फोटो : विकी कॉमंस
31 अक्टूबर से नासिक और त्र्यंबकेश्वर में शुरू होने जा रहा है डेढ़ साल तक चलने वाला सिंहस्थ कुंभ मेला
SANDRP के वैज्ञानिक परीक्षणों में नासिक के जल में सुरक्षित सीमा से 1,000 गुना अधिक हेक्सावेलेंट क्रोमियम का मिलना चिंताजनक
महाराष्ट्र के नासिक और त्र्यंबकेश्वर में गोदावरी नदी के तट पर इस महीने के अंत में 31 अक्टूबर से सिंहस्थ कुंभ मेला शुरू होने जा रहा है। सरकार की ओर से मेले की तैयारियों को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। पर मेले से पहले एक हैरान व परेशान करने वाली रिसर्च रिपोर्ट सामने आई है। दक्षिण एशिया में पर्यावरण और पानी से जुड़े मुद्दों पर काम करने वाली संस्था संदर्प (SANDRP) ने नासिक में मेला स्थल के पास गोदावरी के पानी में कैंसरकारी पदार्थों का गंभीर प्रदूषण पाया है। इससे मेले में लाखों की संख्या में स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सेहत को लेकर गंभीर चिंता उठ खड़ी हुई है। चिंता की बात यह भी है कि इस गंभीर और व्यापक स्वास्थ्य जोखिम की जानकारी सामने आने और इसकी सूचना दिए जाने के बावजूद महाराष्ट्र सरकार ने इसे लेकर अबतक कोई बड़ा कारगर कदम नहीं उठाया है।
संदर्प की रिपोर्ट में बताया गया है कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले विषैले कैंसरकारी प्रदूषक पदार्थ सहायक नदियों के माध्यम से गोदावरी नदी में मिल रहे हैं। इससे 31 अक्टूबर को शुरू हो रहे कुंभ मेले लाखों तीर्थयात्रियों के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम और व्यापक पारिस्थितिक आपदा की आशंका स्पष्ट नज़र आ रही है।
इस अध्ययन के तहत नासिक के मेला स्थल अंबड में गोदावरी नदी से लिए गए पानी के नमूनों के प्रयोगशाला परीक्षणों में तीव्र विषाक्त प्रदूषण की पुष्टि हुई है। यह जहरीला प्रदूषण केवल गोदावरी नदी के साथ ही आसपास के इलाकों के भूजल को भी दूषित कर रहा है। इसके चलते इन आवासीय इलाकों में बोरवेल का पानी चमकीला पीला हो गया है, जो संभवतः अंबड एमआईडीसी प्लांट से आ रहे औद्योगिक हेक्सावेलेंट क्रोमियम [Cr(VI)] के कारण हो रहा है।
SANDRP की रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय कार्यकर्ता रोशन केदार, राजेश पंडित, उनकी टीम और वॉलेंटियर्स ने इस मामले का अध्ययन किया है। पानी में कैंसरकारक जहरीले प्रदूषण की जानकारी मिलने पर SANDRP की परिणिता दांडेकर ने घटनास्थल का दौरा किया और भूजल के नमूनों की एक मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच करवाई। साथ ही वह हेक्सावेलेंट क्रोमियम के प्रदूषण से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति स्थानीय लोगों को जानकारी देकर सचेत भी कर रहे हैं।
अध्ययन के तहत लिए गए इन नमूनों के प्रयोगशाला परीक्षण में क्रोमियम का कुल स्तर 50.5 मिलीग्राम/ लीटर और हेक्सावेलेंट क्रोमियम का स्तर 50.3 मिलीग्राम/लीटर पाया गया। यह मात्रा भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा निर्धारित पेयजल की अनुमेय सीमा 0.05 मिलीग्राम/लीटर से 1,000 गुना से भी अधिक है। चिंताजनक बात यह है कि यही दूषित पानी कुंभ मेले के घाट पर स्थित एक स्थानीय नाले के माध्यम से गोदावरी नदी को प्रदूषित कर रहा है।
SANDRP की ओर से इस पूरे मामले की ज़मीनी स्तर पर पड़ताल करने वाली परिणिता दांडेकर ने इंडिया वाटर पोर्टल से बात करते हुए बताया कि नासिक में कुंभ मेला स्थल के आसपास के इलाकों में बोरिंग से पीला पानी निकलने की सूचना मिलने पर SANDRP की टीम ने वहां का दौरा किया। उनकी टीम द्वारा एकत्र किए गए पानी के नमूनों को जब एक मान्यताप्राप्त प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया, तो इन नमूनों में क्रोमियम की इतना ज़्यादा मात्रा मिली कि लैब के तकनीशियनों को लगा कि उनकी जांच में या नमूने लेने में कुछ गड़बड़ी हो गई है। लैब को जब बताया गया कि सैंपल एकदम सही ढंग से लिए गए हैं, तो उन्होंने दोबार टेस्ट किया, जिसमें कैंसरकारक हेक्सावेलेंट क्रोमियम की मात्रा मानक से एक हज़ार गुना अधिक मिली।
उन्होंने बताया कि इलाके में क्रोमियम प्लेटिंग का काम करने वाले कई कारखाने चल रहे हैं। यहां म्युनिसिपल पाइप लाइन से पानी की सप्लाई बहुत कम होने के कारण लोग अपने दैनिक जीवन में इस दूषित पानी का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। इससे बच्चों से लेकर युवाओं, महिलाओं और वृद्धों तक में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं देखने को मिल रही हैं। पानी में विषाक्त हेक्सावेलेंट क्रोमियम के पाए जाने को लेकर सरकारी महकमों का उदासीनता और लापरवाही भरा रवैया सामने आया। नासिक म्युनिसिपल कॉरपोरेशन का इस बारे में कहना था कि वह अपनी ओर से पानी की सप्ताई तो बढ़ा सकते हैं, पर भूजल और गोदावरी के पानी में मिल रहे क्रोमियम पर लगाम लगाना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। यह काम महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) के दायरे में आता है। संदर्प द्वारा संपर्क किए जाने पर MPCB का रवैया भी टालमटोल भरा ही रहा।
पपानी में जहरीले हेक्सावेलेंट क्रोमियम के घुलने के कारण लोगों के शरीर पर घाव और कई अन्य तरह की स्वास्थ्य समस्याएं देखने को मिल रही हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि गोदावरी के जल में पाया गया हेक्सावेलेंट क्रोमियम समूह 1 का कैंसरकारक (Group 1 carcinogen) है। संदर्प द्वारा परीक्षण के लिए गोदावरी से लिए गए के पानी के नमूनों व स्थानीय भूजल में पाया गया हेक्सावेलेंट क्रोमियम का स्तर और इन जलस्रोतों पर निर्भर एक बड़ी आबादी की सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक उपरोक्त जांच में हेक्सावेलेंट क्रोमियम का स्तर अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रांत के हिंकले शहर में पीजी एंड ई के ज़हरीले जल प्रदूषण के ऐतिहासिक मामले या एरिन ब्रॉकोविच मामले के स्तर से कई गुना अधिक है। यह रानीपेट (तमिलनाडु) और रानिया (कानपुर देहात) के विषाक्त जल प्रदूषण के मामलों से मेल खाता है, जहां अनुपचारित क्रोमियम ने स्थानीय जलभंडारों को ज़हरीला बना दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार नासिक नगर निगम से पानी की कम और अनियमित आपूर्ति के कारण, बड़ी संख्या में लोग और उनके परिवार नहाने, कपड़े धोने और बर्तन साफ करने जैसे दैनिक घरेलू कामों के लिए हेक्सावेलेंट क्रोमियम से इस प्रदूषित पानी का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर हैं। इसके चलते कई लोगों में गंभीर, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। लोगों की बीमारियों लगातार बढ़ोतरी भी देखने को मिल रही है। रिपोर्ट में इस दूषित पानी के कारण लोगों में निम्नलिखित स्वास्थ्य समस्याएं या लक्षण बताए गए हैं-
रासायनिक अल्सर (क्रोम होल), चकत्ते और छाले: सीधे संपर्क से त्वचा जल जाती है, जिससे गहरे, धीरे-धीरे ठीक होने वाले घाव बन जाते हैं। बच्चों तक में ऐसी समस्याएं देखने को मिली हैं। अध्ययन करने वाली टीम ने ऐसे कई बच्चों की तस्वीरें लीं, जिनकी पीठ और शरीर घावों से भरे पड़े थे।
युवाओं, महिलाओं और बच्चों में दर्दनाक, सूजी हुई लसीका ग्रंथियां और पुरानी बीमारियां देखने को मिलीं।
प्रजनन संबंधी समस्याओं के मामले भी सामने आए। प्रभावित बस्ती में दो महिलाओं ने टीम को स्वतः गर्भपात होने की सूचना दी। टीम का मानना है कि यह संख्या इससे काफी अधिक हो सकती है। इसलिए इसके कारणों का आकलन किया जाना आवश्यक है।
अध्ययन में इस खतरनाक जल प्रदूषण से पीडि़त लोगों पर पड़ रहे गंभीर आर्थिक प्रभाव भी सामने आए। श्रमिक वर्ग के परिवार अपनी मासिक आय का लगभग आधा हिस्सा निजी चिकित्सा उपचार, वैकल्पिक आवास और घावों की पट्टियों पर खर्च करना पड़ रहा है। समस्या का कोई समाधान न किए जाने से उन्हें इससे राहत मिलने की कोई उम्मीद भी नहीं दिखाई दे रही है।
नासिक में कुंभ मेला स्थल और आसपास के इलाकों का हवाई मानचित्र।
पानी में क्रोमियम और हेक्सावेलेंट क्रोमियम के जहरीले प्रदूषण से लोगों की सेहत को हो रहे गंभीर नुकसान और बीमारियों की जानकारी होने के बावजूद सरकारी महकमा इस गंभीर समस्या के प्रति उदासीन बना हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कई मौकों पर बार-बार शिकायतें मिलने के बावजूद, संबंधित सरकारी विभागों की प्रतिक्रिया निष्क्रियता भरी रही है। मीडिया रिपोर्टों के जरिये पीले प्रदूषित पानी की खबरें सामने आने के बाद, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) ने 30 सितंबर 2026 को केवल एक कंपनी को नियमित कारण बताओ नोटिस जारी किया। इसके अलावा कोई जरूरी कार्रवाई नहीं हुई। एमपीसीबी ने न तो अपने जल परीक्षण के आंकड़े सार्वजनिक किए और न ही प्रभावित निवासियों को इसकी जानकारी दी । इस उदासीनता भरे रवैये के चलते प्रभावित लोगों का समुदाय उनके स्वास्थ्य पर मंडराते इस घातक रासायनिक खतरे के बारे में अनजान है।
यह विषैला प्रदूषण सहायक नदियों के माध्यम से गोदावरी नदी में मिल जाता है। 31 अक्टूबर को कुंभ मेले के शुभ ध्वजारोहण के अवसर पर, गोदावरी के पानी में कैंसरकारी पदार्थों का पाया जाना एक व्यापक स्वास्थ्य व पारिस्थितिक संकट का संकेत दे रहा है। इसके कारण आगामी कुंभ मेले में लाखों की संख्या में आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम की आशंका दिखाई दे रही है। इस आशंका को देखते हुए मेले के आसपास कुछ न्यूनतम और महत्वपूर्ण कदम तत्काल उठाए जाने की जरूरत है -
वैकल्पिक जल आपूर्ति : नासिक नगर निगम (एनएमसी) और जिला कलेक्टर कार्यालय को सभी दूषित बोरवेलों को बंद करने या इनके पानी के इस्तेमाल पर रोक लगाने के पुख्ता इंतज़ाम करे। प्रभावित इलाके के लोगों के घरेलू इस्तेमाल के लिए तत्काल टैंकरों से जलापूर्ति की व्यवस्था की जाए।
आपातकालीन स्वास्थ्य शिविर : लोगों को हो रही त्वचा संबंधी समस्याओं, बाल रोग और प्रसूति संबंधी जांच करने और विशेष घाव उपचार प्रदान करने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग की चिकित्सा टीमों को तैनात किया जाए। कैंसर की आशंका वाले लोगों की जरूरी जांच कराई जाए।
पारदर्शी औद्योगिक कार्रवाई : एमपीसीबी (महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) को अपने सभी परीक्षण डेटा सार्वजनिक करना चाहिए और महाराष्ट्र उद्योग विकास निगम (एमआईडीसी) अंबड में सभी इलेक्ट्रोप्लेटिंग, मेटल फिनिशिंग, पेंट और अन्य उद्योगों का फोरेंसिक, क्लस्टर-व्यापी निरीक्षण करना चाहिए, ताकि अवैध तरीके से किए जा रहे पानी में जहरीले प्रदूषण को तुरंत और स्थायी रूप से रोका जा सके।
जलभंडार में सुधार : प्रदूषण फैलाने वालों और गैर-जिम्मेदार प्रशासन को प्रदूषणकारी भुगतान सिद्धांत (Polluter-pays principle) के तहत सख्ती से उत्तरदायी ठहराते हुए दंडित किया जाए, ताकि दीर्घकालिक पर्यावरणीय सुधार और सामुदायिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए धन जुटाया जा सके।
गोदावरी के पानी की जांच : एमपीसीबी को गोदावरी नदी के पानी का तुरंत परीक्षण करना चाहिए। संदूषण स्थल से नीचे की ओर बहने वाली नंदिनी सहायक नदी और गोदावरी नदी का परीक्षण करके यह देखना चाहिए कि नदी कितनी दूर तक प्रभावित हुई है। साथ ही प्रदूषण की स्थिति के बारे में नदी जल के उपयोगकर्ताओं को सतर्क करना चाहिए।
त्वरित कानूनी कार्यवाही : मामले की त्वरित जांच-पड़ताल के बाद, प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ तत्काल एफआईआर और मुकदमा दायर करवाया जाना चाहिए। साथ ही इसके जिम्मेदार उद्योगों के खिलाफ एफआईआर और मामले दर्ज कराई जाए। प्रदूषण से प्रभावित लोगों को मुआवजा देने की घोषणा भी कानूनी प्रक्रिया के जरिये की जानी चाहिए।
SANDRP की टीम द्वारा लिए गए दूषित पानी के नमूने।
प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट में पानी में हेक्सावेलेंट क्रोमियम [Cr(VI)] का खतरनाक स्तर पर मिलने की पुष्टि हुई।
क्रोमियम प्लेटिंग कारखानों का अनट्रीटेड सीवेज गोदावरी की सहायक नदियों के जरिये उसमें ज़हरीला प्रदूषण फैला रहा है।
नासिक और त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभ मेला 31 अक्टूबर 2026 को ध्वजारोहण के साथ शुरू होगा और 24 जुलाई 2028 को समाप्त होगा। इस पूरे आयोजन की मुख्य अमृत/शाही स्नान की तिथियां इस प्रकार हैं :
ध्वजारोहण (शुरुआत) : 31 अक्टूबर 2026 (रामकुंड, नासिक और त्र्यंबकेश्वर)
नगर प्रदक्षिणा : 29 जुलाई 2027
पहला अमृत स्नान : 2 अगस्त 2027
दूसरा (मुख्य) अमृत स्नान : 31 अगस्त 2027 (श्रावण अमावस्या)
तीसरा अमृत स्नान (नासिक) : 11 सितंबर 2027
तीसरा अमृत स्नान (त्र्यंबकेश्वर) : 12 सितंबर 2027
समापन : 24 जुलाई 2028
आज से करीब साढ़े तीन दशक पहले 1990 के दशक में अमेरिका के कैलिफोर्निया (California) राज्य के हिंकले (Hinkley) शहर में पैसिफिक गैस एंड इलेक्ट्रिक कंपनी (PG&E) द्वारा किया गया भूजल प्रदूषण दुनिया में अबतक के सबसे गंभीर मामलों में गिना जाता है। इसे अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े और सबसे चर्चित पर्यावरण न्याय (Environmental Justice) मामला बताया जाता है। यह मामला कानूनी क्लर्क एरिन ब्रॉकोविच (Erin Brockovich) के संघर्ष और 1996 में हुए ऐतिहासिक समझौते के बाद दुनिया के सामने आया था। इस ज़हरीले औद्योगिक जल प्रदूषण इस ऐतिहासिक मामले की जानकारी के मुताबिक PG&E कंपनी हिंकले में एक प्राकृतिक गैस कंप्रेसर स्टेशन संचालित करती थी। कंपनी ने अपने कूलिंग टावरों में जंग (rust) को रोकने के लिए हेक्सावेलेंट क्रोमियम (Chromium-6) नामक अत्यधिक विषैले रसायन का उपयोग किया। इस जहरीले रसायन से युक्त करीब 37 करोड़ गैलन दूषित पानी को बिना किसी सुरक्षा उपायों और ट्रीटमेंट के आसपास के तालाबों व अन्य जलस्रोतों में बहा दिया गया। इसके अलावा यह ज़हरीला पानी धीरे-धीरे रिसकर ज़मीन के नीचे भी चला गया। इस तरह हेक्सावेलेंट क्रोमियम का ज़हर पूरे हिंकले शहर के भूजल भंडारों (aquifer) और कुओं में मिल गया। हिंकले के निवासियों ने बिना यह जाने कि पानी ज़हरीला है, दशकों तक इसका इस्तेमाल पीने, नहाने और खेती के लिए किया। इससे इन जलस्रोतों का पानी इस्तेमाल करने वाली एक बड़ी आबादी को कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी समेत कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। शहर में कैंसर, सांस की बीमारियां, गर्भपात, ट्यूमर और बच्चों में जन्म दोष (Birth Defects) के मामले बहुत तेज़ी से बढ़े।
पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि कंपनी को 1987 में ही इस प्रदूषण का पता चल गया था, लेकिन उन्होंने स्थानीय जल बोर्ड या जनता को तुरंत पूरी जानकारी नहीं दी। बल्कि कंपनी की ओर से कथित तौर पर लोगों को गुमराह किया गया कि पानी में मौजूद क्रोमियम स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित सीमा के भीतर ही है। कंपनी की इस लीपापोती के बावजूद आखिरकार उसका भेद खुल गया। इस मामले में आगे का घटनाक्रम कुछ इस प्रकार रहा-
1993 में, एक लॉ फर्म में फाइल क्लर्क के रूप में काम करने वाली एरिन ब्रॉकोविच ने एक रियल एस्टेट मामले की फाइलिंग के दौरान निवासियों के मेडिकल रिकॉर्ड देखे।
बिना किसी कानूनी या वैज्ञानिक प्रशिक्षण के, उन्होंने घर-घर जाकर बीमार लोगों का डेटा जुटाया और इस सच्चाई को सामने लाईं कि इन बीमारियों का सीधा संबंध PG&E के ज़हरीले पानी से था।
इसके बाद, 600 से अधिक हिंकले निवासियों की ओर से PG&E के खिलाफ एक सामूहिक मुकदमा (Class-action Lawsuit) दायर किया गया।
2 जुलाई 1996 को, यह मामला अदालत के बाहर $333 मिलियन (333 मिलियन डॉलर) के रिकॉर्ड समझौते पर समाप्त हुआ। उस समय के अमेरिकी इतिहास में किसी सीधे मुकदमे में दिया जाने वाला यह सबसे बड़ा मुआवजा था।
इस घटना पर साल 2000 में हॉलीवुड फिल्म 'Erin Brockovich' भी बनी, जिसमें जूलिया रॉबर्ट्स ने मुख्य भूमिका निभाई थी और इस मुद्दे को वैश्विक पहचान मिली।
इस समझौते और मुआवजे के आदेशों के बावजूद, हिंकले का पानी पूरी तरह साफ नहीं हो सका। ज़हरीला क्रोमियम-6 भूमिगत जल अगले कई वर्षों तक नए-नए इलाकों में कई किलोमीटर के दायरे में फैलता रहा।
PG&E ने मुआवजे के नए मुकदमों से बचने के लिए हिंकले के अधिकांश घरों और जमीनों को खुद खरीद लिया और वहां बने घरों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। इस तरह एक बसा बसाया शहर पूरी तरह से उजाड़ होकर एक "भूतिया शहर" (Ghost Town) में बदल गया।
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