पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा है खाने की बर्बादी,फोटो:इंडिया वाटर पोर्टल(फ्लिकर)
यूनाइटेड नेशन की इंटर गोवेर्मेंटरल पैनल की छठी आकलन रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हो गई है की हमारी नई पीढ़ी को जलवायु संकट के गंभीर नतीजों का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट में स्प्ष्ट कहा गया है कि ग्लोब वार्मिंग मनुष्य को भी किसी न किसी तरह से प्रभावित करेगी।विश्वभर में प्रदूषित तत्वों से फैले प्रदूषण में 8 प्रतिशत खाने की बर्बादी की वजह से होता है । भारत में बर्बाद हुए खाने से सामजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक प्रभावों और मौजूदा स्थितियों को समझने के लिए वर्ल्ड रिसोर्सेस इंस्टीट्यूट इंडिया ( WRI India) द्वारा 106 प्रकाशित और अप्रकाशित दस्तावेजों को नियमित रूप से विश्लेषण करने के साथ-साथ विशेषज्ञों की राय भी ली। इस अध्ययन में फूड एंड लैंड कॉल कोलिशन (FOLU) इंडिया ने भी सहयोग बखूबी सहयोग दिया।
इस अध्ययन में रिसर्च, पॉलिसी और प्रशिक्षण में जो भी खामियां थी उसे व्यवस्थित रूप से बताया गया है ताकि भारत में खाने की बर्बादी को रोका जा सके।
डब्ल्यूआरआई इंडिया और एफओएलयू इंडिया ने एक आधिकारिक रिपोर्ट जारी करने और '“चैंपियंस 12.3 स्ट्रेटजी ऑफ टारगेट मेजर एक्ट' पर चर्चा करने के लिए हाथ मिलाया हैं। इस बातचीत में भोजन के सड़ने तथा उसके नुकसान को आधा करने से संबंधित सतत विकास के लक्ष्य 12.3 को अपनाने, खराब होने वाले भोजन की मात्रा को नापने और जिन स्थानों पर अधिक मात्रा में भोजन बर्बाद होता है वहां पर इसे रोकने के लिए कदम उठाने जैसे समाधान शामिल किए है इस कार्यक्रम का समापन फ्रेंड्स ऑफ चैंपियंस 12.3 इन इंडिया में शामिल होने के आग्रह के साथ हुआ । यह विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे ऐसे लोगों का एक समूह है जो भोजन के सड़ने और खराब होने में कमी लाने का लगातार प्रयास करता है ।
डब्ल्यूआरआई इंडिया एक शोध संगठन है जिसमें ऐसे विशेषज्ञ और स्टाफ कर्मी शामिल्र हैं, जो स्वस्थ पर्यावरण को बनाए रखने के लिए नेतृत्वकर्ताओं के सहयोग से बड़े विचारों को जमीन पर उतारने के लिए काम करते हैं। स्वस्थ पर्यावरण ही आर्थिक अवसर और मानव कल्याण का आधार है। हम एक ऐसी समानतापूर्ण और खुशहाल धरती की परिकल्पना करते हैं जो प्राकृतिक संसाधनों का ज्ञानपूर्णबप्रबंधन से संचालित होती हो। हम एक ऐसे विश्व को बनाने की आकांक्षा रखते हैं जहां सरकार, कारोबारी वर्ग तथा विभिन्न समुदाय मिलकर गरीबी को हटाने और सभी लोगों के लिए एक सतत और प्राकृतिक पर्यावरण बनाने के लिए काम करते है।
फूड एंड लैंड यूज़ ऑफ वैल्यू (एफओएलयू) इंडिया दरअसल, काउंसिल ऑन एनर्जी एनवायरमेंट एंड वॉटर (सीईई डब्ल्यू), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद (आईआईएम-ए), द एनर्जी एंड रिसोर्सेसइंस्टीट्यूट (टेरी), रिवाइटलाइजिंग रेनफेड एग्रीकल्चर नेटवर्क (आरएसएन) तथा वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट इंडिया (डब्ल्यूआरआई) इंडिया द्वारा संयुक्त रुप से शुरू की गई एक पहल है। इसके तहत खाद्य तथा भू उपयोग की सतत प्रणालियों के लिए दीर्घकालिक उपाय विकसित करने के साथ-साथ नीति संबंधित निर्णयों पर काम करता है ।
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