जलवायु परिवर्तन ने किसानों के लिए खेती-बारी को और भी चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा बना दिया है। इससे निपटने के लिए कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देना ज़रूरी हो। 

 

फोटो : पेक्सेल.कॉम 

जलवायु परिवर्तन

स्‍मार्ट खेती और जलवायु जोखिम से निपटने वाले 3 नवाचारों को NABARD ने दिया अवॉर्ड

Gates Foundation और Dalberg Advisors के सहयोग से आयोजित National Climate Stack Innovation Challenge 2026 के तहत दिए गए 30 लाख रुपये के पुरस्‍कार

Author : कौस्‍तुभ उपाध्‍याय
  • नई तकनीकों के ज़रिये किसानों को मिलेंगे खेती के नए समाधान, पहुंचेगा सैटेलाइट का क्लाइमेट डेटा, और एआई की ताकत

जलवायु परिवर्तन यानी Climate Change अब केवल मौसम वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों की चिंता का विषय नहीं रह गया है। इसके कारण बारिश का समय बदलना, अचानक भारी बारिश, फ्लैश फ्लड, लू (Heat Wave), सूखा पड़ना, और तापमान में उतार-चढ़ाव जैसी मौसमी अनियमितताएं सीधे तौर पर खेती को प्रभावित कर रही हैं। इसके कारण खेती की लागत, फसल की उत्पादकता, किसान की आय और ग्रामीण वित्तीय व्यवस्था पर प्रतिकूल असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। इसलिए आज केवल यह जानना पर्याप्त नहीं है कि मौसम कैसा रहेगा, बल्कि यह जानना भी जरूरी है कि किसी खास गांव, फसल या खेत पर जलवायु जोखिम का असर कितना हो सकता है। साथ ही इन जोखिमों से निपटने की कारगर रणनीति व तकनीकों की भी किसानों की सख्‍त ज़रूरत बनती जा रही है।

कृषि क्षेत्र की इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए नाबार्ड यानी राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (National Bank for Agriculture and Rural Development : NABARD) ने National Climate Stack Innovation Challenge शुरू किया। 2026 में इसके पहले संस्करण का आयोजन किया गया । Gates Foundation और Dalberg Advisors के सहयोग से आयोजित इस चुनौती का मकसद ऐसे डिजिटल समाधान विकसित करना था जो जलवायु संबंधी बिखरे हुए आंकड़ों को कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी निर्णय-सूचना में बदल सकें। चुनौती का आधार NABARD का DiCRA यानी Data in Climate Resilient Agriculture प्लेटफॉर्म है। प्रस्तावित Climate Stack का लक्ष्य अगले 10–15 वर्षों के जलवायु जोखिमों का स्थानीय स्तर पर आकलन करने और उन्हें कृषि, ग्रामीण वित्त तथा सार्वजनिक नीति के फैसलों से जोड़ने वाली डिजिटल संरचना तैयार करना है।

150 से ज्यादा आवेदनों में से चुने गए तीन विजेता

National Climate Stack Innovation Challenge के लिए देशभर से 150 से ज्यादा आवेदन आए। चयन और प्रोटोटाइप विकास की प्रक्रिया को जांचने-परखने के बाद अंतिम चरण तक पहुंची 11 टीमों में से तीन समाधानों को पहले, दूसरे और तीसरे पुरस्‍कार के लिए चुना गया। इन विजेताओं के नामों की घोषणा 13 जुलाई 2026 को NABARD के 45वें स्‍थापना दिवस पर की गई, जबकि चयनित विजेताओं को 10 अगस्‍त को पुरस्‍कार प्रदान किया गया। इस प्रतियोगिता (चैलेंज) में कुल 30 लाख रुपये की पुरस्कार राशि रखी गई थी, जिसमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार क्रमशः 15 लाख, 10 लाख और 5 लाख रुपये हैं।

प्रथम पुरस्कार SatSure Analytics India Pvt. Ltd. को मिला। बेंगलुरु की इस कंपनी ने Climate Vulnerability Index (CVI) विकसित किया है, जो गांव स्तर पर विभिन्न जलवायु जोखिमों का आकलन करता है। SatSure के अनुसार इसका समाधान उपग्रह आंकड़ों, स्थानीयकृत खतरा मॉडलिंग और एआई आधारित विश्लेषण को मिलाकर जलवायु जोखिम का एक निर्णय-सहायक स्कोर तैयार करता है। इसका उपयोग कृषि के साथ-साथ बीमा, ऋण और अन्य वित्तीय निर्णयों में भी किया जा सकता है।

द्वितीय पुरस्कार EXPERIQS Private Limited को उसके WeatherEx.ai समाधान के लिए मिला। मुंबई के IIT Bombay परिसर में स्थित कंपनी का यह इनोवेशन हाइपरलोकल स्‍तर पर मौसम संबंधी सलाह, भविष्य के जलवायु अनुमानों और उनके फसल चक्र पर असर, बदलते मौसम के अनुरूप Crop Calendar में बदलाव, Growing Degree Days की निगरानी और फसल स्तर पर वित्तीय जोखिम विश्लेषण जैसी क्षमताओं को एक साथ लाता है। इसका एक महत्वपूर्ण उपयोग बैंकों और माइक्रोफाइनेंस संस्थानों के लिए कृषि ऋण जोखिम को बेहतर ढंग से समझना भी है।

तृतीय पुरस्कार Varsapradaya को मिला। बेंगलुरु की इस कंपनी का समाधान खास तौर पर प्लांटेशन और खेती के स्तर पर जलवायु जोखिम को व्यावहारिक फैसलों में बदलने पर केंद्रित है। इसमें खेत के सेंसर, एआई और जलवायु विज्ञान को मिलाकर सिंचाई संबंधी सलाह, फसल तनाव की शुरुआती चेतावनी, स्थानीय जलवायु जोखिम स्कोर और लंबे समय के जलवायु प्रभावों का आकलन किया जाता है। कंपनी के अनुसार इसका उद्देश्य जलवायु जानकारी को खेत और प्लांटेशन स्तर के वास्तविक फैसलों से जोड़ना है।

तीनों विजेताओं के काम पर एक नज़र 

तीनों कंपनियों की ओर से पेश किए गए समाधानों में एक समान बात यह है कि वे केवल आंकड़े दिखाने तक सीमित नहीं हैं। उनका उद्देश्य सैटेलाइट, मौसम, सेंसर, जलवायु मॉडलिंग और एआई से मिली जानकारी को ऐसे निर्णयों में बदलना है जिनका इस्तेमाल किसान, बैंक, बीमा कंपनियां और नीति निर्माता कर सकें।

पुरस्कार क्रमविजेतापुरस्कार राशिमुख्य काम
1SatSure Analytics India Private Limited₹15 लाखगांव स्तर पर Climate Vulnerability Index विकसित करना; उपग्रह और जलवायु डेटा से जलवायु जोखिम का आकलन और farmer advisories, वित्तीय पोर्टफोलियो आकलन व सार्वजनिक योजना में उपयोग।
2EXPERIQS Private Limited₹10 लाखब्लॉक स्तर पर drought intelligence platform विकसित करना; सूखा सूचकांकों, vegetation signals और climate projections से फसल चक्र पर प्रभाव तथा किसान वित्तीय तनाव का आकलन।
3VARSAPRADAYA Private Limited₹5 लाखजलवायु जोखिम/हैजार्ड स्कोरिंग और irrigation planning engine विकसित करना; जलवायु projections व satellite data से सिंचाई, crop-risk alerts और ग्रामीण ऋण आकलन में मदद।

DiCRA से National Climate Stack तक का सफर

इस पहल को समझने के लिए DiCRA यानी Data in Climate Resilient Agriculture को समझना जरूरी है। इसे जलवायु-सहनीय कृषि (climate-resilient agriculture) में किसानों की मदद के लिए डिजिटल सार्वजनिक संसाधन के रूप में विकसित किया गया है। UNDP (United Nations Development Programme) के अनुसार DiCRA में रिमोट सेंसिंग और पैटर्न-डिटेक्शन तकनीकों की मदद से जलवायु के प्रति अपेक्षाकृत अधिक संवेदनशील कृषि क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है। अब इसके जरिये अधिक व्यापक और इंटरऑपेरेबल Climate Stack में विकसित करने की कोशिश हो रही है। इसका मतलब अलग-अलग विभागों और संस्थानों के मौसम, जलवायु, कृषि, भू-स्थानिक (geospatial) और अन्य आंकड़ों को एक ऐसी डिजिटल संरचना में जोड़ना है, जहां अलग-अलग एप्लिकेशन और सेवाएं इन आंकड़ों का इस्तेमाल कर सकें।

NABARD के अनुसार Climate Stack का उद्देश्य 10–15 साल की अवधि के निकट-भविष्य वाले जलवायु खतरों के विश्वसनीय अनुमान तैयार करना और उन्हें कृषि, ग्रामीण वित्त तथा सार्वजनिक नीति के लिए निर्णय-सहायक सूचना में बदलना है। इसमें सूखा, बाढ़, अत्यधिक बारिश, लू, चक्रवात और भूस्खलन जैसे खतरे शामिल हो सकते हैं।

किसान के लिए इसका क्या मतलब है?

किसान के लिए जलवायु जोखिम कोई सैद्धांतिक अवधारणा नहीं, बल्कि यह व्यावहारिक  स्‍तर पर उनकी आजीविका को प्रभावित करने वाली चीज बन चुकी है। अत: इससे निपटने के लिए उन्‍हें एक सक्षम "क्लाइमेट मॉडल" की सख्‍त जरूरत है, जिसके जरिये वह यह जान सकें कि इस साल कौन सी फसल लगानी चाहिए? बुवाई में कितना बदलाव किया जाए? सिंचाई कब और कितनी की जाए? सूखे की आशंका वाले क्षेत्र में कौन सा जोखिम कम किया जा सकता है? फसल खराब होने की संभावना कितनी है? बैंक को कृषि ऋण देते समय मौसम से जुड़े जोखिम को कैसे शामिल किया जाए?

Climate Stack से विकसित होने वाले ऐसे समाधान इन सवालों के जवाब को अधिक स्थानीय बनाने की कोशिश करते हैं।

मिसाल के लिए, किसी पूरे जिले को सूखा प्रभावित बताना एक सामान्य सूचना है। लेकिन यदि किसी डिजिटल प्रणाली से यह पता चल सके कि जिले के किस ब्लॉक या गांव में अगले कुछ वर्षों में सूखे का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक है और वहां कौन सी फसलें अधिक संवेदनशील हैं, तो वही जानकारी सिंचाई योजना, फसल बीमा, कृषि ऋण और फसल चयन के फैसलों में ज्यादा उपयोगी हो सकती है। यही इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। यह मौसम की भविष्यवाणी को केवल "मौसम सूचना" के रूप में नहीं देखती, बल्कि उसे कृषि जोखिम प्रबंधन की सूचना में बदलने की कोशिश करती है।

जलवायु और कृषि नवाचार से जुड़े कुछ अन्य पुरस्कार

खेती पर जलवायु परिवर्तन और मौसम की चरम स्थितियों केे बढ़ते प्रभावों को देखते हुए इनसे निपटने के उपायों को बढ़ावा देने के लिए हाल के वर्षों में National Climate Stack Innovation Challenge की तरह ही कई अन्‍य प्रतियोगिताओं और पुरस्‍कारों की घोषणा की गई है। कुछ प्रमुख पुरस्‍कार इस प्रकार हैं- 

  • Climate Innovation Challenge, South Asia: World Bank के Program for Asia Resilience to Climate Change के तहत इस चुनौती में जलवायु-सहनीय कृषि, जल संसाधन प्रबंधन, जलवायु सूचना एवं विश्लेषण, शुरुआती चेतावनी प्रणाली और जोखिम वित्त जैसे क्षेत्रों के समाधान आमंत्रित किए गए। 2022 में 17 नवाचारों को विजेता चुना गया।

  • Cropin का Climate Innovation Challenge समाधान: Cropin को 2022 में Climate Innovation Challenge grant के विजेताओं में चुना गया। उसका समाधान बांग्लादेश और श्रीलंका के छोटे किसानों को तकनीक आधारित व्यक्तिगत जलवायु सलाह देने पर केंद्रित था।

  • FICCI Agri Startup Awards: 2022 में Best Agri Startup Promoting Climate Resilience श्रेणी में Nurture.farm को प्रथम, Natura Crop Care को द्वितीय और Farmneed AgriBusiness को तृतीय पुरस्कार मिला। यह श्रेणी सीधे कृषि में जलवायु-सहनीयता बढ़ाने वाले स्टार्टअप को पहचानने के लिए बनाई गई थी।

  • XCarb India Accelerator: 2024 में ArcelorMittal के XCarb India Accelerator ने तीन जलवायु-तकनीकी स्टार्टअप को संयुक्त विजेता चुना। UrjanovaC, AgroMorph Technosolutions और Susstains Engineering Solutions को औद्योगिक उत्सर्जन घटाने वाली तकनीकों के विकास के लिए पुरस्कार और मार्गदर्शन मिला।

इन पहलों की प्रकृति अलग-अलग है, लेकिन इनका साझा उद्देश्य एक ही दिशा में जाता है: जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाली समस्याओं के लिए वैज्ञानिक ज्ञान को व्यावहारिक और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले समाधान में बदलना।

जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश का समय बदलना, अचानक भारी बारिश, फ्लैश फ्लड, लू (Heat Wave), सूखा पड़ना, और तापमान में उतार-चढ़ाव जैसी मौसमी अनियमितताएं सीधे तौर पर खेती को प्रभावित कर रही हैं।

जलवायु परिवर्तन से जुड़े पुरस्कार-इनोवेशन क्यों जरूरी ?

जलवायु परिवर्तन की समस्या का एक बड़ा हिस्सा यह है कि समाधान केवल शोध-पत्रों में उपलब्ध रह जाते हैं। किसी वैज्ञानिक मॉडल का वास्तविक महत्व तब बढ़ता है जब वह किसान को फसल चुनने में, बैंक को ऋण जोखिम समझने में, बीमा कंपनी को नुकसान का आकलन करने में या सरकार को संसाधनों की प्राथमिकता तय करने में मदद करे।

Innovation Challenge इस "लैब से जमीन तक" की दूरी को कम करने का माध्यम बन सकते हैं। इनके जरिए सरकार, वित्तीय संस्थान, शोध संस्थान, बड़ी तकनीकी कंपनियां और स्टार्टअप एक ही समस्या पर काम करते हैं। प्रतियोगिता के कारण अलग-अलग तकनीकी दृष्टिकोण सामने आते हैं और विशेषज्ञों की मदद से उनमें से अधिक व्यवहारिक समाधानों को आगे बढ़ाया जा सकता है।

ऐसी चुनौतियों का दूसरा महत्व जोखिम पूंजी और शुरुआती वित्त से जुड़ा है। कई जलवायु-तकनीकी स्टार्टअप के पास विचार और तकनीक तो होती है, लेकिन बड़े स्तर पर परीक्षण के लिए संसाधन नहीं होते। पुरस्कार राशि उन्हें शुरुआती प्रोटोटाइप को बेहतर बनाने और वास्तविक परिस्थितियों में उसका परीक्षण करने का अवसर देती है।

तीसरा और शायद सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि ऐसे कार्यक्रम केवल पुरस्कार देकर खत्म नहीं होते। National Climate Stack Challenge के मामले में भी चुने गए समाधानों को आगे चलकर DiCRA में एकीकरण, पायलट या NABARD और उसके साझेदार कार्यक्रमों के माध्यम से अपनाए जाने की संभावना रखी गई है।

असली परीक्षा पुरस्कार जीतने के बाद

पुरस्कार जीतना किसी समाधान की उपयोगिता का अंतिम प्रमाण नहीं है। जलवायु तकनीक में असली चुनौती उसके बाद शुरू होती है। मॉडल की सटीकता अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों और फसलों में कितनी है, इसके आंकड़े कितने विश्वसनीय हैं, किसान या बैंक उसे कितनी आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं और क्या यह बड़े पैमाने पर कम लागत में चल सकता है, इन सवालों के जवाब जरूरी होंगे। इसके अलावा जलवायु डेटा की गुणवत्ता, अलग-अलग स्रोतों के आंकड़ों की संगतता और एआई मॉडल की पारदर्शिता भी महत्वपूर्ण हैं। अगर कोई सिस्‍टम किसी गांव को "उच्च जोखिम" वाला बताता है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि यह निष्कर्ष किन आंकड़ों और किस मॉडल के आधार पर निकाला गया है।

इस लिहाज से National Climate Stack Challenge केवल एक पुरस्कार प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारत में climate intelligence को डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में बदलने की कोशिश है। इसके तीन विजेताओं के समाधान इस बड़े प्रयोग के अलग-अलग हिस्सों को सामने रखते हैं। SatSure का जोखिम आकलन, EXPERIQS का मौसम और फसल चक्र विश्लेषण तथा Varsapradaya का खेत-स्तरीय सिंचाई और जोखिम प्रबंधन इस बात की झलक देते हैं कि आने वाले समय में जलवायु डेटा खेती के फैसलों का एक महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

जलवायु परिवर्तन के दौर में खेती का भविष्य केवल बेहतर बीज, सिंचाई और मशीनों पर निर्भर नहीं होगा। यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि किसान के पास बदलते मौसम को पहले से समझने और उसके अनुसार फैसला लेने की कितनी क्षमता है। National Climate Stack इसी क्षमता को डिजिटल आधार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयोग है।

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