जल प्रबंधन और नदी-नीति की असली इकाई कोई एक नदी नहीं, बल्कि पूरा रिवर बेसिन होता है।
चित्र: भारत का नदी बेसिन एटलस, सीडब्ल्यूसी और इसरो, 2012
भारत में नदियों की चर्चा अक्सर गंगा, ब्रह्मपुत्र, नर्मदा या गोदावरी जैसे नामों से शुरू होती है। लेकिन जल प्रबंधन और नदी-नीति की असली इकाई कोई एक नदी नहीं, बल्कि पूरा रिवर बेसिन होता है।
यानी वह भौगोलिक क्षेत्र जहां बारिश का पानी, पहाड़ों और ढलानों से बहता हुआ अंत में किसी एक मुख्य नदी और उसकी सहायक धाराओं में मिल जाता है। यह समझ सिर्फ तकनीकी नहीं है, बल्कि भारत के जल भविष्य की बुनियाद भी है।
आसान शब्दों में कहा जाए तो, किसी नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा जल निकासी वाले पूरे क्षेत्र को रिवर बेसिन कहा जाता है।
यह सिर्फ एक नदी का रास्ता नहीं होता, बल्कि पहाड़, पठार, मैदान और जल निकासी नेटवर्क, सब मिलकर एक प्राकृतिक जल प्रणाली बनाते हैं। उदाहरण के लिए, गंगा बेसिन केवल गंगा नदी नहीं है। इसमें यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी, सोन जैसी सहायक नदियां शामिल हैं।
भारत सरकार के जल संसाधन सूचना प्रणाली (India-WRIS) के अनुसार भारत को प्रमुख नदी बेसिनों में बांटा गया है। देश में लगभग 25 प्रमुख बेसिन और 102 उप-बेसिन हैं।
यह भारत का सबसे विशाल जल निकासी तंत्र है जो लगभग 11 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है।
इसका महत्व केवल इसके आकार से नहीं, बल्कि इसके प्रभाव से आंका जाता है। दरअसल, देश की सबसे बड़ी आबादी इसी पर निर्भर है। साथ ही सबसे अधिक कृषि उत्पादन भी यहीं होता है और सबसे गंभीर बाढ़ घटनाएं भी इसी क्षेत्र में आती हैं। बिहार, असम, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की बाढ़, डेल्टा क्षरण और गाद जमाव, ये सभी बेसिन-स्तर की प्रक्रियाएं हैं, न कि नदी से जुड़ी अलग-थलग घटनाएं।
जल प्रबंधन की मूल इकाई: नदियां राज्य या जिला सीमाओं का पालन नहीं करतीं। इसलिए जल प्रबंधन भी प्रशासनिक नहीं, बल्कि बेसिन आधारित होना चाहिए। उदाहरण के लिए कावेरी विवाद सिर्फ दो राज्यों का नहीं, बल्कि पूरे कावेरी बेसिन का जल संतुलन मुद्दा है।
बाढ़ और सूखा प्रबंधन: एक ही बेसिन में कहीं बाढ़ और कहीं सूखा देखने को मिल सकता है। अगर पूरे बेसिन का समग्र अध्ययन हो, तो जल भंडारण, जल निकासी और भूजल पुनर्भरण की बेहतर योजना बनाई जा सकती है।
भूजल और सतही जल का संबंध: भारत के कई बेसिनों में भूजल दोहन तेजी से बढ़ा है। गंगा और कृष्णा जैसे बेसिनों में भूजल दोहन ने सतही प्रवाह को प्रभावित किया है। दोनों को अलग-अलग नहीं समझा जा सकता है।
बांध और हाइडल परियोजनाएं: अधिकांश बड़े बांध किसी न किसी बेसिन योजना का हिस्सा होते हैं। नर्मदा घाटी परियोजना, कृष्णा जल विवाद, महानदी जल बंटवारा, ये सभी बेसिन आधारित योजनाओं और संघर्षों के उदाहरण हैं।
।।जलवायु परिवर्तन ने भारत के नदी बेसिनों को अलग-अलग तरह से प्रभावित किया है:
हिमालयी बेसिन: ग्लेशियर पिघलना, अचानक फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की घटनाएं आम हो गई हैं।
प्रायद्वीपीय बेसिन: लंबे समय तक सूखे की स्थिति, कम वार्षिक प्रवाह और भूजल पर बढ़ती निर्भरता ने संतुलन को प्रभावित किया है। इस बदलाव ने नदी को “स्थिर प्रणाली” से “अस्थिर जल नेटवर्क” में बदल दिया है।
इसे देखते हुए ही पिछले कुछ सालों में महाराष्ट्र सरकार ने नर्मदा, तापी, कृष्णा और गोदावरी बेसिनों के संरक्षण के लिए एक “रिवर रीजुवेनेशन अथॉरिटी” बनाने की घोषणा भी की है।
गंगा बेसिन: भारत की सबसे बड़ी आबादी और कृषि अर्थव्यवस्था इसी बेसिन पर निर्भर है। यहां भूजल दोहन, प्रदूषण और बाढ़ तीनों बड़ी चुनौतियां हैं।
ब्रह्मपुत्र बेसिन: यह भारत के सबसे अधिक जल प्रवाह वाले क्षेत्रों में शामिल है। असम की बाढ़ और पूर्वोत्तर की पारिस्थितिकी इसी से जुड़ी है।
गोदावरी बेसिन: इसे दक्षिण की गंगा भी कहा जाता है। यह दक्षिण भारत की सबसे बड़ी नदी प्रणाली है।
कृष्णा बेसिन: यह सिंचाई और जलविद्युत परियोजनाओं के कारण अत्यधिक दबाव में रहने वाला बेसिन है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच लंबे समय से जल विवाद का केंद्र भी बना हुआ है।
नर्मदा बेसिन: यह पश्चिम की ओर बहने वाली प्रमुख नदी प्रणाली है। बड़े बांधों और विस्थापन बहसों के कारण लगातार चर्चा में रहती है।
कावेरी बेसिन: इस नदी बेसिन का नामदेश के सबसे संवेदनशील अंतर्राज्यीय जल विवादों की सूची में आता है। दक्षिण भारत की कृषि और पेयजल व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
रिवर बेसिन केवल जल प्रणाली नहीं हैं, बल्कि इनके भीतर वेटलैंड (आर्द्रभूमि), बाढ़-क्षेत्र और रामसर स्थलों जैसे पारिस्थितिक तंत्र भी शामिल होते हैं।
बेसिन का स्वास्थ्य सीधे तौर पर इन पर ही निर्भर करता है। उदाहरण के लिए गंगा डेल्टा, महानदी मुहाना और कावेरी एस्ट्यूरी ये सभी केवल नदी के अंत नहीं हैं, बल्कि पूरे बेसिन का पारिस्थितिक उत्पादन हैं।
भारत में जल नीति लंबे समय तक नदी-केंद्रित रही है। लेकिन अब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि जल संकट का समाधान नदी के स्तर पर नहीं, बल्कि पूरे बेसिन के स्तर पर खोजा जाना चाहिए।
आज की प्रमुख चुनौतियां अलग-अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। अनियंत्रित शहरीकरण, रेत खनन, बड़े बांधों का दबाव, भूजल का अत्यधिक दोहन और जलवायु परिवर्तन से इनका सीधा संबंध है।
इन सभी का असर किसी एक नदी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे नदी बेसिन की जल-प्रणाली, पारिस्थितिकी और संतुलन को प्रभावित करता है।
India-WRIS द्वारा किए गए अध्ययन इस बात पर जोर देते हैं कि आने वाले समय में जल नीति का फोकस रिवर बेसिन गवर्नेंस पर बढ़ेगा। इससे नदी को एक जीवित पारिस्थितिक तंत्र की तरह देखा जाएगा, न कि सिर्फ पानी के स्रोत के रूप में।
रिवर बेसिन को समझना सिर्फ एक जल-वैज्ञानिक अवधारणा नहीं है, बल्कि यह भारत के भविष्य की जल नीति की दिशा तय करता है। अब जरूरत इस बात की है कि नदी को अलग इकाई की तरह नहीं बल्कि एक जुड़े हुए पारिस्थितिक तंत्र के रूप में देखा जाए।
क्योंकि आख़िरकार, नदियों में केवल पानी नहीं बहता है, बल्कि वे पूरे भूगोल, पारिस्थितिकी और सभ्यता को जोड़ती हैं।
भारत के प्रमुख रिवर बेसिनों की सूचियां
भारत में नदी बेसिनों की कई सूचियां उपलब्ध हैं। क्योंकि अलग-अलग संस्थाएं पानी और जल निकासी तंत्र का अध्ययन अपने कार्यक्षेत्र के अनुसार करती हैं।
यह सूची भारत के उन बड़े नदी क्षेत्रों को दिखाती है जहां किसी एक मुख्य नदी और उसकी सहायक नदियों का पूरा जल प्रवाह एकत्र होता है। इन बेसिनों के आधार पर देश में जल प्रबंधन, सिंचाई, बांध और बाढ़ नियंत्रण की योजनाएं बनाई जाती हैं।
| भारत के प्रमुख रिवर बेसिन: विस्तृत सूची | |||
|---|---|---|---|
| क्रम सं. | रिवर बेसिन | अनुमानित क्षेत्रफल (वर्ग किमी) | प्रमुख राज्य / क्षेत्र |
| 1 | सिंधु (Indus up to border) बेसिन | 4,53,931 | लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर |
| 2 | गंगा बेसिन | 8,08,334 | उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, प.बंगाल |
| 3 | ब्रह्मपुत्र बेसिन | 1,86,421 | अरुणाचल प्रदेश, असम |
| 4 | बराक एवं अन्य बेसिन | 45,622 | असम, मणिपुर, मिजोरम |
| 5 | गोदावरी बेसिन | 3,02,063 | महाराष्ट्र, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश |
| 6 | कृष्णा बेसिन | 2,54,743 | महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश |
| 7 | कावेरी (Cauvery) बेसिन | 85,624 | कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल |
| 8 | सुवर्णरेखा बेसिन | 25,792 | झारखंड, ओडिशा, प.बंगाल |
| 9 | ब्राह्मणी-बैतरणी बेसिन | 51,893 | ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ |
| 10 | महानदी बेसिन | 1,39,659 | छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र |
| 11 | पेन्नार बेसिन | 54,243 | कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु |
| 12 | माही बेसिन | 38,336 | मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात |
| 13 | साबरमती बेसिन | 30,678 | राजस्थान, गुजरात |
| 14 | नर्मदा बेसिन | लगभग 92,000+ | मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात |
| 15 | तापी (ताप्ती) बेसिन | लगभग 63,000+ | मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात |
| 16 | तापी बेसिन के दक्षिण में पश्चिम की ओर बहने वाली नदियां | 111643 | आंध्र प्रदेश |
| 17 | महानदी और गोदावरी बेसिन के बीच पूर्व की ओर बहने वाली नदियां | 46243 | आंध्र प्रदेश |
| 18 | गोदावरी और कृष्णा बेसिन के बीच पूर्व की ओर बहने वाली | 10345 | तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश |
| 19 | कृष्णा और पेन्नार बेसिन के बीच पूर्व की ओर बहने वाली नदियां | 23335 | तमिलनाडु |
| 20 | पेन्नार और कावेरी बेसिन के बीच पूर्व की ओर बहने वाली नदियां | 63646 | केरल |
| 21 | कावेरी बेसिन के दक्षिण में पूर्व की ओर बहने वाली नदियां | 38646 | तमिलनाडु |
| 22 | लूनी बेसिन सहित कच्छ और सौराष्ट्र की पश्चिम की ओर बहने वाली नदियां | 184441 | गुजरात |
| 23 | बांग्लादेश बेसिन में गिरने वाली छोटी नदियां | 5453.23 | राजस्थान, गुजरात |
| 24 | म्यांमार बेसिन में गिरने वाली छोटी नदियां | 24731 | हरियाणा, राजस्थान |
| 25 | उत्तरी लद्दाख का वह क्षेत्र जो सिंधु बेसिन में नहीं गिरता | 29238 | अंडमान-निकोबार |
| 26 | अंडमान और निकोबार द्वीप समूह बेसिन का जल निकासी क्षेत्र | 6918.2 | लक्षद्वीप |
| 27 | लक्षद्वीप द्वीप समूह बेसिन का जल निकासी क्षेत्र | 462 | लक्षद्वीप |
| 28 | द्वीप बेसिन | 371 | ---- |
महत्वपूर्ण सब-बेसिन
सब-बेसिन किसी बड़े रिवर बेसिन के भीतर आने वाले छोटे जल निकासी क्षेत्र होते हैं। ये बताते हैं कि किसी बड़ी नदी प्रणाली के अंदर अलग-अलग सहायक नदियां किस तरह अपना अलग जल क्षेत्र बनाती हैं।
| मुख्य उप-बेसिन | ||
|---|---|---|
| क्र. सं. | उप-बेसिन का नाम | क्षेत्रफल (वर्ग किमी) |
| 1 | बाड़मेर उप-बेसिन | 21646.88 |
| 2 | ब्यास उप-बेसिन | 19138.22 |
| 3 | चौटांग एवं अन्य उप-बेसिन | 27543.74 |
| 4 | चिनाब उप-बेसिन | 29974.29 |
| 5 | चूरू उप-बेसिन | 66890.7 |
| 6 | घग्घर एवं अन्य उप-बेसिन | 49984.26 |
| 7 | गिलगित उप-बेसिन | 27101.85 |
| 8 | झेलम उप-बेसिन | 29196.01 |
| 9 | निचला सिंधु उप-बेसिन | 23891.72 |
| 10 | रावी उप-बेसिन | 13566.95 |
| 11 | श्योक उप-बेसिन | 38724.57 |
| 12 | सतलुज निचला उप-बेसिन | 38578.38 |
| 13 | सतलुज ऊपरी उप-बेसिन | 21425.47 |
| 14 | ऊपरी सिंधु उप-बेसिन | 46268.85 |
| 15 | रामगंगा संगम के ऊपर का उप-बेसिन | 38792.4 |
| 16 | बनास उप-बेसिन | 51639.43 |
| 17 | भागीरथी एवं अन्य (निचला गंगा) उप-बेसिन | 63059.31 |
| 18 | चंबल निचला उप-बेसिन | 11067.89 |
| 19 | चंबल ऊपरी उप-बेसिन | 25511.32 |
| 20 | दामोदर उप-बेसिन | 42050.58 |
| 21 | गंडक एवं अन्य उप-बेसिन | 56573.83 |
| 22 | घाघरा संगम से गोमती संगम तक उप-बेसिन | 26403.75 |
| 23 | घाघरा उप-बेसिन | 58728.53 |
| 24 | गोमती उप-बेसिन | 29618.82 |
| 25 | काली सिंध एवं अन्य, पार्वती संगम तक उप-बेसिन | 48511.99 |
| 26 | रामगंगा उप-बेसिन | 30811.48 |
| 27 | सोन उप-बेसिन | 64789.32 |
| 28 | टोंस उप-बेसिन | 16857.08 |
| 29 | गोमती संगम के ऊपर से मुजफ्फरनगर तक उप-बेसिन | 29381.01 |
| 30 | यमुना निचला उप-बेसिन | 125084.38 |
| 31 | यमुना मध्य उप-बेसिन | 34830.46 |
| 32 | यमुना ऊपरी उप-बेसिन | 35584.95 |
| 33 | कोसी उप-बेसिन | 19037.96 |
| 34 | ब्रह्मपुत्र निचला उप-बेसिन | 87381.27 |
| 35 | ब्रह्मपुत्र ऊपरी उप-बेसिन | 99040.33 |
| 36 | बराक उप-बेसिन | 27615.78 |
| 37 | किंचियांग एवं अन्य दक्षिणमुखी नदियों का उप-बेसिन | 10310.93 |
| 38 | नाओच छारा एवं अन्य उप-बेसिन | 7695.69 |
| 39 | गोदावरी निचला उप-बेसिन | 43821.19 |
| 40 | गोदावरी मध्य उप-बेसिन | 36289.01 |
| 41 | गोदावरी ऊपरी उप-बेसिन | 21469.99 |
| 42 | इंद्रावती उप-बेसिन | 38974.42 |
| 43 | मंजीरा उप-बेसिन | 29485.75 |
| 44 | प्राणहिता एवं अन्य उप-बेसिन | 36108.58 |
| 45 | वर्धा उप-बेसिन | 46237.65 |
| 46 | वैनगंगा उप-बेसिन | 49677.35 |
| 47 | भीमा निचला उप-बेसिन | 23649.56 |
| 48 | भीमा ऊपरी उप-बेसिन | 44807.62 |
| 49 | कृष्णा निचला उप-बेसिन | 39438.74 |
| 50 | कृष्णा मध्य उप-बेसिन | 22286.59 |
| 51 | कृष्णा ऊपरी उप-बेसिन | 54498.4 |
| 52 | तुंगभद्रा निचला उप-बेसिन | 41542.29 |
| 53 | तुंगभद्रा ऊपरी उप-बेसिन | 28520.15 |
| 54 | कावेरी निचला उप-बेसिन | 17378.51 |
| 55 | कावेरी मध्य उप-बेसिन | 57284.09 |
| 56 | कावेरी ऊपरी उप-बेसिन | 10961.84 |
| 57 | सुवर्णरेखा उप-बेसिन | 25792.16 |
| 58 | बैतरणी उप-बेसिन | 14244.22 |
| 59 | ब्राह्मणी उप-बेसिन | 37649.47 |
| 60 | महानदी निचला उप-बेसिन | 57987.1 |
| 61 | महानदी मध्य उप-बेसिन | 51877.65 |
| 62 | महानदी ऊपरी उप-बेसिन | 29794.4 |
| 63 | पेन्नार निचला उप-बेसिन | 17992.3 |
| 64 | पेन्नार ऊपरी उप-बेसिन | 36251.13 |
| 65 | माही निचला उप-बेसिन | 13379.26 |
| 66 | माही ऊपरी उप-बेसिन | 24957.54 |
| 67 | साबरमती निचला उप-बेसिन | 10825.49 |
| 68 | साबरमती ऊपरी उप-बेसिन | 19853.1 |
| 69 | नर्मदा निचला उप-बेसिन | 8897.8 |
| 70 | नर्मदा मध्य उप-बेसिन | 40580.48 |
| 71 | नर्मदा ऊपरी उप-बेसिन | 43192.22 |
| 72 | तापी निचला उप-बेसिन | 4110.13 |
| 73 | तापी मध्य उप-बेसिन | 31759.69 |
| 74 | तापी ऊपरी उप-बेसिन | 28053.09 |
| 75 | वशिष्ठी एवं अन्य उप-बेसिन | 27477.72 |
| 76 | नेत्रावती एवं अन्य उप-बेसिन | 18759.52 |
| 77 | पेरियार एवं अन्य उप-बेसिन | 21893.97 |
| 78 | वर्रार एवं अन्य उप-बेसिन | 14163.19 |
| 79 | भाटसोल एवं अन्य उप-बेसिन | 29349.48 |
| 80 | नागवती एवं अन्य उप-बेसिन | 24375.66 |
| 81 | वंशधारा एवं अन्य उप-बेसिन | 21867.4 |
| 82 | कृष्णा और गोदावरी के बीच पूर्वमुखी नदियों का उप-बेसिन | 10345.11 |
| 83 | कृष्णा और पेन्नार के बीच पूर्वमुखी नदियों का उप-बेसिन | 23335.82 |
| 84 | पालार एवं अन्य उप-बेसिन | 35385.35 |
| 85 | पोननैयार एवं अन्य उप-बेसिन | 28260.85 |
| 86 | पंबा एवं अन्य उप-बेसिन | 18302.72 |
| 87 | वैप्पार एवं अन्य उप-बेसिन | 20343.39 |
| 88 | भादर एवं अन्य पश्चिममुखी नदियों का उप-बेसिन | 17936.32 |
| 89 | रण जलनिकासी उप-बेसिन | 21035.42 |
| 90 | लूणी निचला उप-बेसिन | 19735.35 |
| 91 | लूणी ऊपरी उप-बेसिन | 79886.74 |
| 92 | सरस्वती उप-बेसिन | 27674.11 |
| 93 | शेत्रुंजी एवं अन्य पूर्वमुखी नदियों का उप-बेसिन | 18173.13 |
| 94 | कर्णफुली एवं अन्य उप-बेसिन | 3776.84 |
| 95 | मुहुरी एवं अन्य उप-बेसिन | 1676.39 |
| 96 | इंफाल एवं अन्य उप-बेसिन | 16754.9 |
| 97 | मंगपुई लुई एवं अन्य उप-बेसिन | 7976.18 |
| 98 | शक्सगाम उप-बेसिन | 6523.5 |
| 99 | सुलमार उप-बेसिन | 22715.52 |
| 100 | अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का जलनिकासी उप-बेसिन | 7577.85 |
| 101 | लक्षद्वीप द्वीप समूह का जलनिकासी उप-बेसिन | 669.81 |
| 102 | द्वीपीय उप-बेसिन | 371.4 |
यह सूची क्षेत्रफल के आधार पर भारत के सबसे बड़े नदी बेसिनों की है। इससे समझा जा सकता है कि देश की सबसे बड़ी आबादी, खेती और जल संसाधन किन नदी प्रणालियों पर निर्भर हैं। यह सूची केंद्रीय जल आयोग (CWC) द्वारा तैयार की गई है।
| NCIWRDP के अनुसार बेसिन की सूची | ||
|---|---|---|
| क्र. सं. | बेसिन का नाम | क्षेत्रफल (वर्ग किमी) |
| 1 | सिंधु बेसिन (सीमा तक) | 321289 |
| 2 | गंगा बेसिन | 861452 |
| 3 | ब्रह्मपुत्र बेसिन | 194413 |
| 4 | बराक एवं अन्य बेसिन | 41723 |
| 5 | गोदावरी बेसिन | 312812 |
| 6 | कृष्णा बेसिन | 258948 |
| 7 | कावेरी बेसिन | 81155 |
| 8 | सुवर्णरेखा बेसिन | 29196 |
| 9 | ब्राह्मणी और बैतरणी बेसिन | 51822 |
| 10 | महानदी बेसिन | 141589 |
| 11 | पेन्नार बेसिन | 55213 |
| 12 | माही बेसिन | 34842 |
| 13 | साबरमती बेसिन | 21674 |
| 14 | नर्मदा बेसिन | 98796 |
| 15 | तापी बेसिन | 65145 |
| 16 | तापी से तद्री तक पश्चिममुखी नदियों का बेसिन | 55940 |
| 17 | तद्री से कन्याकुमारी तक पश्चिममुखी नदियों का बेसिन | 56177 |
| 18 | महानदी और पेन्नार के बीच पूर्वमुखी नदियों का बेसिन | 86643 |
| 19 | पेन्नार और कन्याकुमारी के बीच पूर्वमुखी नदियों का बेसिन | 100139 |
| 20 | कच्छ और सौराष्ट्र की पश्चिममुखी नदियों सहित लूणी बेसिन | 321851 |
| 21 | राजस्थान का आंतरिक जलनिकासी क्षेत्र | — |
| 22 | म्यांमार और बांग्लादेश में गिरने वाली लघु नदियाँ | 36202 |
NCIWRDP बेसिन
NCIWRDP का बेसिन वर्गीकरण राष्ट्रीय स्तर पर जल संसाधन विकास और दीर्घकालिक जल योजना के उद्देश्य से तैयार किया गया था। आम तौर पर बांध बनाने, रिवर-लिंकिंग, व हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में सहायक होती है।
| AISLUS की सूची | ||
|---|---|---|
| क्र. सं. | बेसिन का नाम | क्षेत्रफल (वर्ग किमी) |
| 1 | सिंधु बेसिन | 321289 |
| 2 | गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना बेसिन | 1101242 |
| 3 | सुवर्णरेखा बेसिन | 29196 |
| 4 | ब्राह्मणी-बैतरणी बेसिन | 51822 |
| 5 | महानदी बेसिन | 141589 |
| 6 | गोदावरी बेसिन | 312812 |
| 7 | कृष्णा बेसिन | 258948 |
| 8 | पेन्नार बेसिन | 55213 |
| 9 | कावेरी बेसिन | 87900 |
| 10 | तापी बेसिन | 65145 |
| 11 | नर्मदा बेसिन | 98796 |
| 12 | माही बेसिन | 34842 |
| 13 | साबरमती बेसिन | 21674 |
| 14 | कच्छ और सौराष्ट्र की पश्चिममुखी नदियां सहित लूणी बेसिन | 334390 |
| 15 | तापी के दक्षिण की पश्चिममुखी नदियों का बेसिन | 113057 |
| 16 | महानदी और गोदावरी के बीच पूर्वमुखी नदियों का बेसिन | 49570 |
| 17 | गोदावरी और कृष्णा के बीच पूर्वमुखी नदियों का बेसिन | 12289 |
| 18 | कृष्णा और पेन्नार के बीच पूर्वमुखी नदियों का बेसिन | 24649 |
| 19 | पेन्नार और कावेरी के बीच पूर्वमुखी नदियों का बेसिन | 64751 |
| 20 | कावेरी के दक्षिण की पूर्वमुखी नदियों का बेसिन | 35026 |
| 21 | उत्तर लद्दाख का वह क्षेत्र जो सिंधु में नहीं बहता | 28478 |
| 22 | बांग्लादेश में गिरने वाली नदियाँ | 10031 |
| 23 | म्यांमार में गिरने वाली नदियाँ | 26271 |
| 24 | अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप का जलनिकासी क्षेत्र | 8280 |
AISLUS बेसिन
AISLUS की सूची जलग्रहण क्षेत्र, मिट्टी संरक्षण, भूमि उपयोग और जल निकासी से जुड़े अध्ययनों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
| AISLUS की सूची | ||
|---|---|---|
| क्र. सं. | बेसिन का नाम | क्षेत्रफल (वर्ग किमी) |
| 1 | सतलुज बेसिन | 53108 |
| 2 | ब्यास बेसिन | 20187 |
| 3 | रावी बेसिन | 13626 |
| 4 | चिनाब बेसिन | 29945 |
| 5 | झेलम बेसिन | 29513 |
| 6 | सिंधु बेसिन | 138613 |
| 7 | अस्थायी प्रारंभिक जलनिकासी क्षेत्र जो सिंधु में नहीं बहता | 28676 |
| 8 | निचला गंगा बेसिन | 296614 |
| 9 | घाघरा संगम के ऊपर का ऊपरी गंगा बेसिन | 207557 |
| 10 | यमुना बेसिन | 212829 |
| 11 | चंबल बेसिन | 136593 |
| 12 | लोहित संगम तक ब्रह्मपुत्र का दाहिना तट | 105416 |
| 13 | ब्रह्मपुत्र का बायां तटीय क्षेत्र | 107133 |
| 14 | ब्रह्मपुत्र की वे सहायक नदियां जो बांग्लादेश में बहती हैं | 56093 |
| 15 | मणिपुर और मिजोरम के पूर्वी क्षेत्र जो चिंदविन (बर्मा) में बहते हैं | 28320 |
| 16 | केप कोमोरिन से कावेरी तक का क्षेत्र | 37564 |
| 17 | कावेरी बेसिन | 84654 |
| 18 | कावेरी और कृष्णा के बीच का क्षेत्र | 143845 |
| 19 | कृष्णा बेसिन | 271444 |
| 20 | गोदावरी बेसिन | 315076 |
| 21 | गोदावरी और महानदी के बीच का क्षेत्र | 53949 |
| 22 | महानदी बेसिन | 141875 |
| 23 | महानदी से गंगा जल संसाधन क्षेत्र तक | 84326 |
| 24 | केप कोमोरिन से शरावती तक का पश्चिममुखी क्षेत्र | 54771 |
| 25 | शरावती से तापी तक का पश्चिममुखी क्षेत्र | 58146 |
| 26 | तापी बेसिन | 66652 |
| 27 | नर्मदा बेसिन | 95879 |
| 28 | माही बेसिन | 39712 |
| 29 | साबरमती बेसिन | 26967 |
| 30 | दक्षिणी काठियावाड़ क्षेत्र | 39322 |
| 31 | कच्छ की खाड़ी में गिरने वाला क्षेत्र | 58257 |
| 32 | लूणी और अन्य नदियाँ जो कच्छ के रण में गिरती हैं | 92518 |
| 33 | लूणी से जैसलमेर तक का क्षेत्र | 58489 |
| 34 | जैसलमेर और बीकानेर क्षेत्र | 69697 |
| 35 | रोहतक से अंबाला (पूर्व) और गंगानगर (पश्चिम) तक का क्षेत्र | 52582 |
CGWB बेसिन
CGWB का बेसिन वर्गीकरण मुख्य रूप से भूजल, एक्विफर और भूमिगत जल संसाधनों के आकलन के लिए उपयोग किया जाता है।
| CGWB की सूची | ||
|---|---|---|
| क्र. सं. | बेसिन का नाम | क्षेत्रफल (वर्ग किमी) |
| 1 | बाड़मेर बेसिन | 58163 |
| 2 | ब्यास बेसिन | 19562 |
| 3 | भादर बेसिन | 36502 |
| 4 | भाटसोल बेसिन | 54878 |
| 5 | ब्राह्मणी बेसिन | 79815 |
| 6 | ब्रह्मपुत्र बेसिन | 186873 |
| 7 | कावेरी बेसिन | 85457 |
| 8 | चंबल बेसिन | 130665 |
| 9 | चिनाब बेसिन | 29937 |
| 10 | चूरू बेसिन | 66316 |
| 11 | घग्घर बेसिन | 51438 |
| 12 | गोदावरी बेसिन | 301888 |
| 13 | इंफाल बेसिन | 24476 |
| 14 | सिंधु बेसिन | 137655 |
| 15 | झेलम बेसिन | 29231 |
| 16 | कृष्णा बेसिन | 265505 |
| 17 | कच्छ बेसिन | 52880 |
| 18 | निचला गंगा बेसिन | 249661 |
| 19 | लूणी बेसिन | 87393 |
| 20 | महानदी बेसिन | 133665 |
| 21 | माही बेसिन | 3870 |
| 22 | नर्मदा बेसिन | 93398 |
| 23 | पेन्नार बेसिन | 139463 |
| 24 | पेरियार बेसिन | 54580 |
| 25 | कुरा-कुश बेसिन | 29683 |
| 26 | रावी बेसिन | 13230 |
| 27 | साबरमती बेसिन | 24995 |
| 28 | सुरमा बेसिन | 50278 |
| 29 | सतलुज बेसिन | 54458 |
| 30 | तापी बेसिन | 63347 |
| 31 | ऊपरी गंगा बेसिन | 231127 |
| 32 | वैप्पार बेसिन | 38565 |
| 33 | वंशधारा बेसिन | 50792 |
| 34 | यमुना बेसिन | 203641 |
भारत में नदी बेसिनों के कई वर्गीकरण इसलिए मौजूद हैं क्योंकि अलग-अलग संस्थाएं पानी और जल निकासी तंत्र का अध्ययन अपने कार्यक्षेत्र के अनुसार करती हैं। CWC और India-WRIS का वर्गीकरण मुख्यतः नदी प्रवाह, जल संसाधन योजना और समेकित जल प्रबंधन से जुड़ा है, जबकि Main Basin और Sub-Basin संरचना किसी नदी तंत्र की भौगोलिक जल निकासी को अधिक विस्तार से समझाने का काम करती है।
NCIWRDP का उपयोग दीर्घकालिक राष्ट्रीय जल विकास योजनाओं में किया गया, वहीं AISLUS का ढांचा जलग्रहण क्षेत्र, मिट्टी संरक्षण और भूमि उपयोग अध्ययन से जुड़ा है। दूसरी ओर CGWB का बेसिन वर्गीकरण भूजल और एक्विफर आधारित आकलन के लिए तैयार किया गया था। यही कारण है कि अलग-अलग सूचियों में बेसिनों की संख्या और सीमाएं कुछ जगहों पर अलग दिखाई देती हैं।
लेटेस्ट अपडेट्स के लिए हमारे व्हाट्सऐप चैनल को फॉलो करें