फ़ोटो - विकिकॉमंस
आज दुनिया एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। एक ओर तेजी से बढ़ती आबादी, शहरीकरण और औद्योगीकरण है, तो दूसरी ओर जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता का ह्रास, जल संकट, प्रदूषण, गरीबी और सामाजिक असमानताएं है।
इन चुनौतियों का समाधान किसी एक देश के प्रयासों से संभव नहीं है। इसलिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 25 सितंबर 2015 को Transforming Our World: The 2030 Agenda for Sustainable Development को अपनाया, जिसके तहत 17 सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals – SDGs) निर्धारित किए गए।
इन लक्ष्यों का उद्देश्य वर्ष 2030 तक गरीबी समाप्त करना, पर्यावरण की रक्षा करना और सभी लोगों के लिए समृद्धि सुनिश्चित करना है। संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों ने इन लक्ष्यों को स्वीकार किया है।
सतत विकास की अवधारणा पहली बार 1987 में प्रकाशित ब्रंटलैंड रिपोर्ट Our Common Future में स्पष्ट रूप से सामने आई। इसमें कहा गया कि ऐसा विकास जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करे, लेकिन भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता को नुकसान न पहुंचाए, वही सतत विकास है।
SDGs इसी विचार को व्यवहार में लागू करने का वैश्विक प्रयास है। इनका मूल मंत्र है- Leave No One Behind अर्थात विकास की प्रक्रिया में किसी भी व्यक्ति या समुदाय को पीछे न छोड़ना।
संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2015 में 2030 एजेंडा के तहत 17 सतत विकास लक्ष्य (SDGs) निर्धारित किए। इनका उद्देश्य गरीबी उन्मूलन, पर्यावरण संरक्षण और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है। प्रमुख लक्ष्य इस प्रकार है
1. गरीबी की समाप्ति (No Poverty)
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार आज भी दुनिया में करोड़ों लोग गरीबी में जीवन यापन कर रहे है। इस लक्ष्य का उद्देश्य अत्यधिक गरीबी समाप्त करना, सामाजिक सुरक्षा बढ़ाना और सभी को आर्थिक अवसर उपलब्ध कराना है। गरीबी केवल आय की कमी नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सम्मानजनक जीवन तक पहुंच की कमी भी है।
2. भूखमरी समाप्त करना (Zero Hunger)
विश्व में पर्याप्त खाद्यान्न उत्पादन होने के बावजूद लाखों लोग कुपोषण और भूख का सामना कर रहे है। इस लक्ष्य का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, पोषण में सुधार करना और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना है। जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव कृषि पर पड़ता है, इसलिए यह लक्ष्य पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
3. अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण (Good Health and Well-being)
स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी, संक्रामक रोगों की रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना इस लक्ष्य के प्रमुख उद्देश्य है। कोविड-19 महामारी ने यह साबित किया कि स्वास्थ्य व्यवस्था किसी भी देश के सतत विकास की आधारशिला है।
4. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (Quality Education)
शिक्षा गरीबी उन्मूलन और सामाजिक विकास का सबसे प्रभावी साधन है। यह लक्ष्य सुनिश्चित करता है कि सभी बच्चों और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा मिले।
5. लैंगिक समानता (Gender Equality)
महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ भेदभाव समाप्त करना तथा उन्हें समान अवसर प्रदान करना इस लक्ष्य का उद्देश्य है। महिला सशक्तिकरण के बिना सतत विकास संभव नहीं है।
6. स्वच्छ जल और स्वच्छता (Clean Water and Sanitation)
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार अरबों लोग अभी भी सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता सुविधाओं से वंचित हैं। इस लक्ष्य का उद्देश्य जल संसाधनों का टिकाऊ प्रबंधन और सभी को सुरक्षित जल उपलब्ध कराना है। भारत में जल जीवन मिशन इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
7. सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा (Affordable and Clean Energy)
ऊर्जा आर्थिक विकास की आधारशिला है। इस लक्ष्य का उद्देश्य सभी के लिए सस्ती, विश्वसनीय और स्वच्छ ऊर्जा सुनिश्चित करना है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय स्रोत जलवायु परिवर्तन से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
8. सम्मानजनक कार्य और आर्थिक विकास (Decent Work and Economic Growth)
यह लक्ष्य रोजगार सृजन, श्रमिक अधिकारों की रक्षा और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।
9. उद्योग, नवाचार और अवसंरचना (Industry, Innovation and Infrastructure)
सतत औद्योगिकीकरण और तकनीकी नवाचार किसी भी देश की प्रगति के प्रमुख आधार हैं। यह लक्ष्य मजबूत अवसंरचना और नवाचार को बढ़ावा देता है।
10. असमानताओं में कमी (Reduced Inequalities)
आर्थिक और सामाजिक असमानताएं विकास के लाभों को सीमित कर देती हैं। इसलिए यह लक्ष्य समाज के सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान करने पर जोर देता है।
11. टिकाऊ शहर और समुदाय (Sustainable Cities and Communities)
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार वर्ष 2050 तक विश्व की लगभग 68 प्रतिशत आबादी शहरों में निवास करेगी। इसलिए सुरक्षित, समावेशी और पर्यावरण-अनुकूल शहरों का विकास आवश्यक है।
12. जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन (Responsible Consumption and Production)
प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन पर्यावरणीय संकट को बढ़ा रहा है। यह लक्ष्य संसाधनों के कुशल उपयोग और अपशिष्ट में कमी पर केंद्रित है।
13. जलवायु कार्रवाई (Climate Action)
जलवायु परिवर्तन मानवता के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। बढ़ते तापमान, चरम मौसम की घटनाएं, सूखा और बाढ़ सीधे विकास को प्रभावित करते हैं। इस लक्ष्य का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना और अनुकूलन क्षमता बढ़ाना है।
14. जलमंडलीय जीवन (Life Below Water)
महासागर पृथ्वी की जलवायु प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यह लक्ष्य समुद्री प्रदूषण रोकने, समुद्री जैव विविधता बचाने और महासागरों के टिकाऊ उपयोग पर केंद्रित है।
15. स्थलीय जीवन (Life on Land)
वन, भूमि और जैव विविधता पृथ्वी के जीवन तंत्र का आधार हैं। यह लक्ष्य वनों के संरक्षण, भूमि क्षरण रोकने और वन्यजीवों की रक्षा पर जोर देता है।
16. शांति, न्याय और सशक्त संस्थाएं (Peace, Justice and Strong Institutions)
शांति और सुशासन के बिना सतत विकास संभव नहीं है। यह लक्ष्य न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही संस्थाओं को मजबूत बनाने का प्रयास करता है।
17. लक्ष्यों के लिए साझेदारी (Partnerships for the Goals)
यह अंतिम लक्ष्य सभी अन्य लक्ष्यों को प्राप्त करने का आधार है। इसमें सरकारों, निजी क्षेत्र, नागरिक समाज और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार वैश्विक चुनौतियों का समाधान केवल साझेदारी और सहयोग के माध्यम से ही संभव है।
भारत ने SDGs को अपनी विकास योजनाओं के साथ जोड़ा है। नीति आयोग SDGs के कार्यान्वयन और निगरानी के लिए नोडल एजेंसी है। SDG इंडिया इंडेक्स के माध्यम से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की प्रगति का मूल्यांकन किया जाता है।
भारत की प्रमुख योजनाएं जैसे स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम, प्रधानमंत्री आवास योजना, राष्ट्रीय सौर मिशन और नमामि गंगे कार्यक्रम जैसी योजनाएं शामिल है। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विभिन्न SDGs से जुड़ी हुई है।
विश्व पर्यावरण दिवस केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश नहीं देता, बल्कि यह हमें SDG 6 स्वच्छ जल, SDG 7 स्वच्छ ऊर्जा, SDG 12 जिम्मेदार उपभोग, SDG 13 जलवायु कार्रवाई, SDG 14 जल मंडलीय जीवन और SDG 15 स्थलीय जीवन की याद भी दिलाता है। यदि दुनिया को 2030 तक इन लक्ष्यों को हासिल करना है, तो सरकारों के साथ-साथ नागरिकों, उद्योगों और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक होगी।
वर्ष 2030 तक इन लक्ष्यों को प्राप्त करना वैश्विक समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। यदि हम इन लक्ष्यों की दिशा में गंभीरता से कार्य करें, तो आने वाली पीढ़ियों को एक अधिक सुरक्षित, समावेशी और टिकाऊ दुनिया मिल सकती है।
सतत विकास आज विश्व समुदाय की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। बढ़ते जलवायु संकट, जल संसाधनों पर दबाव, जैव विविधता के क्षरण और ऊर्जा सुरक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग आवश्यक हो गया है। भारत ने भी अपने पड़ोसी देशों तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ अनेक समझौते किए है, जिनका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, जल सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2015 में निर्धारित 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने की दिशा में भारत विभिन्न द्विपक्षीय और बहुपक्षीय साझेदारियों के माध्यम से कार्य कर रहा है। भारत में SDGs के समन्वय की जिम्मेदारी नीति आयोग को दी गई है।
जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियां सीमाओं से बंधी नहीं है। हिमालयी नदियाँ कई देशों से होकर गुजरती है, जबकि वायु प्रदूषण, समुद्री प्रदूषण और जैव विविधता संरक्षण जैसे मुद्दे क्षेत्रीय सहयोग की मांग करते है। इसी कारण संयुक्त राष्ट्र ने साझेदारी के माध्यम से विकास को SDG-17 के रूप में शामिल किया है।
भारत ने पड़ोसी देशों के साथ नदी जल समझौतों तथा अन्य देशों के साथ ऊर्जा, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन संबंधी साझेदारियों को इसी दृष्टिकोण से विकसित किया है।
भारत सरकार और संयुक्त राष्ट्र ने 2023-2027 के लिए Government of India – United Nations Sustainable Development Cooperation Framework (GoI-UNSDCF) पर हस्ताक्षर किए है। यह सहयोग ढांचा भारत को सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायता प्रदान करता है।
इस सहयोग के प्रमुख क्षेत्र है -
स्वास्थ्य और पोषण
खाद्य सुरक्षा
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
आर्थिक विकास और रोजगार
पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन
जल, स्वच्छता और आपदा लचीलापन
यह ढांचा People, Prosperity, Planet and Participation यानी व्यक्ति, समृद्धि, पृथ्वी और सहभागिता के चार स्तंभों पर आधारित है।
नदी जल संधियाँ कई सतत विकास लक्ष्यों से सीधे जुड़ी है -
SDG 2 – भूखमरी समाप्त करना
SDG 6 – स्वच्छ जल और स्वच्छता
SDG 7 – स्वच्छ ऊर्जा
SDG 13 – जलवायु कार्रवाई
SDG 15 – पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण
SDG 17 – वैश्विक साझेदारी
जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी ग्लेशियरों में बदलाव और मानसूनी अनिश्चितता बढ़ रही है। ऐसे समय में सीमा पार नदी सहयोग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
भारत ने अन्य देशों के साथ जो समझौते किए है, वे केवल दस्तावेज नहीं हैं बल्कि सतत विकास की आधारशिला हैं। सिंधु जल संधि, गंगा जल संधि, महाकाली, कोसी और गंडक समझौते जैसे नदी जल समझौते करोड़ों लोगों की जल और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते है। वहीं संयुक्त राष्ट्र, फ्रांस, जर्मनी और जापान जैसे साझेदारों के साथ सहयोग भारत को स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु कार्रवाई और सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।
भविष्य में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए इन समझौतों का महत्व और बढ़ेगा। साझा संसाधनों का न्यायसंगत और टिकाऊ उपयोग ही क्षेत्रीय शांति तथा दीर्घकालिक विकास का आधार बन सकता है।
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