बाराबंकी की कमरावां झील विदेशी प्रवासी पक्षियों का एक बड़ा आश्रय स्थल बनकर उभरी है, पर वेटलैंड्स पर अतिक्रमण व पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर हो रहे निर्माणों के चलते यह प्राकृतिक स्थल खतरे में पड़ते जा रहे हैं।
स्रोत : विकी कॉमंस
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटे जिले बाराबंकी की आर्द्रभूमियों (Wetlands) पर अतिक्रमण और सुंदरीकरण के नाम पर पक्के निर्माण किए जाने पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने एक बार फिर सख्त रवैया दिखाया है। अधिकरण में इसे लेकर चर रहे ‘नरेन्द्र कुशवाह एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य' के मामले में कोर्ट ने जिला प्रशासन से एक बार फिर से जवाब मांगा है।
आवेदक नरेन्द्र कुशवाहा, चंद्रप्रकाश तिवारी, बीएल भास्कर, डॉ. अजय कुमार आदि द्वारा दायर याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। इसमें आरोप लगाया गया है कि बाराबंकी जिले की कई महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों पर अवैध कब्जे बरकरार हैं और सुंदरीकरण के नाम पर यहां कंक्रीट के स्थायी निर्माण किए जा रहे हैं। याचिका में सरायबरई, सराही, फतेहपुर बघार, नटकौली, हैदरगढ़, चकरौरा, भीतरी, रामनगर आदि वेटलैंड्स पर अतिक्रमण की बात उठाई गई है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने एनजीटी को बताया कि इन जल निकायों में अवैध निर्माण कार्य जारी है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन और जल संरक्षण पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। इसकी विस्तृत जानकारी के लिए आप हमारी यह रिपोर्ट पढ़ सकते हैं -
बाराबंकी की झीलें अब नहीं बनेंगी पार्क, 'दिखावटी-विकास' पर हुई पर्यावरण की जीत !
बाराबंकी की भगहर झील पर महादेवा इको टूरिज्म स्थल के काम पर एनजीटी ने आदेश देकर रोक लगाई थी, पर बताया जा रहा है कि इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी है।
इससे पहले दिसंबर 2025 में हुई सुनवाई में अधिकरण ने जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया था कि संबंधित जल निकायों तथा उनके बफर जोन में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण न होने दिया जाए। हालिया सुनवाई (9 मार्च 2026) के दौरान जिला मजिस्ट्रेट बाराबंकी की ओर से प्रस्तुत अधिवक्ता ने अधिकरण को बताया था कि जल निकाय या उसके बफर जोन में वर्तमान में कोई निर्माण कार्य नहीं हो रहा है। आवेदक ने इस दावे का विरोध करते हुए कहा था कि कई स्थानों पर निर्माण गतिविधियां अब भी जारी हैं और जिला प्रशासन द्वारा अधिकरण में झूठी और भ्रामक रिपोर्ट प्रस्तुत की जा रही है। उनके अनुसार बाराबंकी जिले के अंतर्गत आने वाली कई महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों और जल निकायों को ‘इको टूरिज्म’ के नाम पर कंक्रीटीकरण किया जा रहा है, जिससे उनके प्राकृतिक स्वरूप और पारिस्थितिक तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
इस पर अधिकरण ने आवेदक को निर्देश दिया है कि वह कथित निर्माण कार्य से संबंधित ठोस साक्ष्य और सामग्री रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करें, ताकि मामले की वस्तुस्थिति स्पष्ट हो सके। मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकरण ने जिला प्रशासन के जवाब को रिकॉर्ड पर लेने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 18 मई 2026 की तारीख तय की है।
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