केरल
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भारतीय राजनीति और भूगोल के पन्नों में आज एक नया अध्याय जुड़ गया जब केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर राज्य का नाम 'केरल' से बदलकर 'केरलम' करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह केवल एक भाषाई बदलाव नहीं है, बल्कि इस भूमि की उस प्राचीन पहचान की वापसी है जो सदियों से इसके जल, मिट्टी और वनस्पतियों में रची-बसी है। ब्रिटिश राज्य में इस राज्य को केरल कह कर पुकारा गया जो सदियों तक चलता रहा। आज राज्य को अपनी असली पहचान वापस मिली। यह पहचान राज्य के पानी के साथ प्रगाढ़ रिश्ते को दर्शाती है।
केरल के नाम परिवर्तन को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम इस प्रकार हैं-
केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी: 24 फरवरी 2026 को कैबिनेट की बैठक में 'केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026' को हरी झंडी दी। इस कदम के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
संवैधानिक संशोधन: अनुच्छेद 3 के तहत, संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन किया जाएगा ताकि सभी आधिकारिक रिकॉर्ड में 'केरल' का स्थान 'केरलम' लाया जा सके।
विधानसभा का संकल्प: यह निर्णय जून 2024 में केरल विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित उस प्रस्ताव का सम्मान है, जिसमें राज्य के नाम को मलयालम उच्चारण और विरासत के अनुरूप करने का आग्रह किया गया था।
प्रक्रिया: कैबिनेट की मंजूरी के बाद, अब राष्ट्रपति इस विधेयक को राज्य विधानसभा की राय के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद संसद द्वारा इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
अंतिम चरण: इस प्रस्ताव पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद केरल का नया नाम सरकारी दस्तावेजों, कार्यालयों, इमारतों, रेलवे स्टेशन, बैंक, आदि हर जगह बदला जाएगा।
केरल बना केरलम
केरल अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है, इस बात से हम सभी वाकिफ हैं। इस राज्य का रिश्ता नारियल और जल दोनों के साथ बहुत गहरा है। शब्दों की गहराई में जाने पर ही इस रिश्ते की गहराई भी समझ आती है।
केरल = केरा + आलम / चेरा। इसका मतलब नारियल की भूमि या चेरा साम्राज्य। यह नाम ब्रिटिश काल में आया और स्वतंत्रता के बाद भी दस्तावेजों में यही नाम रहा। आधुनिक भारत के संविधान (अनुसूची 1) में भी यही नाम प्रचलित रहा।
अनेक भाषाविदों का मानना है कि 'केरलम' की उत्पत्ति प्राचीन शब्द 'चेर-आलम' से हुई है।
'चेर' : इसका अर्थ है गाद, कीचड़ या वह गीली मिट्टी जो नदियों और समुद्र के संगम पर बनती है।
'आलम' (Alam): इसका अर्थ है क्षेत्र या स्थान।
इस प्रकार, 'केरलम' का अर्थ है "आर्द्रभूमि या दलदली मिट्टी वाली भूमि"। यह उन बैकवाटर्स और लैगून का सटीक वर्णन है जो केरल की जीवनरेखा हैं। 'केरलम' का संबंध सीधे तौर पर यहाँ की जल-पारिस्थितिकी से मिलता है।
वैज्ञानिक संदर्भ: केरल विश्वविद्यालय में प्रकाशित शोध पत्र "Coastal wetlands of Kerala: Origin and evolution" स्पष्ट करता है कि इस क्षेत्र का निर्माण समुद्र के पीछे हटने और नदियों द्वारा जमा की गई गाद से हुआ है। यहीं से इसका नाम 'चेर' (कीचड़) को वैज्ञानिक आधार देता है।
ऐसा पहली बार नहीं है जब हम इस राज्य को केरलम कह कर पुकार रहे हैं। स्थानीय लोग अक्सर राज्य को केरलम कह कर ही पुकारते हैं। केरल भारत का शीर्ष नारियल उत्पादक राज्य है और यहाँ का "हरित केरलम" जैसे मिशन पहले से ही इसी नाम का उपयोग कर रहे हैं, जो पर्यावरण और कृषि के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
पौराणिक कथाओं में उल्लेख है कि भगवान परशुराम ने समुद्र से यह भूमि 'प्राप्त' की थी। संस्कृत ग्रंथों में इसे 'के-रलनात्' कहा गया है, जिसका अर्थ है "जल का पीछे हटना"। यह उस भू-वैज्ञानिक प्रक्रिया की ओर इशारा करता है जिससे पश्चिमी तट का निर्माण हुआ। इसे 'चेर्ना-आलम' (जोड़ी गई भूमि) भी कहा जाता है, जो समुद्र द्वारा छोड़ी गई जमीन का प्रतीक है।
कुल मिलाकर इस राज्य का नाम अब पानी से गहरे रिश्ते को हर प्रकार से दर्शाता है। 'केरलम' केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक जलीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व है। जहाँ 'केरा' हरियाली है, वहीं 'चेर' उपजाऊ गीली मिट्टी है।
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