मोतियाबिंद दुनिया भर में बड़े पैमाने पर पाई जाने वाली आंखों की समस्या है। जापान की एक हालिया रिसर्च के अनुसार हीटस्ट्रोक से इसका खतरा दोगुना हो जाता है।
स्रोत : विकी कॉमंस
गर्मी और लू (हीटवेव) ने पिछले हफ्ते, दस दिन में अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही लोगों को हीटवेव से होने वाली कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी शुरू हो गई हैं। मौसमी बुखार, दस्त, उल्टी, फूड पॉयजनिंग और नाक से खून आने की समस्याएं आम हैं। इस सबके बीच शरीर पर हीटवेव के बुरे असर से जुड़ी एक और चिंताजनक बात एक वैज्ञानिक शोध में सामने आई है। एक शोध अध्ययन के मुताबिक गर्मी का तनाव आपकी आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचा सकता है। जापान में हुई इस रिसर्च से पता चला है कि हीटस्ट्रोक से पीड़ित लोगों में मोतियाबिंद होने की संभावना दोगुनी होती है।
हाल ही में किए गए इस अध्ययन के तहत 24 लाख लोगों के स्वास्थ्य बीमा रिकॉर्ड की समीक्षा की गई। इसमें पता चला कि हीटवेव के प्रभाव से मोतियाबिंद (Cataract) होने से आंखों का लेंस धुंधला हो जाता है और दृष्टि अस्पष्ट हो जाती है। एनवायरनमेंटल रिसर्च पत्रिका और साइंस जर्नल साइंस डायरेक्ट में प्रकाशित इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटेक) के शोधकर्ताओं के इस अध्ययन के मुताबिक हीटस्ट्रोक से पीडि़त होने वाले लोगों में मोतियाबिंद का खतरा 1.96 से 2.16 गुना अधिक होता है। इस अध्ययन में शरीर के तापमान में अल्पकालिक वृद्धि और मोतियाबिंद के बढ़ते जोखिम के बीच संभावित संबंध को दर्शाया है।
2010 से 2023 के बीच मोतियाबिंद के मरीजों के रिकॉर्ड का विश्लेषण करने पर पता चला कि हीटस्ट्रोक से पीड़ित लोगों में सामान्य मोतियाबिंद का खतरा 1.96 गुना अधिक, जबकि न्यूक्लियर मोतियाबिंद (Nuclear Cataract) का खतरा हीटस्ट्रोक से पीड़ित न होने वाले लोगों की तुलना में 2.16 गुना अधिक होता है। न्यूक्लियर मोतियाबिंद एक ऐसी स्थिति है जिसमें आंख के लेंस का केंद्र सख्त होकर धुंधला हो जाता है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि 30 वर्ष की आयु के जिन लोगों को पहले हीटस्ट्रोक हो चुका है, उनमें मोतियाबिंद होने का खतरा 2.99 गुना अधिक होता है।
हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि यह अध्ययन केवल हीटस्ट्रोक के अनुभव और मोतियाबिंद के बीच एक सांख्यिकीय संबंध (Statistical Relationship) दर्शाता है, न कि कोई कारण-कार्य संबंध (Cause-and-Effect Relationship)। द जापान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस अध्ययन का नेतृत्व करने वाले एनआईटेक के प्रोफेसर अकिमासा हिराता का कहना है कि हीटस्ट्रोक से पीड़ित होने पर लोगों को न केवल अपने शरीर को, बल्कि अपनी आंखों को भी ठंडा रखने के उपाय भी करने चाहिए। साथ ही, उन्हें अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए ताकि उन्हें हीटस्ट्रोक न हो।
गर्मी के मौसम में बिना सुरक्षा के धूप में निकलने से न केवल आपकी आंखें प्रभावित होती हैं, बल्कि आपकी त्वचा भी खतरे में पड़ जाती है। सूर्य की किरणों से निकलने वाली यूवी किरणें आंखों के लेंस में मौजूद प्रोटीन में बदलाव ला सकती हैं। समय के साथ ये बदलाव लेंस में धुंधलापन और मोतियाबिंद का कारण बन सकते हैं। शुरुआत में शायद आपको इसका एहसास न हो, लेकिन बार-बार बिना सुरक्षा के धूप में निकलने से नुकसान बढ़ता जाता है, जिससे बाद में आपकी दृष्टि भी प्रभावित हो सकती है।
पराबैंगनी विकिरण के दो रूप हैं जिनके संपर्क में आप मुख्य रूप से आते हैं: यूवीए और यूवीबी। यूवीए विकिरण आपकी आंखों के लेंस और रेटिना तक पहुंच सकता है, जबकि यूवीबी विकिरण आपकी त्वचा को जला सकता है। बादल छाए रहने पर भी लगभग 80% यूवी विकिरण आंखों तक पहुंच सकता है, इसलिए यदि आप सुरक्षात्मक उपकरण नहीं पहनते हैं, तो विकिरण आपकी आंखों द्वारा अवशोषित होता रहेगा।
राष्ट्रीय स्तर पर किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि गर्मी से संबंधित बीमारियों से मोतियाबिंद का खतरा काफी बढ़ जाता है।
नाभिकीय मोतियाबिंद का पूर्व में हुई गर्मी से संबंधित बीमारी के साथ सबसे मजबूत संबंध पाया गया है।
गैर-मधुमेह रोगियों और युवा वयस्कों में सापेक्ष जोखिम अधिक देखा गया।
परिणाम बताते हैं कि थर्मल स्ट्रेस लेंस की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज करता है, जैसा कि यूवी तंत्र भी करते हैं।
निष्कर्ष जलवायु परिवर्तन के दृष्टि पर पड़ने वाले प्रभावों और रोकथाम की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हैं।
स्वस्थ लोगों को लग सकता है कि वे अपने शरीर के तापमान को कम करके हीटस्ट्रोक से निपट सकते हैं, लेकिन लंबे समय में गर्मी के कारण उनमें मोतियाबिंद विकसित हो सकता है। हालांकि हमें अभी इसपर और अधिक शोध करने की आवश्यकता है। लेकिन, यह स्पष्ट है कि हीटस्ट्रोक के कारण मोतियाबिंद लोगों को प्रभावित करती है।अकिमासा हिराता, प्रोफेसर, एनआईटेक (इस अध्ययन का नेतृत्व किया)
मोतियाबिंद में आंखों का लेंस धुंधला पड़ जाने के सारण साफ दिखना बंद हो जाता है। कुछ मामलों में तो दिखना पूरी तरह से भी बंद हो सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक मानव जनित कारणों से हो रहे जलवायु परिवर्तन के कारण, लू लगने और इसके कारण मोतियाबिंद होने का जोखिम बढ़ रहा है। मौसम विज्ञान एजेंसी का मानना है कि इस साल अल नीनो की संभावित शुरुआत और अन्य मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण भीषण गर्मी पड़ने की संभावना है। अनुमान है कि मई से जुलाई तक का मौसम 2020 तक के 30 वर्षों के औसत से अधिक गर्म रहेगा, जिससे हीट स्ट्रोक और उसके चलते मोतियाबिंद होने का खतरा बढ़ सकता है।
आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष जापान में हीट स्ट्रोक से संबंधित बीमारियों के लिए एम्बुलेंस द्वारा अस्पताल ले जाए गए लोगों की संख्या 100,510 थी, जो 2008 में आग और अन्य आपदाओं के बाद से सबसे अधिक है। आंकड़ों से पता चलता है कि अस्पताल ले जाए गए इन लोगों में से एक तिहाई से अधिक लोग घर पर ही बीमार पड़े। ससका स्पष्ट मतलब है कि लोगों को घर के अंदर भी लू लगने से सावधान रहने की जरूरत है।
अगर आपकी उम्र 40 साल से ज़्यादा है, आप ज़्यादातर समय बाहर बिताते हैं, या आपकी आँखों का रंग हल्का है, तो आपको सबसे ज़्यादा खतरा है, क्योंकि ये UV किरणों से आसानी से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। बच्चों की आँखें भी ज़्यादा जोखिम में होती हैं क्योंकि उनके लेंस रेटिना तक ज़्यादा UV किरणें पहुँचाते हैं। अगर आप बाहर काम करते हैं या गर्मियों में खेलकूद के शौकीन हैं, तो आपको भी सावधान रहना चाहिए।
सबसे पहले, आपको यह जानना होगा कि ये पराबैंगनी किरणें आपकी आँखों के लिए कैसे हानिकारक हैं। जोखिमों को जानने से आपको हर बार बाहर जाते समय समझदारी भरे निर्णय लेने में मदद मिलेगी। धूप से पूरी तरह बचने की तुलना में सुरक्षा के प्रति समझदारी और निरंतरता बनाए रखना कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। गर्मी में इन लोगों को आंख की समस्याओं का खतर अधिक होता है -
जो लोग बाहर काम करते हैं।
बच्चे, वृद्ध और बीमार लोग।
कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करने वाले लोग।
पहले से आंखों की समस्याओं वाले लोग।
मोतियाबिंद आंखों की वह स्थिति है, जिसमें आंख के लेंस पर धुंधलापन आ जाता है और व्यक्ति की दृष्टि धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। बढ़ती उम्र इसका सबसे सामान्य कारण मानी जाती है, क्योंकि उम्र के साथ आंखों के लेंस में मौजूद प्रोटीन टूटने और जमने लगते हैं। हालांकि अब शोध यह भी संकेत दे रहे हैं कि अत्यधिक गर्मी और हीटस्ट्रोक जैसी स्थितियां भी आंखों पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं।
इसके अलावा मधुमेह मोतियाबिंद का बड़ा जोखिम कारक है। शरीर में लंबे समय तक शुगर का स्तर बढ़ा रहने से आंखों के लेंस में रासायनिक बदलाव होते हैं, जिससे धुंधलापन तेजी से बढ़ सकता है। वहीं तेज धूप और पराबैंगनी (यूवी) किरणों के लगातार संपर्क में रहने वाले लोगों में भी इसका खतरा अधिक देखा गया है। यही वजह है कि डॉक्टर धूप में यूवी प्रोटेक्शन वाले चश्मे के इस्तेमाल की सलाह देते हैं। धूम्रपान और अत्यधिक शराब सेवन भी आंखों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा प्रदूषण, कुपोषण, आंखों में पुरानी चोट, लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का इस्तेमाल और आनुवंशिक कारण भी मोतियाबिंद के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
अब लेज़र विधि से बिना ज़्यादा चीरफाड़ के मोतियाबिंद का ऑपरेशन होने लगा है, जिसमें समय भी काफी कम लगता है।
लू आंखों की सेहत के लिए भी खतरनाक है। गर्मियों में ज्यादा तापमान आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है। लू से आंखों मे जलन, रेडनेस और ड्राईनेस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं, तेज धूप से आंखों में इंफेक्शन का जोखिम भी रहता है। लू से आंखों में कॉर्नियल बर्न जैसी प्रॉब्लम हो सकती है। जिसकी वजह से कॉर्निया को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचता है। इससे दिखाई देना तक बंद हो सकता है। इसके अलावा हीट वेव के साथ धूल-मिट्टी से भी आंखों को बचाना चाहिए, वरना एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे लोग जिनका हाल ही में मोतियाबिंद, लेसिक या ग्लूकोमा की सर्जरी हुई है, उन्हें लू से बचकर रहना चाहिए। हीट वेव से आंखों को बचाने के लिए यह उपाय अपनाने चाहिए -
दोपहर की तेज धूप में और धूल भरी हवाओं या लू चलने के दौरान बाहर निकलने से बचें।
यूवी किरणों से सुरक्षित धूप के चश्मे (सनग्लास) लगाकर ही बाहर निकलें।
धूप में निकलते वक्त खासकर दोपहर के वक्त चौड़ी किनारी वाली टोपी यानी हैट या कैप लगाएं।
आंखों को छूने से पहले हाथों को अच्छी तरह धोएं।
दिन में दो से तीन बार आंखें अच्छी तरह धोएं।
तौलिए या आंखों के मेकअप जैसी व्यक्तिगत चीजों को शेयर करने से बचें, जो बैक्टीरिया ट्रांसफर कर सकते हैं।
शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पानी समय-समय पर पीते रहें।
आंखों के लेंस की सुरक्षा के लिए चीनी का इस्तेमाल कम करें।
कृत्रिम आंसू आई ड्रॉप्स (Artificial Tears Eye Drops) का प्रयोग करें और अपनी आंखों को रगड़ने से बचें।
धूप से लौटने के बाद आंखों को ठंडा करने के लिए गीला कपड़ा या कूलिंग आई मास्क का इस्तेमाल करें।
क्लोरीनयुक्त स्वीमिंग पूल में जाने से बचें या तैराकी के लिए चश्मे का उपयोग करें।
उन दवाओं के प्रति सावधान रहें जो प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाती हैं।
आंख में दिक्कत महसूस होने पर आंखों की जांच करवा लें।
अपनी ओवरऑल हेल्थ पर नज़र रखें। हाई बीपी और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी स्थितियां आंखों के स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा सकती हैं।
ज्यादा गर्मी के संपर्क में आने से आंखों में मोतियाबिंद के अलावा आई स्ट्रोक (Eye Stroke) का भी खतरा होता है। आई स्ट्रोक, जिसे रेटिनल आर्टरी ऑक्लूजन के रूप में भी जाना जाता है, तब होता है जब रेटिना तक ब्लड ले जाने वाली आर्टरीज में से किसी में ब्लॉकेज हो जाए। रेटिना आपकी आंख का वह हिस्सा है जहां लाइट रिसीव होती है और यह आपके दिमाग को विजुअल इंफर्मेशन भेजता है। लेकिन जब ब्लड सप्लाई बाधित होती है, तो इससे अचानक विजन लॉस हो सकता है या कोई और नुकसान हो सकता है।
कई कारक आई स्ट्रोक में योगदान कर सकते हैं, जिनमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और ब्लड वेसल्स को प्रभावित करने वाली अन्य स्थितियां शामिल हैं। हालांकि, हीटवेव रिस्क को बढ़ाती है क्योंकि इससे आपको डिहाइड्रेशन हो सकता है और इससे ब्लड विस्कोसिटी (चिपचिपाहट) बढ़ सकती हैं, जिससे ब्लॉकेज होने की संभावना अधिक हो जाती है।
गर्मी के मौसम में आपकी आंखों को होने वाली परेशानियों के डर से घबराएं नहीं। ऊपर बताई सावधानियों को अपना कर आप चिंतामुक्त होकर इस मौसम में रह सकते सकते हैं और अपनी आंखों को मोतियाबिंद से बचा सकते हैं, बस आपको ऊपर बताए गए ग्रीष्मकालीन देखभाल सुझावों का पालन करना है। इसलिए, लक्षणों के प्रकट होने का इंतज़ार न करें। अभी आई-क्यू सुपर स्पेशलिटी आई हॉस्पिटल्स में अपना मौसमी नेत्र परीक्षण बुक करके गर्मियों में अपनी आँखों के स्वास्थ्य की रक्षा करें । आइए हम आपकी दृष्टि की जाँच करें और इस गर्मी में आपकी आँखों की देखभाल करने और तनावमुक्त रहने में आपकी मदद करें।
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