सुनामी में उठने वाली ऊंची लहरें तटीय इलाकों में काफी दूर तक जाकर तबाही मचा सकती हैं। 

 

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आपदा

भूकंप के बाद क्‍यों बढ़ जाता है सुनामी का खतरा, समझिए Tsunami का विज्ञान और भूगोल

फिलीपींस में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद एक बार फिर सुनामी का खतरा मंडराने लगा है। लेकिन आखिर सुनामी क्या होती है, यह समुद्र में कैसे पैदा होती है और कुछ ही घंटों में हजारों किलोमीटर दूर तक तबाही कैसे मचा सकती है? समझिए इस विनाशकारी प्राकृतिक आपदा का पूरा विज्ञान।

Author : कौस्‍तुभ उपाध्‍याय

फिलीपींस में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद एक बार फिर सुनामी की चेतावनी जारी की गई है। प्रशांत महासागर का यह क्षेत्र दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है, जहां बड़े भूकंपों के बाद सुनामी का खतरा हमेशा बना रहता है। हालिया भूकंप ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सुनामी क्या होती है, यह क्यों आती है और कुछ घंटों में पूरे तटीय क्षेत्रों को तबाह कैसे कर देती है।

सुनामी क्या होती है?

सुनामी (Tsunami) जापानी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है "बंदरगाह की लहर"। यह सामान्य समुद्री लहरों से बिल्कुल अलग होती है। आम लहरें हवा के प्रभाव से बनती हैं, जबकि सुनामी समुद्र के भीतर अचानक होने वाले बड़े भूगर्भीय बदलावों से पैदा होती है।

सुनामी वास्तव में एक अकेली लहर नहीं बल्कि अत्यधिक ऊर्जा वाली विशाल लहरों की श्रृंखला होती है। खुले समुद्र में ये लहरें कई सौ किलोमीटर प्रति घंटे की गति से यात्रा कर सकती हैं, लेकिन उनकी ऊंचाई कम होने के कारण जहाजों को अक्सर इनका पता भी नहीं चलता। जैसे-जैसे ये तट के पास पहुंचती हैं, समुद्र की गहराई कम होने लगती है और लहरों की ऊंचाई कई मीटर से लेकर दर्जनों मीटर तक बढ़ सकती है।

सुनामी अत्यंत लंबी तरंगों की एक शृंखला है, जो समुद्र में अचानक और बड़े पैमाने पर हुए विस्थापन के कारण पैदा होती है। हवा से बनने वाली सामान्य लहरों के विपरीत, सुनामी समुद्र तल से लेकर समुद्र की सतह तक पूरे जल स्तंभ (Water Column) को प्रभावित करती है। आमतौर पर इसका कारण समुद्र तल के नीचे या उसके निकट आने वाला भूकंप होता है।
NOAA Science Council की रिपोर्ट

सुनामी क्यों आती है?

सुनामी पृथ्वी की भूगर्भीय गतिविधियों और समुद्र के बीच होने वाली एक जटिल प्राकृतिक प्रक्रिया का परिणाम है। इसका मूल कारण समुद्र में मौजूद विशाल जलराशि का अचानक अपनी जगह से हटना (Displace) होता है। सामान्य समुद्री लहरें हवा के कारण बनती हैं, लेकिन सुनामी तब पैदा होती है जब समुद्र के भीतर कोई ऐसी घटना घटती है, जो कुछ ही सेकंड या मिनटों में करोड़ों- अरबों टन पानी को अपनी जगह से हटा देती है।

सुनामी का सबसे बड़ा कारण समुद्र के नीचे आने वाले शक्तिशाली भूकंप होते हैं। पृथ्वी की ऊपरी सतह कई विशाल टेक्टोनिक प्लेटों में बंटी हुई है, जो लगातार बहुत धीमी गति से खिसकती रहती हैं। कई जगहों पर एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे धंसती रहती है। इस प्रक्रिया के दौरान वर्षों या कभी-कभी सदियों तक तनाव और ऊर्जा जमा होती रहती है। जब यह दबाव चट्टानों की सहन क्षमता से अधिक हो जाता है, तो प्लेटें अचानक खिसक जाती हैं और भूकंप उत्पन्न होता है। यदि यह भूकंप समुद्र के भीतर और पर्याप्त शक्तिशाली हो, तो समुद्र तल का एक बड़ा हिस्सा अचानक ऊपर उठ सकता है या नीचे धंस सकता है।

समुद्र तल में होने वाला यह अचानक परिवर्तन ऊपर मौजूद पूरी जलराशि को भी प्रभावित करता है। कल्पना कीजिए कि यदि किसी बड़े टब के नीचे से अचानक उसका तल ऊपर उठ जाए, तो ऊपर का पानी भी जोर से हिल जाएगा। ठीक यही प्रक्रिया महासागर में होती है, लेकिन यहां पानी की मात्रा इतनी विशाल होती है कि उत्पन्न ऊर्जा हजारों किलोमीटर दूर तक पहुंच सकती है। समुद्र तल के ऊपर-नीचे होने से पानी का पूरा स्तंभ (Water Column) प्रभावित होता है और यही ऊर्जा विशाल तरंगों के रूप में चारों दिशाओं में फैलने लगती है। यही तरंगें आगे चलकर सुनामी का रूप लेती हैं।

सभी समुद्री भूकंप सुनामी नहीं पैदा करते

सुनामी की आपदा अकसर भूकंप के बाद देखी जाती है। हालांकि सभी समुद्री भूकंप सुनामी नहीं पैदा करते। वैज्ञानिकों के अनुसार आमतौर पर 7.5 या उससे अधिक तीव्रता वाले उथले समुद्री भूकंप, जिनमें समुद्र तल का ऊर्ध्वाधर विस्थापन (Vertical Displacement) होता है, सुनामी पैदा करने की सबसे अधिक क्षमता रखते हैं। यदि भूकंप केवल क्षैतिज दिशा में प्लेटों को खिसकाता है, तो सुनामी बनने की संभावना काफी कम होती है।

भूकंप के अलावा कुछ अन्य प्राकृतिक घटनाएं भी सुनामी का कारण बन सकती हैं। समुद्र के भीतर होने वाले बड़े भूस्खलन (Submarine Landslides) अचानक भारी मात्रा में पानी को विस्थापित कर सकते हैं। इसी तरह समुद्री ज्वालामुखियों के विस्फोट, ज्वालामुखीय द्वीपों का ढहना या समुद्र में विशाल चट्टानों का गिरना भी सुनामी को जन्म दे सकता है। वर्ष 1883 में इंडोनेशिया के क्राकाटोआ ज्वालामुखी विस्फोट और 2022 में टोंगा ज्वालामुखी विस्फोट इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

अत्यंत दुर्लभ परिस्थितियों में किसी बड़े उल्का पिंड (Meteorite) का समुद्र में गिरना भी सुनामी पैदा कर सकता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि पृथ्वी के इतिहास में ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिन्होंने असाधारण रूप से विशाल समुद्री लहरें उत्पन्न की थीं। हालांकि आधुनिक काल में ऐसा कोई बड़ा उदाहरण दर्ज नहीं किया गया है।

इस प्रकार सुनामी का वास्तविक कारण केवल भूकंप नहीं, बल्कि समुद्र की विशाल जलराशि का अचानक और बड़े पैमाने पर विस्थापन है। जितनी अधिक मात्रा में पानी अपनी जगह से हटता है, उतनी ही अधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है और सुनामी उतनी ही विनाशकारी साबित हो सकती है।

कई बार बहुत तगड़ा भूकंप आने के बाद आसपास के समुद्री इलाके में मचने वाली भूगर्भीय हलचल से सुनामी पैदा होती है, पर हर बड़े भूकंप के बाद सुनामी नहीं आती। 

समुद्री तूफान और सुनामी में क्‍या है अंतर?

सुनामी और समुद्री तूफान (चक्रवात, हरिकेन या टाइफून) को अक्सर एक जैसा समझ लिया जाता है, लेकिन दोनों अलग घटनाएं हैं। इनकी उत्पत्ति, प्रकृति और प्रभाव पूरी तरह अलग होते हैं। समुद्री तूफान वायुमंडल में बनने वाली मौसम संबंधी घटना है, जो समुद्र की गर्म सतह, नमी और तेज हवाओं के कारण पैदा होती है। इसके विपरीत सुनामी समुद्र के भीतर होने वाली भूगर्भीय घटनाओं, जैसे भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट या समुद्री भूस्खलन का परिणाम होती है।

तूफान में मुख्य विनाशकारी शक्ति तेज हवाएं, भारी बारिश और समुद्री ज्वार का बढ़ना (Storm Surge) होती हैं। वहीं सुनामी में खतरा विशाल जलराशि के अचानक तट की ओर बढ़ने से होता है। यही कारण है कि सुनामी की लहरें सामान्य समुद्री लहरों की तरह नहीं होतीं, बल्कि कई किलोमीटर लंबी जल-दीवार के रूप में तटीय क्षेत्रों में प्रवेश कर सकती हैं।

सुनामी की एक खास पहचान यह भी है कि कई बार इसके आने से पहले समुद्र का पानी असामान्य रूप से पीछे हट जाता है और समुद्र तल का बड़ा हिस्सा दिखाई देने लगता है। यह दृश्य देखने में आकर्षक लग सकता है, लेकिन वास्तव में यह आने वाली विनाशकारी लहर का चेतावनी संकेत होता है। कुछ मिनट बाद समुद्र का वही पानी अत्यधिक वेग और शक्ति के साथ वापस लौटता है और तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही मचा सकता है। इसके विपरीत समुद्री तूफानों में ऐसी घटना आमतौर पर नहीं होती, बल्कि उनका प्रभाव धीरे-धीरे विकसित होता है और मौसम पूर्वानुमानों के माध्यम से कई दिन पहले पता चल जाता है।

समुद्र के बीच में सुनामी दिखाई क्यों नहीं देती?

यह सुनामी का सबसे रोचक वैज्ञानिक पहलू है। खुले महासागर में सुनामी लहरों की ऊंचाई अक्सर केवल 30 से 100 सेंटीमीटर तक होती है, लेकिन उनकी तरंगदैर्ध्य (Wavelength) सैकड़ों किलोमीटर लंबी हो सकती है। इसलिए जहाजों को ये सामान्य लहरों जैसी ही लगती हैं। तट के पास पहुंचने पर समुद्र उथला होने लगता है। तब लहरों की गति कम हो जाती है लेकिन उनकी ऊर्जा बनी रहती है। परिणामस्वरूप ऊर्जा ऊपर की ओर केंद्रित होती है और लहरों की ऊंचाई तेजी से बढ़ जाती है। इसी प्रक्रिया को "शोलिंग" (Shoaling) कहा जाता है।

इसी कारण समुद्र के बीच से गुजर रहे बड़े जहाजों को कई बार यह पता भी नहीं चलता कि उनके नीचे से सुनामी गुजर चुकी है। वैज्ञानिक उपकरणों और समुद्र में स्थापित विशेष सेंसरों के बिना खुले महासागर में सुनामी का पता लगाना बेहद कठिन होता है। लेकिन जब यही ऊर्जा तटीय क्षेत्रों के उथले पानी में पहुंचती है, तो कुछ ही मिनटों में शांत दिखने वाली लहरें कई मीटर ऊंची जलराशि में बदल सकती हैं और भारी तबाही मचा सकती हैं।

प्रशांत महासागर में सुनामी का खतरा सबसे ज्यादा क्यों?

दुनिया की लगभग 80 प्रतिशत बड़ी सुनामी घटनाएं प्रशांत महासागर में होती हैं। इसका कारण प्रशांत रिंग ऑफ फायर (Pacific Ring of Fire) है। यह पृथ्वी का वह क्षेत्र है जहां अनेक टेक्टोनिक प्लेटें मिलती हैं और लगातार भूकंप व ज्वालामुखीय गतिविधियां होती रहती हैं। फिलीपींस, जापान, इंडोनेशिया, चिली, अलास्का और न्यूजीलैंड इसी क्षेत्र में स्थित हैं। इसी वजह से फिलीपींस में आए बड़े भूकंप के बाद सुनामी की आशंका को गंभीरता से लिया जाता है।

रिंग ऑफ फायर में दुनिया के लगभग 75 प्रतिशत सक्रिय ज्वालामुखी और 90 प्रतिशत से अधिक भूकंप दर्ज किए जाते हैं। यहां प्रशांत प्लेट कई अन्य प्लेटों के नीचे धंस रही है, जिससे लगातार भूगर्भीय तनाव पैदा होता रहता है। यही कारण है कि जापान की 2011 की विनाशकारी सुनामी, इंडोनेशिया की 2004 की हिंद महासागर सुनामी और हाल के वर्षों में फिलीपींस तथा टोंगा क्षेत्र की कई सुनामी घटनाओं का संबंध प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसी अत्यधिक सक्रिय भूगर्भीय क्षेत्र से रहा है।

वर्षघटना
1755पुर्तगाल के लिस्बन भूकंप के बाद विनाशकारी सुनामी
1883इंडोनेशिया के क्राकाटोआ ज्वालामुखी विस्फोट से सुनामी
1946अलास्का भूकंप और प्रशांत क्षेत्र में सुनामी
1960चिली का 9.5 तीव्रता का भूकंप, अब तक का सबसे शक्तिशाली दर्ज भूकंप
1964अलास्का का 'गुड फ्राइडे' भूकंप
1998पापुआ न्यू गिनी में सुनामी, हजारों मौतें
2004हिंद महासागर सुनामी, लगभग 2.3 लाख लोगों की मौत
2011जापान के तोहोकू भूकंप और फुकुशिमा परमाणु दुर्घटना
2018इंडोनेशिया के सुलावेसी और अनाक क्राकाटोआ क्षेत्र की सुनामी
2022टोंगा ज्वालामुखी विस्फोट के बाद प्रशांत क्षेत्र में सुनामी
2026फिलीपींस भूकंप के बाद सुनामी चेतावनी जारी

सुनामी की ऊंची लहरें तटीय शहरों के भीतरी इलाकों तक में जानमाल का भारी नुकसान कर सकती हैं। 2005 में जापान में ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला था। 

क्या अब दुनिया को सुनामी का पहले से ज्यादा खतरा है?

हाल के वर्षों में वैज्ञानिक समुदाय ने चिंता जताई है कि समुद्री निगरानी और मौसम अनुसंधान कार्यक्रमों में कटौती से चेतावनी प्रणालियों पर असर पड़ सकता है।

अमेरिका की एजेंसी NOAA (National Oceanic and Atmospheric Administration) वैश्विक समुद्री निगरानी, मौसम पूर्वानुमान और सुनामी चेतावनी नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ट्रंप प्रशासन के बजट प्रस्तावों में NOAA के कई अनुसंधान कार्यक्रमों और वैज्ञानिक गतिविधियों में कटौती का प्रस्ताव रखा गया था। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि ऐसी कटौतियां दीर्घकाल में वैश्विक निगरानी क्षमता को कमजोर कर सकती हैं।

हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि वैश्विक सुनामी चेतावनी प्रणाली पूरी तरह बंद हो गई है। प्रशांत, हिंद और अटलांटिक महासागर में अभी भी अनेक देशों द्वारा संचालित सेंसर, ज्वारमापी स्टेशन और डीप-ओशन बुआ (DART Buoys) सक्रिय हैं। लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि अनुसंधान और निगरानी में निवेश कम होने से भविष्य में जोखिम बढ़ सकता है।

सुनामी से जुड़े कुछ महत्‍वपूर्ण तथ्य

एक लहर नहीं, कई लहरें आती हैं : लोग अकसर सुनामी की पहली ऊंची लहर के गुज़र जाने के मान लेते हैं कि बाद खतरा टल गया। जबकि, कई मामलों में दूसरी, तीसरी या चौथी लहर सबसे ज्यादा विनाशकारी साबित हुई है।

सुनामी पूरी पृथ्वी पार कर सकती है : 2004 की हिंद महासागर सुनामी की लहरें अफ्रीका के पूर्वी तट तक पहुंच गई थीं। यानी एक महासागर में पैदा हुई ऊर्जा हजारों किलोमीटर दूर तक असर डाल सकती है।

समुद्री जीव पहले संकेत महसूस कर सकते हैं : कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि हाथी, पक्षी और कई समुद्री जीव इंसानों से पहले असामान्य कंपन और दबाव परिवर्तन महसूस कर सकते हैं।

समुद्र के नीचे भूस्खलन भी बड़ा खतरा है : हर सुनामी बड़े भूकंप से नहीं आती। समुद्र के भीतर विशाल भूस्खलन भी अचानक पानी को विस्थापित कर विनाशकारी लहरें पैदा कर सकते हैं।

जलवायु परिवर्तन अप्रत्यक्ष रूप से खतरा बढ़ा सकता है : वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र स्तर बढ़ने से भविष्य में समान ऊंचाई की सुनामी भी तटीय क्षेत्रों में अधिक अंदर तक घुस सकती है और ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है।

निष्कर्ष: चेतावनी ही सबसे बड़ा बचाव

सुनामी पृथ्वी की सबसे शक्तिशाली प्राकृतिक आपदाओं में से एक है। इसे रोका नहीं जा सकता, लेकिन समय रहते चेतावनी देकर लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है। 2004 की हिंद महासागर त्रासदी के बाद दुनिया ने निगरानी और चेतावनी प्रणालियों में बड़ा निवेश किया, लेकिन बदलते भू-राजनीतिक और आर्थिक माहौल में इन प्रणालियों को मजबूत बनाए रखना उतना ही जरूरी है। फिलीपींस में हालिया भूकंप ने एक बार फिर याद दिलाया है कि समुद्र के भीतर होने वाली घटनाएं कुछ ही घंटों में पूरे तटीय संसार को प्रभावित कर सकती हैं।

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