फ़ोटो - विकिकॉमंस 

शब्दकोश

अंकुरण (Germination) क्या है? परिभाषा, प्रक्रिया और पौधों के विकास में महत्व

Author : इंडिया वाटर पोर्टल

अंकुरण (Germination) वह प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है, जिसमें बीज अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर सक्रिय होकर नए पौधे के रूप में विकसित होना शुरू करता है। जब किसी बीज को पर्याप्त पानी, हवा, तापमान और उपयुक्त वातावरण मिलता है, तब उसके अंदर निष्क्रिय अवस्था में मौजूद भ्रूण सक्रिय हो जाता है और धीरे-धीरे जड़ तथा तना बाहर निकलने लगते है। इसी प्रक्रिया को अंकुरण कहा जाता है।

सरल शब्दों में कहा जाए तो बीज से नए पौधे का जन्म अंकुरण कहलाता है। यह पौधों के जीवन चक्र का पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है।

अंकुरण केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि जंगलों, घास के मैदानों, बगीचों और प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों के विकास का आधार भी है। पृथ्वी पर हर पेड़-पौधे की शुरुआत एक छोटे से बीज और उसके अंकुरण से होती है।

अंकुरण की परिभाषा 

बीज के अनुकूल परिस्थितियों में सक्रिय होकर जड़ और तने के रूप में विकसित होने की प्रक्रिया को अंकुरण कहा जाता है। अंग्रेजी में इसे Germination कहा जाता है।

अंकुरण की प्रक्रिया 

अंकुरण एक क्रमिक प्रक्रिया है, जो कई चरणों में पूरी होती है।

  • जल अवशोषण - सबसे पहले बीज मिट्टी से पानी को अवशोषित करता है। पानी मिलने पर बीज फूलने लगता है और उसके अंदर मौजूद एंजाइम सक्रिय हो जाते है।

  • एंजाइम सक्रिय होना - बीज के अंदर जमा भोजन ऊर्जा में बदलने लगता है। यह ऊर्जा बीज की वृद्धि के लिए आवश्यक होती है।

  • श्वसन प्रक्रिया - बीज ऑक्सीजन की मदद से श्वसन करता है, जिससे उसे वृद्धि के लिए ऊर्जा प्राप्त होती है।

  • जड़ का निकलना - अंकुरण के दौरान सबसे पहले छोटी जड़ बाहर निकलती है। यह मिट्टी से पानी और पोषक तत्व लेने का कार्य करती है।

  • तने और पत्तियों का विकास - इसके बाद छोटा तना और पत्तियां विकसित होने लगती हैं। धीरे-धीरे यह एक नए पौधे का रूप ले लेता है।

अंकुरण के लिए आवश्यक परिस्थितियां

बीज का अंकुरण तभी संभव होता है जब उसे सही वातावरण मिले। इसके लिए निम्न परिस्थितियां आवश्यक है -

  • पानी - पानी बीज को सक्रिय करने का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है। इसके बिना बीज अंकुरित नहीं हो सकता।

  • ऑक्सीजन - बीज को श्वसन के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।

  • उपयुक्त तापमान - हर पौधे के लिए अंकुरण का तापमान अलग होता है। बहुत अधिक या बहुत कम तापमान अंकुरण को प्रभावित कर सकता है।

  • प्रकाश - कुछ पौधों के बीजों को अंकुरण के लिए प्रकाश की आवश्यकता होती है, जबकि कुछ बीज अंधेरे में बेहतर अंकुरित होते हैं।

  • उपजाऊ मिट्टी - मिट्टी में नमी और पोषक तत्व होना भी जरूरी है।

अंकुरण के प्रकार 

अंकुरण मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है -

1. एपिजियल अंकुरण (Epigeal Germination) - इसमें बीजपत्र (cotyledons) मिट्टी के ऊपर आ जाते है। उदाहरण - सेम, अरंडी

2. हाइपोजियल अंकुरण (Hypogeal Germination) - इसमें बीजपत्र मिट्टी के नीचे ही रहते हैं। उदाहरण - मक्का, मटर

कृषि में अंकुरण का महत्व

अंकुरण कृषि उत्पादन की शुरुआत का आधार है। यदि बीज सही तरीके से अंकुरित नहीं होगा, तो अच्छी फसल प्राप्त नहीं हो सकती।

कृषि में इसके मुख्य महत्व 

  • स्वस्थ पौधों की वृद्धि सुनिश्चित करता है

  • फसल उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है

  • बीज की गुणवत्ता का पता चलता है

  • खेती की सफलता अंकुरण दर पर निर्भर करती है

  • खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है

भारत जैसे कृषि प्रधान देश में अंकुरण का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि यहां बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। अंकुरण प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र का आधार है। जंगलों का विकास, पौधों की नई पीढ़ी और जैव विविधता का संरक्षण अंकुरण पर निर्भर करता है।

पर्यावरण में इसकी भूमिका - 

  • नए पौधों और जंगलों का निर्माण

  • मिट्टी संरक्षण में मदद

  • ऑक्सीजन उत्पादन बढ़ाना

  • जलवायु संतुलन बनाए रखना

  • वन्य जीवों के लिए भोजन और आवास उपलब्ध कराना

अंकुरण को प्रभावित करने वाले कारक

कई प्राकृतिक और मानवीय कारक अंकुरण को प्रभावित करते है -

  • मिट्टी की नमी

  • तापमान में बदलाव

  • जलवायु परिवर्तन

  • बीज की उम्र और गुणवत्ता

  • मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी

  • अत्यधिक वर्षा या सूखा

  • प्रदूषण और रासायनिक उपयोग

जलवायु परिवर्तन और अंकुरण

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव बीजों के अंकुरण पर भी देखा जा रहा है। अनियमित बारिश, बढ़ता तापमान और सूखे की स्थिति खेती और प्राकृतिक वनस्पतियों के अंकुरण को प्रभावित कर रहे हैं। कई क्षेत्रों में समय पर बारिश न होने के कारण बीज अंकुरित नहीं हो पाते, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है।

अंकुरण के उदाहरण 

  • गेहूं और चने के बीज पानी मिलने पर जल्दी अंकुरित होते हैं

  • मानसून के दौरान खेतों में अंकुरण तेजी से होता है

  • घरों में मूंग और मेथी को पानी में भिगोकर अंकुरित किया जाता है

अंकुरण के उपयोग 

  • कृषि- फसल उत्पादन और पौध तैयार करने में

  • बागवानी- फूल और फलदार पौधों की खेती में

  • वानिकी - नए जंगल विकसित करने में

  • खाद्य उपयोग- अंकुरित अनाज स्वास्थ्यवर्धक भोजन के रूप में उपयोग किए जाते है

अंकुरण प्रकृति की एक महत्वपूर्ण और आधारभूत प्रक्रिया है, जो बीज को नए जीवन में बदलती है। यह केवल पौधों की वृद्धि का प्रारंभ नहीं, बल्कि कृषि, पर्यावरण और मानव जीवन की निरंतरता का आधार भी है। बेहतर अंकुरण के लिए सही बीज, पर्याप्त पानी, उचित तापमान और स्वस्थ मिट्टी का होना जरूरी है। बदलती जलवायु और बढ़ते पर्यावरणीय संकट के बीच बीजों और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक बन गया है।

लेटेस्ट अपडेट्स के लिए हमारे व्हाट्सऐप चैनल को फॉलो करें

SCROLL FOR NEXT