जल जीवन मिशन के दूसरे चरण यानी JJM-2 के तहत ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए सरकार इसमें जनभागीदारी को बढ़ाने के उपाय कर रही है। 

 

स्रोत : विकी कॉमंस

नीतियां और कानून

ग्रामीण जलापूर्ति को बेहतर बनाने के लिए JJM-2.0 में जनभागीदारी को दिया जाएगा बढ़ावा

अरुणाचल, मिजोरम, झारखंड, तमिलनाडु और पुडुचेरी ने इस बाबत केंद्र सरकार के साथ किया करार

Author : कौस्‍तुभ उपाध्‍याय

जल जीवन मिशन के दूसरे दौर यानी JJM-2 के तहत ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए इसमें जनभागीदारी को बढ़ाया जाएगा। इसे लेकर देश के पांच राज्‍यों ने हाल ही में केंद्र सरकार के साथ एक समझौते पर हस्‍ताक्षर किए है। केंद्र के साथ सहमतिपत्र पर (एमओयू) करने वाले राज्‍यों में पूर्वोत्‍तर के अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड, पूर्वी राज्‍य झारखंड और दक्षिण भारत से तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश पुद्दुचेरी शामिल हैं।

इस समझौते के तहत जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 के अंतर्गत पूरे भारत में टिकाऊ, सुनिश्चित और जन-केंद्रित ग्रामीण पेयजल आपूर्ति की दिशा में एक बड़े प्रयास के तहत इन राज्‍यों में इसे ग्राम पंचायतों के नेतृत्व में सौंपे जाने पर सहमति हुई है। इसमें सेवा-आधारित और समुदाय-केंद्रित ग्रामीण जल प्रशासन मॉडल को लागू करने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पर्याप्त मात्रा में और निर्धारित गुणवत्ता का पेयजल उपलब्ध हो। इसके लिए जन भागीदारी को मजबूत किया जाएगा और ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों संरचनात्मक सुधार लाकर उसके संचालन (Operation) और रखरखाव (Maintenance) को टिकाऊ बनाया। इससे ग्रामीण इलाकों में दीर्घकालिक जल सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सकेगा। इससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार होगा और, जो सरकार के ‘विकसित भारत @2047' के राष्ट्रीय मिशन के अनुरूप है।

वीडियो कॉन्फ्रेंस में MoU पर हुए दस्‍तख़त

ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये पांचों राज्‍यों के साथ हुई अलग-अलग बैठकों में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, राज्य मंत्री वी. सोमन्ना और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेश (पुड्डुचेरी) के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति में समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के दौरान पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें डीडीडब्ल्यूएस (DDWS) के सचिव अशोक के.के. मीणा, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (एनजेजेएम) के अपर सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन, सहित विभागीय संयुक्त सचिव, निदेशक और उप सलाहकार भी उपस्थित थे।

अरुणाचल प्रदेश के साथ समझौता ज्ञापन पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू और प्राथमिक स्वास्थ्य एवं जल संरक्षण मंत्री श्री मामा नटुंग भी अरुणाचल प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वर्चुअल माध्यम से इस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। 

इसी तरह झारखंड के साथ भी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक का शुभारंभ केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य के अन्य प्रमुख अधिकारियों की उपस्थिति में हुआझारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री श्री योगेंद्र प्रसाद मिशन अधिकारियों के साथ बैठक में उपस्थित थे।

तमिलनाडु के साथ समझौते की वर्चुअल बैठक में केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री  सी. जोसेफ विजय और राज्य के संबंधित वरिष्‍ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समझौता ज्ञापन पर संयुक्त सचिव, एनजेजेएम डी. सेंथिल पांडियन और अपर मुख्य सचिव, नगर प्रशासन एवं जल आपूर्ति विभाग, तमिलनाडु सरकार के गगनदीप सिंह बेदी ने हस्ताक्षर किए। 

पुड्डुचेरी केंद्र शासित प्रदेश के साथ समझौता ज्ञापन पर जल शक्ति मंत्रालय की संयुक्त सचिव (जल) स्वाति मीणा नाइक और पुद्दुचेरी के पीडब्लूडी की आयुक्त-सह-सचिव डॉ. ए. मुथम्मा ने हस्ताक्षर किए और पुद्दुचेरी के संयुक्त रेज़ीडेंट आयुक्त रवि दीप सिंह चाहर ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और पुद्दुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी तथा केंद्र शासित प्रदेश के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समझौता पत्र का आदान-प्रदान किया गया।

इसी प्रकार पांचवां समझौता ज्ञापन नागालैंड राज्य के साथ नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफिउ रियो की वर्चुअल उपस्थिति में हस्‍ता‍क्षरित हुआ। इस्के साथ ही नागालैंड के पीएचईडी मंत्री श्री जैकब ज़ीमोमी और राज्य के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे। समझौता ज्ञापन पर स्वाति मीणा नाइक, संयुक्त सचिव (जल), डीडीडब्ल्यूएस, और ज़रेंथुंग एज़ुंग, सचिव और मिशन निदेशक (जेजेएम) नागालैंड द्वारा हस्ताक्षर किए गए।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जल जीवन मिशन देशभर में ग्रामीण पेयजल आपूर्ति में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। इसने विशेषरूप से महिलाओं और बालिकाओं के जीवन में पानी लाने की कठिनाई को कम किया है। जेजेएम 2.0 'हर घर निरंतर नल से जल' के दृष्टिकोण की पूर्ति के अनुरूप एक पहल है। जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत अब मिशन के अंतर्गत निर्मित बुनियादी ढांचे को बनाए रखने, नल कनेक्शनों की कार्यक्षमता, जल की गुणवत्ता, जल स्रोतों की स्थिरता, संचालन एवं रख-रखाव, सामुदायिक स्वामित्व और नियमित निगरानी को प्रमुख प्राथमिकता दी जा रही है।

उन्‍होंने जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, अपशिष्ट जल प्रबंधन, जल संग्रहण क्षेत्र संरक्षण और समुदाय आधारित जल गुणवत्ता निगरानी की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों, जिला जल एवं स्वच्छता मिशनों, राज्य जल एवं स्वच्छता मिशनों और स्थानीय समुदायों को मिलकर विश्वसनीय पेयजल सेवाएं सुनिश्चित करनी होंगी। अब नियमित, विश्वसनीय और टिकाऊ जल सेवाओं, जन जागरूकता, सामुदायिक भागीदारी, ग्राम पंचायत स्तर पर सेवा वितरण, सुजल गांव आईडी निर्माण और संशोधित संचालन एवं रखरखाव नीति की अधिसूचना पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। पाटिल ने वर्ष 2021 में 'हर घर जल' प्रमाणन प्राप्त करने के लिए पुद्दुचेरी की सराहना की।

JJM-2.0 समझौते पर कब किस राज्य ने किए हस्ताक्षर
राज्य / केंद्रशासित प्रदेशहस्ताक्षर की तारीख
उत्तर प्रदेश20 मार्च 2026
गुजरात21 मार्च 2026*
हरियाणा21 मार्च 2026*
हिमाचल प्रदेश21 मार्च 2026*
छत्तीसगढ़21 मार्च 2026*
गोवा21 मार्च 2026*
उत्तराखंड22–26 मार्च 2026
कर्नाटक22–26 मार्च 2026
त्रिपुरा22–26 मार्च 2026
अरुणाचल प्रदेश22–26 मार्च 2026
झारखंड22–26 मार्च 2026
तमिलनाडु22–26 मार्च 2026
मेघालय27 मार्च 2026
नागालैंड28 मार्च–15 अप्रैल 2026
महाराष्ट्रअप्रैल 2026 (मध्य)
राजस्थान18–20 अप्रैल 2026
आंध्र प्रदेश22–25 अप्रैल 2026
ओडिशा22–25 अप्रैल 2026
पुडुचेरी (केंद्रशासित प्रदेश)22–25 अप्रैल 2026
फुटनोट* उपलब्ध रिपोर्टों में इन राज्यों के लिए 21 मार्च 2026 को पहले चरण के MoU हस्ताक्षर का उल्लेख मिलता है। कुछ मामलों में राज्यवार सटीक तारीख की अलग पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

बीते वित्‍त वर्ष JJM-2.0 में 5 राज्यों मिले 1,561 करोड़ 

केंद्र सरकार द्वारा 10 मार्च 2026 को JJM-2.0 को मंजूरी दिए जाने के बाद अततक डेढ़ दर्ज़न से अधिक राज्‍य इसे अपने यहां लागू करने को लेकर केंद्र सरकार के साथ समझौते पर हस्‍ताक्षर कर चुके हैं। बीते 31 मार्च को समाप्‍त वित्‍त वर्ष तक केंद्र सरकार का जल शक्ति मंत्रालय ने सुधारों से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर और अनिवार्य शर्तों को पूरा करने के बाद वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ‘जल जीवन मिशन 2.0’ के तहत पांच राज्यों को 1,561.53 करोड़ रुपये की राशि जारी कर चुका है। इसमें उत्तर प्रदेश को 792.93 करोड़ रुपये, छत्तीसगढ़ को 536.53 करोड़ रुपये, मध्य प्रदेश को 154.02 करोड़ रुपये, ओडिशा को 65.31 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र को 12.74 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

मंत्रालय ने बताया कि यह राशि राज्यों द्वारा जेजेएम 2.0 के तहत प्रमुख सुधारों के प्रति प्रतिबद्धता जताने के बाद जारी की गई है। इन सुधारों में बेहतर जल सेवा वितरण मानक, स्थिरता के उपाय और ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों का सामुदायिक प्रबंधन शामिल है। खास बात यह है कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पहली बार ‘प्रदर्शन-आधारित तंत्र’ लागू किया गया है। इसके तहत राज्यों को पैसा जारी होने से पहले वित्तीय, तकनीकी और डेटा संबंधी मानकों को पूरा करना अनिवार्य है।

जल जीवन मिशन के दूसरे चरण यानी JJM-2 के समझौते पर हस्‍ताक्षर के लिए नई दिल्‍ली में आयोजित बैठक में भाग लेते केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, राज्य मंत्री वी. सोमन्ना और मंत्रालय के आला अधिकारी। 

JJM-2.0 से जुड़े 10 महत्वपूर्ण तथ्य

  1. जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक परिवार को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) उपलब्ध कराना है।

  2. जल जीवन मिशन 2.0 का फोकस केवल नल कनेक्शन देने पर नहीं, बल्कि नियमित, पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण जलापूर्ति सुनिश्चित करने पर है।

  3. JJM-2.0 में खासतौर से जलस्रोत स्थिरता (Water Source Sustainability) को प्राथमिकता दी गई है, ताकि भूजल और सतही जल स्रोत लंबे समय तक सुरक्षित बने रहें।

  4. मनरेगा (अब VB-G RAM G), जल शक्ति अभियान और अन्य योजनाओं का उपयोग जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और जल स्रोतों के पुनर्भरण के लिए किया जा सकता है।

  5. ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियां (VWSCs) स्थानीय स्तर पर जलापूर्ति योजनाओं के संचालन, रखरखाव और निगरानी की जिम्मेदारी निभाती हैं।

  6. JJM-2.0 के तहत गांवों में जल गुणवत्ता की नियमित जांच को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसे सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय लोगों, विशेषकर महिलाओं को परीक्षण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

  7. जल जीवन मिशन 2.0 में ग्रे-वॉटर (रसोई और स्नान आदि से निकलने वाला पानी) के प्रबंधन और पुनः उपयोग पर भी विशेष जोर है।

  8. योजना में विकेंद्रीकृत शासन (Decentralized Governance) को बढ़ावा दिया गया है, जिससे गांव स्वयं अपनी जल योजनाओं की योजना, क्रियान्वयन और निगरानी कर सकें।

  9. मिशन के अंतर्गत हर गांव के लिए Village Action Plan (VAP) तैयार किया जाता है, जिसमें जल स्रोत, जलापूर्ति व्यवस्था, संचालन और संरक्षण की विस्तृत रूपरेखा होती है।

  10. जल जीवन मिशन 2.0 का एक प्रमुख लक्ष्य जल सुरक्षा, जल संरक्षण और समुदाय आधारित प्रबंधन के ज़रिये ग्रामीण भारत में दीर्घकालिक और टिकाऊ पेयजल व्यवस्था विकसित करना है।

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