जल प्रबंधन और नदी-नीति की असली इकाई कोई एक नदी नहीं, बल्कि पूरा रिवर बेसिन होता है।

 

चित्र: भारत का नदी बेसिन एटलस, सीडब्ल्यूसी और इसरो, 2012

नदी और तालाब

भारत में रिवर बेसिन और जल प्रणाली की पूरी सूची (2026): गंगा से ब्रह्मपुत्र तक सभी प्रमुख बेसिनों का विस्तृत विवरण

भारत की जल प्रणाली को समझने के लिए नदियों से आगे बढ़कर रिवर बेसिन को देखना जरूरी है। गंगा, ब्रह्मपुत्र और अन्य प्रमुख बेसिन मिलकर देश की पूरी जल-भूगोल को आकार देते हैं।

Author : डॉ. कुमारी रोहिणी

भारत में नदियों की चर्चा अक्सर गंगा, ब्रह्मपुत्र, नर्मदा या गोदावरी जैसे नामों से शुरू होती है। लेकिन जल प्रबंधन और नदी-नीति की असली इकाई कोई एक नदी नहीं, बल्कि पूरा रिवर बेसिन होता है।

यानी वह भौगोलिक क्षेत्र जहां बारिश का पानी, पहाड़ों और ढलानों से बहता हुआ अंत में किसी एक मुख्य नदी और उसकी सहायक धाराओं में मिल जाता है। यह समझ सिर्फ तकनीकी नहीं है, बल्कि भारत के जल भविष्य की बुनियाद भी है।

रिवर बेसिन क्या होता है?

आसान शब्दों में कहा जाए तो, किसी नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा जल निकासी वाले पूरे क्षेत्र को रिवर बेसिन कहा जाता है।

यह सिर्फ एक नदी का रास्ता नहीं होता, बल्कि पहाड़, पठार, मैदान और जल निकासी नेटवर्क, सब मिलकर एक प्राकृतिक जल प्रणाली बनाते हैं। उदाहरण के लिए, गंगा बेसिन केवल गंगा नदी नहीं है। इसमें यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी, सोन जैसी सहायक नदियां शामिल हैं।

भारत में रिवर बेसिन संरचना (India-WRIS के अनुसार)

भारत सरकार के जल संसाधन सूचना प्रणाली (India-WRIS) के अनुसार भारत को प्रमुख नदी बेसिनों में बांटा गया है। देश में लगभग 25 प्रमुख बेसिन और 102 उप-बेसिन हैं।

सबसे बड़ा बेसिन: गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना प्रणाली

यह भारत का सबसे विशाल जल निकासी तंत्र है जो लगभग 11 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है।

इसका महत्व केवल इसके आकार से नहीं, बल्कि इसके प्रभाव से आंका जाता है। दरअसल, देश की सबसे बड़ी आबादी इसी पर निर्भर है। साथ ही सबसे अधिक कृषि उत्पादन भी यहीं होता है और सबसे गंभीर बाढ़ घटनाएं भी इसी क्षेत्र में आती हैं। बिहार, असम, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की बाढ़, डेल्टा क्षरण और गाद जमाव, ये सभी बेसिन-स्तर की प्रक्रियाएं हैं, न कि नदी से जुड़ी अलग-थलग घटनाएं।

रिवर बेसिन क्यों महत्वपूर्ण हैं?

जल प्रबंधन की मूल इकाई: नदियां राज्य या जिला सीमाओं का पालन नहीं करतीं। इसलिए जल प्रबंधन भी प्रशासनिक नहीं, बल्कि बेसिन आधारित होना चाहिए। उदाहरण के लिए कावेरी विवाद सिर्फ दो राज्यों का नहीं, बल्कि पूरे कावेरी बेसिन का जल संतुलन मुद्दा है।

बाढ़ और सूखा प्रबंधन: एक ही बेसिन में कहीं बाढ़ और कहीं सूखा देखने को मिल सकता है। अगर पूरे बेसिन का समग्र अध्ययन हो, तो जल भंडारण, जल निकासी और भूजल पुनर्भरण की बेहतर योजना बनाई जा सकती है।

भूजल और सतही जल का संबंध: भारत के कई बेसिनों में भूजल दोहन तेजी से बढ़ा है। गंगा और कृष्णा जैसे बेसिनों में भूजल दोहन ने सतही प्रवाह को प्रभावित किया है। दोनों को अलग-अलग नहीं समझा जा सकता है।

बांध और हाइडल परियोजनाएं: अधिकांश बड़े बांध किसी न किसी बेसिन योजना का हिस्सा होते हैं। नर्मदा घाटी परियोजना, कृष्णा जल विवाद, महानदी जल बंटवारा, ये सभी बेसिन आधारित योजनाओं और संघर्षों के उदाहरण हैं।

जलवायु परिवर्तन और बेसिन संकट

।।जलवायु परिवर्तन ने भारत के नदी बेसिनों को अलग-अलग तरह से प्रभावित किया है:

हिमालयी बेसिन: ग्लेशियर पिघलना, अचानक फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की घटनाएं आम हो गई हैं।

प्रायद्वीपीय बेसिन: लंबे समय तक सूखे की स्थिति, कम वार्षिक प्रवाह और भूजल पर बढ़ती निर्भरता ने संतुलन को प्रभावित किया है। इस बदलाव ने नदी को “स्थिर प्रणाली” से “अस्थिर जल नेटवर्क” में बदल दिया है।

इसे देखते हुए ही पिछले कुछ सालों में महाराष्ट्र सरकार ने नर्मदा, तापी, कृष्णा और गोदावरी बेसिनों के संरक्षण के लिए एक “रिवर रीजुवेनेशन अथॉरिटी” बनाने की घोषणा भी की है।

कुछ महत्वपूर्ण बेसिन और उनकी विशेषताएं

गंगा बेसिन: भारत की सबसे बड़ी आबादी और कृषि अर्थव्यवस्था इसी बेसिन पर निर्भर है। यहां भूजल दोहन, प्रदूषण और बाढ़ तीनों बड़ी चुनौतियां हैं।

ब्रह्मपुत्र बेसिन: यह भारत के सबसे अधिक जल प्रवाह वाले क्षेत्रों में शामिल है। असम की बाढ़ और पूर्वोत्तर की पारिस्थितिकी इसी से जुड़ी है।

गोदावरी बेसिन: इसे दक्षिण की गंगा भी कहा जाता है। यह दक्षिण भारत की सबसे बड़ी नदी प्रणाली है।

कृष्णा बेसिन: यह सिंचाई और जलविद्युत परियोजनाओं के कारण अत्यधिक दबाव में रहने वाला बेसिन है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच लंबे समय से जल विवाद का केंद्र भी बना हुआ है।

नर्मदा बेसिन: यह पश्चिम की ओर बहने वाली प्रमुख नदी प्रणाली है। बड़े बांधों और विस्थापन बहसों के कारण लगातार चर्चा में रहती है।

कावेरी बेसिन: इस नदी बेसिन का नामदेश के सबसे संवेदनशील अंतर्राज्यीय जल विवादों की सूची में आता है। दक्षिण भारत की कृषि और पेयजल व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

नदी बेसिन और पारिस्थितिकी का अनदेखा संबंध

रिवर बेसिन केवल जल प्रणाली नहीं हैं, बल्कि इनके भीतर वेटलैंड (आर्द्रभूमि), बाढ़-क्षेत्र और रामसर स्थलों जैसे पारिस्थितिक तंत्र भी शामिल होते हैं।

बेसिन का स्वास्थ्य सीधे तौर पर इन पर ही निर्भर करता है। उदाहरण के लिए गंगा डेल्टा, महानदी मुहाना और कावेरी एस्ट्यूरी ये सभी केवल नदी के अंत नहीं हैं, बल्कि पूरे बेसिन का पारिस्थितिक उत्पादन हैं।

आगे की चुनौती

भारत में जल नीति लंबे समय तक नदी-केंद्रित रही है। लेकिन अब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि जल संकट का समाधान नदी के स्तर पर नहीं, बल्कि पूरे बेसिन के स्तर पर खोजा जाना चाहिए।

आज की प्रमुख चुनौतियां अलग-अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। अनियंत्रित शहरीकरण, रेत खनन, बड़े बांधों का दबाव, भूजल का अत्यधिक दोहन और जलवायु परिवर्तन से इनका सीधा संबंध है। 

इन सभी का असर किसी एक नदी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे नदी बेसिन की जल-प्रणाली, पारिस्थितिकी और संतुलन को प्रभावित करता है।

India-WRIS द्वारा किए गए अध्ययन इस बात पर जोर देते हैं कि आने वाले समय में जल नीति का फोकस रिवर बेसिन गवर्नेंस पर बढ़ेगा। इससे नदी को एक जीवित पारिस्थितिक तंत्र की तरह देखा जाएगा, न कि सिर्फ पानी के स्रोत के रूप में।

रिवर बेसिन को समझना सिर्फ एक जल-वैज्ञानिक अवधारणा नहीं है, बल्कि यह भारत के भविष्य की जल नीति की दिशा तय करता है। अब जरूरत इस बात की है कि नदी को अलग इकाई की तरह नहीं बल्कि एक जुड़े हुए पारिस्थितिक तंत्र के रूप में देखा जाए।

क्योंकि आख़िरकार, नदियों में केवल पानी नहीं बहता है, बल्कि वे पूरे भूगोल, पारिस्थितिकी और सभ्यता को जोड़ती हैं।

भारत के प्रमुख रिवर बेसिनों की सूचियां 

भारत में नदी बेसिनों की कई सूचियां उपलब्ध हैं। क्योंकि अलग-अलग संस्थाएं पानी और जल निकासी तंत्र का अध्ययन अपने कार्यक्षेत्र के अनुसार करती हैं।

भारत के रिवर बेसिनों की मुख्‍य सूची 

यह सूची भारत के उन बड़े नदी क्षेत्रों को दिखाती है जहां किसी एक मुख्य नदी और उसकी सहायक नदियों का पूरा जल प्रवाह एकत्र होता है। इन बेसिनों के आधार पर देश में जल प्रबंधन, सिंचाई, बांध और बाढ़ नियंत्रण की योजनाएं बनाई जाती हैं।

भारत के प्रमुख रिवर बेसिन: विस्तृत सूची
क्रम सं.रिवर बेसिनअनुमानित क्षेत्रफल (वर्ग किमी)प्रमुख राज्य / क्षेत्र
1सिंधु (Indus up to border) बेसिन4,53,931लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर
2गंगा बेसिन8,08,334उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, प.बंगाल
3ब्रह्मपुत्र बेसिन1,86,421अरुणाचल प्रदेश, असम
4बराक एवं अन्य बेसिन45,622असम, मणिपुर, मिजोरम
5गोदावरी बेसिन3,02,063महाराष्ट्र, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश
6कृष्णा बेसिन2,54,743महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश
7कावेरी (Cauvery) बेसिन85,624कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल
8सुवर्णरेखा बेसिन25,792झारखंड, ओडिशा, प.बंगाल
9ब्राह्मणी-बैतरणी बेसिन51,893ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़
10महानदी बेसिन1,39,659छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र
11पेन्नार बेसिन54,243कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु
12माही बेसिन38,336मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात
13साबरमती बेसिन30,678राजस्थान, गुजरात
14नर्मदा बेसिनलगभग 92,000+मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात
15तापी (ताप्ती) बेसिनलगभग 63,000+मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात
16तापी बेसिन के दक्षिण में पश्चिम की ओर बहने वाली नदियां111643आंध्र प्रदेश
17महानदी और गोदावरी बेसिन के बीच पूर्व की ओर बहने वाली नदियां46243आंध्र प्रदेश
18गोदावरी और कृष्णा बेसिन के बीच पूर्व की ओर बहने वाली10345तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश
19कृष्णा और पेन्नार बेसिन के बीच पूर्व की ओर बहने वाली नदियां23335तमिलनाडु
20पेन्नार और कावेरी बेसिन के बीच पूर्व की ओर बहने वाली नदियां63646केरल
21कावेरी बेसिन के दक्षिण में पूर्व की ओर बहने वाली नदियां38646तमिलनाडु
22लूनी बेसिन सहित कच्छ और सौराष्ट्र की पश्चिम की ओर बहने वाली नदियां184441गुजरात
23बांग्लादेश बेसिन में गिरने वाली छोटी नदियां5453.23राजस्थान, गुजरात
24म्यांमार बेसिन में गिरने वाली छोटी नदियां24731हरियाणा, राजस्थान
25उत्तरी लद्दाख का वह क्षेत्र जो सिंधु बेसिन में नहीं गिरता29238अंडमान-निकोबार
26अंडमान और निकोबार द्वीप समूह बेसिन का जल निकासी क्षेत्र6918.2लक्षद्वीप
27लक्षद्वीप द्वीप समूह बेसिन का जल निकासी क्षेत्र462लक्षद्वीप
28द्वीप बेसिन371----

महत्वपूर्ण सब-बेसिन

सब-बेसिन किसी बड़े रिवर बेसिन के भीतर आने वाले छोटे जल निकासी क्षेत्र होते हैं। ये बताते हैं कि किसी बड़ी नदी प्रणाली के अंदर अलग-अलग सहायक नदियां किस तरह अपना अलग जल क्षेत्र बनाती हैं। 

मुख्य उप-बेसिन
क्र. सं.उप-बेसिन का नामक्षेत्रफल (वर्ग किमी)
1बाड़मेर उप-बेसिन21646.88
2ब्यास उप-बेसिन19138.22
3चौटांग एवं अन्य उप-बेसिन27543.74
4चिनाब उप-बेसिन29974.29
5चूरू उप-बेसिन66890.7
6घग्घर एवं अन्य उप-बेसिन49984.26
7गिलगित उप-बेसिन27101.85
8झेलम उप-बेसिन29196.01
9निचला सिंधु उप-बेसिन23891.72
10रावी उप-बेसिन13566.95
11श्योक उप-बेसिन38724.57
12सतलुज निचला उप-बेसिन38578.38
13सतलुज ऊपरी उप-बेसिन21425.47
14ऊपरी सिंधु उप-बेसिन46268.85
15रामगंगा संगम के ऊपर का उप-बेसिन38792.4
16बनास उप-बेसिन51639.43
17भागीरथी एवं अन्य (निचला गंगा) उप-बेसिन63059.31
18चंबल निचला उप-बेसिन11067.89
19चंबल ऊपरी उप-बेसिन25511.32
20दामोदर उप-बेसिन42050.58
21गंडक एवं अन्य उप-बेसिन56573.83
22घाघरा संगम से गोमती संगम तक उप-बेसिन26403.75
23घाघरा उप-बेसिन58728.53
24गोमती उप-बेसिन29618.82
25काली सिंध एवं अन्य, पार्वती संगम तक उप-बेसिन48511.99
26रामगंगा उप-बेसिन30811.48
27सोन उप-बेसिन64789.32
28टोंस उप-बेसिन16857.08
29गोमती संगम के ऊपर से मुजफ्फरनगर तक उप-बेसिन29381.01
30यमुना निचला उप-बेसिन125084.38
31यमुना मध्य उप-बेसिन34830.46
32यमुना ऊपरी उप-बेसिन35584.95
33कोसी उप-बेसिन19037.96
34ब्रह्मपुत्र निचला उप-बेसिन87381.27
35ब्रह्मपुत्र ऊपरी उप-बेसिन99040.33
36बराक उप-बेसिन27615.78
37किंचियांग एवं अन्य दक्षिणमुखी नदियों का उप-बेसिन10310.93
38नाओच छारा एवं अन्य उप-बेसिन7695.69
39गोदावरी निचला उप-बेसिन43821.19
40गोदावरी मध्य उप-बेसिन36289.01
41गोदावरी ऊपरी उप-बेसिन21469.99
42इंद्रावती उप-बेसिन38974.42
43मंजीरा उप-बेसिन29485.75
44प्राणहिता एवं अन्य उप-बेसिन36108.58
45वर्धा उप-बेसिन46237.65
46वैनगंगा उप-बेसिन49677.35
47भीमा निचला उप-बेसिन23649.56
48भीमा ऊपरी उप-बेसिन44807.62
49कृष्णा निचला उप-बेसिन39438.74
50कृष्णा मध्य उप-बेसिन22286.59
51कृष्णा ऊपरी उप-बेसिन54498.4
52तुंगभद्रा निचला उप-बेसिन41542.29
53तुंगभद्रा ऊपरी उप-बेसिन28520.15
54कावेरी निचला उप-बेसिन17378.51
55कावेरी मध्य उप-बेसिन57284.09
56कावेरी ऊपरी उप-बेसिन10961.84
57सुवर्णरेखा उप-बेसिन25792.16
58बैतरणी उप-बेसिन14244.22
59ब्राह्मणी उप-बेसिन37649.47
60महानदी निचला उप-बेसिन57987.1
61महानदी मध्य उप-बेसिन51877.65
62महानदी ऊपरी उप-बेसिन29794.4
63पेन्नार निचला उप-बेसिन17992.3
64पेन्नार ऊपरी उप-बेसिन36251.13
65माही निचला उप-बेसिन13379.26
66माही ऊपरी उप-बेसिन24957.54
67साबरमती निचला उप-बेसिन10825.49
68साबरमती ऊपरी उप-बेसिन19853.1
69नर्मदा निचला उप-बेसिन8897.8
70नर्मदा मध्य उप-बेसिन40580.48
71नर्मदा ऊपरी उप-बेसिन43192.22
72तापी निचला उप-बेसिन4110.13
73तापी मध्य उप-बेसिन31759.69
74तापी ऊपरी उप-बेसिन28053.09
75वशिष्ठी एवं अन्य उप-बेसिन27477.72
76नेत्रावती एवं अन्य उप-बेसिन18759.52
77पेरियार एवं अन्य उप-बेसिन21893.97
78वर्रार एवं अन्य उप-बेसिन14163.19
79भाटसोल एवं अन्य उप-बेसिन29349.48
80नागवती एवं अन्य उप-बेसिन24375.66
81वंशधारा एवं अन्य उप-बेसिन21867.4
82कृष्णा और गोदावरी के बीच पूर्वमुखी नदियों का उप-बेसिन10345.11
83कृष्णा और पेन्नार के बीच पूर्वमुखी नदियों का उप-बेसिन23335.82
84पालार एवं अन्य उप-बेसिन35385.35
85पोननैयार एवं अन्य उप-बेसिन28260.85
86पंबा एवं अन्य उप-बेसिन18302.72
87वैप्पार एवं अन्य उप-बेसिन20343.39
88भादर एवं अन्य पश्चिममुखी नदियों का उप-बेसिन17936.32
89रण जलनिकासी उप-बेसिन21035.42
90लूणी निचला उप-बेसिन19735.35
91लूणी ऊपरी उप-बेसिन79886.74
92सरस्वती उप-बेसिन27674.11
93शेत्रुंजी एवं अन्य पूर्वमुखी नदियों का उप-बेसिन18173.13
94कर्णफुली एवं अन्य उप-बेसिन3776.84
95मुहुरी एवं अन्य उप-बेसिन1676.39
96इंफाल एवं अन्य उप-बेसिन16754.9
97मंगपुई लुई एवं अन्य उप-बेसिन7976.18
98शक्सगाम उप-बेसिन6523.5
99सुलमार उप-बेसिन22715.52
100अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का जलनिकासी उप-बेसिन7577.85
101लक्षद्वीप द्वीप समूह का जलनिकासी उप-बेसिन669.81
102द्वीपीय उप-बेसिन371.4

भारत के सबसे बड़े रिवर बेसिन (CWC)

यह सूची क्षेत्रफल के आधार पर भारत के सबसे बड़े नदी बेसिनों की है। इससे समझा जा सकता है कि देश की सबसे बड़ी आबादी, खेती और जल संसाधन किन नदी प्रणालियों पर निर्भर हैं। यह सूची केंद्रीय जल आयोग (CWC) द्वारा तैयार की गई है।

NCIWRDP के अनुसार बेसिन की सूची
क्र. सं.बेसिन का नामक्षेत्रफल (वर्ग किमी)
1सिंधु बेसिन (सीमा तक)321289
2गंगा बेसिन861452
3ब्रह्मपुत्र बेसिन194413
4बराक एवं अन्य बेसिन41723
5गोदावरी बेसिन312812
6कृष्णा बेसिन258948
7कावेरी बेसिन81155
8सुवर्णरेखा बेसिन29196
9ब्राह्मणी और बैतरणी बेसिन51822
10महानदी बेसिन141589
11पेन्नार बेसिन55213
12माही बेसिन34842
13साबरमती बेसिन21674
14नर्मदा बेसिन98796
15तापी बेसिन65145
16तापी से तद्री तक पश्चिममुखी नदियों का बेसिन55940
17तद्री से कन्याकुमारी तक पश्चिममुखी नदियों का बेसिन56177
18महानदी और पेन्नार के बीच पूर्वमुखी नदियों का बेसिन86643
19पेन्नार और कन्याकुमारी के बीच पूर्वमुखी नदियों का बेसिन100139
20कच्छ और सौराष्ट्र की पश्चिममुखी नदियों सहित लूणी बेसिन321851
21राजस्थान का आंतरिक जलनिकासी क्षेत्र
22म्यांमार और बांग्लादेश में गिरने वाली लघु नदियाँ36202

NCIWRDP बेसिन 

NCIWRDP का बेसिन वर्गीकरण राष्ट्रीय स्तर पर जल संसाधन विकास और दीर्घकालिक जल योजना के उद्देश्य से तैयार किया गया था। आम तौर पर बांध बनाने, रिवर-लिंकिंग, व हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में सहायक होती है।

AISLUS की सूची
क्र. सं.बेसिन का नामक्षेत्रफल (वर्ग किमी)
1सिंधु बेसिन321289
2गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना बेसिन1101242
3सुवर्णरेखा बेसिन29196
4ब्राह्मणी-बैतरणी बेसिन51822
5महानदी बेसिन141589
6गोदावरी बेसिन312812
7कृष्णा बेसिन258948
8पेन्नार बेसिन55213
9कावेरी बेसिन87900
10तापी बेसिन65145
11नर्मदा बेसिन98796
12माही बेसिन34842
13साबरमती बेसिन21674
14कच्छ और सौराष्ट्र की पश्चिममुखी नदियां सहित लूणी बेसिन334390
15तापी के दक्षिण की पश्चिममुखी नदियों का बेसिन113057
16महानदी और गोदावरी के बीच पूर्वमुखी नदियों का बेसिन49570
17गोदावरी और कृष्णा के बीच पूर्वमुखी नदियों का बेसिन12289
18कृष्णा और पेन्नार के बीच पूर्वमुखी नदियों का बेसिन24649
19पेन्नार और कावेरी के बीच पूर्वमुखी नदियों का बेसिन64751
20कावेरी के दक्षिण की पूर्वमुखी नदियों का बेसिन35026
21उत्तर लद्दाख का वह क्षेत्र जो सिंधु में नहीं बहता28478
22बांग्लादेश में गिरने वाली नदियाँ10031
23म्यांमार में गिरने वाली नदियाँ26271
24अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप का जलनिकासी क्षेत्र8280

AISLUS बेसिन 

AISLUS की सूची जलग्रहण क्षेत्र, मिट्टी संरक्षण, भूमि उपयोग और जल निकासी से जुड़े अध्ययनों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।

AISLUS की सूची
क्र. सं.बेसिन का नामक्षेत्रफल (वर्ग किमी)
1सतलुज बेसिन53108
2ब्यास बेसिन20187
3रावी बेसिन13626
4चिनाब बेसिन29945
5झेलम बेसिन29513
6सिंधु बेसिन138613
7अस्थायी प्रारंभिक जलनिकासी क्षेत्र जो सिंधु में नहीं बहता28676
8निचला गंगा बेसिन296614
9घाघरा संगम के ऊपर का ऊपरी गंगा बेसिन207557
10यमुना बेसिन212829
11चंबल बेसिन136593
12लोहित संगम तक ब्रह्मपुत्र का दाहिना तट105416
13ब्रह्मपुत्र का बायां तटीय क्षेत्र107133
14ब्रह्मपुत्र की वे सहायक नदियां जो बांग्लादेश में बहती हैं56093
15मणिपुर और मिजोरम के पूर्वी क्षेत्र जो चिंदविन (बर्मा) में बहते हैं28320
16केप कोमोरिन से कावेरी तक का क्षेत्र37564
17कावेरी बेसिन84654
18कावेरी और कृष्णा के बीच का क्षेत्र143845
19कृष्णा बेसिन271444
20गोदावरी बेसिन315076
21गोदावरी और महानदी के बीच का क्षेत्र53949
22महानदी बेसिन141875
23महानदी से गंगा जल संसाधन क्षेत्र तक84326
24केप कोमोरिन से शरावती तक का पश्चिममुखी क्षेत्र54771
25शरावती से तापी तक का पश्चिममुखी क्षेत्र58146
26तापी बेसिन66652
27नर्मदा बेसिन95879
28माही बेसिन39712
29साबरमती बेसिन26967
30दक्षिणी काठियावाड़ क्षेत्र39322
31कच्छ की खाड़ी में गिरने वाला क्षेत्र58257
32लूणी और अन्य नदियाँ जो कच्छ के रण में गिरती हैं92518
33लूणी से जैसलमेर तक का क्षेत्र58489
34जैसलमेर और बीकानेर क्षेत्र69697
35रोहतक से अंबाला (पूर्व) और गंगानगर (पश्चिम) तक का क्षेत्र52582

CGWB बेसिन

CGWB का बेसिन वर्गीकरण मुख्य रूप से भूजल, एक्विफर और भूमिगत जल संसाधनों के आकलन के लिए उपयोग किया जाता है।

CGWB की सूची
क्र. सं.बेसिन का नामक्षेत्रफल (वर्ग किमी)
1बाड़मेर बेसिन58163
2ब्यास बेसिन19562
3भादर बेसिन36502
4भाटसोल बेसिन54878
5ब्राह्मणी बेसिन79815
6ब्रह्मपुत्र बेसिन186873
7कावेरी बेसिन85457
8चंबल बेसिन130665
9चिनाब बेसिन29937
10चूरू बेसिन66316
11घग्घर बेसिन51438
12गोदावरी बेसिन301888
13इंफाल बेसिन24476
14सिंधु बेसिन137655
15झेलम बेसिन29231
16कृष्णा बेसिन265505
17कच्छ बेसिन52880
18निचला गंगा बेसिन249661
19लूणी बेसिन87393
20महानदी बेसिन133665
21माही बेसिन3870
22नर्मदा बेसिन93398
23पेन्नार बेसिन139463
24पेरियार बेसिन54580
25कुरा-कुश बेसिन29683
26रावी बेसिन13230
27साबरमती बेसिन24995
28सुरमा बेसिन50278
29सतलुज बेसिन54458
30तापी बेसिन63347
31ऊपरी गंगा बेसिन231127
32वैप्पार बेसिन38565
33वंशधारा बेसिन50792
34यमुना बेसिन203641

भारत में नदी बेसिनों के कई वर्गीकरण इसलिए मौजूद हैं क्योंकि अलग-अलग संस्थाएं पानी और जल निकासी तंत्र का अध्ययन अपने कार्यक्षेत्र के अनुसार करती हैं। CWC और India-WRIS का वर्गीकरण मुख्यतः नदी प्रवाह, जल संसाधन योजना और समेकित जल प्रबंधन से जुड़ा है, जबकि Main Basin और Sub-Basin संरचना किसी नदी तंत्र की भौगोलिक जल निकासी को अधिक विस्तार से समझाने का काम करती है।

NCIWRDP का उपयोग दीर्घकालिक राष्ट्रीय जल विकास योजनाओं में किया गया, वहीं AISLUS का ढांचा जलग्रहण क्षेत्र, मिट्टी संरक्षण और भूमि उपयोग अध्ययन से जुड़ा है। दूसरी ओर CGWB का बेसिन वर्गीकरण भूजल और एक्विफर आधारित आकलन के लिए तैयार किया गया था। यही कारण है कि अलग-अलग सूचियों में बेसिनों की संख्या और सीमाएं कुछ जगहों पर अलग दिखाई देती हैं।

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