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फौवारा (Fountain) क्या है? अर्थ, परिभाषा, प्रकार और जल प्रबंधन में महत्व

Author : इंडिया वाटर पोर्टल

फौवारा या फ़व्वारा ऐसी जल संरचना है, जिसमें पानी को दबाव या पंप की सहायता से ऊपर, बाहर या विभिन्न दिशाओं में प्रवाहित किया जाता है। यह जलधारा आकर्षक आकृतियां बनाते हुए पुनः नीचे जलाशय, टैंक या कुंड में गिरती है।

सरल शब्दों में, पानी को सजावटी या उपयोगी रूप से ऊपर उछालने वाली व्यवस्था को फौवारा या फ़व्वारा कहा जाता है।

फव्वारे प्राचीन काल से ही बाग-बगीचों, महलों, सार्वजनिक स्थलों और धार्मिक परिसरों में सौंदर्य तथा शीतलता बढ़ाने के लिए उपयोग किए जाते रहे है। आधुनिक समय में ये शहरी सौंदर्यीकरण, पर्यटन और सार्वजनिक स्थानों की आकर्षण वृद्धि का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके है।

फौवारा की परिभाषा

जल को प्राकृतिक दबाव या यांत्रिक पंप की सहायता से नियंत्रित रूप से ऊपर या विभिन्न दिशाओं में प्रवाहित करने वाली संरचना को फौवारा (Fountain) कहा जाता है। अंग्रेजी में इसे Fountain कहा जाता है।

फौवारे की कार्यप्रणाली

फौवारा एक सरल लेकिन प्रभावी जल प्रणाली पर आधारित होता है।

  • जल संग्रहण - सबसे पहले पानी किसी टैंक, कुंड या जलाशय में संग्रहित किया जाता है।

  • दबाव उत्पन्न करना - पंप या प्राकृतिक जलदाब की सहायता से पानी को ऊपर भेजा जाता है।

  • नोजल से जल प्रवाह - विशेष नोजल के माध्यम से पानी विभिन्न आकारों और पैटर्न में बाहर निकलता है।

  • जल का पुनर्चक्रण - गिरा हुआ पानी पुनः टैंक में एकत्र होकर दोबारा उपयोग किया जाता है।

फौवारे के प्रकार

फौवारे विभिन्न उद्देश्यों के अनुसार कई प्रकार के होते है।

  • सजावटी फौवारा (Decorative Fountain) - इनका उपयोग पार्कों, उद्यानों, होटलों और सार्वजनिक स्थलों की सुंदरता बढ़ाने के लिए किया जाता है।

  • संगीत फौवारा (Musical Fountain) - इनमें पानी की धाराएं संगीत और प्रकाश के साथ तालमेल में संचालित होती है।

  • पेयजल फौवारा (Drinking Fountain) - सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लगाए जाते है।

  • उद्यान फौवारा (Garden Fountain) - घरों, बगीचों और लैंडस्केप डिज़ाइन में उपयोग किए जाते है।

  • सौर ऊर्जा आधारित फौवारा (Solar Fountain) - ये सौर ऊर्जा से संचालित होते है और ऊर्जा की बचत करते है।

फौवारे का ऐतिहासिक महत्व

फौवारों का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है।

  • प्राचीन रोमन सभ्यता में सार्वजनिक जल आपूर्ति के लिए फौवारों का उपयोग किया जाता था।

  • मुगलकालीन भारत में बागों और महलों में फव्वारे विशेष आकर्षण का केंद्र होते थे।

  • कश्मीर के शालीमार और निशात बाग जैसे ऐतिहासिक उद्यान अपने सुंदर फव्वारों के लिए प्रसिद्ध है।

  • आधुनिक शहरों में फव्वारे पर्यटन और सार्वजनिक सौंदर्यीकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए है।

शहरी विकास में फौवारे का महत्व

फौवारे केवल सजावट का साधन नहीं है, बल्कि शहरी वातावरण को बेहतर बनाने में भी योगदान देते है।

मुख्य लाभ

  • सार्वजनिक स्थानों की सुंदरता बढ़ाते है।

  • पर्यटकों को आकर्षित करते है।

  • गर्म वातावरण में शीतलता का अनुभव कराते है।

  • लोगों के लिए मनोरंजन और विश्राम का स्थान बनाते है।

  • शहरों की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते है।

पर्यावरण में फौवारे की भूमिका

यदि उचित ढंग से संचालित किए जाएं तो फौवारे पर्यावरणीय दृष्टि से भी उपयोगी हो सकते है।

पर्यावरणीय लाभ

  • जल के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देते है।

  • स्थानीय सूक्ष्म जलवायु (Microclimate) को प्रभावित कर सकते है।

  • शहरी हरित क्षेत्रों की सुंदरता बढ़ाते है।

  • पक्षियों और छोटे जीवों के लिए जल स्रोत का कार्य कर सकते है।

  • सार्वजनिक स्थलों में हरियाली को प्रोत्साहित करते है।

फौवारे को प्रभावित करने वाले कारक

फौवारे की कार्यक्षमता कई कारकों पर निर्भर करती है।

  • जल की उपलब्धता

  • पंप की क्षमता

  • बिजली की उपलब्धता

  • नोजल का आकार और डिजाइन

  • जल की गुणवत्ता

  • रखरखाव और सफाई

  • मौसम और तापमान

जल संरक्षण और फौवारे

आधुनिक समय में जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए कई फौवारे पुनर्चक्रण प्रणाली पर आधारित बनाए जाते है।

जल बचत के उपाय

  • रीसर्कुलेशन सिस्टम का उपयोग

  • सौर ऊर्जा आधारित पंप

  • कम जल खपत वाले नोजल

  • नियमित रखरखाव

  • वर्षा जल संचयन के साथ एकीकरण

फौवारे के उदाहरण

  • शहरों के पार्कों में लगाए गए सजावटी फौवारे

  • संगीत और प्रकाश वाले शो फव्वारे

  • मुगल उद्यानों के ऐतिहासिक फव्वारे

  • रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डों पर पेयजल फौवारे

  • घरों और रिसॉर्ट्स में लगाए जाने वाले उद्यान फौवारे

फौवारे के उपयोग

  • शहरी सौंदर्यीकरण - पार्कों, चौकों और सार्वजनिक स्थलों की सुंदरता बढ़ाने में।

  • पर्यटन - पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए।

  • मनोरंजन - संगीत और प्रकाश आधारित फव्वारा शो में।

  • पेयजल आपूर्ति - सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने में।

  • बागवानी और लैंडस्केपिंग - उद्यानों और आवासीय परिसरों के डिजाइन में

फौवारा (फ़व्वारा) जल, कला और अभियांत्रिकी का सुंदर संगम है। यह केवल एक सजावटी संरचना नहीं, बल्कि शहरी सौंदर्यीकरण, पर्यटन, सार्वजनिक उपयोगिता और पर्यावरणीय आकर्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है। प्राचीन उद्यानों से लेकर आधुनिक स्मार्ट शहरों तक, फव्वारे मानव सभ्यता में जल के महत्व और सौंदर्यबोध का प्रतीक रहे हैं। जल संरक्षण और ऊर्जा दक्ष तकनीकों के साथ इनका उपयोग भविष्य में और अधिक टिकाऊ एवं उपयोगी बन सकता है।

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