दुनिया भर के समुद्रों में अवैध, अनियमित और अनियंत्रित मछली पकड़ने के खिलाफ 15 देशों ने मोंबासा घोषणा को अपनाने पर सहमति जताई है।

 

फोटो : विकी कॉमंस

नीतियां और कानून

मोंबासा घोषणा: आखिर क्यों दुनिया को अवैध मछली पकड़ने के खिलाफ एकजुट होना पड़ा?

समुद्र में मची मछलियों की ‘लूट’ पर लगाम लगाने के लिए ज़ोर पकड़ रही एक ज़रूरी अंतरराष्‍ट्रीय पहल

Author : कौस्‍तुभ उपाध्‍याय

दुनिया के महासागर आज केवल जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के साथ ही एक और बड़ी समस्‍या से जूझ रहे हैं और यह उनके अस्तित्व को प्रभावित कर रहीहै। यह समस्‍या है दुनिया भर के समुद्रों में अवैध, अनियमित और अनियंत्रित मछली पकड़ना, जिसे IUU Fishing कहा जाता है, जिसमें  IUU का मतलब  Illegal, Unreported, and Unregulated से है। हिंदी में इसे अवैध, गैर-सूचित (या असूचित) और अनियमित मत्स्यन (मछली पकड़ना) कहा जाता है। आधुनिक तकनीक से लैस विशाल मछली पकड़ने वाले जहाज समुद्रों में इतनी तेजी से मछलियों का दोहन कर रहे हैं कि इससे मछलियों, जलीय जीवों की प्रजातियों और कुछ जलीय वनस्‍पतियों तक के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।

इसी वैश्विक चिंता को लेकर जून 2026 में केन्या के तटीय शहर मोंबासा में आयोजित आवर ओशन कॉन्फ्रेंस (Our Ocean Conference) में 15 देशों ने मोंबासा घोषणा (Mombasa Declaration) को अपनाने पर सहमति जताई है। इस घोषणा का उद्देश्य मछली उद्योग में पारदर्शिता को बढ़ाना, मछली पकड़ने वाले जहाजों की निगरानी मजबूत करना और अवैध मछली पकड़ने पर लगाम लगाना है।

समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र (Marine Ecosystem) को अत्यधिक और अवैध मछली पकड़ने से हो रहे गंभीर नुकसान को देखते हुए दुनिया के कई देशों ने 'मोंबासा घोषणा' को अपनाने पर सहमति जताई है। इस घोषणा का उद्देश्य अवैध, अनियमित और अनियंत्रित (IUU) मछली पकड़ने पर रोक लगाना, समुद्री जैव विविधता की रक्षा करना और मत्स्य संसाधनों के व्‍यवस्थित ढंग से उपयोग को बढ़ावा देना है। 

क्या है मोंबासा घोषणा?

मोंबासा घोषणा एक राजनीतिक संकल्प (Political Declaration) है, जिसके तहत सदस्य देश मछली पकड़ने वाले जहाजों, उनके मालिकों, लाइसेंस और गतिविधियों से संबंधित सूचनाओं को सार्वजनिक करने तथा देशों के बीच डेटा साझा करने पर सहमत हुए हैं।

इस घोषणा में देशों से निम्न कदम उठाने का आग्रह किया गया है -

  • मछली पकड़ने वाले जहाजों की आधुनिक डिजिटल रजिस्ट्री तैयार करना।

  • फिशिंग लाइसेंस सार्वजनिक करना।

  • जहाजों की निगरानी और ट्रैकिंग बढ़ाना।

  • देशों के बीच मत्स्य डेटा साझा करना।

  • समुद्री अपराधों और अवैध व्यापार के खिलाफ सहयोग बढ़ाना।

यह घोषणा ग्लोबल चार्टर फॉर फिशरीज ट्रांसपेरेंसी (Global Charter for Fisheries Transparency) के दस सिद्धांतों को लागू करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है। यह 10 सिद्धांत मत्स्य क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और अवैध मछली पकड़ने (IUU Fishing) पर रोक लगाने के लिए बनाए गए हैं। इन्हें संक्षेप में इस प्रकार समझा जा सकता है -

  1. मछली पकड़ने वाले सभी जहाजों की सार्वजनिक सूची हो – प्रत्येक जहाज का एक आधिकारिक और सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाए।

  2. हर जहाज की एक विशिष्ट पहचान संख्या (Unique Vessel Identifier) हो – ताकि जहाजों की सही पहचान और ट्रैकिंग संभव हो सके।

  3. जहाज के वास्तविक मालिक (Beneficial Owner) की जानकारी सार्वजनिक हो – केवल कंपनी नहीं, बल्कि वास्तविक नियंत्रण रखने वाले व्यक्ति की पहचान भी सामने आए।

  4. मछली पकड़ने के लाइसेंस और परमिट की जानकारी सार्वजनिक की जाए – कौन, कहां और कितनी मात्रा में मछली पकड़ने का अधिकार रखता है, यह जानकारी उपलब्ध हो।

  5. जहाजों की गतिविधियों और स्थान की निगरानी की जाए – ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाए।

  6. मछली पकड़ने, ट्रांसशिपमेंट और लैंडिंग का डेटा सार्वजनिक किया जाए – पकड़ी गई मछलियों की मात्रा और उनकी आवाजाही का रिकॉर्ड उपलब्ध हो।

  7. मत्स्य प्रबंधन संबंधी कानून और नीतियां सार्वजनिक हों – नियम, प्रतिबंध और प्रबंधन उपाय आसानी से उपलब्ध कराए जाएं।

  8. उल्लंघन और दंड की जानकारी सार्वजनिक की जाए – अवैध गतिविधियों में शामिल जहाजों और उन पर हुई कार्रवाई का रिकॉर्ड साझा किया जाए।

  9. मत्स्य क्षेत्र से जुड़ी वित्तीय सहायता और सब्सिडी की पारदर्शिता हो – सरकारों द्वारा दी जाने वाली सहायता और प्रोत्साहनों की जानकारी सार्वजनिक हो।

  10. देशों के बीच डेटा साझा करने और सहयोग को बढ़ावा दिया जाए – अवैध, अनियमित और अनियंत्रित मछली पकड़ने से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचना साझाकरण और समन्वय बढ़ाया जाए।

इन 10 सिद्धांतों का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समुद्र में कौन, कहां, किस अनुमति से और कितनी मछली पकड़ रहा है। इससे मछली पकड़ने के काम में ग्‍लोबल स्‍तर पर अधिकतम पारदर्शिता लाई जा सके। साथ ही IUU Fishing पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

अबतक किन देशों ने जताई सहमति 

अब तक 15 देशों ने आधिकारिक रूप से 'मोंबासा घोषणा' (Mombasa Declaration) को अपनाने और उस पर सहमति जताने की घोषणा की है। यह घोषणा 17 जून 2026 को केन्या के मोंबासा में आयोजित 11वें Our Ocean Conference 2026 के दौरान अपनाई गई। इन 15 देशों में से 7 अफ्रीकी देश हैं, जिससे स्पष्ट है कि अवैध मछली पकड़ने से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में अफ्रीका प्रमुख है। इनमें से फ्रांस ने यह घोषणा अपने विदेशी क्षेत्रों (Overseas Territories) की ओर से भी समर्थन के साथ अपनाई है। घोषणा पर हस्ताक्षर करने वाले देशों ने मछली पकड़ने वाले जहाजों, उनके स्वामित्व, लाइसेंस और गतिविधियों से जुड़ा डेटा अधिक पारदर्शी बनाने तथा आपस में साझा करने का संकल्प लिया है। आवर ओशन कॉन्फ्रेंस के आयोजकों के अनुसार, 2027 तक और देशों के इस पहल से जुड़ने की उम्मीद है। फिलहाल इसपर सहमति जताने वाले देशों की सूची इस प्रकार है-

क्रम संख्याCountry (English)देश (हिन्दी)
1Belgiumबेल्जियम
2Cameroonकैमरून
3Chileचिली
4Dominican Republicडोमिनिकन गणराज्य
5Franceफ्रांस
6The Gambiaगाम्बिया
7Ghanaघाना
8Guineaगिनी
9Liberiaलाइबेरिया
10Panamaपनामा
11Papua New Guineaपापुआ न्यू गिनी
12Peruपेरू
13Republic of the Congoकांगो गणराज्य
14Somaliaसोमालिया
15South Koreaदक्षिण कोरिया

आखिर कितना बड़ा है अवैध मछली पकड़ने का कारोबार?

विशेषज्ञों के अनुसार, अवैध मछली पकड़ने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को हर वर्ष लगभग 50 अरब डॉलर तक का नुकसान होता है। दुनिया भर में पकड़ी जाने वाली मछलियों का एक बड़ा हिस्सा बिना रिपोर्ट किए या नियमों का उल्लंघन करके निकाला जाता है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, IUU Fishing समुद्री संसाधनों के टिकाऊ उपयोग के लिए सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है। यह न केवल मछलियों के भंडार को कम करता है, बल्कि वैध रूप से मछली पकड़ने वाले छोटे मछुआरों की आजीविका पर भी सीधा असर डालता है। इसे लेकर बीते दिनों संयुक्त राष्ट्र द्वारा मनाए जाने वाले International Day for the Fight against Illegal, Unreported and Unregulated Fishing के मौके पर संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और The State of World Fisheries and Aquaculture (SOFIA) ने The toll of illegal, unreported and unregulated fishing शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक हर वर्ष दुनिया में पकड़ी जाने वाली मछलियों का लगभग 11 से 26 मिलियन टन हिस्सा IUU Fishing से जुड़ा होता है, जिसकी आर्थिक कीमत 10 से 23 अरब डॉलर तक आंकी गई है। यह गतिविधि न केवल मछलियों के भंडार को तेजी से घटाती है, बल्कि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ उन करोड़ों छोटे मछुआरों की आजीविका पर भी चोट करती है, जो नियमों का पालन करते हुए मछली पकड़ने पर निर्भर हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि IUU Fishing खाद्य सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण और समुद्री अर्थव्यवस्था, तीनों ही के लिए गंभीर खतरा बन गई है।

समुद्री पारिस्थितिकी पर कितना बड़ा खतरा?

जब किसी क्षेत्र में आवश्यकता से अधिक मछलियां पकड़ी जाती हैं, तो पूरा समुद्री खाद्य जाल प्रभावित होता है। बड़ी मछलियों की संख्या घटने पर छोटी प्रजातियों का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे कोरल रीफ, समुद्री स्तनधारियों और अन्य जीवों पर भी असर पड़ता है। इसके अलावा, कई अवैध जहाज प्रतिबंधित जालों का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में डॉल्फिन, समुद्री कछुए और शार्क भी फंस जाती हैं। इससे जैव विविधता को अपूरणीय क्षति पहुंचती है।

स्वस्थ महासागर पृथ्वी के सबसे बड़े कार्बन सिंक हैं। यदि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र कमजोर होता है, तो महासागरों की कार्बन सोखने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए मछलियों के भंडार और समुद्री जैव विविधता का संरक्षण जलवायु परिवर्तन से लड़ाई का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

दुनिया की लगभग 3 अरब आबादी अपनी प्रोटीन जरूरतों के लिए समुद्री भोजन पर निर्भर है और IUU Fishing से हर वर्ष 50 अरब डॉलर तक का आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है।
एफएओ की रिपोर्टरिपोर्ट

गरीब देशों पर पड़ता है सबसे अधिक असर

अवैध मछली पकड़ने का सबसे ज्यादा नुकसान विकासशील देशों को होता है। अफ्रीका, एशिया और प्रशांत क्षेत्र के कई देशों में लाखों लोगों की आजीविका और भोजन का प्रमुख स्रोत मछली है।

उदाहरण के लिए, घाना में 60 प्रतिशत से अधिक पशु प्रोटीन की आपूर्ति मछलियों से होती है और लगभग 10 प्रतिशत आबादी की आजीविका मत्स्य क्षेत्र पर निर्भर है। ऐसे में मछलियों का अवैध दोहन सीधे खाद्य सुरक्षा और रोजगार पर संकट खड़ा कर सकता है।

क्या केवल घोषणा से रुक जाएगी समस्या?

विशेषज्ञ मानते हैं कि मोंबासा घोषणा सही दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि देश वास्तव में अपने मत्स्य डेटा को सार्वजनिक करते हैं या नहीं, निगरानी प्रणालियों में निवेश करते हैं या नहीं और कानूनों को कितनी सख्ती से लागू करते हैं।

यदि इन वादों को जमीन पर उतारा गया, तो यह समुद्री संरक्षण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। अन्यथा यह भी कई अंतरराष्ट्रीय घोषणाओं की तरह केवल कागजों तक सीमित रह जाने का खतरा रखती है।

मोंबासा घोषणा से पहले हुआ था केप टाउन समझौता

अवैध और असुरक्षित मत्स्य गतिविधियों पर नियंत्रण की वैश्विक कोशिशें नई नहीं हैं। इससे पहले वर्ष 2012 में केप टाउन समझौता (Cape Town Agreement) अस्तित्व में आया था, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के तहत अपनाया गया था। इसका उद्देश्य दुनिया भर में बड़े मछली पकड़ने वाले जहाजों के लिए न्यूनतम सुरक्षा मानक तय करना है। यह समझौता 24 मीटर या उससे अधिक लंबाई वाले मत्स्यन जहाजों के डिजाइन, निर्माण, उपकरण, संचार प्रणाली, जीवनरक्षक साधनों और नियमित निरीक्षण से जुड़े नियम निर्धारित करता है, ताकि समुद्र में होने वाली दुर्घटनाओं को कम किया जा सके और जहाजों की पहचान व निगरानी बेहतर हो सके।

हालांकि यह समझौता सीधे तौर पर अवैध मछली पकड़ने को रोकने के लिए नहीं बनाया गया था, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि जहाजों के पंजीकरण, निरीक्षण और ट्रैकिंग की मजबूत व्यवस्था IUU Fishing (Illegal, Unreported and Unregulated Fishing) पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यही कारण है कि आज मोंबासा घोषणा को केप टाउन समझौते की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जो समुद्री मत्स्य क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत करने का प्रयास करती है। उल्लेखनीय है कि भारत अभी तक केप टाउन समझौते का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है।

भारत का मत्स्य क्षेत्र : अर्थव्यवस्था और आजीविका का बड़ा सहारा

भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और वैश्विक मत्स्य उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग 7.56 प्रतिशत है। देश की अर्थव्यवस्था में भी इस क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान है। मत्स्य क्षेत्र का योगदान भारत के सकल मूल्य वर्धित (GVA) में करीब 1.24 प्रतिशत और कृषि GVA में 7.28 प्रतिशत से अधिक है। यही वजह है कि सरकार ने वर्ष 2024-25 तक 22 मिलियन मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। भारत के लिए मत्स्य क्षेत्र केवल खाद्य उत्पादन का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और निर्यात आय का एक महत्वपूर्ण आधार भी बन चुका है।

यह क्षेत्र देश में लगभग 1.45 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराता है और करीब 2.8 करोड़ लोगों के मछुआरा समुदाय की आजीविका का आधार माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय मत्स्य क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव भी देखने को मिले हैं। इनमें सबसे बड़ा परिवर्तन अंतर्देशीय जलीय कृषि, विशेषकर मीठे पानी (फ्रेशवाटर) में मछली पालन का तेजी से विस्तार है। इसके अलावा मछली पकड़ने की गतिविधियों का बढ़ता मशीनीकरण और लवणीय जल में झींगा (श्रिम्प) जलीय कृषि की सफल शुरुआत ने इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। हालांकि, उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग, अत्यधिक दोहन और अवैध मछली पकड़ने जैसी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं, जिससे भारत के लिए टिकाऊ मत्स्य प्रबंधन और समुद्री संरक्षण पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

निष्कर्ष : समुद्र को बचाने के लिए लड़नी होगी बड़ी लड़ाई

महासागर पृथ्वी के जलवायु संतुलन, खाद्य सुरक्षा और करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार हैं। मोंबासा घोषणा यह स्वीकार करती है कि समुद्री संसाधन असीमित नहीं हैं और उन्हें बचाने के लिए देशों को मिलकर काम करना होगा। अवैध मछली पकड़ने पर रोक केवल मछलियों को बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि समुद्र और मानव सभ्यता के भविष्य को सुरक्षित करने की भी लड़ाई है।

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