गंगा, यमुना, घाघरा, रामगंगा, शारदा, गोमती, राप्ती, गंडक, चंबल, बेतवा, केन और सोन जैसी नदियां उत्तर प्रदेश राज्य की कृषि, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और जैव विविधता की आधारशिला हैं।
यूपी भारत के सबसे बड़े नदी प्रदेशों में से एक है, जहां 31,200 किमी तक नदियां व नहरें फैली हुई हैं।
यहां नदियां केवल जलधाराएं नहीं हैं, बल्कि उनसे जुड़ी आर्द्रभूमियां भी राज्य की पारिस्थितिकी का केंद्रीय हिस्सा हैं।
अधिकांश नदियां हिमालय से निकलती हैं, लेकिन आगे जाकर कहां मिलती हैं, यह इस लेख में पढ़ें।
उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है और इसकी जल व्यवस्था मुख्यतः नदियों पर आधारित है। राज्य का अधिकांश भूभाग गंगा नदी के विशाल मैदान में स्थित है। इस मैदान को हिमालय और विंध्य क्षेत्र से आने वाली नदियों ने हजारों वर्षों में आकार दिया है। गंगा, यमुना, घाघरा, रामगंगा, शारदा, गोमती, राप्ती, गंडक, चंबल, बेतवा, केन और सोन जैसी नदियां राज्य की कृषि, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और जैव विविधता की आधारशिला हैं।
उत्तर प्रदेश में लगभग सभी प्रमुख नदियां अंततः गंगा नदी तंत्र का हिस्सा बन जाती हैं। यही कारण है कि राज्य को भारत के सबसे प्रमुख नदी प्रदेशों में गिना जाता है।
हालांकि नदियों की यह समृद्धि आज कई चुनौतियों का सामना कर रही है। एक ओर पूर्वांचल के जिले हर साल बाढ़ की मार झेलते हैं, तो दूसरी ओर बुंदेलखंड सूखे और जल संकट से जूझता है। कई नदियां प्रदूषण, अतिक्रमण और घटते प्रवाह के कारण संकट में हैं।
नीचे उत्तर प्रदेश की प्रमुख नदियों, उनके उद्गम स्थल, अनुमानित लंबाई और वे किस नदी में मिलती हैं, इसकी संक्षिप्त जानकारी दी गई है। इस सूची का मुख्य आधार एटलस ऑफ रिवर इन उत्तर प्रदेश है।
| क्रम सं. | नदी | उद्गम स्थल | अनुमानित लंबाई | उत्तर प्रदेश के प्रमुख क्षेत्र/जिले | किस नदी में मिलती है |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | गंगा | गंगोत्री हिमनद, उत्तराखंड | 2525 किमी | बिजनौर, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, शेरपुर (बलिया), गाजीपुर, सैदपुर (गाजीपुर), वाराणसी, मिर्ज़ापुर, सिरसा (प्रयागराज), प्रयागराज, श्रृंगवेरपुर (प्रयागराज), कालाकांकर (प्रतापगढ़), डलमऊ (रायबरेली), बक्सर (उन्नाव), कानपुर, बिठूर (कानपुर), फतेहगढ़ (फर्रुखाबाद), कछला घाट (बदायूं), अनूपशहर (बुलंदशहर), गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़) | बंगाल की खाड़ी |
| 2 | यमुना | यमुनोत्री हिमनद, उत्तराखंड | 1376 किमी | मथुरा, आगरा, इटावा, जालौन, हमीरपुर, प्रयागराज | गंगा |
| 3 | घाघरा (सरयू) | तिब्बत-नेपाल हिमालय | लगभग 1080 किमी | बहराइच, गोंडा, अयोध्या, बलिया | गंगा |
| 4 | रामगंगा | दूधातोली पर्वतमाला, उत्तराखंड | लगभग 640 किमी | बिजनौर, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहाँपुर | गंगा |
| 5 | गोमती | गोमत ताल, पिलिभीत | लगभग 960 किमी | लखनऊ, सीतापुर, सुल्तानपुर, जौनपुर | गंगा |
| 6 | शारदा | मिलम हिमनद, उत्तराखंड | लगभग 500 किमी | लखीमपुर खीरी, बहराइच | घाघरा |
| 7 | राप्ती | नेपाल हिमालय | लगभग 640 किमी | श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर | घाघरा |
| 8 | गंडक | नेपाल हिमालय | लगभग 765 किमी | महाराजगंज, कुशीनगर | गंगा |
| 9 | चंबल | जनापाव पहाड़ी, मध्य प्रदेश | 1024 किमी | इटावा | यमुना |
| 10 | बेतवा | विंध्य क्षेत्र, मध्य प्रदेश | 590 किमी | झांसी, जालौन, हमीरपुर | यमुना |
| 11 | केन | मध्य प्रदेश | 427 किमी | बांदा, चित्रकूट | यमुना |
| 12 | सोन | अमरकंटक, मध्य प्रदेश | 784 किमी | सोनभद्र | गंगा |
| 13 | सई | हरदोई क्षेत्र, उत्तर प्रदेश | लगभग 715 किमी | रायबरेली, प्रतापगढ़, जौनपुर | गोमती |
| 14 | वरुणा | वाराणसी क्षेत्र | लगभग 100 किमी | वाराणसी | गंगा |
| 15 | तमसा (टोंस) | कैमूर क्षेत्र | लगभग 264 किमी | अयोध्या, अंबेडकरनगर, मऊ, बलिया | गंगा |
| 16 | कुआनो | गोण्डा-तराई क्षेत्र | लगभग 130 किमी | बस्ती, संत कबीर नगर, गोरखपुर | घाघरा |
| 17 | रिहंद | छत्तीसगढ़–मध्य भारत उच्चभूमि | लगभग 600 किमी | सोनभद्र | सोन |
| 18 | धसान | मध्य प्रदेश | लगभग 365 किमी | ललितपुर, झांसी | बेतवा |
| 19 | रोहिणी | नेपाल तराई | लगभग 160 किमी | महाराजगंज, गोरखपुर | राप्ती |
| 20 | काली (शारदा तंत्र) | कुमाऊँ हिमालय | लगभग 350 किमी | पीलीभीत-तराई जलग्रहण क्षेत्र से संबंधित | शारदा |
उत्तर प्रदेश का अधिकांश भूभाग गंगा नदी तंत्र के अंतर्गत आता है, लेकिन राज्य की जल व्यवस्था को समझने के लिए इसके प्रमुख नदी बेसिनों को जानना आवश्यक है। प्रत्येक बेसिन का अपना भौगोलिक, कृषि और सामाजिक महत्व है। इस सूची को India-Wris के आधार पर तैयार किया गया है।
| क्रम सं. | नदी बेसिन | प्रमुख नदियां | प्रमुख क्षेत्र | विशेष महत्व |
|---|---|---|---|---|
| 1 | गंगा बेसिन | गंगा, रामगंगा, गोमती, सई, तमसा | पश्चिमी, मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश | राज्य का सबसे बड़ा नदी बेसिन, सिंचाई और आबादी का प्रमुख आधार |
| 2 | घाघरा-शारदा-राप्ती बेसिन | घाघरा, शारदा, राप्ती | बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, कुशीनगर | अत्यंत उपजाऊ क्षेत्र, लेकिन नियमित बाढ़ की चुनौती |
| 3 | गंडक बेसिन | गंडक और इसकी सहायक नदियाँ | कुशीनगर, महाराजगंज और आसपास का क्षेत्र | कृषि उत्पादन और भूजल पुनर्भरण में महत्वपूर्ण |
| 4 | यमुना-चंबल-बेतवा-केन बेसिन | यमुना, चंबल, बेतवा, केन | आगरा, इटावा, झांसी, जालौन, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट | बुंदेलखंड और दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रमुख नदी तंत्र |
| 5 | सोन-रिहंद बेसिन | सोन, रिहंद, कनहर | सोनभद्र, मिर्जापुर | जलाशयों, ऊर्जा उत्पादन और खनन गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण |
उत्तर प्रदेश की नदी व्यवस्था की विविधता इन्हीं बेसिनों से निर्मित होती है। एक ओर पूर्वी और तराई क्षेत्र बाढ़ की चुनौती का सामना करते हैं, वहीं दूसरी ओर बुंदेलखंड और दक्षिणी क्षेत्र जल संकट और सूखे जैसी समस्याओं से जूझते हैं।
उत्तर प्रदेश की नदियां केवल जलधाराएं नहीं हैं, बल्कि उनसे जुड़ी आर्द्रभूमियां (वेटलैंड) भी राज्य की पारिस्थितिकी का केंद्रीय हिस्सा हैं। ये वेटलैंड बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण, जैव विविधता संरक्षण और प्रवासी पक्षियों के आवास के रूप में उल्लेखनीय भूमिका निभाती हैं।
राज्य की अधिकांश प्रमुख आर्द्रभूमियां गंगा, यमुना, घाघरा, राप्ती और गोमती जैसे नदी तंत्रों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं।
| क्रम सं. | आर्द्रभूमि / वेटलैंड | जिला | संबंधित नदी तंत्र | प्रमुख विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| 1 | बखीरा झील | संत कबीर नगर | राप्ती नदी तंत्र | पूर्वी उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी प्राकृतिक बाढ़भूमि आर्द्रभूमियों में से एक, प्रवासी पक्षियों का महत्वपूर्ण आवास |
| 2 | समसपुर पक्षी विहार | रायबरेली | गोमती-सई नदी तंत्र | रामसर स्थल, पक्षी विविधता के लिए प्रसिद्ध |
| 3 | नवाबगंज पक्षी विहार (शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार) | उन्नाव | गंगा नदी तंत्र | प्रवासी पक्षियों और आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण |
| 4 | सुर सरोवर (कीथम झील) | आगरा | यमुना नदी तंत्र | यमुना बेसिन की प्रमुख मानव निर्मित आर्द्रभूमि |
| 5 | पार्वती अरगा पक्षी विहार | गोंडा | घाघरा नदी तंत्र | तराई क्षेत्र की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि और पक्षी आवास |
| 6 | संडी पक्षी विहार | हरदोई | गंगा-रामगंगा नदी तंत्र | रामसर स्थल, जलपक्षियों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण |
| 7 | लख बहोसी पक्षी विहार | कन्नौज | गंगा नदी तंत्र | उत्तर भारत की प्रमुख प्राकृतिक झील-आधारित आर्द्रभूमियों में से एक |
| 8 | ओखला पक्षी विहार | गौतम बुद्ध नगर | यमुना नदी तंत्र | यमुना पर स्थित महत्वपूर्ण शहरी आर्द्रभूमि और रामसर स्थल |
| 9 | समन पक्षी विहार | मैनपुरी | यमुना-चंबल तंत्र | प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि |
| 10 | सरसई नावर झील | इटावा | यमुना-चंबल तंत्र | रामसर स्थल, संकटग्रस्त पक्षी प्रजातियों का आवास |
उत्तर प्रदेश की नदी व्यवस्था मुख्यतः गंगा नदी तंत्र पर आधारित है। राज्य की कृषि, पेयजल आपूर्ति, सिंचाई, जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत में कुछ नदियों की भूमिका प्रमुख रही है।
| क्रम सं. | नदी | प्रमुख क्षेत्र | विशेष महत्व |
|---|---|---|---|
| 1 | गंगा | मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश | राज्य की जीवनरेखा, सिंचाई और सांस्कृतिक महत्व |
| 2 | यमुना | पश्चिमी उत्तर प्रदेश | प्रमुख सहायक नदियों के साथ बड़ा नदी तंत्र |
| 3 | घाघरा (सरयू) | पूर्वांचल | उच्च जल प्रवाह और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र |
| 4 | गोमती | मध्य उत्तर प्रदेश | पूरी तरह उत्तर प्रदेश में बहने वाली प्रमुख नदी |
| 5 | शारदा | तराई क्षेत्र | सिंचाई और भूजल पुनर्भरण में महत्वपूर्ण |
| 6 | राप्ती | पूर्वी उत्तर प्रदेश | बाढ़ और कृषि दोनों के लिए महत्वपूर्ण |
| 7 | गंडक | पूर्वी उत्तर प्रदेश | उर्वर भूमि और कृषि उत्पादन में योगदान |
| 8 | बेतवा | बुंदेलखंड | क्षेत्र की प्रमुख सिंचाई नदी |
| 9 | केन | बुंदेलखंड | अपेक्षाकृत स्वच्छ नदी, नदी जोड़ो परियोजना से जुड़ी |
| 10 | सोन | दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश | ऊर्जा उत्पादन और जलाशय प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण |
| 11 | पहूज नदी | झांसी, बुंदेलखंड | सिंध नदी की सहायक नदी |
ये नदियां मिलकर उत्तर प्रदेश की जल, कृषि और पारिस्थितिक सुरक्षा की आधारशिला बनाती हैं। राज्य की अधिकांश आबादी और आर्थिक गतिविधियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन्हीं नदी तंत्रों पर निर्भर हैं।
नदियों के जल का उपयोग और प्रबंधन करने के लिए उत्तर प्रदेश में कई महत्वपूर्ण बांध और जलाशय विकसित किए गए हैं।
| क्रम सं | बांध | नदी | जिला | प्रमुख उद्देश्य |
|---|---|---|---|---|
| 1 | रिहंद | रिहंद | सोनभद्र | ऊर्जा एवं जल भंडारण |
| 2 | माताटीला | बेतवा | ललितपुर | सिंचाई |
| 3 | राजघाट | बेतवा | ललितपुर | सिंचाई |
| 4 | शारदा बैराज | शारदा | लखीमपुर खीरी | सिंचाई |
| 5 | नरौरा बैराज | गंगा | बुलंदशहर | सिंचाई एवं जल प्रबंधन |
उत्तर प्रदेश का पूर्वी और तराई क्षेत्र हर वर्ष बाढ़ की चुनौती का सामना करता है। नेपाल से आने वाली नदियों में मानसून के दौरान जलस्तर बढ़ने से लाखों लोग प्रभावित होते हैं और कृषि, आवास तथा बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचता है।
| क्रम सं. | नदी/नदी तंत्र | प्रमुख क्षेत्र | बाढ़ की स्थिति |
|---|---|---|---|
| 1 | घाघरा (सरयू) | बहराइच, गोंडा, अयोध्या, बलिया | उत्तर प्रदेश की सबसे बाढ़ प्रभावित नदियों में से एक |
| 2 | राप्ती | श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर | मानसून में बार-बार बाढ़ की स्थिति |
| 3 | शारदा | लखीमपुर खीरी, बहराइच | तराई क्षेत्र में व्यापक जलभराव और बाढ़ |
| 4 | गंडक | कुशीनगर, महाराजगंज | नेपाल से आने वाले अतिरिक्त जल के कारण बाढ़ |
| 5 | रोहिणी | गोरखपुर, महाराजगंज | स्थानीय बाढ़ और जलभराव की समस्या |
| 6 | छोटी गंडक | देवरिया, कुशीनगर | निचले क्षेत्रों में नियमित बाढ़ का प्रभाव |
| 7 | घाघरा-राप्ती-शारदा नदी तंत्र | बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, कुशीनगर | राज्य का प्रमुख बाढ़ प्रभावित क्षेत्र |
| 8 | कुआनो | बस्ती, संत कबीर नगर, गोरखपुर | मानसूनी बाढ़ और नदी तट कटाव |
| 9 | गेरुआ | बहराइच | मानसूनी बाढ़ और तटीय कटाव |
पूर्वी उत्तर प्रदेश में बाढ़ केवल एक मौसमी आपदा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है। नदी तटों पर बढ़ता दबाव, बदलते वर्षा पैटर्न और सीमापार जल प्रबंधन से जुड़ी समस्याएँ इस चुनौती को और जटिल बनाती हैं।
उत्तर प्रदेश के दक्षिणी हिस्से, विशेषकर बुंदेलखंड क्षेत्र में, प्रमुख नदियों की मौजूदगी के बावजूद जल संकट एक गंभीर समस्या बना हुआ है। अनियमित वर्षा, भूजल के अत्यधिक दोहन और पारंपरिक जल स्रोतों के क्षरण के कारण यह क्षेत्र बार-बार सूखे जैसी परिस्थितियों का सामना करता है।
| क्रम सं. | नदी/नदी तंत्र | प्रमुख क्षेत्र | सूखने के प्रमुख कारण | जल संकट की स्थिति |
|---|---|---|---|---|
| 1 | बेतवा | झांसी, जालौन, हमीरपुर | कम वर्षा, भूजल दोहन, जलाशयों में घटता जल | वर्षा पर बढ़ती निर्भरता, घटता जलस्तर |
| 2 | केन | बांदा, चित्रकूट | अनियमित मानसून, सीमित जल भंडारण | कम वर्षा और मौसमी जल उपलब्धता की समस्या |
| 3 | यमुना | हमीरपुर, बांदा, जालौन | सिंचाई की बढ़ती मांग, घटता प्रवाह | सिंचाई और पेयजल पर बढ़ता दबाव |
| 4 | धसान | ललितपुर, झांसी | वर्षा की कमी, जल संरक्षण संरचनाओं का अभाव | गर्मियों में प्रवाह में कमी |
| 5 | जामनी | ललितपुर, झांसी | कम वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट | सीमित जल उपलब्धता और सूखे का प्रभाव |
| 6 | पहूज | झांसी क्षेत्र | जलग्रहण क्षेत्र का क्षरण, अनियमित वर्षा | घटते प्रवाह और जलाशयों पर निर्भरता |
| 7 | बुंदेलखंड नदी तंत्र (समग्र) | झांसी, ललितपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन | आवर्ती सूखा, भूजल संकट, जल संचयन की कमी | आवर्ती सूखा, भूजल संकट और जल असुरक्षा |
बुंदेलखंड का जल संकट केवल नदियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भूजल, तालाबों और स्थानीय जल संरचनाओं से भी जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में नदी संरक्षण के साथ-साथ जल संचयन और जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन को भी निर्णायक माना जाता है।
उत्तर प्रदेश की प्रदूषित, संकटग्रस्त और सिकुड़ती नदियां
उत्तर प्रदेश की कई नदियां आज प्रदूषण, अतिक्रमण, अवैध खनन, शहरी विस्तार और घटते प्राकृतिक प्रवाह जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही हैं। औद्योगिक और घरेलू अपशिष्ट ने कई नदियों की जल गुणवत्ता को प्रभावित किया है, जबकि कुछ छोटी नदियों का नदी मार्ग और जलग्रहण क्षेत्र लगातार सिकुड़ रहा है। नीचे ऐसी प्रमुख नदियों की सूची दी गई है, जिनकी वर्तमान स्थिति राज्य की नदी संरक्षण चुनौतियों को दर्शाती है।
| क्रम सं. | नदी | प्रमुख क्षेत्र | वर्तमान स्थिति / प्रमुख समस्या |
|---|---|---|---|
| 1 | हिंडन | सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा | गंभीर औद्योगिक और सीवेज प्रदूषण |
| 2 | काली (पश्चिमी) | मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत | औद्योगिक प्रदूषण और दूषित जल |
| 3 | कृष्णी | शामली, मुजफ्फरनगर | प्रदूषण और घटती जल गुणवत्ता |
| 4 | गोमती | लखनऊ, सुल्तानपुर, जौनपुर | सीवेज, शहरी दबाव और घटता प्रवाह |
| 5 | सई | रायबरेली, प्रतापगढ़, जौनपुर | प्रदूषण और सिकुड़ती जलधारा |
| 6 | सरायन | सीतापुर, हरदोई | अतिक्रमण और मौसमीकरण |
| 7 | कठिना | सीतापुर, लखीमपुर खीरी | घटता जलस्तर और प्रवाह |
| 8 | चौका | लखीमपुर खीरी | जलग्रहण क्षेत्र पर बढ़ता दबाव |
| 9 | सुहेली | लखीमपुर खीरी | प्रवाह में कमी और पारिस्थितिक दबाव |
| 10 | वरुणा | वाराणसी | अतिक्रमण और शहरी प्रदूषण |
| 11 | अस्सी | वाराणसी | शहरीकरण और प्राकृतिक धारा का क्षरण |
| 12 | आमी | गोरखपुर, संत कबीर नगर | औद्योगिक एवं घरेलू प्रदूषण |
| 13 | रोहिणी | महाराजगंज, गोरखपुर | अतिक्रमण, प्रदूषण और बाढ़ दबाव |
| 14 | छोटी गंडक | देवरिया, कुशीनगर | प्रदूषण और बाढ़ मैदानों पर दबाव |
| 15 | कुआनो | बस्ती, गोंडा, संत कबीर नगर | प्रदूषण और नदी तटों पर दबाव |
| 16 | मनोरमा | गोंडा, बस्ती | सिकुड़ता प्रवाह और अतिक्रमण |
| 17 | तमसा (टोंस) | अयोध्या, अंबेडकरनगर, मऊ | घटता प्रवाह और प्रदूषण |
| 18 | मगई | जौनपुर, गाजीपुर | मौसमीकरण और जलधारा में कमी |
| 19 | बिसुही | जौनपुर, भदोही | सिकुड़ती धारा और स्थानीय प्रदूषण |
| 20 | पहूज | झांसी | घटता प्रवाह, अतिक्रमण और जल संकट |
| 21 | धसान | ललितपुर, झांसी | जल संकट और मौसमी प्रवाह |
| 22 | जामनी | ललितपुर, झांसी | घटता प्रवाह और सूखे का प्रभाव |
| 23 | अरिल | बरेली | सिकुड़ता नदी मार्ग और अतिक्रमण |
| 24 | बहगुल | पीलीभीत, शाहजहाँपुर | प्रवाह में कमी और तटीय दबाव |
| 25 | देवहा | पीलीभीत | जलग्रहण क्षेत्र में बदलाव |
| 26 | पांडु | कानपुर | शहरी प्रदूषण और सीवेज |
| 27 | कर्णावती (करवन) | प्रयागराज क्षेत्र | मौसमीकरण और अतिक्रमण |
| 28 | सुसर खदेरी | प्रयागराज | शहरी विस्तार और प्रदूषण |
| 29 | बकुलाही | प्रतापगढ़, कौशांबी | घटता प्रवाह और अतिक्रमण |
| 30 | बेलन | मिर्जापुर, प्रयागराज | रेत खनन और प्रवाह में कमी |
उत्तर प्रदेश की नदियों से जुड़े प्रमुख जल संरक्षण और पुनर्जीवन कार्यक्रम
उत्तर प्रदेश की कई नदियां प्रदूषण, घटते प्रवाह और जल संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। इन समस्याओं से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने विभिन्न जल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन और भूजल प्रबंधन कार्यक्रम शुरू किए हैं।
| क्रम सं. | अभियान / योजना | प्रमुख नदी / क्षेत्र | उद्देश्य |
|---|---|---|---|
| 1 | नमामि गंगे | गंगा | प्रदूषण नियंत्रण, अविरल और निर्मल गंगा |
| 2 | राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) | गंगा, यमुना, रामगंगा, गोमती | गंगा बेसिन की सहायक नदियों का संरक्षण |
| 3 | गोमती पुनर्जीवन अभियान | गोमती | नदी की सफाई और पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखना |
| 4 | हिंडन पुनर्जीवन पहल | हिंडन | औद्योगिक प्रदूषण कम करना, जल गुणवत्ता सुधारना |
| 5 | अटल भूजल योजना | बुंदेलखंड और जल संकट वाले क्षेत्र | भूजल संरक्षण और जल उपयोग प्रबंधन |
| 6 | जल शक्ति अभियान | राज्य के सभी नदी बेसिन | वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण |
| 7 | अमृत सरोवर योजना | ग्रामीण जलग्रहण क्षेत्र | तालाबों और जलाशयों का पुनर्जीवन |
| 8 | केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना | केन और बेतवा | बुंदेलखंड में जल उपलब्धता बढ़ाना |
| 9 | रिवर फ्रंट एवं नदी तट विकास परियोजनाएं | गोमती, गंगा, वरुणा | नदी तट संरक्षण और शहरी नदी प्रबंधन |
| 10 | कैच द रेन अभियान | राज्यव्यापी | वर्षा जल संचयन और स्थानीय जल स्रोतों का संरक्षण |
गंगा, यमुना, घाघरा, गोमती और शारदा जैसी नदियां उत्तर प्रदेश की कृषि, संस्कृति और अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं। राज्य का अधिकांश भूभाग गंगा नदी तंत्र के अंतर्गत आता है, जिससे यह देश के सबसे महत्वपूर्ण नदी प्रदेशों में शामिल होता है।
हालांकि बाढ़, सूखा, प्रदूषण, अतिक्रमण और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियाँ इन नदियों पर बढ़ता दबाव बना रही हैं। भविष्य की जल सुरक्षा के लिए नदी संरक्षण, भूजल प्रबंधन और जलग्रहण क्षेत्रों के पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होगा।
उत्तर प्रदेश की नदियों से जुड़े रोचक तथ्य
उत्तर प्रदेश का अधिकांश भूभाग गंगा नदी बेसिन में स्थित है, जो दुनिया के सबसे बड़े नदी तंत्रों में से एक है।
प्रयागराज में गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम को भारत के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में गिना जाता है।
घाघरा (सरयू) उत्तर प्रदेश की सबसे अधिक जल वहन करने वाली नदियों में शामिल है और पूर्वांचल की कृषि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
गोमती उत्तर प्रदेश की उन प्रमुख नदियों में है जिसका उद्गम और अधिकांश प्रवाह राज्य की सीमाओं के भीतर ही है।
बुंदेलखंड की केन और बेतवा नदियों को जोड़ने वाली केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत की पहली नदी जोड़ो परियोजना मानी जाती है।
रिहंद बांध और गोविंद बल्लभ पंत सागर जलाशय उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण जलाशयों में गिने जाते हैं।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिले हर वर्ष घाघरा, राप्ती और शारदा नदियों की बाढ़ से प्रभावित होते हैं, जबकि बुंदेलखंड क्षेत्र जल संकट का सामना करता है।
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