फ़ोटो - विकिकॉमंस
मौसम (Weather) किसी स्थान पर एक निश्चित समय में वातावरण की स्थिति को दर्शाता है। इसमें तापमान, वर्षा, हवा, आर्द्रता, बादल, धूप और वायुदाब जैसी स्थितियां शामिल होती है। सरल शब्दों में, किसी दिन गर्मी, ठंड, बारिश या तेज हवा जैसी परिस्थितियां मौसम कहलाती है।
मौसम हमारे दैनिक जीवन, खेती, जल संसाधनों, स्वास्थ्य और पर्यावरण को सीधे प्रभावित करता है। किसान बुवाई और सिंचाई के लिए मौसम पर निर्भर रहते है, जबकि शहरों में मौसम परिवहन, बिजली की मांग और जल उपलब्धता को प्रभावित करता है। आज जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की घटनाएं अधिक अनिश्चित और चरम होती जा रही हैं।
मौसम किसी क्षेत्र में कम समय के लिए वातावरण की वर्तमान स्थिति को कहा जाता है। यह कुछ घंटों, दिनों या सप्ताहों तक बदल सकता है। उदाहरण के लिए -
आज बारिश होना
कल तेज गर्मी पड़ना
अगले सप्ताह तूफान आना, ये सभी मौसम की घटनाएं हैं।
अक्सर लोग मौसम और जलवायु को एक ही मान लेते है, लेकिन दोनों अलग है।
मौसम - यह अल्पकालिक स्थिति है और यह रोज बदलता है। उदाहरण - बारिश होना।
अप्रैल का महीना आमतौर पर गर्मी के आगमन का संकेत देता है, लेकिन इस बार देश के कई हिस्सों में मौसम ने बिल्कुल उलट तस्वीर पेश की है। उत्तर भारत से लेकर मध्य और पूर्वी क्षेत्रों तक मूसलाधार बारिश, ओलावृष्टि, तेज आंधियां और पहाड़ों में बर्फबारी ने लोगों को चौंका दिया है।
जलवायु - यह दीर्घकालिक औसत स्थिति जो वर्षों में बदलता है। उदाहरण- राजस्थान का शुष्क जलवायु।
यानी मौसम तत्काल वातावरण की स्थिति है, जबकि जलवायु किसी क्षेत्र का लंबे समय का मौसम पैटर्न है।
तापमान - यह बताता है कि वातावरण कितना गर्म या ठंडा है। भारत में गर्मियों में तापमान कई क्षेत्रों में 45°C तक पहुँच जाता है।
वर्षा - बारिश जल चक्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत में मानसून कृषि और जल संसाधनों की रीढ़ माना जाता है।
आर्द्रता - हवा में मौजूद जलवाष्प की मात्रा को आर्द्रता कहते हैं। अधिक आर्द्रता होने पर गर्मी अधिक महसूस होती है।
वायु दबाव - वायुदाब में बदलाव से तूफान और चक्रवात जैसी घटनाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
हवा - हवा की दिशा और गति मौसम को प्रभावित करती है। समुद्री हवाएँ और मानसूनी पवन भारत के मौसम तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
मौसम का जल संसाधनों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। बारिश कम होने पर सूखा और अधिक होने पर बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है।
भारत की लगभग 50 प्रतिशत खेती मानसूनी बारिश पर निर्भर है। यदि मानसून कमजोर हो जाए तो जलाशयों में पानी कम हो जाता है, भूजल स्तर गिरने लगता है और किसानों की फसल प्रभावित होती है। वहीं अत्यधिक वर्षा से बाढ़, मिट्टी कटाव, जल प्रदूषण और फसलों की क्षति जैसी समस्याएं उत्पन्न होती है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस वर्ष अलनीनो के कारण मानसून की बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) के 92% के आसपास रहने का अनुमान जताया है, जो सामान्य से कम है। इसका प्रमुख कारण जून के बाद सुपर अलनीनो की परिस्थितियां पैदा होने की आशंका है। दुनियाभर के मौसम विज्ञानियों के मुताबिक अलनीनो की आशंका 62% की और सुपर अलनीनो की आशंका 25% है। इससे खरीफ फसलों, खासकर दलहन और तिलहन उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
वैश्विक तापमान बढ़ने के कारण मौसम की घटनाएं अधिक अस्थिर हो रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार -
हीटवेव बढ़ रही है
अनियमित बारिश हो रही है
चक्रवातों की तीव्रता बढ़ रही है
सूखा और बाढ़ दोनों की घटनाएं बढ़ रही है
भारत में हाल के वर्षों में उत्तराखंड की अचानक बाढ़, महाराष्ट्र में अत्यधिक बारिश और राजस्थान में बढ़ती गर्मी इसके उदाहरण है।
कृषि क्षेत्र पूरी तरह मौसम पर निर्भर है। सही समय पर बारिश और उपयुक्त तापमान फसल उत्पादन बढ़ाते हैं। जलवायु परिवर्तन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एक पारिस्थितिकी तंत्र को भी प्रभावित करता है। जलवायु में परिवर्तन भूजल पुनर्भरण, जल चक्र, मिट्टी की नमी, पशुधन और जलीय प्रजातियों को प्रभावित करेगा। जलवायु में परिवर्तन से कीटों और रोगों की घटनाओं में वृद्धि होती है, जिससे फसल उत्पादन में भारी नुकसान होता है।
अच्छी बारिश से सिंचाई में मदद
संतुलित तापमान से उत्पादन बढ़ना
जल स्रोतों का पुनर्भरण
ओलावृष्टि से फसल नुकसान
सूखा पड़ने से उत्पादन कम होना
बाढ़ से खेतों का कटाव
इसलिए आजकल किसान मौसम पूर्वानुमान का अधिक उपयोग कर रहे है।
मौसम की भविष्यवाणी को मौसम पूर्वानुमान कहते हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) उपग्रहों, रडार और कंप्यूटर मॉडल की मदद से मौसम का अनुमान जारी करता है।यह जानकारी किसानों, मछुआरों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और यात्रियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है।
भारत सरकार ने 11 सितम्बर 2024 को दो वर्षों के लिए 2,000 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ हर मौसम के लिए अधिक तैयार और जलवायु-स्मार्ट भारत बनाने के लिए 'मिशन मौसम' आरंभ किया। इस मिशन से मौसम की चरम घटनाओं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में अतिरिक्त मदद मिलेगी। उन्नत संवेदन (सेंसर) और उच्च प्रदर्शन वाले सुपर कम्प्यूटर के साथ अगली पीढ़ी के रेडार एवं उपग्रह प्रणालियां शामिल की जाएंगी। इस मिशन का उद्देश्य देश में मौसम और जलवायु निगरानी, मेधा, प्रतिमान और भविष्यवाणी में वृद्धि कर बेहतर, अधिक उपयोगी, अचूक और समय से सेवा प्रदान करना है।
जल संरक्षण, जलवायु अनुकूल खेती और आपदा प्रबंधन के लिए मौसम संबंधी जानकारी बेहद जरूरी है। सही मौसम पूर्वानुमान से -
पानी का बेहतर प्रबंधन
सूखा और बाढ़ की तैयारी
फसल सुरक्षा
ऊर्जा प्रबंधन, संभव हो पाता है।
मौसम केवल दैनिक तापमान या बारिश की जानकारी नहीं है, बल्कि यह जल, कृषि, पर्यावरण और मानव जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ विषय है। बदलते जलवायु परिदृश्य में मौसम को समझना और उसके अनुसार योजनाएँ बनाना पहले से अधिक आवश्यक हो गया है। वैज्ञानिक मौसम पूर्वानुमान और सतत संसाधन प्रबंधन भविष्य की चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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