपलब्ध कराना।

  • पर्यटन - प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन स्थलों का निर्माण।

  • वैज्ञानिक अध्ययन - पारिस्थितिकी और जलवायु का अध्ययन करना।

पर्यावरण पृथ्वी पर जीवन का आधार है। यह जीवित और निर्जीव तत्वों का ऐसा तंत्र है, जो मानव सहित सभी जीवों के अस्तित्व और विकास को संभव बनाता है। स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण न केवल वर्तमान पीढ़ी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आवश्यक है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और सतत विकास को बढ़ावा देना समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

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