फोटो: इरुगुराला रवि कृष्णा / विकिमीडिया कॉमन्स, सीसी बाय-एसए।
आंध्र प्रदेश की प्रमुख नदियां राज्य की खेती, सिंचाई और जल उपलब्धता में अहम भूमिका निभाती हैं।
गोदावरी, कृष्णा और पेन्नार के साथ वंशधारा, नागावली और कई तटीय नदियां राज्य की विविध नदी प्रणाली बनाती हैं।
अलग-अलग क्षेत्रों में बाढ़, सूखा, जल प्रदूषण, भूजल पर बढ़ता दबाव और नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव जैसी चुनौतियां मौजूद हैं।
नदियों के बेहतर प्रबंधन के लिए जलग्रहण क्षेत्र, सतही जल, भूजल और तटीय पर्यावरण को एक साथ ध्यान में रखना जरूरी है।
आंध्र प्रदेश की नदियां राज्य के भूगोल, खेती और जल संसाधनों को काफी हद तक प्रभावित करती हैं। गोदावरी, कृष्णा और पेन्नार राज्य के तीन प्रमुख नदी बेसिन हैं। इनके अलावा उत्तर तटीय और मध्य तटीय क्षेत्रों में वंशधारा, नागावली, गुंडलकम्मा, सरदा, वराह, गोस्तानी और दूसरी छोटी नदियां बहती हैं। इनमें से कई नदियां सीधे बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।
इन नदियों का महत्व सिंचाई और पेयजल से लेकर मछली पालन, स्थानीय आजीविका और तटीय पर्यावरण तक है। लेकिन बाढ़, सूखा, प्रदूषण, भूजल पर बढ़ता दबाव और नदी के प्रवाह में बदलाव इनके प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौतियां हैं।
आंध्र प्रदेश की नदी प्रणाली को तीन बड़े नदी बेसिनों गोदावरी, कृष्णा और पेन्नार और पूर्वी तट की स्वतंत्र नदी प्रणालियों के जरिए समझा जा सकता है। राज्य की कई नदियां दूसरे राज्यों से भी जुड़ी हैं। इसलिए इनके प्रबंधन के लिए राज्यों के बीच समन्वय जरूरी है।
| नदी बेसिन/नदी तंत्र | प्रमुख नदियां | आंध्र प्रदेश में प्रमुख क्षेत्र | प्रमुख विशेषता |
|---|---|---|---|
| गोदावरी बेसिन | गोदावरी, साबरी, इंद्रावती आदि | उत्तर और पूर्वी आंध्र प्रदेश | राज्य की प्रमुख नदी प्रणालियों में से एक; सिंचाई, पेयजल और डेल्टा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण |
| कृष्णा बेसिन | कृष्णा, तुंगभद्रा, मुसी, मुनेरु, पालेरु आदि | मध्य और दक्षिण-मध्य आंध्र प्रदेश | सिंचाई, जलाशयों और कृषि के लिए महत्वपूर्ण |
| पेन्नार बेसिन | पेन्नार, चित्रावती, पापाग्नि, कुंडेरु आदि | दक्षिणी आंध्र प्रदेश | रायलसीमा और दक्षिणी जिलों की सिंचाई तथा जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण |
| महानदी–पेन्नार के बीच पूर्वी प्रवाह वाली नदियां | वंशधारा, नागावली, सरदा, वराह, तांडवा, गुंडलकम्मा आदि | उत्तर तटीय और मध्य तटीय आंध्र प्रदेश | कई नदियां सीधे बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं |
| पेन्नार–कावेरी के बीच तटीय नदी तंत्र | स्वर्णमुखी, पालार और छोटी तटीय नदियां | दक्षिणी तटीय क्षेत्र | स्थानीय सिंचाई, पेयजल और तटीय पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण |
आंध्र प्रदेश की प्रमुख नदियों में गोदावरी, कृष्णा और पेन्नार के अलावा वंशधारा, नागावली, गुंडलकम्मा, स्वर्णमुखी और कई अन्य छोटी-बड़ी नदियां शामिल हैं।
| नदी | उद्गम स्थल | अनुमानित लंबाई | आंध्र प्रदेश के प्रमुख क्षेत्र/जिले | किस नदी में मिलती है |
|---|---|---|---|---|
| गोदावरी | त्र्यंबक पहाड़ियां, नासिक, महाराष्ट्र | 1465 किमी | अल्लूरी सीताराम राजू, एलुरु, पूर्वी गोदावरी, कोनसीमा, काकीनाडा क्षेत्र | बंगाल की खाड़ी |
| कृष्णा | महाबलेश्वर, महाराष्ट्र | 1400 किमी | नंद्याल, पलनाडु, एनटीआर, कृष्णा, गुंटूर क्षेत्र | बंगाल की खाड़ी |
| पेन्नार (पेन्ना) | नंदी पहाड़ियां, कर्नाटक | 597 किमी | श्री सत्य साईं, अनंतपुर, वाईएसआर कडपा, नेल्लोर क्षेत्र | बंगाल की खाड़ी |
| तुंगभद्रा | तुंगा और भद्रा नदियों का संगम, कूडलि, कर्नाटक | 531 किमी | कर्नूल, मंत्रालयम क्षेत्र | कृष्णा |
| वंशधारा | ओडिशा के कालाहांडी-रायगड़ा क्षेत्र की पहाड़ियां | 254 किमी | पार्वतीपुरम मन्यम, श्रीकाकुलम | बंगाल की खाड़ी |
| नागावली | लखबहाल, कालाहांडी, ओडिशा | 256 किमी | पार्वतीपुरम मन्यम, विजयनगरम, श्रीकाकुलम | बंगाल की खाड़ी |
| गुंडलकम्मा | नल्लमाला की गुंडला ब्रह्मेश्वरम पहाड़ियां | लगभग 265 किमी | नंद्याल क्षेत्र, मार्कापुरम, प्रकाशम, ओंगोल क्षेत्र | बंगाल की खाड़ी |
| पालार | कर्नाटक के कोलार जिले में तालगवरे के पास | 348 किमी | चित्तूर क्षेत्र | बंगाल की खाड़ी |
| स्वर्णमुखी | पूर्वी घाट, चित्तूर क्षेत्र | 130 किमी | चित्तूर, तिरुपति, एसपीएसआर नेल्लोर क्षेत्र | बंगाल की खाड़ी |
| गोस्थनी | अनंतगिरि वन क्षेत्र, विजयनगरम | लगभग 120 किमी | विजयनगरम, अनकापल्ली/विशाखापत्तनम क्षेत्र | बंगाल की खाड़ी |
| सरदा | पूर्वी घाट | लगभग 122 किमी | अनकापल्ली, विशाखापत्तनम क्षेत्र | बंगाल की खाड़ी |
| मुसि | वेलिगोंडा पहाड़ियां, प्रकाशम क्षेत्र | लगभग 100 किमी | मार्कापुरम, दर्शन, कोंडापी, तंगुटूर क्षेत्र | बंगाल की खाड़ी |
| पालेरु | वेलिगोंडा पहाड़ियां | लगभग 112 किमी | मार्कापुरम, कनिगिरी, सिंगरायकोंडा, प्रकाशम | बंगाल की खाड़ी |
| बहुदा | गजपति जिले की रामगिरि पहाड़ियां, ओडिशा | लगभग 20 किमी | इच्चापुरम, कवीटी, मंदसा, श्रीकाकुलम | बंगाल की खाड़ी |
गोदावरी: डेल्टा और सिंचाई की प्रमुख नदी
गोदावरी आंध्र प्रदेश की प्रमुख नदी प्रणालियों में से एक है। राज्य में प्रवेश करने के बाद यह पूर्व की ओर बहती है और डेल्टा क्षेत्र में पहुंचती है। इसके पानी का इस्तेमाल सिंचाई और दूसरी जरूरतों के लिए होता है। पोलावरम और धवलेश्वरम जैसी परियोजनाएं गोदावरी के पानी के प्रबंधन में महत्वपूर्ण हैं।
कृष्णा: सिंचाई और जल प्रबंधन की प्रमुख नदी
कृष्णा नदी महाराष्ट्र से निकलकर कर्नाटक और तेलंगाना से होते हुए आंध्र प्रदेश में आती है। राज्य में यह नदी सिंचाई, जलाशयों और खेती से गहराई से जुड़ी है। श्रीशैलम, पुलिचिंतला और प्रकाशम बैराज जैसी परियोजनाएं इसके जल प्रबंधन का हिस्सा हैं।
पेन्नार: रायलसीमा की जल सुरक्षा से जुड़ी नदी
पेन्नार या पेन्ना कर्नाटक से निकलकर आंध्र प्रदेश के रायलसीमा क्षेत्र से होकर बहती है और आगे बंगाल की खाड़ी में गिरती है। कम और अनिश्चित बारिश वाले क्षेत्रों में इसका पानी सिंचाई और जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
तुंगभद्रा: कृष्णा की प्रमुख सहायक नदी
तुंगभद्रा तुंगा और भद्रा नदियों के संगम से बनती है। यह कर्नाटक से होते हुए आंध्र प्रदेश के कर्नूल क्षेत्र में आती है और आगे कृष्णा नदी में मिलती है। इसके पानी का इस्तेमाल सिंचाई और जलाशयों के संचालन में होता है।
वंशधारा: ओडिशा और आंध्र प्रदेश से जुड़ी नदी
वंशधारा ओडिशा से निकलकर आंध्र प्रदेश में प्रवेश करती है और बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इसका नदी बेसिन दोनों राज्यों में फैला है। महेंद्रतनया इसकी प्रमुख सहायक नदियों में शामिल है।
नागावली: उत्तर तटीय आंध्र की महत्वपूर्ण नदी
नागावली ओडिशा से निकलकर आंध्र प्रदेश के पार्वतीपुरम मन्यम, विजयनगरम और श्रीकाकुलम क्षेत्रों से होकर बहती है। नदी का बड़ा और निचला हिस्सा आंध्र प्रदेश में है। यह उत्तर तटीय आंध्र की महत्वपूर्ण नदी प्रणालियों में शामिल है।
गुंडलकम्मा: मध्य तटीय आंध्र की स्वतंत्र नदी
गुंडलकम्मा आंध्र प्रदेश के पूर्वी घाट क्षेत्र से निकलकर प्रकाशम और आसपास के तटीय क्षेत्रों से गुजरती है। यह पूर्व की ओर बहने वाली स्वतंत्र नदियों में शामिल है और आगे बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
स्वर्णमुखी: दक्षिणी तटीय नदी
स्वर्णमुखी दक्षिणी आंध्र प्रदेश की महत्वपूर्ण तटीय नदियों में है। इसका नदी तंत्र तिरुपति और आसपास के क्षेत्रों की जल व्यवस्था तथा स्थानीय कृषि से जुड़ा है।
गोदावरी, कृष्णा और पेन्नार जैसी बड़ी नदियों से कई सहायक नदियां जुड़ी हैं। इनका अपना जलग्रहण क्षेत्र होता है और ये पानी को मुख्य नदी तक पहुंचाती हैं। वंशधारा और नागावली जैसी स्वतंत्र नदियों को इस सूची में शामिल नहीं किया गया है।
| सहायक नदी | उद्गम स्थल | अनुमानित लंबाई | आंध्र प्रदेश के प्रमुख क्षेत्र/जिले | किस नदी में मिलती है |
|---|---|---|---|---|
| प्राणहिता | वर्धा और वैनगंगा नदियों का संगम, महाराष्ट्र–तेलंगाना सीमा | 721 किमी* | तेलंगाना सीमा से लगे गोदावरी क्षेत्र | गोदावरी |
| इंद्रावती | पूर्वी घाट, कालाहांडी, ओडिशा | 535 किमी | अल्लूरी सीताराम राजू क्षेत्र/गोदावरी का सीमावर्ती क्षेत्र | गोदावरी |
| शबरी | सिंकराम पहाड़ियां, ओडिशा | 418 किमी | अल्लूरी सीताराम राजू, एलुरु क्षेत्र | गोदावरी |
| तुंगभद्रा | तुंगा और भद्रा नदियों का संगम, कूडलि, कर्नाटक | 531 किमी | कर्नूल, मंत्रालयम क्षेत्र | कृष्णा |
| मूसी | अनंतगिरि पहाड़ियां, तेलंगाना | 265 किमी | कृष्णा बेसिन से जुड़े दक्षिणी क्षेत्र | कृष्णा |
| मुनेरु | तेलंगाना का वारंगल क्षेत्र | 195 किमी | एनटीआर, कृष्णा क्षेत्र | कृष्णा |
| पालेరు | तेलंगाना–आंध्र प्रदेश सीमा का पठारी क्षेत्र | 152 किमी | कृष्णा क्षेत्र | कृष्णा |
| चित्रावती | चिक्कबल्लापुर, कर्नाटक | 218 किमी | श्री सत्य साईं, अनंतपुर, वाईएसआर कडपा | पेन्नार |
| पापाग्नि | नंदी पहाड़ियों/चिक्कबल्लापुर क्षेत्र, कर्नाटक | 205 किमी | श्री सत्य साईं, अनंतपुर, वाईएसआर कडपा | पेन्नार |
| कुंदेरु (कुंडू) | एर्रमला पहाड़ियों की पश्चिमी ढलान, आंध्र प्रदेश | 205 किमी | नंद्याल, वाईएसआर कडपा | पेन्नार |
| सगिलेरु | नल्लमाला–वेलिगोंडा पहाड़ी क्षेत्र | 141 किमी | प्रकाशम, वाईएसआर कडपा | पेन्नार |
| चेय्येरु | चित्तूर क्षेत्र की बहुदा और पिंचा धाराओं का संगम | 87 किमी | अन्नमय्या, वाईएसआर कडपा | पेन्नार |
| जयमंगली | कर्नाटक का पहाड़ी क्षेत्र | 77 किमी | श्री सत्य साईं क्षेत्र | पेन्नार |
| महेंद्रतनया | गजपति जिला, ओडिशा | — | श्रीकाकुलम | वंशधारा |
| झंझावती | ओडिशा का पूर्वी घाट क्षेत्र | — | पार्वतीपुरम मन्यम, विजयनगरम | नागावली |
| गुमुदुगड्डा | पूर्वी घाट, ओडिशा–आंध्र क्षेत्र | — | विजयनगरम, श्रीकाकुलम | नागावली |
| वोट्टिगेड्डा | पूर्वी घाट क्षेत्र | — | पार्वतीपुरम मन्यम, विजयनगरम | नागावली |
आंध्र प्रदेश की प्रमुख नदी घाटियां
आंध्र प्रदेश की नदी घाटियों को समझने के लिए नदी बेसिन और जलग्रहण क्षेत्र, दोनों को देखना जरूरी है। राज्य की प्रमुख नदी घाटियां गोदावरी, कृष्णा और पेन्नार बेसिन से जुड़ी हैं। इनके अलावा उत्तर और मध्य तटीय क्षेत्रों में कई छोटी और स्वतंत्र नदी घाटियां भी हैं।
| नदी घाटी/बेसिन | प्रमुख नदी/नदियां | आंध्र प्रदेश के प्रमुख क्षेत्र/जिले | प्रमुख महत्व |
|---|---|---|---|
| गोदावरी घाटी | गोदावरी और सहायक नदियां | पूर्वी और पश्चिमी गोदावरी क्षेत्र, अल्लूरी सीताराम राजू आदि | सिंचाई, डेल्टा कृषि, पेयजल और मत्स्य संसाधन |
| कृष्णा घाटी | कृष्णा, तुंगभद्रा, मुनेरु, पालेरु आदि | कर्नूल, नंद्याल, पलनाडु, गुंटूर, कृष्णा आदि | सिंचाई, जलाशय और कृषि |
| पेन्नार घाटी | पेन्नार, चित्रावती, पापाग्नि आदि | अनंतपुर, कडपा, नेल्लोर आदि | रायलसीमा की जल सुरक्षा और सिंचाई |
| वंशधारा घाटी | वंशधारा, महेंद्रतनया | पार्वतीपुरम मन्यम, श्रीकाकुलम | सिंचाई और तटीय कृषि |
| नागावली घाटी | नागावली और सहायक नदियां | पार्वतीपुरम मन्यम, विजयनगरम, श्रीकाकुलम | कृषि, सिंचाई और स्थानीय जल संसाधन |
| गुंडलकम्मा घाटी | गुंडलकम्मा | प्रकाशम, बापटला | सिंचाई और स्थानीय जलापूर्ति |
| सरदा–वराह–तांडवा नदी क्षेत्र | सरदा, वराह, तांडवा | अनकापल्ली और आसपास | स्थानीय सिंचाई, पेयजल और तटीय पारिस्थितिकी |
| दक्षिणी तटीय नदी क्षेत्र | स्वर्णमुखी, पालार और छोटी नदियां | तिरुपति, नेल्लोर आदि | स्थानीय कृषि, जलापूर्ति और तटीय पारिस्थितिकी |
आंध्र प्रदेश की नदियों का सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक महत्व
आंध्र प्रदेश की नदियां खेती, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पानी की उपलब्धता के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। बड़े नदी बेसिनों के साथ-साथ छोटी तटीय नदियां भी स्थानीय स्तर पर सिंचाई, घरेलू पानी और पारिस्थितिकी में भूमिका निभाती हैं।
गोदावरी और कृष्णा की नदी घाटियों में डेल्टा और सिंचित कृषि का विशेष महत्व है। दूसरी ओर, रायलसीमा में पेन्नार और उसकी सहायक नदियां ऐसे क्षेत्रों से जुड़ी हैं जहां पानी की उपलब्धता सीमित और अनिश्चित है। तटीय नदियां मुहानों, आर्द्रभूमियों और मत्स्य संसाधनों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
नदियों से मिलने वाले पानी का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहता। इससे ग्रामीण रोजगार, खेती से जुड़ी गतिविधियों और स्थानीय बाजारों को भी बढ़ावा मिलता है। वहीं तटीय क्षेत्रों में नदी के मुहाने और आर्द्रभूमियां मत्स्य संसाधनों और स्थानीय आजीविका के लिए महत्वपूर्ण हैं।
| महत्व का क्षेत्र | प्रमुख नदियां/नदी तंत्र | आंध्र प्रदेश के प्रमुख क्षेत्र/जिले | प्रमुख महत्व |
|---|---|---|---|
| कृषि और सिंचाई | गोदावरी, कृष्णा, पेन्नार, वंशधारा, नागावली | गोदावरी डेल्टा, कृष्णा डेल्टा, नेल्लोर, उत्तर आंध्र और रायलसीमा के कई क्षेत्र | नदियों और उनसे जुड़ी नहर प्रणालियों से खेती को सिंचाई मिलती है। कृष्णा डेल्टा इसका प्रमुख उदाहरण है। |
| पेयजल और घरेलू जलापूर्ति | कृष्णा, गोदावरी, पेन्नार और उनकी सहायक नदियां | विजयवाड़ा, कृष्णा डेल्टा, गोदावरी क्षेत्र, नेल्लोर सहित कई क्षेत्र | नदी और जलाशय प्रणालियां ग्रामीण तथा शहरी पेयजल आपूर्ति का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। |
| मत्स्य पालन और जलीय अर्थव्यवस्था | गोदावरी, कृष्णा और उनकी डेल्टा/मुहाना प्रणालियां | कोनसीमा, काकीनाडा, कृष्णा, पश्चिम गोदावरी, तटीय क्षेत्र | नदियां, मुहाने, जलाशय और संबंधित जल निकाय अंतर्देशीय मत्स्य पालन तथा जलीय कृषि के लिए आधार प्रदान करते हैं। |
| कृषि आधारित अर्थव्यवस्था | गोदावरी, कृष्णा, पेन्नार | गोदावरी और कृष्णा डेल्टा, तटीय आंध्र, रायलसीमा | सिंचाई की उपलब्धता से धान, गन्ना, दालों और अन्य फसलों की खेती तथा उससे जुड़े रोजगार को आधार मिलता है। |
| जलविद्युत और ऊर्जा | कृष्णा, तुंगभद्रा, गोदावरी | श्रीशैलम, तुंगभद्रा क्षेत्र, गोदावरी बेसिन | नदी पर बने बहुउद्देशीय बांध और जलाशय जलविद्युत उत्पादन में योगदान देते हैं। |
| बाढ़ प्रबंधन और जल नियंत्रण | गोदावरी, कृष्णा, पेन्नार, वंशधारा, नागावली | तटीय आंध्र, गोदावरी और कृष्णा डेल्टा, उत्तर आंध्र | बांध, बैराज, जलाशय और नहर प्रणालियां बाढ़ के पानी को नियंत्रित करने तथा उसका प्रबंधन करने में भूमिका निभाती हैं। |
| नदी डेल्टा और उपजाऊ मैदान | गोदावरी, कृष्णा | कोनसीमा, पूर्वी/पश्चिमी गोदावरी, कृष्णा, गुंटूर, बापटला | नदियों द्वारा लाई गई जलोढ़ मिट्टी और सिंचाई ने बड़े कृषि मैदान और घनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था विकसित करने में योगदान दिया है। |
| मैंग्रोव और तटीय पारिस्थितिकी | गोदावरी, कृष्णा | कोनसीमा, काकीनाडा, कृष्णा और आसपास का तटीय क्षेत्र | नदी के मुहानों में मैंग्रोव वन तटीय जैव विविधता, मछली और झींगा संसाधनों तथा तटीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। |
| आर्द्रभूमि और पक्षी जैव विविधता | कृष्णा, गोदावरी तथा आसपास की जल प्रणालियां | कोल्लेरू, कृष्णा-गोदावरी डेल्टा | नदी और आर्द्रभूमि तंत्र प्रवासी पक्षियों तथा अन्य जलीय जीवों के लिए महत्वपूर्ण आवास उपलब्ध कराते हैं। |
| पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था | गोदावरी, कृष्णा और तटीय नदी तंत्र | राजमहेंद्रवरम, पापीकोंडालु, विजयवाड़ा, डेल्टा क्षेत्र | नदी किनारे के प्राकृतिक परिदृश्य, घाट, नौका विहार और धार्मिक स्थलों से पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। |
| सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व | गोदावरी, कृष्णा | राजमहेंद्रवरम, विजयवाड़ा और अन्य नदी तटीय क्षेत्र | नदी घाट धार्मिक गतिविधियों, तीर्थ, स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक जीवन से जुड़े हैं। |
| स्थानीय आजीविका | सभी प्रमुख नदी एवं तटीय नदी तंत्र | ग्रामीण और तटीय आंध्र प्रदेश | खेती, मत्स्य पालन, जलकृषि, पशुपालन, नौका परिवहन और नदी-आधारित छोटे व्यवसायों को जल संसाधनों से सहारा मिलता है। |
आंध्र प्रदेश में नदी प्रबंधन की चुनौती केवल बाढ़ और पानी की कमी तक सीमित नहीं है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बाढ़, सूखा, पानी की गुणवत्ता, भूजल पर दबाव, नदी के प्रवाह में बदलाव और तटीय पर्यावरण से जुड़ी कई समस्याएं हैं।
| प्रमुख दबाव/चुनौती | प्रभावित नदी/क्षेत्र | समस्या का स्वरूप | प्रमुख प्रभाव |
|---|---|---|---|
| बाढ़ और अचानक बढ़ता जलस्तर | गोदावरी, कृष्णा, वंशधारा, नागावली | भारी बारिश और तेज प्रवाह | बस्तियों, कृषि और बुनियादी ढांचे पर असर |
| सूखा और मौसमी जल कमी | पेन्नार और रायलसीमा की नदियां | वर्षा और नदी प्रवाह में असमानता | सिंचाई और पेयजल पर दबाव |
| नदी प्रदूषण | कृष्णा, गोदावरी, तुंगभद्रा और अन्य नदी क्षेत्र | सीवेज और अन्य प्रदूषक | जल गुणवत्ता में गिरावट |
| भूजल पर बढ़ती निर्भरता | शुष्क और कृषि क्षेत्र | सतही जल की कमी की भरपाई भूजल से | जलस्तर और जल गुणवत्ता पर दबाव |
| प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव | बड़े बांध और बैराज वाले नदी तंत्र | जलाशय आधारित प्रवाह नियंत्रण | नदी के नीचे के हिस्सों पर असर |
| डेल्टा और मुहाना क्षेत्र पर दबाव | गोदावरी, कृष्णा | भूमि उपयोग और तटीय बदलाव | आर्द्रभूमि और तटीय पारिस्थितिकी पर प्रभाव |
| अंतरराज्यीय जल प्रबंधन | कृष्णा, गोदावरी, पेन्नार, वंशधारा, नागावली | एक से अधिक राज्यों में फैले बेसिन | जल बंटवारे और परियोजना प्रबंधन की जटिलता |
| चरम मौसम की घटनाएं | राज्य के विभिन्न नदी बेसिन | भारी बारिश और लंबे सूखे की घटनाएं | बाढ़ और जल कमी दोनों का जोखिम |
1. बाढ़ और नदी कटाव
मानसून के दौरान गोदावरी और कृष्णा जैसी बड़ी नदियों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ सकता है। उत्तर तटीय आंध्र की वंशधारा और नागावली जैसी नदियों में भी भारी बारिश के दौरान बाढ़ का जोखिम रहता है। आंध्र प्रदेश स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर ने गोदावरी, कृष्णा, पेन्नार, नागावली और वंशधारा के संभावित बाढ़ क्षेत्रों के मानचित्र तैयार किए हैं।
2. सूखा और मौसमी जल कमी
रायलसीमा में बारिश और सतही पानी की अनिश्चित उपलब्धता के कारण पेन्नार और उसकी सहायक नदियां खास महत्व रखती हैं। ऐसे क्षेत्रों में जलाशय, सिंचाई परियोजनाएं और भूजल मिलकर पानी की जरूरत पूरी करने में मदद करते हैं।
3. नदी प्रदूषण
खासकर शहरों में नदी प्रदूषण एक बड़ी चुनौती है। CWC के राष्ट्रीय नदी संरक्षण कार्यक्रम से जुड़े दस्तावेजों में आंध्र प्रदेश की कुंडू, तुंगभद्रा, गोदावरी, कृष्णा और नागावली नदियों के कुछ हिस्सों को प्रदूषित दर्ज किया गया था।
4. भूजल पर बढ़ता दबाव
जब सतही पानी कम मिलता है तो सिंचाई और घरेलू जरूरतों के लिए भूजल पर निर्भरता बढ़ सकती है। इसलिए नदी और भूजल प्रबंधन को अलग-अलग देखने के बजाय दोनों को एक साथ देखना जरूरी है। जलस्तर, पानी की गुणवत्ता और मौसम के हिसाब से पानी की उपलब्धता की निगरानी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।
5. प्राकृतिक नदी प्रवाह में बदलाव
बड़े बांध और बैराज सिंचाई, पेयजल और बाढ़ प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके संचालन से नदी में पानी कब और कितना बहेगा, इसमें बदलाव हो सकता है। इसलिए पानी जमा करने और सिंचाई की जरूरतों के साथ नदी के निचले हिस्सों की जरूरत और नदी के जरूरी प्राकृतिक प्रवाह को भी ध्यान में रखना चाहिए।
6. अंतरराज्यीय नदी प्रबंधन
गोदावरी और कृष्णा जैसे बड़े नदी बेसिन कई राज्यों में फैले हैं। वंशधारा और नागावली जैसी नदियां भी ओडिशा और आंध्र प्रदेश से जुड़ी हैं। इसलिए पानी के बंटवारे, परियोजनाओं के संचालन और बाढ़ से निपटने के लिए राज्यों के बीच तालमेल जरूरी है।
| प्रबंधन/पहल | प्रमुख नदी/क्षेत्र | संबंधित संस्था | प्रमुख उद्देश्य |
|---|---|---|---|
| APWRIMS जल संसाधन सूचना प्रणाली | राज्य की प्रमुख नदियां और जल परियोजनाएं | आंध्र प्रदेश जल संसाधन विभाग | जल संसाधनों और परियोजनाओं की डिजिटल निगरानी |
| बाढ़ पूर्वानुमान और नदी जलस्तर निगरानी | गोदावरी, कृष्णा, वंशधारा, नागावली आदि | CWC और राज्य एजेंसियां | बाढ़ की निगरानी और पूर्व चेतावनी |
| जलाशय और बैराज आधारित जल प्रबंधन | गोदावरी, कृष्णा, पेन्नार आदि | जल संसाधन विभाग | जल भंडारण, सिंचाई और बाढ़ प्रबंधन |
| नदी प्रदूषण नियंत्रण और पुनर्स्थापना | गोदावरी, कृष्णा, कुंडू, तुंगभद्रा, नागावली आदि | CPCB, APPCB और राज्य एजेंसियां | सीवेज और प्रदूषण नियंत्रण |
| एकीकृत वाटरशेड प्रबंधन कार्यक्रम | राज्य के विभिन्न वाटरशेड | APSAC/संबंधित विभाग | वर्षाजल संरक्षण, मिट्टी संरक्षण और भूजल पुनर्भरण |
| Remote Sensing और GIS आधारित निगरानी | नदी बेसिन और जलग्रहण क्षेत्र | APSAC | जल संसाधनों और बाढ़ क्षेत्रों की निगरानी |
| नीरू–चेत्तु कार्यक्रम | ग्रामीण जल निकाय और जलग्रहण क्षेत्र | आंध्र प्रदेश सरकार | जल संरक्षण, जल निकायों का पुनर्जीवन और भूजल पुनर्भरण |
| तेलुगु गंगा परियोजना | कृष्णा–पेन्नार जल तंत्र | जल संसाधन विभाग | सिंचाई और चेन्नई पेयजल आपूर्ति |
| सोमशिला परियोजना | पेन्नार | जल संसाधन विभाग | सिंचाई और जल भंडारण |
| गोदावरी–कृष्णा जल हस्तांतरण | गोदावरी और कृष्णा बेसिन | आंध्र प्रदेश सरकार | कृष्णा बेसिन की जल जरूरतों के लिए गोदावरी जल का उपयोग |
| भूजल निगरानी और जल ऑडिट | जल-संकट वाले क्षेत्र | Ground Water & Water Audit विभाग | भूजल स्तर, गुणवत्ता, पुनर्भरण और मौसमी स्थिति की निगरानी |
| शहरी जल एवं सीवेज प्रबंधन | शहरी नदी क्षेत्र | शहरी स्थानीय निकाय/संबंधित विभाग | जलापूर्ति, सीवेज प्रबंधन और शहरी जल सुरक्षा |
APWRIMS आंध्र प्रदेश के जल संसाधनों से जुड़ी जानकारी और उनके प्रबंधन के लिए एकीकृत प्रणाली है। वहीं भूजल एवं जल ऑडिट विभाग जलस्तर, पानी की गुणवत्ता, जल संसाधनों के आकलन और मौसमी जल ऑडिट जैसे काम करता है।
Neeru-Chettu के तहत पानी बचाने, छोटे सिंचाई जलाशयों की मरम्मत और गाद निकालने, चेक डैम बनाने और भूजल रिचार्ज जैसे कामों को बढ़ावा दिया गया। शहरों में AMRUT 2.0 के तहत पानी की आपूर्ति, सीवेज, बारिश के पानी को जमा करने और जल स्रोतों को बनाए रखने से जुड़े काम भी किए जा रहे हैं।
आंध्र प्रदेश में बांध और बैराज सिंचाई, पानी जमा करने, बाढ़ से निपटने और कुछ क्षेत्रों में पेयजल पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राज्य की कई प्रमुख नदी परियोजनाएं गोदावरी, कृष्णा, पेन्नार और उत्तर तटीय नदियों से जुड़ी हैं।
| नदी | प्रमुख क्षेत्र/जिला | प्रकार | प्रमुख महत्व |
|---|---|---|---|
| बांध/बैराज | नदी | प्रमुख क्षेत्र/जिला | प्रकार |
| पोलावरम परियोजना | गोदावरी | एलुरु/अल्लूरी सीताराम राजू क्षेत्र | सिंचाई, जल भंडारण और जल हस्तांतरण |
| सर आर्थर कॉटन/धवलेश्वरम बैराज | गोदावरी | राजमहेंद्रवरम | डेल्टा सिंचाई |
| श्रीशैलम | कृष्णा | नंद्याल/कर्नूल क्षेत्र | जल भंडारण, सिंचाई और जलविद्युत |
| पुलिचिंतला | कृष्णा | पलनाडु क्षेत्र | सिंचाई और प्रवाह प्रबंधन |
| प्रकाशम बैराज | कृष्णा | विजयवाड़ा | कृष्णा डेल्टा सिंचाई और जल प्रबंधन |
| सोमशिला | पेन्नार | नेल्लोर | सिंचाई और जल भंडारण |
| कंदलेरु | कंदलेरु/पेन्नार तंत्र | नेल्लोर | सिंचाई और पेयजल |
| गांडीकोटा | पेन्नार | कडपा | सिंचाई और जल भंडारण |
| गुंडलकम्मा | गुंडलकम्मा | प्रकाशम | सिंचाई |
| येलरु | येलरु | काकीनाडा/अनकापल्ली क्षेत्र | सिंचाई और जलापूर्ति |
| थोटापल्ली | नागावली | विजयनगरम | सिंचाई |
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| मद्दुवलसा | नागावली | विजयनगरम | सिंचाई |
| वेंगलराय सागरम | नागावली तंत्र | उत्तर तटीय आंध्र | सिंचाई |
| सुंकेसुला | तुंगभद्रा | कर्नूल | सिंचाई और जल प्रबंधन |
आंध्र प्रदेश में नदी संरक्षण का मतलब केवल नदी किनारे सफाई करना या नए जल ढांचे बनाना नहीं है। राज्य की नदियां बड़े नदी बेसिन, छोटे जलग्रहण क्षेत्रों, भूजल, खेती और तटीय पर्यावरण से जुड़ी हैं।
नदी प्रबंधन में नदी के प्राकृतिक प्रवाह, जलग्रहण क्षेत्र, सतही पानी, भूजल और तटीय पर्यावरण को एक साथ देखना होगा। बाढ़ के समय अतिरिक्त पानी को सुरक्षित तरीके से संभालना और सूखे समय में पानी की उपलब्धता बनाए रखना, दोनों जरूरी हैं।
बड़ी नदियों के साथ छोटी नदियों और जलधाराओं को भी नदी प्रबंधन में शामिल करना जरूरी है। वंशधारा और नागावली जैसी अंतरराज्यीय नदियों के लिए राज्यों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण है। वहीं गोदावरी और कृष्णा जैसे बड़े बेसिनों में जल उपलब्धता, जलाशय संचालन और नदी के निचले हिस्सों की जरूरतों को भी साथ लेकर चलना होगा।
आंध्र प्रदेश की नदी प्रणाली में अलग-अलग क्षेत्रों की स्थिति अलग है। गोदावरी और कृष्णा जैसी बड़ी नदियां राज्य के सिंचित कृषि क्षेत्रों और डेल्टा अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं, जबकि पेन्नार और रायलसीमा की नदी प्रणालियां अधिक अनिश्चित जल उपलब्धता वाले क्षेत्रों से जुड़ी हैं। उत्तर तटीय आंध्र की वंशधारा और नागावली जैसी नदियां राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत दिखाती हैं।
इसलिए राज्य में नदी प्रबंधन का सवाल केवल इस बात का नहीं है कि पानी कितना उपलब्ध है। यह इस बात से भी जुड़ा है कि पानी कब, कहां और कैसे इस्तेमाल हो रहा है और नदी में प्राकृतिक प्रवाह तथा पानी की गुणवत्ता कैसी है।
आगे की चुनौती यह है कि बाढ़ के समय अतिरिक्त पानी को बेहतर तरीके से संभाला जाए, पानी की कमी वाले क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ाई जाए और नदी, भूजल तथा तटीय पर्यावरण को एक साथ देखा जाए।
केंद्रीय जल आयोग (CWC), Water and Related Statistics, 2005.
केंद्रीय जल आयोग (CWC), History of Irrigation Development in Andhra Pradesh.
केंद्रीय जल आयोग (CWC), Reassessment of Water Availability in Basins Using Spatial Inputs, 2018.
केंद्रीय जल आयोग (CWC), Vamsadhara Basin / Vamsadhara Water Disputes Tribunal Report.
केंद्रीय जल आयोग (CWC), Hydrological Data (Unclassified) Book, 2018.
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