फोटो- विकिकॉमंस
8 जून 2026 को गुना शहर के वार्ड 9 और 10 से बच्चों के बीमार होने की खबर सामने आई।
जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी है।
प्रभावित क्षेत्र से पानी के नमूने एकत्र किए गए है और उनकी प्रयोगशाला जांच कराई जा रही है।
गुना, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के गुना जिले में एक मामला सामने आया है, जिसमें उल्टी-दस्त से बच्चे बीमार हुए है। गुना शहर में एक दर्जन से अधिक बच्चों के अचानक बीमार पड़ने के बाद पेयजल की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
एक रिपोर्ट के अनुसार वार्ड क्रमांक 9 और 10 में रहने वाले कई बच्चों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रशासन को आशंका है कि यह मामला दूषित पेयजल से जुड़ा हो सकता है, हालांकि इसकी अंतिम पुष्टि अभी नहीं हुई है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र से पानी के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं।
8 जून 2026 को गुना शहर के वार्ड 9 और 10 से बच्चों के बीमार होने की खबर सामने आई। प्रभावित बच्चों को उल्टी, दस्त, पेट दर्द और कमजोरी की शिकायत के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, एक दर्जन से अधिक बच्चों को अस्पताल में भर्ती किया गया, जबकि कुछ स्थानीय रिपोर्टों में संख्या डेढ़ दर्जन तक बताई गई है।
जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी है। प्रभावित क्षेत्र से पानी के नमूने एकत्र किए गए है और उनकी प्रयोगशाला जांच कराई जा रही है।
गुना में जल जीवन मिशन के मुख्य अधिकारी संचित धेमरी ने ANI से बातचीत में कहा कि सूचना मिलते ही विभागीय टीम को मौके पर भेजा गया।
"वार्ड 9 और 10 में कुछ बच्चों के बीमार होकर जिला अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी मिली थी। सूचना मिलते ही हमारी टीम को क्षेत्र में भेजा गया और पानी के नमूने लिए गए हैं।"
धेमरी ने बताया कि जिस जल टंकी से प्रभावित क्षेत्र को पानी की आपूर्ति होती है, उसी टंकी से कम से कम छह वार्डों में पानी पहुंचाया जाता है। इसलिए जांच केवल एक मोहल्ले तक सीमित नहीं रखी गई है।
अधिकारियों के अनुसार अस्पताल में भर्ती बच्चों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द, कमजोरी और कुछ मामलों में पीलिया जैसे लक्षण मिले है। जल जीवन मिशन के अधिकारी ने बताया कि कुछ बच्चों में पीलिया के लक्षण भी देखे गए हैं। हालांकि हेपेटाइटिस-ए अथवा किसी अन्य संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
अधिकारियों के अनुसार अस्पताल में भर्ती अधिकांश बच्चों की हालत स्थिर है। ANI को दिए गए बयान में अधिकारियों ने कहा कि कोई भी बच्चा गंभीर स्थिति में नहीं है। लगभग 5 से 11 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को भर्ती किया गया है और उनका उपचार जिला अस्पताल में जारी है।
भारत में जलजनित बीमारियां अक्सर दूषित पेयजल, सीवर मिश्रण, पाइपलाइन रिसाव या असुरक्षित जल भंडारण के कारण फैलती है। यदि किसी जल स्रोत में बैक्टीरिया, वायरस या अन्य प्रदूषक मिल जाते है तो दस्त, पीलिया, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
गुना मामले में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बीमारी का कारण वास्तव में पेयजल है या कोई अन्य संक्रमण है। इसी वजह से प्रशासन ने पानी के नमूनों की जांच के आदेश दिए है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी के वास्तविक कारण का पता चल सकेगा।
गुना की यह घटना एक बार फिर शहरी पेयजल आपूर्ति की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। यदि जांच में जल स्रोत या वितरण प्रणाली में प्रदूषण की पुष्टि होती है, तो यह स्थानीय जल प्रबंधन व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी होगी। वहीं यदि बीमारी का कारण कुछ और निकलता है, तब भी यह घटना जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
फिलहाल सभी की निगाहें पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो यह स्पष्ट करेगी कि बच्चों की बीमारी के पीछे वास्तव में दूषित पेयजल था या कोई अन्य कारण है।
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