बेलनाकार वर्षामापी से बारिश का स्तर मापा जाता है। बारिश के पानी का संचय कर भूजल रिचार्ज की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सकती है।
फोटो : विकी कॉमंस
मानसून की बारिश को भूजल रिचार्ज का एक सुनहरा अवसर माना जाता है। इसी को देखते हुए सरकार इन दिनों कैच द रेन (Catch the Rain) अभियान पर जोर दे रही है, ताकि वर्षा जल का संचय कर भूजल स्रोतों का ज़्यादा से ज़्यादा पुनर्भरण किया जा सके। देशभर में लोगों को इस अभियान से जोड़ने के लिए सरकार ने ने एक गीत भी तैयार करवाया है। जल शक्ति मंत्रालय ने 15 सितंबर 2026 को ‘जल संचय जन भागीदारी : कैच द रेन’ का एंथम को जारी कर दिया है। प्रसिद्ध गायक-संगीतकार शंकर महादेवन द्वारा गाया और संगीतबद्ध किया गया यह गीत बारिश की हर बूंद को सहेजने और जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का संदेश देता है। इस तरह इस ‘कैच द रेन’ एंथम “Catch the Rain – Where It Falls, When It Falls” के जरिये जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को जनभागीदारी से जोड़ने की कोशिश को अब एक संगीतमय आवाज भी मिल गई है।
मंत्रालय के मुताबिक इस एंथम का उद्देश्य वर्षा जल संरक्षण के संदेश को गांव, कस्बे, स्कूल, संस्थान और घर तक पहुंचाना और खास तौर पर युवाओं को जल संरक्षण का भागीदार बनाना है। एंथम के बोल कुछ इस प्रकार हैं-
“पकड़ें हम, पकड़ें हम, बारिश का पानी,
लिखें हम, लिखें हम, एक नई कहानी”
इसके जरिए बारिश के पानी को बह जाने देने के बजाय उसे भविष्य के लिए सुरक्षित करने का संदेश हिन्दी और अंग्रेजी की मिश्रित भाषा में कुछ इस प्रकार दिया गया है-
कैच द रेन – व्हेयर इट फॉल्स, व्हेन इट फॉल्स
जल संचय को जन आंदोलन बनाएं — हर बूंद बचाएं, भविष्य सुरक्षित बनाएं।
एंथम का वीडियो भी जारी किया गया है, जिसे यूट्यूब पर देखा जा सकता है -
‘कैच द रेन’ अभियान का मूल विचार यह है कि बारिश का पानी गिरने के बाद उसे यूं ही बहकर बर्बाद हो जाने देने के बजाय स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक मात्रा में संग्रहीत और भूजल स्रोतों को रिचार्ज करने के लिए इस्तेमाल किया जाए। इसके लिए वर्षा जल संचयन संरचनाओं के निर्माण और पुराने जलस्रोतों तथा रिचार्ज संरचनाओं के पुनर्जीवन पर जोर दिया जाता है। मंत्रालय के अनुसार जल संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम मानने के बजाय नागरिकों, परिवारों, समुदायों, स्थानीय निकायों, संस्थानों और उद्योगों को इसमें सक्रिय भागीदार बनाना इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यही वजह है कि एंथम का संदेश किसी एक योजना या विभाग तक सीमित नहीं रखा गया है। इसे रोजमर्रा की आदतों से जोड़ने की कोशिश की गई है। मसलन, घर की छत से आने वाले बारिश के पानी को सहेजना हो, किसी तालाब को वर्षाजल के भराव से पुनर्जीवन हो या फिर रेन वाटर हार्वेस्टिंग से ग्राउंड वाटर रिचार्ज के लिए पर्कुलेशन पिट (सोख्ता गड्ढा) जैसी संरचना बनाना, उद्देश्य बारिश के पानी को स्थानीय जल-सुरक्षा से जोड़ना है।
जल शक्ति मंत्रालय ने एंथम के जरिए जल संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम न मानकर जनभागीदारी और दैनिक व्यवहार से जोड़ने की कोशिश की है। इसका संदेश विशेष रूप से युवाओं तक पहुंचाने पर जोर है, ताकि स्कूल, कॉलेज और समुदाय स्तर पर पानी बचाने की गतिविधियां केवल किसी अभियान की अवधि तक सीमित न रहें। एंथम इसी विचार को सरल भाषा और संगीत के जरिए लोगों तक पहुंचाने का माध्यम है।
असल चुनौती हालांकि एंथम के संदेश को जमीन पर उतारने की है। बारिश का पानी रोकने के लिए संरचना बनना पहला कदम है; उसका सही स्थान पर होना, नियमित रखरखाव, गाद की सफाई, रिचार्ज संरचनाओं की कार्यक्षमता और स्थानीय समुदाय की भागीदारी यह तय करती है कि पानी वास्तव में कितनी मात्रा में बचाया या जमीन में पहुंचाया जा सका। इसलिए ‘पकड़ें हम बारिश का पानी’ का संदेश तभी स्थायी जल सुरक्षा में बदल सकता है, जब गीत के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर जल संरचनाओं का निर्माण, रखरखाव और उपयोग भी लगातार चलता रहे।
भारत में बारिश का वितरण समान नहीं है। कई इलाकों में मानसून के कुछ ही महीनों में बहुत अधिक पानी गिरता है, जबकि साल के बाकी हिस्से में पानी की उपलब्धता कम हो जाती है। ऐसे में बारिश के दौरान बड़ी मात्रा में पानी का तेजी से बह जाना और दूसरी ओर भूजल पर बढ़ती निर्भरता एक महत्वपूर्ण जल प्रबंधन चुनौती बन जाती है। वर्षा जल संचयन का उद्देश्य इस अस्थायी जल उपलब्धता को स्थानीय जल भंडार में बदलना है। छतों से पानी को टैंक में जमा करना, सोख्ता गड्ढों और रिचार्ज पिट के जरिए भूजल तक पहुंचाना, तालाबों और पारंपरिक जलस्रोतों की भंडारण क्षमता बढ़ाना इसके अलग-अलग तरीके हैं। इसलिए ‘Catch the Rain’ का संदेश केवल बारिश के मौसम तक सीमित नहीं है। बारिश के समय किया गया संचय बाद के सूखे महीनों में भूजल और स्थानीय जल उपलब्धता को सहारा दे सकता है।
वर्षा जल संचय के मौजूदा अभियान का विस्तार 1 जून 2026 को किया गया। ‘जल संचय जन भागीदारी’ पहल को ‘जल शक्ति अभियान: कैच द रेन’ के साथ जोड़ा गया और इसका नाम ‘जल संचय जन भागीदारी : कैच द रेन (JSJB: CTR)’ रखा गया। सरकार के अनुसार इसके तहत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, जल भंडारण और जनभागीदारी पर नए सिरे से जोर दिया गया है। स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक कम लागत वाली जल संरक्षण गतिविधियों को बढ़ावा देना भी इसका हिस्सा है। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के बीच तालमेल के जरिए जल संरक्षण के काम को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस अभियान को समझने के लिए इसकी पिछली कड़ियों पर भी नजर डालना जरूरी है। जल संचय जन भागीदारी पहल की शुरुआत 6 सितंबर 2024 को गुजरात के सूरत में हुई थी। इससे पहले ‘जल शक्ति अभियान: कैच द रेन’ को 2021 में देश के सभी जिलों के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों तक विस्तार दिया गया था। इसकी मूल थीम थी “Catch the Rain – Where it Falls, When it Falls.” यानी बारिश के पानी का संरक्षण उसके गिरने के स्थान और समय के आसपास ही करने की कोशिश करना।
पहाड़ी ढलानों पर सोख्ता गड्ढे बनाकर बारिश के पानी का संचय किया जा सकता है, जिससे भूजल रिचार्ज के साथ ही मिट्टी का कटाव और भूस्खलन रोकने में भी मदद मिलती है।
| पहल/स्रोत | सूचक | आंकड़ा | अर्थ/टिप्पणी | स्रोत |
|---|---|---|---|---|
| JSJB:CTR 2026 | अभियान की शुरुआत | 1 जून 2026 | जल संचय जन भागीदारी को जल शक्ति अभियान: कैच द रेन के साथ एकीकृत किया गया | जल शक्ति मंत्रालय/PIB |
| JSJB:CTR 2026 | 4 अगस्त 2026 तक पूरे कार्य | 1,33,724 | राज्यवार दर्ज पूर्ण कार्य | जल शक्ति मंत्रालय/PIB |
| JSJB 2.0 | 31 मई 2026 तक दर्ज संरचनाएं | 1.5 करोड़ से अधिक | कम से कम 1 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले; भौतिक सत्यापन/फील्ड वैलिडेशन जारी | PIB |
| JSJB 2.0 | 31 मई 2026 तक लक्ष्य | 1 करोड़ | भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का लक्ष्य | PIB |
| JSJB 1.0 | 31 मई 2025 तक दर्ज कृत्रिम रिचार्ज संरचनाएं | 27 लाख से अधिक | कम से कम 10 लाख के लक्ष्य के मुकाबले | PIB |
| JSJB 1.0 | लक्ष्य | 10 लाख | भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का न्यूनतम लक्ष्य | PIB |
| JSJB 1.0 | अवधि | 1 अप्रैल 2024–31 मई 2025 | अभियान की अवधि | PIB |
| JSJB | शुरुआत | 6 सितंबर 2024 | सूरत, गुजरात से पहल शुरू | PIB |
| भारत का भूजल संसाधन, 2025 | कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण | 448.52 BCM | देश का कुल वार्षिक भूजल रिचार्ज | CGWB/जल शक्ति मंत्रालय |
| भारत का भूजल संसाधन, 2025 | वार्षिक निष्कर्षण योग्य भूजल | 407.75 BCM | वार्षिक इस्तेमाल करने योग्य भूजल संसाधन | CGWB/जल शक्ति मंत्रालय |
| भारत का भूजल संसाधन, 2025 | वार्षिक भूजल निकासी | 247.22 BCM | सिंचाई, औद्योगिक और घरेलू उपयोग सहित | CGWB/जल शक्ति मंत्रालय |
| भारत का भूजल संसाधन, 2025 | भूजल निकासी स्तर | 60.63% | वार्षिक निकासी बनाम वार्षिक निष्कर्षण योग्य संसाधन | CGWB/जल शक्ति मंत्रालय |
| भारत के जल संसाधनों का आकलन, 2024 | औसत वार्षिक नदी-बेसिन जल संसाधन | 2115.95 BCM | CWC का आकलन; सामान्यतः 2116 BCM बताया जाता है | केंद्रीय जल आयोग/जल शक्ति मंत्रालय |
| शहरी Catch the Rain/AMRUT 2.0 | भागीदारी | 27 राज्य/केंद्रशासित प्रदेश; करीब 900 ULBs | जुलाई 2026 तक सक्रिय भागीदारी | MoHUA/PIB |
| शहरी JSJB 2.0 | नगर निगमों में लिए गए रिचार्ज स्ट्रक्चर | 1,99,278 | 79 नगर निगमों में | MoHUA/PIB |
| शहरी JSJB 2.0 | ULBs में कार्यान्वित किए जा रहे रिचार्ज स्ट्रक्चर | 73,036 | 738 Urban Local Bodies में | MoHUA/PIB |
| AMRUT 2.0 | जल निकाय पुनर्जीवन क्षेत्र | करीब 1.21 लाख एकड़ | जल भंडारण, भूजल रिचार्ज और शहरी बाढ़ लचीलापन के लिए | MoHUA/PIB |
| JSA:CTR | राष्ट्रीय अभियान का विस्तार | 2021 | जल शक्ति अभियान को देशभर में Catch the Rain के रूप में विस्तार | जल शक्ति मंत्रालय/PIB |
| JSA | मूल अभियान की शुरुआत | 2019 | 256 जल-संकटग्रस्त जिलों में मिशन मोड अभियान | जल शक्ति मंत्रालय/PIB |
स्रोत: जल शक्ति मंत्रालय/PIB, केंद्रीय भूजल बोर्ड और आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के आधिकारिक विवरण।
JSJB:CTR अभियान का मौजूदा डिजिटल डैशबोर्ड यह दिखाता है कि जल संचय से जुड़े काम किस स्तर पर दर्ज किए जा रहे हैं। 16 सितंबर 2026 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार JSJB:CTR के तहत कुल 2,56,232 कार्य दर्ज किए गए। इनमें से 2,22,258 कार्य पूरे हो चुके थे, जबकि 33,974 कार्य जारी थे। इसी डैशबोर्ड पर ‘Jal Sanchay Jan Bhagidari’ के संचयी आंकड़े के रूप में 1,58,23,207 का आंकड़ा प्रदर्शित किया गया है। हालांकि यह आंकड़े अभियान के तहत दर्ज गतिविधियों का सरकारी डैशबोर्ड पर आधारित रिकॉर्ड हैं। इसलिए इन्हें देश में बने सभी वर्षा जल संचयन ढांचों की स्वतंत्र भौतिक गणना के बराबर नहीं माना जाना जा सकता।
‘कैच द रेन’ को केवल छतों से पानी जमा करने की तकनीक तक सीमित नहीं रखा गया है। इसके दायरे में भूजल पुनर्भरण, पारंपरिक जलस्रोतों का पुनर्जीवन, जल भंडारण और स्थानीय जल संरचनाओं को मजबूत करना भी शामिल है। जुलाई 2026 में जारी जल शक्ति मंत्रालय के बैकग्राउंडर के अनुसार, 31 मई 2026 तक कम से कम एक करोड़ भूजल रिचार्ज के ढांचे तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था और राज्यों से 1.5 करोड़ से अधिक संरचनाओं की सूचना प्राप्त हुई थी। मंत्रालय ने साथ ही कहा था कि इनका भौतिक सत्यापन और क्षेत्रीय प्रमाणीकरण किया जा रहा है। यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रशासनिक रिपोर्टिंग में दर्ज संरचनाओं और उनके वास्तविक उपयोग या स्थिति को एक ही बात नहीं माना जा सकता।
लेटेस्ट अपडेट्स के लिए हमारे व्हाट्सऐप चैनल को फॉलो करें