पर्यावरण और वन संरक्षण जलवायु परिवर्तन के परिणामों से निपटने का सबसे कारगर उपाय है।
फोटो - water flicker
पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाली कई शख्सीयतों और संस्थाओं को देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में चौथे ‘इको वॉरियर’ पुरस्कार प्रदान किए गए। भारतीय वन सेवा संघ (IFSA) और इंडियन मास्टरमाइंड्स (Indian Masterminds) की ओर से आयोजित इस समारोह में वन, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वन अधिकारियों और संरक्षण विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया। वन एवं वन्यजीव संरक्षण में दशकों लंबे योगदान के लिए वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी बृज किशोर सिंह को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ दिया गया। इसके साथ ही 15 वन अधिकारियों और संरक्षण विशेषज्ञों को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार दिए गए।
इस मौके पर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने विजेताओं को पुरस्कार वितरित करते हुए पर्यावरण संरक्षण की राष्ट्रीय जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को बचाए रखने के लिए हमारे जंगल बहुत जरूरी हैं। क्योंकि जंगल ही जल, मिट्टी, जैव विविधता से लेकर जलवायु और लाखों लोगों की आजीविका तक को सहारा देते हैं। उन्होंने देश में वनों के संरक्षण में वन कर्मियों के अग्रणी योगदान की सराहना करते हुए इस कार्य में स्थानीय स्तर पर जनजातीय और वनवासी समुदायों की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश में वन और पर्यावरण के संरक्षण का काम लगातार जटिल होता जा रहा है। भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के साथ जलवायु परिवर्तन, अप्रत्याशित चरम मौसम की घटनाएं, जंगलों में आग और जल संकट जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। इसके समाधान के लिए जरूरी है कि संरक्षण को केवल एक सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय जिम्मेदारी रूप में देखा जाए।
‘इको वॉरियर’ विभिन्न श्रेणियों में उल्लेखनीय भूमिकाओं के लिए दिया जाता है। इसकी प्रमुख श्रेणियां इस प्रकार हैं -
पुरस्कार समारोह में कर्नाटक कैडर के 1976 बैच के आईएफएस अधिकारी बृज किशोर सिंह को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ प्रदान किया गया। कर्नाटक में वन सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के साथ चंदन तस्कर और डाकू वीरप्पन की गतिविधियों से निपटने के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल रही है।
इस श्रेणी में ओडिशा के सिमलीपाल बाघ अभ्यारण्य के वन संरक्षक एवं प्रभारी क्षेत्र निदेशक डॉ. प्रकाश चंद गोगिनेनी और उत्तर प्रदेश के पीलीभीत बाघ अभ्यारण्य के डीएफओ मनीष सिंह को सम्मानित किया गया। उन्हें तकनीक, सुरक्षा उपायों और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से बाघ एवं वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने के लिए पुरस्कार मिला।
इस श्रेणी में कोयंबटूर (तमिलनाडु) की डीसीएफ सेल्वी एस. सेनबगाप्रिया और पालमपुर वन प्रभाग (हिमाचल प्रदेश) के डीसीएफ डॉ. संजीव शर्मा को सम्मानित किया गया। इन सभी को इनके द्वारा किए गए समुदाय आधारित संरक्षण, वैज्ञानिक निगरानी, वन्यजीव बचाव एवं पुनर्वास के कार्यों और अवैध शिकार-रोधी अभियान में इनकी अग्रणी भूमिका के लिए सम्मानित किया गया।
‘पर्यावरण संरक्षण’ श्रेणी में उत्तराखंड के भागीरथी सर्कल के वन संरक्षक धर्म सिंह मीणा धर्म सिंह मीणा को वैज्ञानिक जल संरक्षण तथा झरनों और जलधाराओं के पुनरुद्धार के लिए सम्मानित किया गया। इनके साथ ही नागालैंड के वोखा के डीएफओ सुमन शिवशंकर शिवाचार डब्ल्यू.एम. को अमूर फाल्कन की सुरक्षा, सामुदायिक सहभागिता और दोयांग जलाशय के संरक्षण के लिए सम्मान मिला।
सामुदायिक भागीदारी की श्रेणी में अरुणाचल प्रदेश के पक्के बाघ अभ्यारण्य के डीएफओ धवन कुमार रावत और हिमाचल प्रदेश के रामपुर के डीसीएफ गुरहर्ष सिंह को सम्मानित किया गया। धवन कुमार रावत को वन संरक्षण को सामुदायिक आजीविका से जोड़ने के प्रयासों के लिए पुरस्कृत किया गया। जबकि, गुरहर्ष सिंह को समेज में बादल फटने की घटना के बाद राहत एवं बचाव कार्यों के लिए महज छह घंटे में लकड़ी का पुल तैयार कराने के लिए सम्मानित किया गया।
तकनीक का इस्तेमाल
वन एवं वन्य जीव संरक्षण में ‘प्रौद्योगिकी का सर्वोत्तम उपयोग’ श्रेणी में तमिलनाडु के होसुर के वन्यजीव वार्डन एन. जयराज और बिहार के राजगीर ज़ू सफारी के निदेशक रामसुंदर एम. को पुरस्कार दिया गया। एन. जयराज को संवेदनशील रेलवे मार्ग के पास हाथियों की सुरक्षा के लिए एआई आधारित निगरानी और पूर्व-चेतावनी प्रणाली के उपयोग के लिए, जबकि रामसुंदर एम. को डिजिटल बुकिंग, सीसीटीवी निगरानी और जीपीएस ट्रैकिंग के उपयोग के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया।
राजस्थान के बाड़मेर की डीसीएफ सविता दहिया और तमिलनाडु के तंजावुर की डीएफओ के. कार्तिकेयनी को विशेष जूरी पुरस्कार प्रदान किया गया। सविता दहिया को ताल छापर घास के मैदानों के पुनरुद्धार तथा काले हिरण और चिंकारा के प्राकृतिक वास में सुधार के लिए यह सम्मान मिला। जबकि, के. कार्तिकेयनी को सम्मानित किया गया, जिसने हाथियों की सुरक्षा मजबूत करने के साथ क्षेत्र से 239 अवैध बंदूकें हटाने के अभियान के लिए में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
इस श्रेणी के तहत राजस्थान में ‘प्रोजेक्ट एलिफेंट’ और ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड संरक्षण प्रोजेक्ट’ को प्रजातियों और उनके आवासों के संरक्षण की परियोजनाओं को उनके बेहतर क्रियान्वयन और नतीजों के पुरस्कार दिया गया।
इको वॉरियर पुरस्कार वितरण समारोह के साथ ही इस मौके पर एक इको वॉरियर कॉन्क्लेव का भी आायेजन किया गया। इसमें वन संरक्षण में एआई और कॉरपोरेट भागीदारी जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई।
इस कॉन्क्लेव में पर्यावरण शासन और संरक्षण (Environmental Governance and Conservation) से जुड़े उभरते मुद्दों पर तीन अलग-अलग सत्रों में पैनल चर्चाएं हुईं। इनमें पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के लिए एआई एवं नई तकनीकों के उपयोग, वन प्रबंधन में कॉरपोरेट सेक्टर की भूमिका और सतत विकास (Sustainable Development) और पर्यावरणीय नैतिकता (Environmental Ethics) जैसे विषयों पर सार्थक विमर्श हुआ। इन सत्रों में वन और पर्यावरण श्रेत्र से जुड़े कई विशेषज्ञों ने संरक्षण के प्रयासों को मजबूत करके बेहतर परिणामों प्राप्त करने में तकनीक, कॉरपोरेट भागीदारी को बढ़ावा देने की जरूरत जताई।
कॉन्क्लेव के साथ ही इस मौके पर देशभर में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा खींची गई प्रकृति की तस्वीरों की एक प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें वन और संरक्षण क्षेत्र से जुड़े प्रमुख लोगों ने हिस्सा लिया। इनमें केंद्र सरकार में महानिदेशक (वन) एवं विशेष सचिव सुशील कुमार अवस्थी, पूर्व एनएचआरसी महासचिव भारत लाल, आईएफएसए की अध्यक्ष अनिता कर्ण, महासचिव मोनालिसा दास और ‘इंडियन मास्टरमाइंड्स’ संस्था के प्रतिनिधि शामिल रहे।
केंद्र सरकार के पत्र सूचना कार्यालय (Press Information Bureau) यानी PIB के मुताबिक ‘इको वॉरियर अवॉर्ड्स’ की शुरुआत 2023 में इंडियन मास्टरमाइंड्स और इंडियन फॉरेस्ट सर्विस एसोसिएशन (IFSA) ने की थी। इसका उद्देश्य भारतीय वन सेवा (IFS) के उन अधिकारियों और संरक्षण से जुड़े लोगों के काम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देना है, जो वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा, जैव विविधता, तकनीक के इस्तेमाल, समुदाय की भागीदारी और टिकाऊ पर्यावरणीय प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम कर रहे हैं। उपलब्ध आधिकारिक/आयोजक सामग्री के अनुसार, पुरस्कार पाने वाले अधिकारियों को प्रशस्ति-पत्र (citation) और ट्रॉफी दी जाती है।
पहला इको वॉरियर पुरस्कार समारोह 3 नवंबर 2023 को नई दिल्ली के आकाशवाणी सभागार में हुआ था। आयोजकों के मुताबिक, उस समय IFS अधिकारियों के लिए इस तरह का कोई समर्पित राष्ट्रीय पुरस्कार नहीं था, इसलिए उनके जमीनी काम को सामने लाने के लिए इसकी शुरुआत की गई।
हर साल यह पुरस्कार अलग-अलग श्रेणियों में दिया जाता है। पहले वर्ष इसमें फॉरेस्ट प्रोटेक्शन, वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन, वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन, संरक्षण में तकनीक के बेहतर इस्तेमाल और कम्युनिटी कनेक्ट जैसी श्रेणियां थीं। अगले साल 2024 में लाइफटाइम अचीवमेंट श्रेणी को भी इसमें जोड़ दिया गया। पिछल साल 2025 में सात प्रमुख श्रेणियों में पुरस्कार दिए गए और प्रोजेक्ट चीता तथा ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी संरक्षण पहलों को भी मान्यता मिली।
इको वॉरियर पुरस्कार का उद्देश्य केवल वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि उनके मैदानी कार्य अनुभवों और वन व पर्यावरण संरक्षण के सफल मॉडलों को लोगों के सामने लाना और दूसरे अधिकारियों व आम लोगों को ऐसे कार्यों के लिए प्रेरित करना भी है।
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