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Photosynthesis को हिंदी में प्रकाश संश्लेषण कहते है। ये वो जैविक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से हरे पौधे, शैवाल (algae) और कुछ बैक्टीरिया सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा का उपयोग करके अपना भोजन स्वयं बनाते है। यह प्रक्रिया पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इसी से ऑक्सीजन (oxygen) का उत्पादन होता है और खाद्य श्रृंखला (food chain) की शुरुआत होती है।
प्रकाश संश्लेषण एक रासायनिक प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में पौधे सूर्य के प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और पानी (H₂O) की सहायता से ग्लूकोज़ (glucose) बनाते है और ऑक्सीजन को वातावरण में छोड़ते है। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से पौधों की पत्तियों में उपस्थित क्लोरोफिल (chlorophyll) नामक हरे रंग के पिगमेंट द्वारा होती है।
प्रकाश संश्लेषण जल चक्र, जलवायु संतुलन और कृषि उत्पादन से गहराई से जुड़ा हुआ है।
जल चक्र में भूमिका: पौधे जड़ों के माध्यम से पानी लेते हैं और पत्तियों के जरिए वाष्पोत्सर्जन (transpiration) करते हैं, जिससे वातावरण में नमी बढ़ती है और वर्षा चक्र प्रभावित होता है।
कार्बन संतुलन: यह प्रक्रिया वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को कम करती है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
ऑक्सीजन उत्पादन: पृथ्वी के अधिकांश जीवों के लिए आवश्यक ऑक्सीजन प्रकाश संश्लेषण से ही मिलती है।
प्रकाश संश्लेषण दो मुख्य चरणों में होता है-
प्रकाश अभिक्रिया (Light Reaction)- सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को अवशोषित किया जाता है, पानी का अपघटन होता है और ऑक्सीजन निकलती है।
अंधकार अभिक्रिया (Dark Reaction / Calvin Cycle)- कार्बन डाइऑक्साइड को ग्लूकोज़ में परिवर्तित किया जाता है, यह प्रक्रिया प्रकाश पर सीधे निर्भर नहीं होती है।
रासायनिक समीकरण (Chemical Equation)
प्रकाश संश्लेषण को इस प्रकार दर्शाया जा सकता है:
6CO₂ + 6H₂O + प्रकाश ऊर्जा → C₆H₁₂O₆ + 6O₂
भारत जैसे कृषि प्रधान देश में प्रकाश संश्लेषण का महत्व बहुत अधिक है। धान, गेहूँ और मक्का जैसी फसलें सीधे इस प्रक्रिया पर निर्भर है। अधिक धूप और उचित सिंचाई से फसल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। वनों (forests) और पेड़ों की संख्या बढ़ाकर कार्बन संतुलन बनाए रखा जा सकता है।
सिंचाई (Irrigation): पर्याप्त पानी मिलने से पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बेहतर होती है
मृदा स्वास्थ्य (Soil Health): स्वस्थ मिट्टी पौधों की वृद्धि और प्रकाश संश्लेषण को बढ़ावा देती है
जलवायु अनुकूल खेती: बदलते मौसम में ऐसी फसलें चुनना जरूरी है जो प्रकाश संश्लेषण को प्रभावी ढंग से कर सकें
जलवायु परिवर्तन का इस प्रक्रिया पर सीधा प्रभाव पड़ता है, जिसमें
अत्यधिक तापमान से पौधों की क्षमता कम हो सकती है
पानी की कमी (drought) से प्रकाश संश्लेषण बाधित होता है
प्रदूषण से सूर्य का प्रकाश कम पहुँचता है
प्रकाश संश्लेषण केवल पौधों की भोजन बनाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) की नींव है। जल, वायु और कृषि सभी इस प्रक्रिया पर निर्भर हैं। इसलिए, पर्यावरण संरक्षण, जल प्रबंधन और हरित आवरण (green cover) को बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है ताकि यह प्राकृतिक प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती रहे।
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