अर्द्धशुष्क प्रदेशों में स्थित असमान धरातल वाली उच्चस्थ भूमि जिस पर आकस्मिक तीव्र वर्षा हो जाने से गहरी-गहरी अवनलिकाओं (gullies) की पंक्तिया बन जाती हैं और संपूर्ण भूमि ऊबड़-खाबड़ हो जाती है। विभेदी अपरदन के कारण कठोर एवं प्रतिरोधी शैलें समीपस्थ भूमि के ऊपर लम्बें स्तंभ अथवा उच्च सपाट भूमि के रूप में दृष्टिगोचर होती है। यह भूमि पशुचारण तथा कृषि के लिए अनुपयुक्त होती है। पश्चिमी सं.रा.अ. के दक्षिणी डैकोटा प्रांत के पश्चिमी भाग में स्थित उत्खात भूमि इसका उत्कृष्ट उदाहरण है।
उत्खात भूमि बंजर पठार जहां पहाडि़यों का नाटकिय क्षरण होता है, उन पर अनेक जीवाश्म अवसाद भी मिलते हैं। इस प्रकार के रेगिस्तान में तीव्र क्षरण होने के अलावा वनस्पति भी कम ही मिलती हैं।
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