सरकार नदियों में अंतर्देशीय जलमार्ग विकसित कर देश के भीतर जल परिवहन को बढ़ावा देने की योजना पर तेजी से काम कर रही है।
स्रोत : विकी कॉमंस
भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और इसके साथ-साथ माल ढुलाई की मांग भी लगातार बढ़ रही है। लेकिन लंबे समय तक देश में माल परिवहन मुख्य रूप से सड़क और रेल पर निर्भर रहा। इससे न केवल लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ी, बल्कि डीजल आधारित ट्रकों के कारण प्रदूषण भी बढ़ता गया। अब सरकार नदियों और नहरों को माल ढुलाई के लिए विकसित कर अंतर्देशीय जल परिवहन यानी इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट (IWT) को एक नए विकल्प के रूप में सामने ला रही है।
हाल के वर्षों में गंगा, ब्रह्मपुत्र और कई अन्य राष्ट्रीय जलमार्गों पर कार्गो ढुलाई बढ़ी है। केंद्रीय बजट 2026-27 में भी इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई अहम घोषणाएं की गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नदियों का उपयोग व्यवस्थित रूप से बढ़ाया गया तो यह भारत की लॉजिस्टिक्स लागत कम करने, ऊर्जा बचाने और कार्बन उत्सर्जन घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारत के पास लगभग 14,500 किलोमीटर लंबा नौगम्य जलमार्ग नेटवर्क है, जिसमें नदियां, नहरें, बैकवॉटर और झीलें शामिल हैं। वर्ष 2016 के राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम के तहत देश में 111 राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किए गए हैं। इनमें से गंगा-भागीरथी-हुगली प्रणाली (राष्ट्रीय जलमार्ग-1), ब्रह्मपुत्र (राष्ट्रीय जलमार्ग-2) और केरल का पश्चिमी तटीय नहर तंत्र (राष्ट्रीय जलमार्ग-3) प्रमुख हैं।
फिर भी भारत में माल ढुलाई में जलमार्गों की हिस्सेदारी अभी बहुत कम है। अनुमान है कि देश के कुल माल परिवहन में लगभग 70% हिस्सा सड़क, 18% रेल और केवल करीब 6% जलमार्गों का है।
यह आंकड़ा बताता है कि भारत में जलमार्गों की क्षमता अभी पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हुई है। यही कारण है कि केंद्र सरकार अब इसे परिवहन प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर रही है।
| राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या | लंबाई (किमी) | जलमार्गों का विवरण | राज्य |
|---|---|---|---|
| राष्ट्रीय जलमार्ग 1 | 1620 | गंगा-भागीरथी-हुगली नदी प्रणाली (हल्दिया-इलाहाबाद) | उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 2 | 891 | ब्रह्मपुत्र नदी (धुबरी - सदिया) | असम |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 3 | 205 | पश्चिमी तट नहर (कोट्टापुरम - कोल्लम), चंपकारा और उद्योगमंडल नहरें | केरल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 3 | 170 | पश्चिमी तट नहर (कोट्टापुरम - कोझिकोड) | |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 4 | 50 | काकीनाडा नहर (काकीनाडा से राजमुंदरी) | आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और महाराष्ट्र |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 4 | 171 | गोदावरी नदी (भद्राचलम से राजमुंदरी) | |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 4 | 139 | एलुरु नहर (राजमुंदरी से विजयवाड़ा) | |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 4 | 157 | कृष्णा नदी (वजीराबाद से विजयवाड़ा) | |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 4 | 113 | कोमामुर नहर (विजयवाड़ा से पेद्दागंजम) | |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 4 | 316 | उत्तरी बकिंघम नहर (चेन्नई के पेद्दागंजम से सेंट्रल स्टेशन तक) | |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 4 | 110 | दक्षिण बकिंघम नहर (चेन्नई के सेंट्रल स्टेशन से मराकानम तक) | |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 4 | 22 | मराकानम से कलुवेल्ली टैंक होते हुए पुडुचेरी तक | |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 4 | 1202 | गोदावरी नदी (भद्राचलम - नासिक) | |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 4 | 636 | कृष्णा नदी (वज़ीराबाद - गलागली) | |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 4 | 256 | ईस्ट कोस्ट नहर और माताई नदी | |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 5 | 265 | ब्राह्मणी-खरसुआ-धामरा नदियाँ | ओडिशा और पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 5 | 67 | महानदी डेल्टा की नदियां (जिनमें हंसुआ नदी, नुननाला, गोब्रिनाला, खारनासी नदी और महानदी नदी शामिल हैं) | |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 6 | 68 | आई नदी | असम |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 7 | 90 | अजय नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 8 | 29 | अलप्पुझा-चंगनास्सेरी नहर | केरल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 9 | 40 | अलाप्पुझा-कोट्टायम-अथिरामपुझा नहर | केरल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 10 | 45 | अम्बा नदी | महाराष्ट्र |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 11 | 99 | अरुणावती - अरण नदी प्रणाली | महाराष्ट्र |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 12 | 5.5 | एएसआई नदी | उत्तर प्रदेश |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 13 | 11 | एवीएम नहर | केरल और तमिलनाडु |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 14 | 48 | बैतार्नी नदी | ओडिशा |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 15 | 135 | बकरेश्वर - मयूराक्षी नदी प्रणाली | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 16 | 121 | बराक नदी | असम |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 17 | 189 | बीस नदी | हिमाचल प्रदेश और पंजाब |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 18 | 69 | बेकी नदी | असम |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 19 | 67 | बेतवा नदी | उत्तर प्रदेश |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 20 | 95 | भवानी नदी | तमिलनाडु |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 21 | 139 | भीमा नदी | कर्नाटक और तेलंगाना |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 22 | 156 | बिरूपा - बड़ी गेंगुटी - ब्राह्मणी नदी प्रणाली | ओडिशा |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 23 | 56 | बुद्ध बलंगा | ओडिशा |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 24 | 61 | चंबल नदी | उत्तर प्रदेश |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 25 | 33 | चापोरा नदी | गोवा |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 26 | 51 | चेनाब नदी | जम्मू और कश्मीर |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 27 | 17 | कुंबरजुआ नदी | गोवा |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 28 | 45 | दाभोल क्रीक-वशिष्ठि नदी प्रणाली | महाराष्ट्र |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 29 | 132 | दामोदर नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 30 | 109 | देहिंग नदी | असम |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 31 | 114 | धनसिरी / चथे | असम |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 32 | 63 | दिखू नदी | असम |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 33 | 61 | डोयन्स नदी | असम |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 34 | 137 | डीवीसी नहर | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 35 | 108 | द्वारेकेश्वर नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 36 | 119 | द्वारका नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 37 | 296 | गंडक नदी | बिहार और उत्तर प्रदेश |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 38 | 62 | गंगाधर नदी | असम और पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 39 | 49 | गानोल नदी | मेघालय |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 40 | 354 | घाघरा नदी | बिहार और उत्तर प्रदेश |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 41 | 112 | घाटप्रभा नदी | कर्नाटक |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 42 | 514 | गोमती नदी | उत्तर प्रदेश |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 43 | 10 | गुरुपुर नदी | कर्नाटक |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 44 | 63 | इचामती नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 45 | 650 | इंदिरा गांधी नहर | पंजाब, हरियाणा और राजस्थान |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 46 | 35 | सिंधु नदी | जम्मू और कश्मीर |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 47 | 131 | जलंगी नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 48 | 590 | कच्छ नदी प्रणाली का जवाई-लूनी-रण | गुजरात और राजस्थान |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 49 | 110 | झेलम नदी | जम्मू और कश्मीर |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 50 | 43 | जिंजीराम नदी | असम और मेघालय |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 51 | 23 | कबिनी नदी | कर्नाटक |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 52 | 53 | काली नदी | कर्नाटक |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 53 | 145 | कल्याण-ठाणे-मुंबई जलमार्ग, वसई क्रीक और उल्हास नदी प्रणाली | महाराष्ट्र |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 54 | 86 | करमनासा नदी | बिहार और उत्तर प्रदेश |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 55 | 311 | कावेरी - कोल्लिडम नदी प्रणाली | तमिलनाडु |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 56 | 22 | खेरकाई नदी | झारखंड |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 57 | 50 | कोपिली नदी | असम |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 58 | 236 | कोसी नदी | बिहार |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 59 | 19 | कोट्टायम-वैकोम नहर | केरल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 60 | 80 | कुमारी नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 61 | 28 | किन्शी नदी | मेघालय |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 62 | 86 | लोहित नदी | असम और अरुणाचल प्रदेश |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 63 | 336 | लूनी नदी | राजस्थान |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 64 | 426 | महानदी नदी | ओडिशा |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 65 | 80 | महानंदा नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 66 | 247 | माही नदी | गुजरात |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 67 | 94 | मालप्रभा नदी | कर्नाटक |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 68 | 41 | मांडोवी नदी | गोवा |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 69 | 5 | मणिमुथारू नदी | तमिलनाडु |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 70 | 245 | मंजारा नदी | महाराष्ट्र और तेलंगाना |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 71 | 27 | मापुसा / मोइड नदी | गोवा |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 72 | 59 | नाग नदी | महाराष्ट्र |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 73 | 226 | नर्मदा नदी | महाराष्ट्र और गुजरात |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 74 | 79 | नेत्रावती नदी | कर्नाटक |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 75 | 142 | पालार नदी | तमिलनाडु |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 76 | 23 | पंचगंगावली (पंचगंगोली) नदी | कर्नाटक |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 77 | 20 | पझ्यार नदी | तमिलनाडु |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 78 | 262 | पेंगनागा - वर्धा नदी प्रणाली | महाराष्ट्र और तेलंगाना |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 79 | 28 | पेन्नार नदी | आंध्र प्रदेश |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 80 | 126 | पोन्नियार नदी | तमिलनाडु |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 81 | 35 | पुनपुन नदी | बिहार |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 82 | 58 | पुथिमारी नदी | असम |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 83 | 31 | राजपुरी क्रीक | महाराष्ट्र |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 84 | 44 | रावी नदी | जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और पंजाब |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 85 | 31 | रेवदंडा क्रीक - कुंडलिका नदी प्रणाली | महाराष्ट्र |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 86 | 72 | रूपनारायण नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 87 | 210 | साबरमती नदी | गुजरात |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 88 | 14 | साल नदी | गोवा |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 89 | 45 | सावित्री नदी (बैंकॉट क्रीक) | महाराष्ट्र |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 90 | 29 | शरावती नदी | कर्नाटक |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 91 | 52 | शास्त्री नदी - जयगढ़ क्रीक प्रणाली | महाराष्ट्र |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 92 | 26 | सिलाबती नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 93 | 63 | सिमसांग नदी | मेघालय |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 94 | 141 | सोन नदी | बिहार |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 95 | 106 | सुबनसिरी नदी | असम |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 96 | 311 | सुबर्णरेखा नदी | झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 97 | 172 | सुंदरबन जलमार्ग | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 97 | 56 | बिद्या नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 97 | 15 | छोटा कालागाछी नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 97 | 7 | गोमर नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 97 | 16 | हरिभंगा नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 97 | 37 | होगला (होगल)-पठानखली नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 97 | 9 | कालिंदी (कालंदी) नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 97 | 22 | कटखली नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 97 | 99 | माटला नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 97 | 28 | मुरी गंगा (बाराटाला) नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 97 | 53 | रायमंगल नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 97 | 14 | साहिबखाली (SAHEBKHALI) नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 97 | 37 | सप्तमुखी नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 97 | 64 | ठाकुरन नदी | पश्चिम बंगाल |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 98 | 377 | सतलज नदी | हिमाचल प्रदेश और पंजाब |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 99 | 62 | तामरापरानी नदी | तमिलनाडु |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 100 | 436 | तापी नदी | महाराष्ट्र और गुजरात |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 101 | 42 | तिज़ू-ज़ुंगकी नदियां | नगालैंड |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 102 | 87 | तलवांग (ढालेश्वरी नदी) | असम और मिजोरम |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 103 | 73 | टन्स नदी | उत्तर प्रदेश |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 104 | 232 | तुंगभद्रा नदी | कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 105 | 15 | उदयवारा नदी | कर्नाटक |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 106 | 20 | उमंगोट (डॉकी) नदी | मेघालय |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 107 | 46 | वैगई नदी | तमिलनाडु |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 108 | 53 | वरुणा नदी | उत्तर प्रदेश |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 109 | 166 | वाणगंगा - प्रो-लाइफ सिस्टम | महाराष्ट्र और तेलंगाना |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 110 | 1081 | यमुना नदी | दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 111 | 50 | ज़ुआरी नदी | गोवा |
| कुल लंबाई | 20163.5 |
भारत में कई राष्ट्रीय जलमार्ग विकसित किए जा रहे हैं, लेकिन कुछ जलमार्ग माल परिवहन और आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
National Waterway‑1 भारत का सबसे लंबा और सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जो Varanasi से Haldia तक लगभग 1,390 किलोमीटर तक फैला है। यह जलमार्ग उत्तर भारत के कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों को पूर्वी समुद्री बंदरगाहों से जोड़ता है। कोयला, खाद, सीमेंट और कंटेनर कार्गो के परिवहन के लिए इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
National Waterway‑2 : यह आंतरिक जलमार्ग ब्रह्मपुत्र नदी पर स्थित है और लगभग 891 किलोमीटर लंबा है। यह जलमार्ग Dhubri से Sadiya तक फैला है। पूर्वोत्तर भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर बन रहा है, जहां से चाय, पेट्रोलियम उत्पाद और निर्माण सामग्री की ढुलाई होती है।
National Waterway‑3 Kerala के बैकवॉटर और नहर प्रणाली पर आधारित है। यह कोल्लम से कोच्चि तक फैला जलमार्ग है और मुख्य रूप से सीमेंट, उर्वरक और निर्माण सामग्री के परिवहन में उपयोग होता है। पर्यटन और यात्री परिवहन में भी इसका बड़ा योगदान है।
National Waterway‑4 (Godavari-Krishna Waterway) : जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह अंतर्देशीय जल मार्ग दक्षिण भारत की दो सबसे प्रमुख नदियों कृष्णा और गोदावरी को आपस में जोड़ता है। यह जलमार्ग आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कई औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को जोड़ता है। भविष्य में यहां बड़े पैमाने पर कार्गो ढुलाई की संभावना देखी जा रही है।
National Waterway‑5: इसे ब्राह्मणी नदी (Brahmani River) और महानदी (Mahanadi River) पर विकसित किया जा रहा है। यह जलमार्ग ओडिशा के खनिज समृद्ध क्षेत्रों को Paradip और Dhamra जैसे महत्वपूर्ण बंदरगाहों से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। इससे कोयला और लौह अयस्क के परिवहन की लागत कम होने की उम्मीद है।
गंगा, ब्रह्मपुत्र, सिंधु, कृष्णा, कावेरी, महानदी जैसी देश की बड़ी नदियां अंतर्देशीय जल परिवहन को बढ़ावा देने की व्यापक क्षमता रखती हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था में लॉजिस्टिक्स लागत एक बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर जलमार्गों का उपयोग बढ़ाया जाए तो देश की लॉजिस्टिक्स लागत GDP के लगभग 14% से घटकर 9% तक आ सकती है। इससे हर साल अरबों डॉलर की बचत संभव है।
जलमार्गों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि वे सड़क और रेल नेटवर्क पर दबाव कम कर सकते हैं। कई औद्योगिक क्षेत्रों से बंदरगाहों तक भारी माल भेजने के लिए नदियां एक प्राकृतिक कॉरिडोर की तरह काम कर सकती हैं। उदाहरण के तौर पर ओडिशा में प्रस्तावित राष्ट्रीय जलमार्ग-5 खनिज समृद्ध क्षेत्रों को पारादीप और धामरा जैसे बंदरगाहों से जोड़ने की योजना है। इससे कोयला और खनिजों की ढुलाई अधिक सस्ती और तेज हो सकती है। अगर ऐसे कॉरिडोर विकसित होते हैं तो उद्योगों के लिए परिवहन आसान होगा और निर्यात प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।
हाल के केंद्रीय बजट में सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया कि भविष्य की लॉजिस्टिक्स रणनीति में जलमार्गों की बड़ी भूमिका होगी। वित्त मंत्री ने घोषणा की कि इनलैंड और तटीय जलमार्गों के विकास तथा कंटेनर निर्माण के लिए लगभग 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाएगा। इसके साथ ही अगले कुछ वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों को परिचालन में लाने की योजना भी सामने रखी गई है।
सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक माल ढुलाई में जलमार्गों और तटीय शिपिंग की हिस्सेदारी 6% से बढ़ाकर लगभग 12% की जाए। इसके अलावा पूर्वोत्तर क्षेत्र में जलमार्ग विकास के लिए अलग रोडमैप तैयार किया जा रहा है और कई परियोजनाओं में हजारों करोड़ रुपये निवेश की योजना है।
नीतिगत रूप से यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत लंबे समय से अपनी लॉजिस्टिक्स लागत कम करने की कोशिश कर रहा है। वर्तमान में भारत में लॉजिस्टिक्स लागत GDP का लगभग 13-14 प्रतिशत मानी जाती है, जो कई विकसित देशों से अधिक है।
भारत में इनलैंड जलमार्गों को विकसित करने की सबसे बड़ी पहल Jal Marg Vikas Project है। यह परियोजना मुख्य रूप से Ganga River पर स्थित राष्ट्रीय जलमार्ग-1 को विकसित करने के लिए शुरू की गई है। इसका उद्देश्य वाराणसी से हल्दिया तक लगभग 1,390 किलोमीटर लंबे जलमार्ग को आधुनिक नौवहन के लिए तैयार करना है।
इस परियोजना के तहत नदी में न्यूनतम नौवहन गहराई बनाए रखने के लिए ड्रेजिंग, आधुनिक मल्टी-मोडल टर्मिनल, नेविगेशन सिस्टम और नदी सूचना प्रणाली विकसित की जा रही है। वाराणसी, साहिबगंज और हल्दिया में बड़े मल्टी-मोडल टर्मिनल बनाए गए हैं, जिससे सड़क, रेल और जलमार्ग के बीच माल का आसानी से आदान-प्रदान हो सके। विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना गंगा घाटी के औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को बंदरगाहों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकती है। इसके माध्यम से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के उद्योगों को सस्ता और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन विकल्प मिल रहा है।
करीब साढ़े सात हज़ार किलोमीटर लंबी तटरेखा वाले भारत देश के लिए सुरक्षा की दृष्टि से भी अपने आंतरिक जलमार्गों का विकास करना ज़रूरी है।
जलमार्ग क्यों हैं सस्ते : इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट की सबसे बड़ी ताकत इसकी कम लागत है। विश्व बैंक और सरकारी अध्ययनों के अनुसार, एक टन माल को एक किलोमीटर ले जाने की लागत जलमार्ग से लगभग 1.2 रुपये, रेल से 1.4 रुपये और सड़क से करीब 2.28 रुपये पड़ती है। कुछ अन्य अध्ययनों में भी पाया गया है कि जलमार्ग से ढुलाई की लागत सड़क के मुकाबले लगभग 60% तक कम हो सकती है। इसके पीछे कई कारण हैं। जहाज या बार्ज एक साथ बहुत बड़ी मात्रा में माल ले जा सकते हैं, जिससे प्रति टन लागत कम हो जाती है। उदाहरण के तौर पर एक हॉर्सपावर ऊर्जा सड़क पर लगभग 150 किलोग्राम माल को आगे बढ़ाती है, जबकि रेल पर 500 किलोग्राम और जलमार्ग में लगभग 4000 किलोग्राम माल को आगे बढ़ा सकती है। यही कारण है कि कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, खाद, खाद्यान्न और कंटेनर जैसे भारी माल के लिए जलमार्ग बेहद उपयोगी माने जाते हैं। अगर भारत में बड़े पैमाने पर कार्गो नदियों के जरिए जाने लगे तो उद्योगों की परिवहन लागत काफी कम हो सकती है।
इनलैंड जलमार्ग न केवल सस्ते हैं बल्कि ऊर्जा के लिहाज से भी बेहद कुशल माने जाते हैं। आंकड़ों के अनुसार एक लीटर ईंधन सड़क पर लगभग 24 टन-किलोमीटर माल, रेल पर 85 टन-किलोमीटर और जलमार्ग में लगभग 105 टन-किलोमीटर माल ले जा सकता है। इसका मतलब है कि समान दूरी पर समान माल ढोने के लिए जलमार्गों में ईंधन की खपत काफी कम होती है। इससे न केवल लागत घटती है बल्कि आयातित ईंधन पर निर्भरता भी कम हो सकती है।
भारत जैसे देश के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां तेल आयात पर बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। अगर भारी माल ढुलाई का एक हिस्सा नदियों पर स्थानांतरित हो जाए तो देश के ऊर्जा बिल में भी कमी आ सकती है।
| जलमार्ग बनाम सड़क और रेल : कौन है सबसे किफायती? | |||
|---|---|---|---|
| मापदंड | सड़क परिवहन | रेल परिवहन | इनलैंड जलमार्ग |
| प्रति टन-किमी लागत | ₹2.2 – ₹2.5 | ₹1.4 – ₹1.6 | ₹1.1 – ₹1.3 |
| 1 लीटर ईंधन से माल ढुलाई | 24 टन-किमी | 85 टन-किमी | 105 टन-किमी |
| ऊर्जा दक्षता | कम | मध्यम | सबसे अधिक |
| कार्बन उत्सर्जन | सबसे ज्यादा | मध्यम | सबसे कम |
| भारी माल ढुलाई क्षमता | सीमित | अच्छी | बहुत अधिक |
| ट्रैफिक / दुर्घटना जोखिम | अधिक | कम | बहुत कम |
जलमार्गों का एक बड़ा फायदा पर्यावरण से जुड़ा है। परिवहन क्षेत्र भारत में कार्बन उत्सर्जन का प्रमुख स्रोत बन चुका है। एक अध्ययन के अनुसार 2020 में भारत के परिवहन क्षेत्र से लगभग 368 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन हुआ, जिसमें अधिकांश हिस्सा सड़क परिवहन का था।
जलमार्गों का उपयोग बढ़ाने से इस उत्सर्जन को कम किया जा सकता है। जहाजों या बार्ज से माल ढुलाई में ईंधन की खपत कम होती है, इसलिए कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है। कई अध्ययनों में यह भी बताया गया है कि जलमार्गों में ऊर्जा खपत सड़क परिवहन की तुलना में लगभग 17% तक ही होती है।
इसके अलावा नदियों के जरिए माल भेजने से सड़कों पर भारी ट्रकों की संख्या कम हो सकती है, जिससे शहरी प्रदूषण, ट्रैफिक जाम और सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आ सकती है।
सरकार अब “ग्रीन वेसल” और हाइड्रोजन या इलेक्ट्रिक तकनीक वाले जहाजों पर भी काम कर रही है। उदाहरण के तौर पर वाराणसी में भारत का पहला हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित इनलैंड जहाज विकसित किया गया है, जो लगभग शून्य उत्सर्जन के साथ चल सकता है।
देश के समुद्र तटीय इलाकों में नदियों में आंतरिक जलमार्गों को विकसित करने से आयात-निर्यात को भी बढ़ावा मिल सकता है, क्योंकि इससे उत्तरी राज्यों का माल भी निर्यात के लिए सीधे बंदरगाहों तक पहुंच सकता है।
इनलैंड जलमार्गों का एक सामाजिक-आर्थिक पहलू भी है। नदी किनारे बसे कई क्षेत्रों में सड़क और रेल संपर्क सीमित है। ऐसे इलाकों में जल परिवहन स्थानीय अर्थव्यवस्था को नया जीवन दे सकता है।
नदियों पर टर्मिनल, जेट्टी, गोदाम और लॉजिस्टिक्स हब बनने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं। इसके अलावा मछली पालन, पर्यटन और छोटे व्यापार भी बढ़ सकते हैं।
केरल, असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पहले से ही नदी आधारित परिवहन का उपयोग हो रहा है। सरकार की योजना है कि इन मॉडलों को अन्य राज्यों में भी बढ़ाया जाए।
हालांकि इनलैंड जलमार्गों की संभावनाएं बड़ी हैं, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी चुनौती नदियों की गहराई और नौवहन क्षमता बनाए रखना है। कई नदियों में जल स्तर मौसमी होता है, जिससे बड़े जहाजों का संचालन मुश्किल हो जाता है।
इसके अलावा ड्रेजिंग, टर्मिनल निर्माण और नेविगेशन सिस्टम जैसे बुनियादी ढांचे में भारी निवेश की जरूरत होती है। कुछ पर्यावरणविदों का यह भी मानना है कि अत्यधिक ड्रेजिंग या नदी तटों के विकास से पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि जलमार्ग विकास के साथ-साथ नदी पारिस्थितिकी की सुरक्षा पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है।
भारत में इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन इसकी संभावनाएं काफी बड़ी हैं। अगर सरकार की योजनाएं सफल होती हैं तो आने वाले वर्षों में नदियां केवल सिंचाई या धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि देश की आर्थिक धमनियों की तरह काम करेंगी। कम लागत, ऊर्जा दक्षता और कम उत्सर्जन जैसे फायदे इसे भविष्य के परिवहन का महत्वपूर्ण माध्यम बना सकते हैं।
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