फ़ोटो - सयाली पराते 

कृषि

किसी जिले को कब घोषित किया जाता है सूखाग्रस्त?

मध्य प्रदेश के पांढुर्णा के किसान जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि किसी भी जिले को सूखाग्रस्त कब घोषित किया जाता है और यह घोषणा कौन करता है?

Author : सयाली पराते

विदर्भ से लगे मध्य प्रदेश के पांढुर्णा जिले में मानसून की बेरुखी और बारिश की भारी खिंचतान के चलते कृषि संकट गहरा गया है। खरीफ सत्र में पर्याप्त बारिश न होने के कारण मक्का, कपास, सोयाबीन और तुअर की फसलें खेतों में ही सूखकर बर्बाद हो चुकी है।

आर्थिक रूप से टूट चुके सैकड़ों किसानों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। अपनी अनदेखी से नाराज किसानों ने जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रशासन और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर हल्ला बोला और पांढुर्णा को भी सूखा घोषित करने की मांग की। ऐसे में वैज्ञानिक और नीतिगत रूप से यह समझना जरूरी है कि किसी भी जिले को सूखाग्रस्त कब घोषित किया जाता है।  

फ़ोटो - सयाली पराते 

हाथों में सूखी फसलें और कलेक्ट्रेट का घेराव

जिले के विभिन्न गांवों से पहुंचे हजारों किसान हाथों में सूखी हुई फसलें लेकर एकत्रित हुए। किसानों ने शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए एक विशाल रैली निकाली। प्रदर्शन के दौरान किसानों को मुआवजा दो, पांढुर्णा को सूखाग्रस्त घोषित करो जैसी नारेबाजी भी की।

जिले के पूर्व सांसद नकुलनाथ और किसान।

किसान रैली के जिले के पूर्व सांसद नकुलनाथ पहुंचेे, उनकी उपस्थिति में शहर के जगनाड़े चौक में किसानों ने एकत्रित होकर प्रदर्शन किया। पश्चात रैली निकालकर शहर भ्रमण करते हुए कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और वहां कार्यालय का घेराव किया। 

हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पांढुर्णा आगमन के दौरान भी किसानों ने अपनी समस्याओ की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए सूखी फसलें दिखाई थीं। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस पहल न होने से नाराज होकर किसान संगठनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस बड़े आंदोलन का रूप दिया।

किसानों की प्रमुख मांगें

प्रदर्शन के पश्चात किसान, प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी गई है - 

  1. पांढुर्णा जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया जाए। जिले में कम वर्षा और फसलों को हुए नुकसान का तत्काल सर्वेक्षण कराकर पांढुर्णा को सूखाग्रस्त घोषित किया जाए।

  2. किसानों का कर्ज माफ किया जाए।आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों के कृषि ऋण माफ करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।

  3. किसानों के बिजली बिल माफ किए जाएं। कृषि पंपों के बिजली बिल माफ करने के साथ सिंचाई के लिए पर्याप्त और नियमित बिजली उपलब्ध कराई जाए।

  4. प्रभावित किसानों को तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए। फसलों को हुए नुकसान का सर्वेक्षण कराकर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा और राहत राशि प्रदान की जाए।

  5. सभी बीमित किसानों को फसल बीमा की राशि दिलाई जाए। जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, लेकिन फसल खराब होने के बावजूद उन्हें बीमा राशि नहीं मिली है, उनके बीमा प्रकरणों की जांच कराकर लंबित राशि का शीघ्र भुगतान किया जाए।

कितने तरह से पड़ता है सूखा? 

सूखे को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:

  1. मौसम संबंधी सूखा (Meteorological Drought)

  2. जल विज्ञान संबंधी सूखा (Hydrological Drought)

  3. कृषि संबंधी सूखा (Agricultural Drought)

1. मौसम संबंधी सूखा (Meteorological Drought)

2. जल विज्ञान संबंधी सूखा (Hydrological Drought)

3. कृषि संबंधी सूखा (Agricultural Drought)

महत्वपूर्ण: सूखे की इन श्रेणियों का उपयोग ही किसी क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित करने का एकमात्र आधार नहीं है। इसके लिए वर्षा, कृषि, मिट्टी की नमी, जल संसाधनों और अन्य प्रभाव संकेतकों का भी आकलन किया जाता है।

किसी जिले को सूखाग्रस्त कब घाोषित किया जाता है?

किसी जिले को सूखाग्रस्त (Drought-affected) तब घोषित किया जाता है, जब बारिश की कमी के साथ-साथ खेती, मिट्टी की नमी, वनस्पति और जल स्रोतों पर भी सूखे का प्रतिकूल प्रभाव दिखाई देता है। केवल कम बारिश होने से किसी जिले को स्वतः सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया जाता।

भारत सरकार के Manual for Drought Management, 2016 के अनुसार, सूखे का आकल मुख्य रूप से इन संकेतकों के आधार पर किया जाता है।

सूखाग्रस्त घोषित करने के 4 प्रमुख आधार

1. बारिश की कमी (Rainfall Deficiency)

सामान्य बारिश की तुलना में कितनी कम वर्षा हुई है, सूखे की अवधि कितनी लंबी है और बारिश के बीच कितने लंबे अंतराल रहे हैं, इनका आकलन किया जाता है। जब किसी क्षेत्र में लंबे समय तक सामान्य या अपेक्षित स्तर से कम वर्षा होती है, तो इसे मौसम संबंधी सूखा कहते हैं आमतौर पर यह सूखे का शुरुआती चरण होता है और इसके बाद जल विज्ञान संबंधी तथा कृषि संबंधी सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

वर्षा की दीर्घकालिक औसत मात्रा की तुलना में कमी के आधार पर इसे निम्न श्रेणियों में बांटा जा सकता है:

  • मध्यम सूखा: वर्षा में 26 से 50 प्रतिशत तक की कमी

  • गंभीर सूखा: वर्षा में 50 प्रतिशत से अधिक की कमी।

2. कृषि पर प्रभाव (Agricultural Indicators)

जब फसलों की वृद्धि के दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी और वर्षा उपलब्ध नहीं होती, जिससे पौधों पर जल तनाव बढ़ता है और फसलें मुरझाने लगती हैं, तो इसे कृषि संबंधी सूखा कहते हैं।

यह आमतौर पर मौसम संबंधी और जल विज्ञान संबंधी सूखे के कारण उत्पन्न होता है। हालांकि, फसलों पर इसका प्रभाव कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे मौसम की स्थिति, फसल की प्रजाति, विकास का चरण तथा मिट्टी के भौतिक और जैविक गुण।

भारत में कृषि संबंधी सूखे के आकलन के लिए वर्षा की कमी और उसकी अवधि को भी ध्यान में रखा जाता है। राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र (NRSC) के निर्णय सहायता केंद्र के अनुसार, खरीफ मौसम (मध्य मई से मध्य अक्टूबर) में निम्न में से कोई एक स्थिति कृषि सूखे का संकेत मानी जाती है:

लगातार चार सप्ताह तक गंभीर मौसम संबंधी सूखे की स्थिति, जिसमें वर्षा दीर्घकालिक औसत से 50 प्रतिशत से अधिक कम हो; या लगातार चार सप्ताह तक प्रत्येक सप्ताह 5 सेंटीमीटर या उससे कम वर्षा हो।

वर्ष के शेष समय में ऐसी स्थिति लगातार छह सप्ताह तक बनी रहने पर कृषि संबंधी सूखे का संकेत माना जाता है।

3. वनस्पति और मिट्टी की नमी (Remote Sensing and Soil Moisture)

उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों की मदद से किसी क्षेत्र में वनस्पति की स्थिति, मिट्टी में उपलब्ध नमी और सूखे के प्रभावों का आकलन किया जाता है। उपग्रहों से ली गई तस्वीरों के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि वनस्पति कितनी हरी-भरी है और उसमें कितना बदलाव आया है। यदि किसी क्षेत्र में लंबे समय तक बारिश नहीं होती, तो मिट्टी की नमी कम होने लगती है और फसलों तथा प्राकृतिक वनस्पति पर इसका असर दिखाई देने लगता है। इन आंकड़ों की तुलना सामान्य परिस्थितियों से करके सूखे की गंभीरता और प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलती है।

4. जल स्रोतों की स्थिति (Hydrological Indicators)

जब सतही और भूमिगत जल स्रोतों में पानी की उपलब्धता सामान्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं रहती, तो इसे जल विज्ञान संबंधी सूखा कहते हैं। इसमें नदियों, जलाशयों और भूजल के जलस्तर में कमी शामिल है।

यह स्थिति केवल कम वर्षा के कारण ही नहीं, बल्कि पानी की बढ़ती खपत और जल संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण भी उत्पन्न हो सकती है। इसलिए सामान्य या औसत से अधिक वर्षा होने के बावजूद जल विज्ञान संबंधी सूखा पड़ सकता है।

इनमें बारिश से संबंधित संकेतक अनिवार्य हैं।

इसके साथ कृषि, रिमोट सेंसिंग, मिट्टी की नमी और जल स्रोतों से जुड़े चार समूहों में से कम-से-कम तीन प्रभाव संकेतकों का आकलन किया जाता है। इसके बाद क्षेत्रीय सर्वेक्षण (Field Verification) से निष्कर्षों की पुष्टि की जाती है।

सूखाग्रस्त घोषित कौन करता है?

संबंधित राज्य सरकार आधिकारिक अधिसूचना जारी करके सूखा घोषित करती है। अधिसूचना में प्रभावित क्षेत्र और सूखे की गंभीरता का उल्लेख किया जाता है। आकलन जिला, ब्लॉक, तहसील या अन्य प्रशासनिक इकाई के स्तर पर हो सकता है।

ध्यान दें: ये केंद्र सरकार के 2016 के दिशानिर्देश हैं। इन्हें हर राज्य में हूबहू लागू होने वाला बाध्यकारी नियम नहीं समझना चाहिए; राज्यों की आकलन प्रक्रिया में अंतर हो सकता है।

पांढुर्ना का हाल

किसान हरनाम सिंह सेंगर कहते है की कम बारिश से किसानो की फसल बर्बाद हो गई है। सरकार किसानो के लिए कुछ नहीं कर रही है, किसान कर्जे लेकर अपनी खेती को तैयार करते हैं, ऊपर से हमारी फसल पूरी बर्बाद हो गई है। इस समय हमें का करना चाहिए ? इस साल तो हमारी खरीफ की फसल भी ख़राब हुई और रबी की फसल भी गयी। बिजली वाले हमें नोटिस पर नोटिस दिए जा रहे है।

किसान शंकर बागडे कहते है की इस समय पानी की कोई व्यवस्था नहीं है, डेम पूरी तरह सुख गए है और बारिश कम होने से बहुत मुश्किलें है। पानी इतना भी नहीं है की चना बोया जा सके। ऐसे समय में किसान क्या करता है।

जयंत घोड़े बताते है की यह आन्दोलन किसानों के साथ ही सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, आंदोलन के बाद किसान प्रदर्शन करते हुए संत जगनाड़े चौक से कलेक्टर कार्यालय पहुचे जहा पर किसानो की मांग रखते हुए जल्द से जल्द सभी मांगो को पूरा करने की बात रखी। वे बताते है की जिले के कलेक्टर ने कहा की किसानो की बात को ऊपर तक पहुंचाया जायेगा। जिले के पूर्व सांसद नकुलनाथ ने कहा की अगर जल्द से जल्द कोई कार्यवाही नहीं होती है तो इसके बाद प्रदेश स्तर का आन्दोलन किया जायेगा। 

लेटेस्ट अपडेट्स के लिए हमारे व्हाट्सऐप चैनल को फॉलो करें

SCROLL FOR NEXT