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एंटीबायोटिक (Antibiotic) ऐसी औषधियां है, जिनका उपयोग बैक्टीरिया (Bacteria) से होने वाले संक्रमणों को रोकने, नियंत्रित करने या समाप्त करने के लिए किया जाता है। ये दवाएं बैक्टीरिया को नष्ट कर सकती है या उनकी वृद्धि को रोक सकती है, जिससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण से लड़ने में सक्षम हो जाती है।
सरल शब्दों में, बैक्टीरिया जनित रोगों के उपचार के लिए उपयोग की जाने वाली दवाओं को एंटीबायोटिक कहा जाता है।
हालांकि, एंटीबायोटिक केवल बैक्टीरिया पर प्रभावी होती हैं। इनका उपयोग वायरल संक्रमण जैसे सर्दी, फ्लू, डेंगू या कोविड-19 के उपचार के लिए नहीं किया जाता।
ऐसी दवाएं या रासायनिक पदार्थ जो बैक्टीरिया को नष्ट करें या उनकी वृद्धि को रोकें, एंटीबायोटिक (Antibiotic) कहलाते है। अंग्रेजी में इसे Antibiotic कहा जाता है।
एंटीबायोटिक चिकित्सा विज्ञान की सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक है।
वर्ष 1928 में Alexander Fleming ने पेनिसिलिन (Penicillin) की खोज की।
इस खोज ने बैक्टीरियल संक्रमणों के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव लाया।
इसके बाद अनेक प्रकार की एंटीबायोटिक दवाओं का विकास हुआ, जिससे लाखों लोगों की जान बचाई जा सकी।
एंटीबायोटिक दवाएं विभिन्न तरीकों से बैक्टीरिया को प्रभावित करती हैं।
बैक्टीरिया को नष्ट करना - कुछ एंटीबायोटिक सीधे बैक्टीरिया की कोशिका भित्ति (Cell Wall) को नष्ट कर देती हैं।
वृद्धि रोकना - कुछ दवाएं बैक्टीरिया की वृद्धि और प्रजनन को रोकती हैं।
प्रोटीन निर्माण रोकना - कुछ एंटीबायोटिक बैक्टीरिया में प्रोटीन निर्माण की प्रक्रिया को बाधित करती हैं।
डीएनए को प्रभावित करना - कुछ दवाएं बैक्टीरिया के आनुवंशिक तंत्र को प्रभावित कर उन्हें निष्क्रिय कर देती हैं।
एंटीबायोटिक को उनके कार्य और रासायनिक संरचना के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
पेनिसिलिन (Penicillin) - बैक्टीरियल संक्रमणों के उपचार में व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली एंटीबायोटिक।
सेफालोस्पोरिन (Cephalosporins) - श्वसन और त्वचा संक्रमणों में उपयोगी।
मैक्रोलाइड्स (Macrolides) - गले, फेफड़ों और श्वसन तंत्र के संक्रमणों में प्रयुक्त।
टेट्रासाइक्लिन (Tetracyclines) - विभिन्न प्रकार के बैक्टीरियल संक्रमणों के उपचार में उपयोग।
फ्लूरोक्विनोलोन (Fluoroquinolones) - मूत्र मार्ग और अन्य गंभीर संक्रमणों के लिए प्रयुक्त।
एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग कई प्रकार के बैक्टीरियल संक्रमणों के उपचार में किया जाता है।
निमोनिया (Pneumonia)
तपेदिक (Tuberculosis) के कुछ उपचारों में
गले का संक्रमण
कान का संक्रमण
मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI)
त्वचा संक्रमण
बैक्टीरियल फूड पॉइजनिंग
सर्जरी के बाद संक्रमण की रोकथाम
आधुनिक चिकित्सा में एंटीबायोटिक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बैक्टीरियल रोगों का प्रभावी उपचार
मृत्यु दर में कमी
शल्य चिकित्सा (Surgery) को सुरक्षित बनाना
संक्रमण के प्रसार को रोकना
जीवन प्रत्याशा बढ़ाने में योगदान
जब बैक्टीरिया किसी एंटीबायोटिक दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं और दवा उन पर प्रभावी नहीं रहती, तो इसे एंटीबायोटिक प्रतिरोध (Antibiotic Resistance) कहा जाता है। यह वर्तमान समय की सबसे गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक मानी जाती है।
बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना
निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले दवा बंद करना
अनावश्यक एंटीबायोटिक का उपयोग
पशुपालन और कृषि में अत्यधिक उपयोग
गलत खुराक का सेवन
संक्रमण का उपचार कठिन हो जाता है
अस्पताल में भर्ती होने की अवधि बढ़ सकती है
उपचार की लागत बढ़ जाती है
गंभीर रोग और मृत्यु का खतरा बढ़ सकता है
नई और अधिक शक्तिशाली दवाओं की आवश्यकता पड़ती है
केवल चिकित्सक की सलाह पर एंटीबायोटिक लें।
निर्धारित खुराक और अवधि का पालन करें।
दवा का पूरा कोर्स पूरा करें।
संक्रमण के लक्षण समाप्त होने पर भी डॉक्टर के निर्देश का पालन करें।
स्वयं दवा न लें।
बची हुई दवा का पुनः उपयोग न करें।
किसी अन्य व्यक्ति की दवा का उपयोग न करें।
वायरल संक्रमणों में एंटीबायोटिक का उपयोग न करें।
एंटीबायोटिक का अत्यधिक उपयोग केवल मानव स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि पर्यावरण को भी प्रभावित कर सकता है।
जल स्रोतों में दवा अवशेष पहुंच सकते है।
मिट्टी में सूक्ष्मजीव समुदाय प्रभावित हो सकते है।
एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया का प्रसार बढ़ सकता है।
जैव विविधता पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकते है।
पेनिसिलिन (Penicillin)
एमोक्सिसिलिन (Amoxicillin)
एजिथ्रोमाइसिन (Azithromycin)
डॉक्सीसाइक्लिन (Doxycycline)
सिप्रोफ्लोक्सासिन (Ciprofloxacin)
इन दवाओं का उपयोग केवल योग्य चिकित्सक की सलाह पर ही किया जाना चाहिए।
एंटीबायोटिक (Antibiotic) आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसने बैक्टीरिया जनित अनेक घातक रोगों के उपचार को संभव बनाया है। यह संक्रमणों से बचाव और उपचार में अत्यंत प्रभावी भूमिका निभाती है। हालांकि, इनका अनुचित और अत्यधिक उपयोग एंटीबायोटिक प्रतिरोध जैसी गंभीर समस्या को जन्म दे सकता है। इसलिए एंटीबायोटिक का उपयोग हमेशा चिकित्सकीय सलाह और निर्धारित नियमों के अनुसार ही करना चाहिए, ताकि मानव स्वास्थ्य और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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