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पास्तेरीकरण (Pasteurization) खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों को एक निश्चित तापमान तक गर्म करके उनमें मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया का उपयोग सबसे अधिक दूध और डेयरी उत्पादों में किया जाता है।
सरल भाषा में, खाद्य पदार्थों को सुरक्षित और लंबे समय तक उपयोग योग्य बनाने के लिए नियंत्रित तापमान पर गर्म करने की प्रक्रिया को पास्तेरीकरण कहा जाता है।
इस तकनीक का विकास 19वीं शताब्दी में फ्रांसीसी वैज्ञानिक Louis Pasteur ने किया था, जिनके नाम पर इस प्रक्रिया का नाम रखा गया।
खाद्य पदार्थों को एक निश्चित तापमान पर निर्धारित समय तक गर्म करके हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने तथा उनकी गुणवत्ता बनाए रखने की प्रक्रिया को पास्तेरीकरण कहा जाता है।
1860 के दशक में Louis Pasteur ने पाया कि गर्म करने से भोजन और पेय पदार्थों में मौजूद रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों को नियंत्रित किया जा सकता है। प्रारंभ में इस तकनीक का उपयोग वाइन और बीयर के संरक्षण के लिए किया गया, बाद में दूध और अन्य खाद्य पदार्थों में इसका व्यापक उपयोग शुरू हुआ।
पास्तेरीकरण में खाद्य पदार्थ को नियंत्रित तापमान तक गर्म किया जाता है और फिर तेजी से ठंडा किया जाता है।
मुख्य चरण -
उत्पाद को निर्धारित तापमान तक गर्म करना
उस तापमान पर निश्चित समय तक रखना
तुरंत ठंडा करना
सुरक्षित भंडारण और पैकेजिंग करना
1. HTST (High Temperature Short Time)
तापमान- लगभग 72°C
समय- 15 सेकंड
दूध उद्योग में सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली विधि
2. LTLT (Low Temperature Long Time)
तापमान- लगभग 63°C
समय- 30 मिनट
छोटे पैमाने के डेयरी उत्पादन में उपयोग
3. UHT (Ultra High Temperature)
तापमान- 135°C से 150°C
समय- 2–5 सेकंड
लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला पैकेज्ड दूध तैयार करने में उपयोग
पास्तेरीकरण खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
हानिकारक सूक्ष्मजीवों का नियंत्रण - यह साल्मोनेला, लिस्टेरिया और ई.कोलाई जैसे रोगजनक जीवाणुओं को नष्ट करने में मदद करता है।
खाद्य सुरक्षा बढ़ाना - पास्तेरीकृत उत्पादों के सेवन से खाद्य जनित रोगों का जोखिम कम होता है।
शेल्फ लाइफ बढ़ाना - यह खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद करता है।
पोषण गुणवत्ता बनाए रखना - उचित तापमान नियंत्रण के कारण अधिकांश पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं।
डेयरी उद्योग को समर्थन - दूध और दुग्ध उत्पादों के सुरक्षित वितरण में पास्तेरीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पास्तेरीकरण का उपयोग विभिन्न खाद्य और पेय पदार्थों में किया जाता है:
दूध और दुग्ध उत्पाद
दही और क्रीम
फलों के रस
बीयर और वाइन
अंडा उत्पाद
कुछ पैकेज्ड खाद्य पदार्थ
पास्तेरीकरण सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण उपकरण है।
खाद्य जनित संक्रमणों को कम करता है।
बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों की सुरक्षा में मदद करता है।
डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करता है।
सुरक्षित खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाता है।
भारत विश्व के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक देशों में से एक है। दूध की बढ़ती मांग और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पास्तेरीकरण डेयरी उद्योग का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है। Food Safety and Standards Authority of India द्वारा खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। संगठित डेयरी क्षेत्र में अधिकांश दूध पास्तेरीकरण के बाद ही उपभोक्ताओं तक पहुंचता है।
डेयरी उद्योग में
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में
पेय पदार्थ निर्माण में
खाद्य सुरक्षा प्रबंधन में
सार्वजनिक स्वास्थ्य संरक्षण में
निर्यात गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में
पास्तेरीकरण खाद्य संरक्षण की एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो भोजन को सुरक्षित, स्वच्छ और लंबे समय तक उपयोग योग्य बनाती है। विशेष रूप से दूध और डेयरी उत्पादों में इसका महत्व अत्यधिक है। खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए पास्तेरीकरण आधुनिक खाद्य उद्योग की आधारभूत तकनीकों में से एक माना जाता है।
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