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हीदरग्राफ (Hythergraph) क्या है? अर्थ, परिभाषा, निर्माण विधि और उपयोग

Author : इंडिया वाटर पोर्टल

हीदरग्राफ एक विशेष प्रकार का जलवायु ग्राफ है, जिसका उपयोग किसी स्थान के औसत मासिक तापमान और औसत मासिक वर्षा के बीच संबंध को प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है। यह ग्राफ वर्ष के प्रत्येक महीने के तापमान और वर्षा के आंकड़ों को एक साथ प्रस्तुत करता है, जिससे यह समझना आसान हो जाता है कि किस तापमान पर कितनी वर्षा होती है और वर्षभर जलवायु में किस प्रकार परिवर्तन होता है।

सामान्यतः मौसम विज्ञान, भूगोल, पर्यावरण विज्ञान, कृषि विज्ञान तथा जल संसाधन प्रबंधन में हीदरग्राफ का व्यापक उपयोग किया जाता है। यह जलवायु के मौसमी स्वरूप, मानसून के प्रभाव तथा शुष्क एवं आर्द्र अवधियों की पहचान करने का एक प्रभावी माध्यम है।

हीदरग्राफ की परिभाषा 

हीदरग्राफ वह ग्राफ है जिसमें X-अक्ष (Horizontal Axis) पर औसत मासिक तापमान (°C) तथा Y-अक्ष (Vertical Axis) पर औसत मासिक वर्षा (मिलीमीटर) को दर्शाया जाता है। वर्ष के प्रत्येक महीने के तापमान एवं वर्षा के मानों को एक बिंदु के रूप में अंकित किया जाता है और बाद में इन बिंदुओं को जनवरी से दिसंबर तक क्रमवार जोड़ दिया जाता है। इस प्रकार बनने वाली आकृति को हीदरग्राफ कहा जाता है।

सरल शब्दों में कहें तो, हीदरग्राफ तापमान और वर्षा के बीच संबंध को प्रदर्शित करने वाला जलवायु ग्राफ है।

Hythergraph शब्द का अर्थ

Hythergraph शब्द दो ग्रीक मूल शब्दों से मिलकर बना है -

  • Hyet (Hyetos) = वर्षा (Rainfall)

  • Therm (Thermos) = ताप (Heat/Temperature)

  • Graph = चित्र या आलेख

अर्थात, Hythergraph = वर्षा + तापमान का ग्राफ

हीदरग्राफ का उद्देश्य

हीदरग्राफ तैयार करने का मुख्य उद्देश्य किसी स्थान की जलवायु को केवल आंकड़ों के बजाय चित्रात्मक रूप में प्रस्तुत करना है। इससे निम्नलिखित बातें आसानी से समझी जा सकती है -

  • वर्षभर तापमान में परिवर्तन

  • वर्षा का वितरण

  • मानसून का प्रभाव

  • सूखे एवं आर्द्र महीनों की पहचान

  • तापमान और वर्षा का संबंध

  • जलवायु का प्रकार

हीदरग्राफ के प्रमुख घटक

एक सामान्य हीदरग्राफ में निम्नलिखित घटक होते है -

  • X-अक्ष (Horizontal Axis) - इस अक्ष पर औसत मासिक तापमान प्रदर्शित किया जाता है। उदाहरण - 15°C, 20°C, 25°C, 30°C

  • Y-अक्ष (Vertical Axis) - इस अक्ष पर औसत मासिक वर्षा (मिलीमीटर में) दर्शाई जाती है। उदाहरण - 20 mm, 50 mm, 100 mm, 200 mm, 300 mm

  • मासिक बिंदु - जनवरी से दिसंबर तक प्रत्येक महीने का तापमान और वर्षा एक बिंदु के रूप में अंकित किया जाता है।

  • संयोजक रेखा -  सभी बिंदुओं को क्रमवार जोड़ दिया जाता है जिससे एक बंद अथवा खुला वक्र बनता है।

  • महीनों का संकेत - प्रत्येक बिंदु के पास संबंधित महीने का संक्षिप्त नाम लिखा जाता है। उदाहरण - Jan, Feb, Mar… या जन., फर., मार्च…

हीदरग्राफ से क्या जानकारी मिलती है?

हीदरग्राफ के माध्यम से निम्नलिखित जानकारियाँ प्राप्त होती हैं - 

  • वर्षा का मौसमी वितरण - किस महीने में अधिक वर्षा हुई तथा किस महीने में कम, इसका पता चलता है।

  • मानसून की शुरुआत - भारत जैसे देशों में जून से सितंबर तक वर्षा में अचानक वृद्धि हीदरग्राफ में स्पष्ट दिखाई देती है।

  • तापमान एवं वर्षा का संबंध - यह समझा जा सकता है कि अधिक तापमान वाले महीनों में वर्षा अधिक हुई या कम।

  • शुष्क एवं आर्द्र अवधि - कम वर्षा वाले महीनों को आसानी से पहचाना जा सकता है।

  • जलवायु का प्रकार -  ग्राफ देखकर अनुमान लगाया जा सकता है कि क्षेत्र शुष्क (Arid), अर्द्ध-शुष्क (Semi-arid), मानसूनी (Monsoonal), आर्द्र (Humid), उष्णकटिबंधीय (Tropical) में से किस प्रकार का है।

हीदरग्राफ का महत्व

हीदरग्राफ जलवायु अध्ययन का अत्यंत उपयोगी उपकरण है। इसके प्रमुख महत्व निम्नलिखित हैं -

  • जलवायु विश्लेषण - यह किसी क्षेत्र की जलवायु का संपूर्ण चित्र प्रस्तुत करता है।

  • कृषि योजना - किस महीने में बुवाई, सिंचाई और कटाई करनी चाहिए, इसका अनुमान लगाया जा सकता है।

  • जल संसाधन प्रबंधन - बांध, जलाशय और सिंचाई योजनाओं के लिए वर्षा के वितरण का अध्ययन किया जाता है।

  • पर्यावरण अध्ययन - जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का विश्लेषण करने में सहायता मिलती है।

  • भूगोल शिक्षा - विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में इसका व्यापक उपयोग होता है।

हीदरग्राफ के लाभ

  • तापमान और वर्षा का संबंध स्पष्ट करता है।

  • जलवायु को समझना आसान बनाता है।

  • वर्षा के मौसमी पैटर्न को दर्शाता है।

  • जलवायु की तुलना करने में उपयोगी।

  • कृषि एवं जल प्रबंधन में सहायक।

  • जलवायु परिवर्तन के अध्ययन में उपयोगी।

हीदरग्राफ की सीमाएँ

यद्यपि हीदरग्राफ उपयोगी है, फिर भी इसकी कुछ सीमाएँ है - 

  • इसमें केवल तापमान और वर्षा को दर्शाया जाता है।

  • आर्द्रता, पवन, वाष्पीकरण तथा वायुदाब जैसी जलवायु संबंधी अन्य सूचनाएँ शामिल नहीं होतीं।

  • दैनिक या साप्ताहिक परिवर्तन नहीं दर्शाता।

  • लंबे समय के औसत आंकड़ों पर आधारित होने के कारण अल्पकालिक मौसम परिवर्तन नहीं दिखाता।

हीदरग्राफ के अनुप्रयोग 

हीदरग्राफ का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है - 

  • जलवायु विज्ञान (Climatology)

  • मौसम विज्ञान (Meteorology)

  • भूगोल (Geography)

  • कृषि विज्ञान (Agriculture)

  • पर्यावरण विज्ञान (Environmental Science)

  • जल संसाधन प्रबंधन (Water Resource Management)

  • शहरी नियोजन (Urban Planning)

  • आपदा प्रबंधन (Disaster Management)

हीदरग्राफ एक महत्वपूर्ण जलवायु ग्राफ है, जो किसी स्थान के औसत मासिक तापमान और वर्षा के बीच संबंध को सरल एवं चित्रात्मक रूप में प्रस्तुत करता है। इसकी सहायता से किसी क्षेत्र की जलवायु, मानसून का प्रभाव, वर्षा का वितरण तथा शुष्क एवं आर्द्र अवधियों का आसानी से विश्लेषण किया जा सकता है।

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