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नदी और तालाब

चंडीगढ़ में नदियां नहीं, मौसमी जलधाराएं हैं शहर की प्राकृतिक जल प्रणाली की रीढ़, देखें सूची 

Author : डॉ. कुमारी रोहिणी
  • चंडीगढ़ में बड़ी नदियां नहीं हैं। शहर की प्राकृतिक जल प्रणाली मुख्यतः मौसमी चोए और छोटी जलधाराओं पर निर्भर है।

  • सुखना चोए और पटियाला-की-राव शहर के प्रमुख प्राकृतिक जल निकासी तंत्र हैं।

  • शिवालिक का जलग्रहण क्षेत्र इन जलधाराओं और सुखना झील के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

  • शहरीकरण, प्रदूषण और भारी बारिश इन मौसमी जलधाराओं के सामने बड़ी चुनौतियां हैं।

चंडीगढ़ शिवालिक की तलहटी में स्थित है। यहां की प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था में मौसमी चोए और छोटी जलधाराएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। चंडीगढ़ प्रशासन के अनुसार शहर के पूर्वी हिस्से की जल निकासी सुखना चोए और पश्चिमी हिस्से की पटियाला-की-राव चोए से होती है। इनके बीच का क्षेत्र जल-विभाजक है। यहां एन-चोए और चोए नाला जैसी छोटी धाराएं भी हैं।

इनमें से अधिकांश जलधाराओं का प्रवाह मुख्यतः वर्षा पर निर्भर करता है। इसलिए मानसून में इनका जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है, जबकि सूखे मौसम में कई धाराओं में पानी बहुत कम रह जाता है।

विषयविवरण
मुख्य नदी बेसिनघग्गर नदी बेसिन
चंडीगढ़ से बहने वाली प्रमुख मौसमी धारासुखना चो
दूसरी प्रमुख मौसमी धारापटियाला-की-राव चो
केंद्रीय हिस्से की प्रमुख धाराएन-चो
अन्य छोटी जलधाराचो नाला
घग्गर से जुड़ने वाले प्रमुख ड्रेनसुखना चो, एन-चो, फाइदा चो और पटियाला-की-राव
चंडीगढ़ से निकट बहने वाली प्रमुख नदीघग्गर
चंडीगढ़ की जलधाराओं की प्रकृतिमुख्यतः मौसमी
सुखना झील से जुड़ी धारासुखना चो
शिवालिक से निकलने वाली प्रमुख धाराएंसुखना चो और पटियाला-की-राव चो

चंडीगढ़ की नदी-प्रणाली 

चंडीगढ़ की नदी प्रणाली को बड़ी नदियों के बजाय मौसमी चोए और जल निकासी तंत्र के रूप में समझना अधिक उचित है। चंडीगढ़ की प्राकृतिक ढलान और शिवालिक की स्थिति इसकी जल निकासी व्यवस्था को प्रभावित करती है। शहर का मध्य भाग एक जल-विभाजक है। यहां से एन-चोए और चोए नाला जैसी छोटी धाराएं निकलती हैं।

चंडीगढ़ की प्रमुख जलधाराएं

जलधाराप्रमुख क्षेत्र/स्थितिप्रमुख विशेषता
सुखना चोएचंडीगढ़ के पूर्वी हिस्से से होकरसुखना झील और उसके जलग्रहण क्षेत्र से जुड़ी मौसमी धारा
पटियाला-की-राव चोएचंडीगढ़ के पश्चिमी हिस्से से होकरशिवालिक क्षेत्र से आने वाली मौसमी जलधारा
एन-चोए (अटावा चोए)शहर के मध्य हिस्से से होकरशहरी जल निकासी और आगे घग्गर तंत्र से जुड़ाव
चोए नालासेक्टर 29 क्षेत्र से शुरूशहर की छोटी प्राकृतिक जलधाराओं में शामिल
सुखना नाला/अन्य छोटी धाराएंसुखना जलग्रहण क्षेत्र और आसपासबरसाती बहाव और स्थानीय जल निकासी में भूमिका

सुखना चोए: सुखना झील से आगे का जल प्रवाह

सुखना चोए चंडीगढ़ की सबसे प्रमुख मौसमी जलधाराओं में है। यह सुखना झील और उसके जलग्रहण क्षेत्र से जुड़े प्राकृतिक जल निकासी तंत्र का हिस्सा है।

सुखना झील का जलग्रहण क्षेत्र शिवालिक की पहाड़ियों तक फैला है। यह क्षेत्र मिट्टी के कटाव के प्रति संवेदनशील है। इसी कारण झील और उससे जुड़ी जलधारा के लिए जलग्रहण क्षेत्र का संरक्षण महत्वपूर्ण है।

सुखना चोए केवल जल निकासी का रास्ता नहीं है। यह शहर के आसपास के प्राकृतिक क्षेत्र और जल पारिस्थितिकी से भी जुड़ी है।

पटियाला-की-राव: पश्चिमी हिस्से की प्रमुख जलधारा

पटियाला-की-राव चोए चंडीगढ़ की दूसरी प्रमुख मौसमी जलधारा है। चंडीगढ़ प्रशासन इसे शहर के पश्चिमी हिस्से की मुख्य प्राकृतिक जलधारा के रूप में दर्ज करता है।

चंडीगढ़ के बॉटनिकल गार्डन में पटियाला-की-राव के साथ दो झीलें विकसित की गई हैं। इनका उद्देश्य वर्षाजल का संचयन और भूजल पुनर्भरण है।

एन-चोए: शहर के बीच से निकलने वाली धारा

एन-चोए को अटावा चोए भी कहा जाता है। यह चंडीगढ़ की प्रमुख शहरी जलधाराओं में है। इसका प्रवाह शहर के कई हिस्सों से होकर आगे मोहाली की ओर जाता है।

यह धारा केवल प्राकृतिक बहाव का रास्ता नहीं है। शहर का वर्षाजल निकासी तंत्र भी इससे जुड़ा है। इसलिए तेज बारिश के समय एन-चोए की क्षमता और उसके आसपास की भूमि का उपयोग बाढ़ के जोखिम से सीधे जुड़ जाता है। चंडीगढ़ की जल निकासी व्यवस्था में प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों तरह की नालियां शामिल हैं।

एन-चोए आगे चलकर घग्गर नदी तंत्र से जुड़ता है। इसलिए चंडीगढ़ से निकलने वाले पानी और प्रदूषकों का प्रभाव शहर की सीमा से बाहर भी पड़ सकता है।

चंडीगढ़ में बड़ी नदियों पर बने बड़े बांध या बैराज नहीं हैं। यहां की प्रमुख जल संरचनाएं मुख्यतः सुखना झील के जलग्रहण क्षेत्र में बने साइल्ट रिटेंशन डैम, चेक डैम और छोटे जल निकाय हैं।

चोए नाला: छोटी लेकिन महत्वपूर्ण जलधारा

चंडीगढ़ प्रशासन के अनुसार चोए नाला सेक्टर 29 से शुरू होता है। यह शहर की छोटी प्राकृतिक जलधाराओं में शामिल है।

ऐसी छोटी धाराएं शहर के स्थानीय वर्षाजल को निकालने में भूमिका निभाती हैं। इनका प्राकृतिक रास्ता बनाए रखना भारी बारिश के दौरान जल निकासी के लिए जरूरी है।

चंडीगढ़ के जलग्रहण क्षेत्र और जल निकासी तंत्र

जलग्रहण/जल निकासी क्षेत्रप्रमुख जलधाराप्रमुख विशेषतामहत्व
सुखना जलग्रहण क्षेत्रसुखना चोएशिवालिक की पहाड़ियों से जुड़ासुखना झील और जल संरक्षण
पश्चिमी जल निकासी क्षेत्रपटियाला-की-राव चोएपश्चिमी चंडीगढ़ की प्रमुख मौसमी धारावर्षाजल निकासी और जल संरक्षण
केंद्रीय जल-विभाजक क्षेत्रएन-चोएशहर के मध्य हिस्से से होकर बहती हैशहरी जल निकासी
केंद्रीय क्षेत्रचोए नालासेक्टर 29 से शुरूस्थानीय वर्षाजल निकासी

चंडीगढ़ में बड़ी नदी घाटियों के बजाय छोटे जलग्रहण क्षेत्रों और चोए तंत्र को समझना अधिक उपयोगी है। शिवालिक की ढलानों से बारिश का पानी नीचे आता है। यह पानी छोटी धाराओं और चोए के रास्ते आगे बहता है।

चंडीगढ़ मास्टर प्लान 2031 के अनुसार सुखना जलग्रहण क्षेत्र में साइल्ट डिटेंशन डैम और चिनाई वाले चेक डैम समेत कई मृदा एवं जल संरक्षण उपाय किए गए हैं। इनसे झील में आने वाली गाद को कम करने में मदद मिली है।

सुखना झील का जलग्रहण क्षेत्र इसका प्रमुख उदाहरण है। शिवालिक की पहाड़ियों में मिट्टी का कटाव तेज होने पर बड़ी मात्रा में तलछट झील में पहुंच सकती है। चंडीगढ़ प्रशासन के अनुसार झील में शुरुआती दशकों में गाद जमा होने की समस्या गंभीर थी। इसके बाद जल और मृदा संरक्षण तथा वनीकरण के उपाय किए गए।

इसलिए चंडीगढ़ में नदी संरक्षण को केवल चोए की सफाई तक सीमित नहीं किया जा सकता। उसके पूरे जलग्रहण क्षेत्र को देखना जरूरी है।

चंडीगढ़ की प्रमुख जल संरचनाएं: बांध और चेक डैम

जल संरचनास्थान/क्षेत्रप्रमुख उद्देश्य
साइल्ट रिटेंशन डैमसुखना झील का जलग्रहण क्षेत्रगाद को रोकना, मिट्टी का कटाव कम करना और पानी को रोकना
चेक डैमसुखना वन्यजीव अभयारण्य और चोए क्षेत्रबहाव की गति कम करना, जल संचयन और मृदा संरक्षण
छोटे जल निकायसुखना जलग्रहण क्षेत्रवर्षाजल रोकना और वन्यजीवों के लिए पानी उपलब्ध कराना
सुखना झीलसुखना चोए का जलग्रहण क्षेत्रजल संचयन, शहरी पर्यावरण और मनोरंजन

चंडीगढ़ में बड़ी नदियों पर बने बड़े बांध या बैराज नहीं हैं। यहां की प्रमुख जल संरचनाएं मुख्यतः सुखना झील के जलग्रहण क्षेत्र में बने साइल्ट रिटेंशन डैम, चेक डैम और छोटे जल निकाय हैं। इनका उद्देश्य बारिश के पानी के बहाव को धीमा करना, मिट्टी के कटाव को कम करना और गाद को नीचे आने से रोकना है।

चंडीगढ़ प्रशासन के अनुसार सुखना वन्यजीव अभयारण्य और उसके जलग्रहण क्षेत्र में साइल्ट रिटेंशन डैम, चेक डैम, गली प्लगिंग और चोए प्रशिक्षण जैसे उपाय किए गए हैं। इन संरचनाओं के पीछे बने जल निकायों से पानी को कुछ समय तक रोकने और मिट्टी के कटाव को कम करने में मदद मिलती है।

चंडीगढ़ प्रशासन की एक जानकारी के अनुसार जल और मृदा संरक्षण के लिए 190 साइल्ट रिटेंशन डैम और 200 से अधिक चेक डैम बनाए गए हैं। इन संरचनाओं के पीछे बने जल निकायों में जमा गाद को समय-समय पर हटाया जाता है।

चंडीगढ़ मास्टर प्लान 2031 के अनुसार सुखना जलग्रहण क्षेत्र में साइल्ट डिटेंशन डैम और चिनाई वाले चेक डैम समेत कई मृदा एवं जल संरक्षण उपाय किए गए हैं। इनसे झील में आने वाली गाद को कम करने में मदद मिली है।

चंडीगढ़ की जलधाराओं का पर्यावरणीय और शहरी महत्व

महत्वभूमिका
वर्षाजल निकासीबारिश के पानी को शहर से बाहर ले जाने में मदद
बाढ़ नियंत्रणप्राकृतिक जलधाराएं अतिरिक्त पानी के बहाव का रास्ता देती हैं
भूजल पुनर्भरणकुछ जल निकाय और वर्षाजल संरचनाएं भूजल पुनर्भरण में मदद करती हैं
जैव विविधताजलधाराओं और उनके आसपास के क्षेत्र पक्षियों तथा अन्य जीवों के लिए आवास उपलब्ध कराते हैं
हरित क्षेत्रकई चोए शहर के पार्कों और हरित गलियारों से जुड़े हैं
पर्यटन और मनोरंजनसुखना झील और आसपास के प्राकृतिक क्षेत्र शहर के प्रमुख आकर्षण हैं

चंडीगढ़ की जलधाराएं शहर की प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था का हिस्सा हैं। वे बारिश के पानी को आगे ले जाने में मदद करती हैं। इनके जलग्रहण क्षेत्र मिट्टी और पानी के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण हैं। सुखना जलग्रहण क्षेत्र इसका प्रमुख उदाहरण है। यहां मृदा संरक्षण और वनीकरण से झील में गाद आने की दर को कम करने में मदद मिली।

इन जलधाराओं का महत्व शहर की हरित व्यवस्था से भी जुड़ा है। चंडीगढ़ के मास्टर प्लान में प्राकृतिक चोए और खुले एवं हरित क्षेत्रों को एक साथ देखने पर जोर दिया गया है।

चंडीगढ़ की जलधाराओं के सामने प्रमुख चुनौतियां

चंडीगढ़ की जलधाराओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि प्राकृतिक जल निकासी और तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्र के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

अचानक बढ़ता जलस्तर और जलभराव  

चोए के आसपास निर्माण और भूमि उपयोग में बदलाव से उनके प्राकृतिक बहाव के रास्ते और फैलाव क्षेत्र पर दबाव पड़ सकता है। इससे भारी बारिश के समय जल निकासी की समस्या बढ़ सकती है।

सुखना चोए से जुड़े एक मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने भी इसके प्राकृतिक प्रवाह और संकुचन से जुड़े मुद्दों पर विचार किया था।

शहरीकरण और प्राकृतिक बहाव में बदलाव

चोए के आसपास निर्माण और भूमि उपयोग में बदलाव से उनके प्राकृतिक बहाव के रास्ते और फैलाव क्षेत्र पर दबाव पड़ सकता है। इससे भारी बारिश के समय जल निकासी की समस्या बढ़ सकती है। सुखना चोए से जुड़े एक मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने भी इसके प्राकृतिक प्रवाह और संकुचन से जुड़े मुद्दों पर विचार किया था।

प्रदूषण

शहरी जलधाराओं के लिए प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। CPCB के 2022 के जल गुणवत्ता आंकड़ों में एन-चोए, पटियाला-की-राव और सुखना चोए तीनों को ड्रेन के रूप में दर्ज किया गया है। इन नमूनों में BOD और कोलीफॉर्म के ऊंचे स्तर भी दर्ज हुए।

इसका मतलब है कि नदी संरक्षण केवल बारिश के पानी के बहाव का सवाल नहीं है। इसमें सीवेज, ठोस कचरे और दूसरे प्रदूषकों को जलधाराओं तक पहुंचने से रोकना भी जरूरी है।

शहर से बाहर जाने वाला जल प्रवाह

चंडीगढ़ की प्राकृतिक जलधाराएं प्रशासनिक सीमा तक सीमित नहीं हैं। उनका जल प्रवाह आसपास के क्षेत्रों से भी जुड़ता है। इसलिए जल निकासी और प्रदूषण का प्रबंधन पड़ोसी क्षेत्रों के साथ समन्वय से करना जरूरी है।

भारी बारिश और मौसमी प्रवाह

भारी बारिश कम समय में होने पर मौसमी जलधाराओं में अचानक तेज बहाव आ सकता है। दूसरी ओर, लंबे शुष्क दौर में इन धाराओं में पानी बहुत कम हो सकता है। इसलिए जल प्रबंधन में सामान्य वर्षा के साथ भारी बारिश से पैदा होने वाले तेज बहाव को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

शहरी जलधाराओं
के लिए प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। CPCB के 2022 के जल गुणवत्ता आंकड़ों में एन-चोए, पटियाला-की-राव और सुखना चोए तीनों को ड्रेन के रूप में दर्ज किया गया है।

चंडीगढ़ की जलधाराओं और जलग्रहण क्षेत्रों का संरक्षण

चंडीगढ़ में नदी संरक्षण का काम जल निकासी, झील संरक्षण, वर्षाजल संचयन और जलग्रहण क्षेत्र के प्रबंधन से जुड़ा है।

पहल/उपायउद्देश्य
सुखना जलग्रहण क्षेत्र में मृदा एवं जल संरक्षणमिट्टी के कटाव और झील में गाद को कम करना
जलग्रहण क्षेत्र में वनीकरणसतही बहाव और मिट्टी के कटाव को कम करना
पटियाला-की-राव के साथ जल निकायवर्षाजल संचयन और भूजल पुनर्भरण
प्राकृतिक चोए और हरित क्षेत्रप्राकृतिक जल निकासी और पारिस्थितिकी को बनाए रखना

1960 और 1970 के दशक में सुखना झील में गाद तेजी से जमा होती थी। 1988 तक गाद के कारण झील की मूल जलधारण क्षमता का 66% कम हो गया था। इसके बाद जल और मृदा संरक्षण तथा बड़े पैमाने पर वनीकरण के उपाय किए गए। इससे गाद आने की दर में काफी कमी आई।

चंडीगढ़ के बॉटनिकल गार्डन में पटियाला-की-राव के साथ बनाए गए जल निकाय वर्षाजल संचयन और भूजल पुनर्भरण के उदाहरण हैं।

चंडीगढ़ के मास्टर प्लान में भी प्राकृतिक चोए को हरित गलियारों और खुले क्षेत्रों के नेटवर्क से जोड़ने की बात कही गई है।

वर्तमान स्थिति

चंडीगढ़ की नदी प्रणाली बड़ी नदियों से नहीं, बल्कि मौसमी चोए, छोटी जलधाराओं और उनके जलग्रहण क्षेत्रों से बनी है। सुखना चोए और पटियाला-की-राव इसके प्रमुख प्राकृतिक जल निकासी तंत्र हैं। एन-चोए और दूसरी छोटी धाराएं भी शहर के वर्षाजल प्रबंधन में भूमिका निभाती हैं।

इन जलधाराओं की स्थिति शहर के भूमि उपयोग, जल निकासी और जल गुणवत्ता से जुड़ी है। इसलिए इनके संरक्षण को केवल सफाई या नालों के विस्तार तक सीमित नहीं किया जा सकता। जलग्रहण क्षेत्रों, प्राकृतिक बहाव के रास्तों, हरित क्षेत्रों और वर्षाजल प्रबंधन को साथ लेकर चलना होगा।

चंडीगढ़ के लिए चुनौती यह है कि मौसमी जलधाराओं को केवल जल निकासी की समस्या मानने के बजाय उन्हें शहर के प्राकृतिक जल तंत्र का हिस्सा मानकर प्रबंधित किया जाए।

संदर्भ

General Information 

Sukhna Wildlife Sanctuary 

Chandigarh Master Plan 2031 – Ecology and Environment.

Chandigarh Master Plan 2031 – Open Spaces.

Botanical Garden. चंडीगढ़ प्रशासन।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), Water Quality Data of Drains under National Water Quality Monitoring Programme (NWMP), 2022.

केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB), Dynamic Ground Water Resources / Ground Water Information related to Chandigarh. भारत सरकार, जल शक्ति मंत्रालय।

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