वुलर झील

 

फोटो - इमरान रसूल डार 

पर्यावरण

भारत में रामसर स्थलों की पूरी सूची (2026) - 101 आर्द्रभूमियों की पूरी जानकारी

प्रस्तुत है भारत के 100 रामसर स्थलों की पूरी सूची। इस लेख में प्रत्येक स्थल का नाम, संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और अधिसूचना की तिथि शामिल है। विश्व आर्द्रभूमि दिवस के संदर्भ में प्रकाशित यह संकलन भारत की आर्द्रभूमियों की भौगोलिक विविधता और उनके जल-सुरक्षा, जैव विविधता तथा आजीविका से जुड़े महत्व को बताता करता है।

Author : अजय मोहन

रामसर स्थल (Ramsar Site) ऐसे आर्द्रभूमि या दलदली भूमि को कहा जाता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि के रूप में मान्यता दी गई हो। ऐसी आर्द्रभूमि जहां पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों या कीटों आदि की दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हों, जो जैव विविधता बनाए रखने के लिए पौधों और जानवरों की प्रजातियों को आश्रय देता हो और नियमित रूप से 20,000 या उससे अधिक जलपक्षी आते होंं,आम तौर पर उन जगहों को रामसर साइट का दर्जा प्रदान किया जाता है। ऐसे स्थल स्थानीय मछलियों के जीवन चक्र, भोजन और प्रजनन के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं।

एशिया में नंबर 1 पर भारत

भारत में कुल 101 रामसर स्थल हैं। 101वाँ रामसर स्थल अरुणाचल प्रदेश की ग्लॉ झील है, जिसे तीन अगस्त को रामसर स्थल का दर्जा मिला। यह राज्य की पहली रामसर साईट है। इससे पहले देश की 100वीं रामसर साईट उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार (सुरहा ताल) बनी थी जिसको 5 जून 2026 को रामसर साइट का दर्जा प्राप्‍त हुआ और इसी के साथ भारत रामसर स्‍थलों की संख्‍या के मामले में एशिया में नंबर 1 पर पहुंच गया। विश्‍व की बात करें तो भारत तीसरे स्थान पर आता है। पहले स्थान पर यूके जहां 176 रामसर स्थल हैं और दूसरे पर मैक्सिको (144) आता है।

वर्ष 2026 में चार नाम जुड़े
जनवरी 2026 में भारत की रामसर सूची में तीन नए महत्वपूर्ण आर्द्रस्थल शामिल किए गए। उत्तर प्रदेश के एटा ज़िले में स्थित पटना पक्षी विहार को रामसर स्थल के रूप में मान्यता मिली। लगभग 109 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह छोटा लेकिन जैव विविधता से समृद्ध आर्द्रस्थल प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण आवास है। वहीं, गुजरात के कच्छ ज़िले में स्थित छारी-ढांड आर्द्रभूमि को भी रामसर सूची में शामिल किया गया, जिसका क्षेत्रफल लगभग 227 वर्ग किलोमीटर है। दोनों स्थलों को भारत सरकार द्वारा 30 जनवरी 2026 को रामसर कन्वेंशन के तहत नामित किया गया। इनके बाद तीसरा नाम 22 अप्रैल 2026 को अलीगढ़ के शेखा पक्षी विहार का जुड़ा। चौथा नाम जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार सुराह ताल का है, जिसके 5 जून 2026 को रामसर साइट का दर्जा दिया गया।

इसी वैश्विक महत्व को रेखांकित करने के लिए रामसर कन्वेंशन के तहत दुनिया भर की प्रमुख आर्द्रभूमियों को “अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि” के रूप में मान्यता दी जाती है। जिन्हें रामसर स्थल कहा जाता है। जैवविविधता को संरक्षित रखने की दिशा में भारत ने भी बीते एक दशक में बहुत तेजी से कदम बढ़ाए हैं। सरकार, स्थानीय लोगों और तमाम पर्यावरणीय संस्थाओं व संगठनों के प्रयासों का ही नतीजा है कि आज देश में 999 रामसर स्थल अधिसूचित हैं। भारत की रामसर सूची में अंतिम अपडेट दिसंबर 2025 में हुआ जब छत्तीसगढ़ के कोपरा जलाशय को सूची में शामिल किया गया।

पिचावरम मैंग्रोव, तमिल नाडु 

आर्द्रभूमियों में दिखाई देती है भारत की जैव विविधता

भारत की भौगोलिक और जलवायु विविधता देश की आर्द्रभूमियों में भी साफ दिखाई देती है। हिमालय के ऊंचे पर्वतों के बीच झीलें हों या तटीय मैंग्रोव। देश की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील वुलर झील हो या खारे–मीठे पानी की (Brackish Water Lagoon) चिलिका झील हो। या फिर सुंदरबन जैसा विशाल डेल्टा क्षेत्र हो। शहरी झीलों से लेकर विशाल नदी डेल्टा तक रामसर स्थलों की सूची भारत की जल-परिस्थितिकी का एक व्यापक चित्र प्रस्तुत करती है। ये स्थल न केवल जैव विविधता के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका, मत्स्य पालन, कृषि और पर्यटन से भी सीधे जुड़े हुए हैं।

हालाँकि, आर्द्रभूमियों पर बढ़ता शहरीकरण, प्रदूषण, जल प्रवाह में बदलाव और भूमि उपयोग परिवर्तन का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में रामसर मान्यता केवल अंतरराष्ट्रीय दर्जा भर नहीं है, बल्कि बेहतर प्रबंधन, निगरानी और नीति-समन्वय की आवश्यकता की भी याद दिलाती है। और तो और ये वो स्थल हैं जो न केवल प्रकृति के साथ हमारे रिश्‍ते को मजबूत करते हैं, बल्कि विदेशी पक्षियों की भी पहली पसंद हैं।

भारत में राज्यवार रामसर स्थलों की सूची (List of Ramsar Sites in India)

अप्रैल 2026 तक भारत में कुल 99 रामसर स्थल हैं। इनमें सबसे ज्यादा 20 रामसर स्थल तमिलनाडु में हैं। दूसरे स्थान पर 12 रामसर आर्द्रभूमियों के साथ उत्तर प्रदेश है और तीसरे नंबर छह-छह रामसर सथलों के साथ बिहार, ओडिशा और पंजाब हैं। नीचे पूरी सूची प्रस्तुत की गई है, जिसमें प्रत्येक स्थल का नाम, संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और अधिसूचना की तिथि शामिल है।

क्र. सं.राज्य/यूटीआर्द्रभूमिनामांकन तिथि/वर्षक्षेत्रफल (हेक्टेयर)घोषणा की तिथि/वर्ष
1आंध्र प्रदेश कोल्लेरू झील19.08.200290,10020.12.2002
2अरुणाचल प्रदेश ग्लॉ झील2025129ˇ03.08.2026
3असम दीपोर बील19.08.20024,00020.12.2002
4बिहारकबरताल आर्द्रभूमि21.07.20202,62016.10.2020
5बिहारनागी पक्षी अभयारण्य11.10.20232065.06.2024
6बिहारनक्ती पक्षी अभयारण्य11.10.20233335.06.2024
7बिहारगोकुल जलशय13.05.202544826.09.2025
8बिहारउदयपुर झील13.05.202531926.09.2025
9बिहारगोगबिल झील13.05.20258730.10.2025
10छत्तीसगढ़कोपरा जलाशय8.08.202521012.12.2025
11गुजरात नलसरोवर24.09.201212,00028.08 2012
12गुजरात वधवाना आर्द्रभूमि5.04.202163013.09.2021
13गुजरात थोल झील वन्यजीव अभयारण्य5.04.202169913.09.2021
14गुजरात खिजड़िया वन्यजीव अभयारण्य13.04.20215121.02.2022
15गुजरात छारी ढंड वेटलैंड रिजर्व कच्छदिसंबर 202522,70030.01.2026
16गोवा नंदा झील8.06.2022423.08.2022
17हरियाणासुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान25.05.202114313.09.2021
18हरियाणाभिंडावास वन्यजीव अभ्यारण्य25.05.202141213.09.2021
19हिमाचल प्रदेश पोंग बांध झील19.08.200215,66220.12.2002
20हिमाचल प्रदेश चंदरताल आर्द्रभूमि8.11.20054920.01.2006
21हिमाचल प्रदेश रेणुका आर्द्रभूमि8.11.20052020.01.2006
22जम्मू एवं कश्‍मीर वुलर झील23.03.199018,9001990
23जम्मू एवं कश्‍मीर सुरिंसर-मानसर झीलें8.11.200535020.01.2006
24जम्मू एवं कश्‍मीर होकेरा आर्द्रभूमि8.11.20051,37520.01.2006
25जम्मू एवं कश्‍मीर हाइगम आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व8.06.202280213.08.2022
26जम्मू एवं कश्‍मीर शैलबुघ आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व8.06.20221,67513.08.2022
27झारखंड उधवा झील पक्षी अभयारण्य8.01.202493630.01.2025
28कर्नाटक रंगनाथिट्टू पक्षी अभयारण्य15.02.20225183.08.2022
29कर्नाटक अंकसमुद्र पक्षी संरक्षण रिजर्व10.03.20239931.01.2024
30कर्नाटक अघनाशिनी मुहाना14.02.20234,80131.01.2024
31कर्नाटक मगाडी केरे संरक्षण अभ्यारण्य14.02.20235431.01.2024
32केरल अस्थामुडी आर्द्रभूमि19.08.20026,14020.12.2002
33केरल सस्थमकोट्टा झील19.08.200237320.12.2002
34केरल वेम्बनाडकोल आर्द्रभूमि19.08.2002151,25020.12.2002
35लद्दाख त्सो कार आर्द्रभूमि परिसर17.11.20209,57723.12.2020
36लद्दाख त्सो मोरीरी झील19.08.200212,00020.12.2002
37मध्‍य प्रदेश भोज आर्द्रभूमि19.08.20023,20120.12.2002
38मध्‍य प्रदेश सिरपुर आर्द्रभूमि7.01.20221613.08.2022
39मध्‍य प्रदेश साख्य सागर7.01.202224826.07.2022
40मध्‍य प्रदेश यशवंत सागर7.01.202282313.08.2022
41मध्‍य प्रदेश तावा जलाशय8.01.202420,05014.08.2024
42महाराष्‍ट्र नांदूर मधमेश्वर21.06.20191,43727.01.2020
43महाराष्‍ट्र लोनार झील22.07.202042712.11.2020
44महाराष्‍ट्र ठाणे क्रीक13.04.20226,52113.08.2022
45मणिपुर लोकटक झील23.03.199026,6001990
46मिज़ोरमपाला आर्द्रभूमि31.08.20211,85026.07.2022
47ओडिशाचिल्का झील1.10.1981116,5001982
48ओडिशाभितरकनिका मैंग्रोव19.08.200265,00020.12.2002
49ओडिशासतकोसिया घाटी12.10.202198,1973.08.2022
50ओडिशाताम्पारा झील12.10.202130013.08.2022
51ओडिशाहीराकुंड जलाशय12.10.202165,40013.08.2022
52ओडिशाअंसुपा झील12.10.202123113.08.2022
53पंजाब हरिके झील23.03.19904,1001990
54पंजाब कंजली झील22.01.200218325.01.2002
55पंजाब रोपड़ झील22.01.20021,36525.01.2002
56पंजाब ब्यास संरक्षण आरक्षित26.09.20196,42927.01.2020
57पंजाब केशोपुर - मियानी सामुदायिक रिजर्व26.09.201934427.01.2020
58पंजाब नांगल वन्यजीव अभयारण्य26.09.201911627.01.2020
59राजस्थानकेवलादेव घाना राष्ट्रीय उद्यान1.10.19812,8731982
60राजस्थानसांभर झील23.03.199024,0001990
61राजस्थानमेनार आर्द्रभूमि परिसर19.02.20254634.06.2025
62राजस्थानखिचन आर्द्रभूमि19.02.2025544.06.2025
63राजस्थानसिलिसेढ़ झील7.07.202531612.12.2025
64सिक्क‍िमखाचोएडपालरी आर्द्रभूमि15.07.202417230.01.2025
65तमिलनाडुप्वाइंट कैलिमेरे वन्यजीव एवं पक्षी अभयारण्य19.08.200238,50020.12.2002
66तमिलनाडुकून्तंकुलम पक्षी अभयारण्य8.11.2021723.08.2022
67तमिलनाडुचित्रांगुडी पक्षी अभयारण्य8.11.202126013.08.2022
68तमिलनाडुकरिकिली पक्षी अभयारण्य8.04.20225826.07.2022
69तमिलनाडुपिचावरम मैंग्रोव8.04.20221,47926.07.2022
70तमिलनाडुपल्लीकरनई मार्श रिजर्व वन8.04.20221,24826.07.2022
71तमिलनाडुमन्नार की खाड़ी समुद्री जीवमंडल अभ्यारण्य8.04.202252,6723.08.2022
72तमिलनाडुवेम्बन्नूर आर्द्रभूमि परिसर8.04.2022203.08.2022
73तमिलनाडुवेलोड पक्षी अभयारण्य8.04.2022773.08.2022
74तमिलनाडुउदयमार्थंडपुरम पक्षी अभयारण्य8.04.2022443.08.2022
75तमिलनाडुवेदान्थंगल पक्षी अभयारण्य8.04.2022403.08.2022
76तमिलनाडुसुचिंद्रम थेरूर आर्द्रभूमि परिसर8.04.20229413.08.2022
77तमिलनाडुवडुवुर पक्षी अभयारण्य8.04.202211313.08.2022
78तमिलनाडुकंजीरंकुलम पक्षी अभयारण्य8.04.20229713.08.2022
79तमिलनाडुकारावेट्टी पक्षी अभयारण्य24.05.202345431.01.2024
80तमिलनाडुलॉन्गवुड शोला आरक्षित वन24.05.202311631.01.2024
81तमिलनाडुकाझुवेली पक्षी अभयारण्य16.01.20245,15214.08.2024
82तमिलनाडुनंजरायन पक्षी अभयारण्य16.01.202412614.08.2024
83तमिलनाडुसक्कराकोट्टई पक्षी अभयारण्य15.07.202423030.01.2025
84तमिलनाडुथेरथांगल पक्षी अभयारण्य15.07.20242930.01.2025
85त्रिपुरारुद्रसागर झील8.11.200524020.01.2006
86उत्तर प्रदेशऊपरी गंगा नदी8.11.200526,59020.01.2006
87उत्तर प्रदेशनवाबगंज पक्षी अभयारण्य19.09.201922527.01.2020
88उत्तर प्रदेशपार्वती अर्गा पक्षी अभयारण्य2.12.201972227.01.2020
89उत्तर प्रदेशसमन पक्षी अभयारण्य2.12.201952627.01.2020
90उत्तर प्रदेशसमसपुर पक्षी अभयारण्य3.10.201979927.01.2020
91उत्तर प्रदेशसैंडी पक्षी अभयारण्य26.09.201930927.01.2020
92उत्तर प्रदेशसरसई नवारझील19.09.201916127.01.2020
93उत्तर प्रदेशसुर सरोवर21.08.202043112.11.2020
94उत्तर प्रदेशहैदरपुर आर्द्रभूमि13.04.20216,9088.12.2021
95उत्तर प्रदेशबखीरा वन्यजीव अभयारण्य29.06.20212,8941.02.2022
96उत्तर प्रदेशपटना पक्षी विहार, एटादिसंबर 202510930.01.2026
97उत्तर प्रदेशशेखा पक्षी विहार, अलीगढ़दिसंबर 20254022.04.2026
98उत्तर प्रदेशजय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) 19 जनवरी 20263,43305.06.2026
99उत्तराखंडआसन संरक्षण आरक्षित क्षेत्र21.07.202044416.10.2020
100पश्चिम बंगाल पूर्वी कोलकाता आर्द्रभूमि19.08.200212,50020.12.2002
101पश्चिम बंगाल सुंदरबन आर्द्रभूमि30.01.2019423,0001.02.2019
विश्व आर्द्रभूमि दिवस के अवसर पर यह संकलन यह समझने का अवसर भी देता है कि भारत में आर्द्रभूमि संरक्षण किस दिशा में बढ़ रहा है और किन क्षेत्रों में अभी भी मजबूत नीतिगत और संस्थागत प्रयासों की जरूरत है।

भारत का 99वा रामसर स्थल 

पृथ्‍वी दिवस के अवसर पर 22 अप्रैल 2022 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित शेखा झील पक्षी अभयारण्य (Shekha Jheel Bird Sanctuary) को आधिकारिक तौर पर भारत का 99वां रामसर स्थल घोषित किया गया है। 

यह एक ताजे पानी की झील है, जो लगभग 40 हेक्टेयर में फैली हुई है और ऊपरी गंगा नहर से जुड़ी है। यह एक महत्वपूर्ण बर्ड साइट है जो 'सेंट्रल एशियन फ्लाईवे' पर बार-हेडेड गूज़ जैसे प्रवासी पक्षियों को आश्रय देती है।

भारत के रामसर स्थल देश की जल-सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन की रीढ़ हैं। इन स्थलों की सूची केवल नामों का संकलन नहीं, बल्कि यह उस प्राकृतिक पूंजी का संकेत है, जिस पर भविष्य की जल-योजनाएं और जलवायु अनुकूलन रणनीतियाँ निर्भर करती हैं। विश्व आर्द्रभूमि दिवस के संदर्भ में यह ज़रूरी है कि रामसर मान्यता को ज़मीनी संरक्षण, सामुदायिक भागीदारी और दीर्घकालिक जल प्रबंधन से जोड़ा जाए।

किसी स्थल को 'रामसर स्थल' कब घोषित किया जाता है?

किसी भी आर्द्रभूमि को रामसर स्थल का दर्जा तब मिलता है, जब वह रामसर कन्वेंशन द्वारा तय किए गए 9 अंतरराष्ट्रीय मानदंडों में से कम से कम एक को पूरा करती हो। मुख्य मानदंड इस प्रकार हैं:

  • वह क्षेत्र अपने आप में अनोखा हो या वहाँ कोई दुर्लभ या संकटग्रस्त प्रजाति पाई जाती हो।

  • वह जैव विविधता को बनाए रखने के लिए पौधों और जानवरों की प्रजातियों को आश्रय देता हो।

  • वहाँ नियमित रूप से 20,000 या उससे अधिक जलपक्षी आते हों।

  • वह स्थानीय मछलियों के जीवन चक्र, भोजन और प्रजनन के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत हो।

रामसर स्थल घोषित होने से उस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलती है, संरक्षण के लिए तकनीकी सहायता मिलती है और पर्यावरण पर्यटन को बढ़ावा मिलता है।

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