गंगा, यमुना, घाघरा, रामगंगा, शारदा, गोमती, राप्ती, गंडक, चंबल, बेतवा, केन और सोन जैसी नदियां उत्तर प्रदेश राज्य की कृषि, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और जैव विविधता की आधारशिला हैं।

 
नदी और तालाब

उत्तर प्रदेश में नदियों की सूची : गंगा-यमुना से लेकर टोंस, अरिल, सोन तक; नदी बेसिन और वेटलैंड भी

उत्तर प्रदेश की प्रमुख नदियों, सहायक नदियों, नदी बेसिनों, बाढ़-सूखा प्रभावित क्षेत्रों और बढ़ते जल संकट का एक समग्र परिचय।

Author : डॉ. कुमारी रोहिणी
  • यूपी भारत के सबसे बड़े नदी प्रदेशों में से एक है, जहां 31,200 किमी तक नदियां व नहरें फैली हुई हैं।

  • यहां नदियां केवल जलधाराएं नहीं हैं, बल्कि उनसे जुड़ी आर्द्रभूमियां भी राज्य की पारिस्थितिकी का केंद्रीय हिस्सा हैं।

  • अधिकांश नदियां हिमालय से निकलती हैं, लेकिन आगे जाकर कहां मिलती हैं, यह इस लेख में पढ़ें।

उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है और इसकी जल व्यवस्था मुख्यतः नदियों पर आधारित है। राज्य का अधिकांश भूभाग गंगा नदी के विशाल मैदान में स्थित है। इस मैदान को हिमालय और विंध्य क्षेत्र से आने वाली नदियों ने हजारों वर्षों में आकार दिया है। गंगा, यमुना, घाघरा, रामगंगा, शारदा, गोमती, राप्ती, गंडक, चंबल, बेतवा, केन और सोन जैसी नदियां राज्य की कृषि, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और जैव विविधता की आधारशिला हैं।

उत्तर प्रदेश में लगभग सभी प्रमुख नदियां अंततः गंगा नदी तंत्र का हिस्सा बन जाती हैं। यही कारण है कि राज्य को भारत के सबसे प्रमुख नदी प्रदेशों में गिना जाता है।

हालांकि नदियों की यह समृद्धि आज कई चुनौतियों का सामना कर रही है। एक ओर पूर्वांचल के जिले हर साल बाढ़ की मार झेलते हैं, तो दूसरी ओर बुंदेलखंड सूखे और जल संकट से जूझता है। कई नदियां प्रदूषण, अतिक्रमण और घटते प्रवाह के कारण संकट में हैं।

उत्तर प्रदेश की प्रमुख नदियां: उद्गम, लंबाई और सहायक नदियां

नीचे उत्तर प्रदेश की प्रमुख नदियों, उनके उद्गम स्थल, अनुमानित लंबाई और वे किस नदी में मिलती हैं, इसकी संक्षिप्त जानकारी दी गई है। इस सूची का मुख्य आधार एटलस ऑफ रिवर इन उत्तर प्रदेश है।

क्रम सं.नदीउद्गम स्थलअनुमानित लंबाईउत्तर प्रदेश के प्रमुख क्षेत्र/जिलेकिस नदी में मिलती है
1गंगागंगोत्री हिमनद, उत्तराखंड2525 किमीबिजनौर, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, शेरपुर (बलिया), गाजीपुर, सैदपुर (गाजीपुर), वाराणसी, मिर्ज़ापुर, सिरसा (प्रयागराज), प्रयागराज, श्रृंगवेरपुर (प्रयागराज), कालाकांकर (प्रतापगढ़), डलमऊ (रायबरेली), बक्सर (उन्नाव), कानपुर, बिठूर (कानपुर), फतेहगढ़ (फर्रुखाबाद), कछला घाट (बदायूं), अनूपशहर (बुलंदशहर), गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़)बंगाल की खाड़ी
2यमुनायमुनोत्री हिमनद, उत्तराखंड1376 किमीमथुरा, आगरा, इटावा, जालौन, हमीरपुर, प्रयागराजगंगा
3घाघरा (सरयू)तिब्बत-नेपाल हिमालयलगभग 1080 किमीबहराइच, गोंडा, अयोध्या, बलियागंगा
4रामगंगादूधातोली पर्वतमाला, उत्तराखंडलगभग 640 किमीबिजनौर, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहाँपुरगंगा
5गोमतीगोमत ताल, पिलिभीतलगभग 960 किमीलखनऊ, सीतापुर, सुल्तानपुर, जौनपुरगंगा
6शारदामिलम हिमनद, उत्तराखंडलगभग 500 किमीलखीमपुर खीरी, बहराइचघाघरा
7राप्तीनेपाल हिमालयलगभग 640 किमीश्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, गोरखपुरघाघरा
8गंडकनेपाल हिमालयलगभग 765 किमीमहाराजगंज, कुशीनगरगंगा
9चंबलजनापाव पहाड़ी, मध्य प्रदेश1024 किमीइटावायमुना
10बेतवाविंध्य क्षेत्र, मध्य प्रदेश590 किमीझांसी, जालौन, हमीरपुरयमुना
11केनमध्य प्रदेश427 किमीबांदा, चित्रकूटयमुना
12सोनअमरकंटक, मध्य प्रदेश784 किमीसोनभद्रगंगा
13सईहरदोई क्षेत्र, उत्तर प्रदेशलगभग 715 किमीरायबरेली, प्रतापगढ़, जौनपुरगोमती
14वरुणावाराणसी क्षेत्रलगभग 100 किमीवाराणसीगंगा
15तमसा (टोंस)कैमूर क्षेत्रलगभग 264 किमीअयोध्या, अंबेडकरनगर, मऊ, बलियागंगा
16कुआनोगोण्डा-तराई क्षेत्रलगभग 130 किमीबस्ती, संत कबीर नगर, गोरखपुरघाघरा
17रिहंदछत्तीसगढ़–मध्य भारत उच्चभूमिलगभग 600 किमीसोनभद्रसोन
18धसानमध्य प्रदेशलगभग 365 किमीललितपुर, झांसीबेतवा
19रोहिणीनेपाल तराईलगभग 160 किमीमहाराजगंज, गोरखपुरराप्ती
20काली (शारदा तंत्र)कुमाऊँ हिमालयलगभग 350 किमीपीलीभीत-तराई जलग्रहण क्षेत्र से संबंधितशारदा

उत्तर प्रदेश के प्रमुख नदी बेसिन और उनका क्षेत्रीय प्रभाव

उत्तर प्रदेश का अधिकांश भूभाग गंगा नदी तंत्र के अंतर्गत आता है, लेकिन राज्य की जल व्यवस्था को समझने के लिए इसके प्रमुख नदी बेसिनों को जानना आवश्यक है। प्रत्येक बेसिन का अपना भौगोलिक, कृषि और सामाजिक महत्व है। इस सूची को India-Wris के आधार पर तैयार किया गया है।

क्रम सं.नदी बेसिनप्रमुख नदियांप्रमुख क्षेत्रविशेष महत्व
1गंगा बेसिनगंगा, रामगंगा, गोमती, सई, तमसापश्चिमी, मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेशराज्य का सबसे बड़ा नदी बेसिन, सिंचाई और आबादी का प्रमुख आधार
2घाघरा-शारदा-राप्ती बेसिनघाघरा, शारदा, राप्तीबहराइच, श्रावस्ती, गोंडा, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, कुशीनगरअत्यंत उपजाऊ क्षेत्र, लेकिन नियमित बाढ़ की चुनौती
3गंडक बेसिनगंडक और इसकी सहायक नदियाँकुशीनगर, महाराजगंज और आसपास का क्षेत्रकृषि उत्पादन और भूजल पुनर्भरण में महत्वपूर्ण
4यमुना-चंबल-बेतवा-केन बेसिनयमुना, चंबल, बेतवा, केनआगरा, इटावा, झांसी, जालौन, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूटबुंदेलखंड और दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रमुख नदी तंत्र
5सोन-रिहंद बेसिनसोन, रिहंद, कनहरसोनभद्र, मिर्जापुरजलाशयों, ऊर्जा उत्पादन और खनन गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण

उत्तर प्रदेश की नदी व्यवस्था की विविधता इन्हीं बेसिनों से निर्मित होती है। एक ओर पूर्वी और तराई क्षेत्र बाढ़ की चुनौती का सामना करते हैं, वहीं दूसरी ओर बुंदेलखंड और दक्षिणी क्षेत्र जल संकट और सूखे जैसी समस्याओं से जूझते हैं।

उत्तर प्रदेश की प्रमुख आर्द्रभूमियां और नदी तंत्र

उत्तर प्रदेश की नदियां केवल जलधाराएं नहीं हैं, बल्कि उनसे जुड़ी आर्द्रभूमियां (वेटलैंड) भी राज्य की पारिस्थितिकी का केंद्रीय हिस्सा हैं। ये वेटलैंड बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण, जैव विविधता संरक्षण और प्रवासी पक्षियों के आवास के रूप में उल्लेखनीय भूमिका निभाती हैं।

राज्य की अधिकांश प्रमुख आर्द्रभूमियां गंगा, यमुना, घाघरा, राप्ती और गोमती जैसे नदी तंत्रों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं।

क्रम सं.आर्द्रभूमि / वेटलैंडजिलासंबंधित नदी तंत्रप्रमुख विशेषता
1बखीरा झीलसंत कबीर नगरराप्ती नदी तंत्रपूर्वी उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी प्राकृतिक बाढ़भूमि आर्द्रभूमियों में से एक, प्रवासी पक्षियों का महत्वपूर्ण आवास
2समसपुर पक्षी विहाररायबरेलीगोमती-सई नदी तंत्ररामसर स्थल, पक्षी विविधता के लिए प्रसिद्ध
3नवाबगंज पक्षी विहार (शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार)उन्नावगंगा नदी तंत्रप्रवासी पक्षियों और आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण
4सुर सरोवर (कीथम झील)आगरायमुना नदी तंत्रयमुना बेसिन की प्रमुख मानव निर्मित आर्द्रभूमि
5पार्वती अरगा पक्षी विहारगोंडाघाघरा नदी तंत्रतराई क्षेत्र की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि और पक्षी आवास
6संडी पक्षी विहारहरदोईगंगा-रामगंगा नदी तंत्ररामसर स्थल, जलपक्षियों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण
7लख बहोसी पक्षी विहारकन्नौजगंगा नदी तंत्रउत्तर भारत की प्रमुख प्राकृतिक झील-आधारित आर्द्रभूमियों में से एक
8ओखला पक्षी विहारगौतम बुद्ध नगरयमुना नदी तंत्रयमुना पर स्थित महत्वपूर्ण शहरी आर्द्रभूमि और रामसर स्थल
9समन पक्षी विहारमैनपुरीयमुना-चंबल तंत्रप्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि
10सरसई नावर झीलइटावायमुना-चंबल तंत्ररामसर स्थल, संकटग्रस्त पक्षी प्रजातियों का आवास

उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण नदियां

उत्तर प्रदेश की नदी व्यवस्था मुख्यतः गंगा नदी तंत्र पर आधारित है। राज्य की कृषि, पेयजल आपूर्ति, सिंचाई, जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत में कुछ नदियों की भूमिका प्रमुख रही है।

क्रम सं.नदीप्रमुख क्षेत्रविशेष महत्व
1गंगामध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेशराज्य की जीवनरेखा, सिंचाई और सांस्कृतिक महत्व
2यमुनापश्चिमी उत्तर प्रदेशप्रमुख सहायक नदियों के साथ बड़ा नदी तंत्र
3घाघरा (सरयू)पूर्वांचलउच्च जल प्रवाह और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र
4गोमतीमध्य उत्तर प्रदेशपूरी तरह उत्तर प्रदेश में बहने वाली प्रमुख नदी
5शारदातराई क्षेत्रसिंचाई और भूजल पुनर्भरण में महत्वपूर्ण
6राप्तीपूर्वी उत्तर प्रदेशबाढ़ और कृषि दोनों के लिए महत्वपूर्ण
7गंडकपूर्वी उत्तर प्रदेशउर्वर भूमि और कृषि उत्पादन में योगदान
8बेतवाबुंदेलखंडक्षेत्र की प्रमुख सिंचाई नदी
9केनबुंदेलखंडअपेक्षाकृत स्वच्छ नदी, नदी जोड़ो परियोजना से जुड़ी
10सोनदक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेशऊर्जा उत्पादन और जलाशय प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण
11पहूज नदीझांसी, बुंदेलखंड सिंध नदी की सहायक नदी

ये नदियां मिलकर उत्तर प्रदेश की जल, कृषि और पारिस्थितिक सुरक्षा की आधारशिला बनाती हैं। राज्य की अधिकांश आबादी और आर्थिक गतिविधियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन्हीं नदी तंत्रों पर निर्भर हैं।

उत्तर प्रदेश के प्रमुख बांध और जलाशय

नदियों के जल का उपयोग और प्रबंधन करने के लिए उत्तर प्रदेश में कई महत्वपूर्ण बांध और जलाशय विकसित किए गए हैं।

क्रम संबांधनदीजिलाप्रमुख उद्देश्य
1रिहंदरिहंदसोनभद्रऊर्जा एवं जल भंडारण
2माताटीलाबेतवाललितपुरसिंचाई
3राजघाटबेतवाललितपुरसिंचाई
4शारदा बैराजशारदालखीमपुर खीरीसिंचाई
5नरौरा बैराजगंगाबुलंदशहरसिंचाई एवं जल प्रबंधन

बाढ़ प्रभावित नदी क्षेत्र

उत्तर प्रदेश का पूर्वी और तराई क्षेत्र हर वर्ष बाढ़ की चुनौती का सामना करता है। नेपाल से आने वाली नदियों में मानसून के दौरान जलस्तर बढ़ने से लाखों लोग प्रभावित होते हैं और कृषि, आवास तथा बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचता है।

क्रम सं.नदी/नदी तंत्रप्रमुख क्षेत्रबाढ़ की स्थिति
1घाघरा (सरयू)बहराइच, गोंडा, अयोध्या, बलियाउत्तर प्रदेश की सबसे बाढ़ प्रभावित नदियों में से एक
2राप्तीश्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, गोरखपुरमानसून में बार-बार बाढ़ की स्थिति
3शारदालखीमपुर खीरी, बहराइचतराई क्षेत्र में व्यापक जलभराव और बाढ़
4गंडककुशीनगर, महाराजगंजनेपाल से आने वाले अतिरिक्त जल के कारण बाढ़
5रोहिणीगोरखपुर, महाराजगंजस्थानीय बाढ़ और जलभराव की समस्या
6छोटी गंडकदेवरिया, कुशीनगरनिचले क्षेत्रों में नियमित बाढ़ का प्रभाव
7घाघरा-राप्ती-शारदा नदी तंत्रबहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, कुशीनगरराज्य का प्रमुख बाढ़ प्रभावित क्षेत्र
8कुआनोबस्ती, संत कबीर नगर, गोरखपुरमानसूनी बाढ़ और नदी तट कटाव
9गेरुआ बहराइचमानसूनी बाढ़ और तटीय कटाव

पूर्वी उत्तर प्रदेश में बाढ़ केवल एक मौसमी आपदा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है। नदी तटों पर बढ़ता दबाव, बदलते वर्षा पैटर्न और सीमापार जल प्रबंधन से जुड़ी समस्याएँ इस चुनौती को और जटिल बनाती हैं।

सूखा प्रभावित नदी क्षेत्र

उत्तर प्रदेश के दक्षिणी हिस्से, विशेषकर बुंदेलखंड क्षेत्र में, प्रमुख नदियों की मौजूदगी के बावजूद जल संकट एक गंभीर समस्या बना हुआ है। अनियमित वर्षा, भूजल के अत्यधिक दोहन और पारंपरिक जल स्रोतों के क्षरण के कारण यह क्षेत्र बार-बार सूखे जैसी परिस्थितियों का सामना करता है।

क्रम सं.नदी/नदी तंत्रप्रमुख क्षेत्रसूखने के प्रमुख कारणजल संकट की स्थिति
1बेतवाझांसी, जालौन, हमीरपुरकम वर्षा, भूजल दोहन, जलाशयों में घटता जलवर्षा पर बढ़ती निर्भरता, घटता जलस्तर
2केनबांदा, चित्रकूटअनियमित मानसून, सीमित जल भंडारणकम वर्षा और मौसमी जल उपलब्धता की समस्या
3यमुनाहमीरपुर, बांदा, जालौनसिंचाई की बढ़ती मांग, घटता प्रवाहसिंचाई और पेयजल पर बढ़ता दबाव
4धसानललितपुर, झांसीवर्षा की कमी, जल संरक्षण संरचनाओं का अभावगर्मियों में प्रवाह में कमी
5जामनीललितपुर, झांसीकम वर्षा, भूजल स्तर में गिरावटसीमित जल उपलब्धता और सूखे का प्रभाव
6पहूजझांसी क्षेत्रजलग्रहण क्षेत्र का क्षरण, अनियमित वर्षाघटते प्रवाह और जलाशयों पर निर्भरता
7बुंदेलखंड नदी तंत्र (समग्र)झांसी, ललितपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौनआवर्ती सूखा, भूजल संकट, जल संचयन की कमीआवर्ती सूखा, भूजल संकट और जल असुरक्षा

बुंदेलखंड का जल संकट केवल नदियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भूजल, तालाबों और स्थानीय जल संरचनाओं से भी जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में नदी संरक्षण के साथ-साथ जल संचयन और जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन को भी निर्णायक माना जाता है।

उत्तर प्रदेश की प्रदूषित, संकटग्रस्त और सिकुड़ती नदियां
उत्तर प्रदेश की कई नदियां आज प्रदूषण, अतिक्रमण, अवैध खनन, शहरी विस्तार और घटते प्राकृतिक प्रवाह जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही हैं। औद्योगिक और घरेलू अपशिष्ट ने कई नदियों की जल गुणवत्ता को प्रभावित किया है, जबकि कुछ छोटी नदियों का नदी मार्ग और जलग्रहण क्षेत्र लगातार सिकुड़ रहा है। नीचे ऐसी प्रमुख नदियों की सूची दी गई है, जिनकी वर्तमान स्थिति राज्य की नदी संरक्षण चुनौतियों को दर्शाती है।

क्रम सं.नदीप्रमुख क्षेत्रवर्तमान स्थिति / प्रमुख समस्या
1हिंडनसहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडागंभीर औद्योगिक और सीवेज प्रदूषण
2काली (पश्चिमी)मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपतऔद्योगिक प्रदूषण और दूषित जल
3कृष्णीशामली, मुजफ्फरनगरप्रदूषण और घटती जल गुणवत्ता
4गोमतीलखनऊ, सुल्तानपुर, जौनपुरसीवेज, शहरी दबाव और घटता प्रवाह
5सईरायबरेली, प्रतापगढ़, जौनपुरप्रदूषण और सिकुड़ती जलधारा
6सरायनसीतापुर, हरदोईअतिक्रमण और मौसमीकरण
7कठिनासीतापुर, लखीमपुर खीरीघटता जलस्तर और प्रवाह
8चौकालखीमपुर खीरीजलग्रहण क्षेत्र पर बढ़ता दबाव
9सुहेलीलखीमपुर खीरीप्रवाह में कमी और पारिस्थितिक दबाव
10वरुणावाराणसीअतिक्रमण और शहरी प्रदूषण
11अस्सीवाराणसीशहरीकरण और प्राकृतिक धारा का क्षरण
12आमीगोरखपुर, संत कबीर नगरऔद्योगिक एवं घरेलू प्रदूषण
13रोहिणीमहाराजगंज, गोरखपुरअतिक्रमण, प्रदूषण और बाढ़ दबाव
14छोटी गंडकदेवरिया, कुशीनगरप्रदूषण और बाढ़ मैदानों पर दबाव
15कुआनोबस्ती, गोंडा, संत कबीर नगरप्रदूषण और नदी तटों पर दबाव
16मनोरमागोंडा, बस्तीसिकुड़ता प्रवाह और अतिक्रमण
17तमसा (टोंस)अयोध्या, अंबेडकरनगर, मऊघटता प्रवाह और प्रदूषण
18मगईजौनपुर, गाजीपुरमौसमीकरण और जलधारा में कमी
19बिसुहीजौनपुर, भदोहीसिकुड़ती धारा और स्थानीय प्रदूषण
20पहूजझांसीघटता प्रवाह, अतिक्रमण और जल संकट
21धसानललितपुर, झांसीजल संकट और मौसमी प्रवाह
22जामनीललितपुर, झांसीघटता प्रवाह और सूखे का प्रभाव
23अरिलबरेलीसिकुड़ता नदी मार्ग और अतिक्रमण
24बहगुलपीलीभीत, शाहजहाँपुरप्रवाह में कमी और तटीय दबाव
25देवहापीलीभीतजलग्रहण क्षेत्र में बदलाव
26पांडुकानपुरशहरी प्रदूषण और सीवेज
27कर्णावती (करवन)प्रयागराज क्षेत्रमौसमीकरण और अतिक्रमण
28सुसर खदेरीप्रयागराजशहरी विस्तार और प्रदूषण
29बकुलाहीप्रतापगढ़, कौशांबीघटता प्रवाह और अतिक्रमण
30बेलनमिर्जापुर, प्रयागराजरेत खनन और प्रवाह में कमी

उत्तर प्रदेश की नदियों से जुड़े प्रमुख जल संरक्षण और पुनर्जीवन कार्यक्रम

उत्तर प्रदेश की कई नदियां प्रदूषण, घटते प्रवाह और जल संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। इन समस्याओं से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने विभिन्न जल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन और भूजल प्रबंधन कार्यक्रम शुरू किए हैं।

क्रम सं.अभियान / योजनाप्रमुख नदी / क्षेत्रउद्देश्य
1नमामि गंगेगंगाप्रदूषण नियंत्रण, अविरल और निर्मल गंगा
2राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG)गंगा, यमुना, रामगंगा, गोमतीगंगा बेसिन की सहायक नदियों का संरक्षण
3गोमती पुनर्जीवन अभियानगोमतीनदी की सफाई और पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखना
4हिंडन पुनर्जीवन पहलहिंडनऔद्योगिक प्रदूषण कम करना, जल गुणवत्ता सुधारना
5अटल भूजल योजनाबुंदेलखंड और जल संकट वाले क्षेत्रभूजल संरक्षण और जल उपयोग प्रबंधन
6जल शक्ति अभियानराज्य के सभी नदी बेसिनवर्षा जल संचयन और जल संरक्षण
7अमृत सरोवर योजनाग्रामीण जलग्रहण क्षेत्रतालाबों और जलाशयों का पुनर्जीवन
8केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजनाकेन और बेतवाबुंदेलखंड में जल उपलब्धता बढ़ाना
9रिवर फ्रंट एवं नदी तट विकास परियोजनाएंगोमती, गंगा, वरुणानदी तट संरक्षण और शहरी नदी प्रबंधन
10कैच द रेन अभियानराज्यव्यापीवर्षा जल संचयन और स्थानीय जल स्रोतों का संरक्षण

गंगा, यमुना, घाघरा, गोमती और शारदा जैसी नदियां उत्तर प्रदेश की कृषि, संस्कृति और अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं। राज्य का अधिकांश भूभाग गंगा नदी तंत्र के अंतर्गत आता है, जिससे यह देश के सबसे महत्वपूर्ण नदी प्रदेशों में शामिल होता है।

हालांकि बाढ़, सूखा, प्रदूषण, अतिक्रमण और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियाँ इन नदियों पर बढ़ता दबाव बना रही हैं। भविष्य की जल सुरक्षा के लिए नदी संरक्षण, भूजल प्रबंधन और जलग्रहण क्षेत्रों के पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होगा।

उत्तर प्रदेश की नदियों से जुड़े रोचक तथ्य

  • उत्तर प्रदेश का अधिकांश भूभाग गंगा नदी बेसिन में स्थित है, जो दुनिया के सबसे बड़े नदी तंत्रों में से एक है।

  • प्रयागराज में गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम को भारत के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में गिना जाता है।

  • घाघरा (सरयू) उत्तर प्रदेश की सबसे अधिक जल वहन करने वाली नदियों में शामिल है और पूर्वांचल की कृषि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

  • गोमती उत्तर प्रदेश की उन प्रमुख नदियों में है जिसका उद्गम और अधिकांश प्रवाह राज्य की सीमाओं के भीतर ही है।

  • बुंदेलखंड की केन और बेतवा नदियों को जोड़ने वाली केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत की पहली नदी जोड़ो परियोजना मानी जाती है।

  • रिहंद बांध और गोविंद बल्लभ पंत सागर जलाशय उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण जलाशयों में गिने जाते हैं।

  • पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिले हर वर्ष घाघरा, राप्ती और शारदा नदियों की बाढ़ से प्रभावित होते हैं, जबकि बुंदेलखंड क्षेत्र जल संकट का सामना करता है।

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