2 सितंबर को मनाया जाने वाला विश्व नारियल दिवस नारियल की खेती और इससे जुड़ी आजीविका पर बात करने का भी मौका है।

 

फ़ोटो: विकिमीडिया कॉमन्स

कृषि

नारियल के 250 उपयोगों की सूची: जानिए कैसे यह पेड़ पानी और संसाधन दोनों बचाता है

2 सितंबर को विश्व नारियल दिवस पर जानिए, कैसे नारियल-आधारित खेती में पेड़ की छाया, पत्तियां, भूसी और छोटी जल-संरक्षण संरचनाएं मिट्टी की नमी बचाने और बारिश के पानी को खेत में रोकने में मदद करती हैं। साथ में पढ़ें नारियल के पेड़ के 250 उपयोगों की सूची।

Author : डॉ. कुमारी रोहिणी

नारियल को भारत में लंबे समय से ‘कल्पवृक्ष’ कहा जाता है। फल से लेकर तेल, पानी, रेशा और पत्तियों तक, पेड़ का लगभग हर हिस्सा किसी न किसी उपयोग में आता है। लेकिन नारियल की एक ऐसी भूमिका भी है, जिस पर कम बात होती है। नारियल के बागान में अपनाए जाने वाले कुछ तरीके पानी और मिट्टी को बचाने में भी मदद कर सकते हैं।

2 सितंबर को मनाया जाने वाला विश्व नारियल दिवस नारियल की खेती और इससे जुड़ी आजीविका पर बात करने का भी मौका है। यह दिन International Coconut Community की स्थापना की याद में मनाया जाता है।

बदलते मौसम में नारियल को सिर्फ एक फसल मानकर देखना काफी नहीं है। इसके आसपास की खेती और इसकी प्रकृति से हम बारिश के पानी को रोकने के उपाय एक बारे में जान पाते हैं। साथ ही मिट्टी की नमी को बनाए रखने के तरीक़े और सिंचाई के पानी के बेहतर इस्तेमाल के बारे में भी पता चलता है।

नारियल की ऊंची छतरी, जमीन पर गिरने वाली पत्तियां और उसके आसपास उगने वाली वनस्पति मिलकर खेत की सतह को खुला नहीं रहने देतीं।

नारियल का जल-तंत्र एक नज़र में

नारियल प्रणाली का हिस्सापानी में भूमिका
पेड़ का canopyजमीन पर सीधी धूप और वर्षा के प्रभाव को प्रभावित करता है
गिरी पत्तियांमिट्टी को ढककर नमी संरक्षण में मदद
नारियल की भूसीपानी सोखकर नमी बनाए रखने में मदद
कोयर पिथजल धारण करने वाली जैविक सामग्री
मेड़/कंटूर संरचनाएंबहते पानी की गति कम करती हैं
ड्रिप सिंचाईपानी को जड़ क्षेत्र तक लक्षित करती है
बहुफसली व्यवस्थाजमीन और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग

नारियल का पेड़ नहीं, पूरा जल तंत्र

नारियल की खेती मुख्य रूप से गर्म और नम इलाकों में होती है। लेकिन इन इलाकों में भी बारिश पूरे साल एक जैसी नहीं होती। मानसून के कुछ महीनों में खूब पानी मिलता है और फिर कई महीने अपेक्षाकृत सूखे रहते हैं। इसलिए नारियल के लिए चुनौती सिर्फ पानी की उपलब्धता नहीं, बल्कि पानी को खेत में टिकाए रखना भी है।

ICAR-CPCRI नारियल के बागानों में कई तरह के जल और मिट्टी संरक्षण उपायों की सिफारिश करता है। इनमें सूखी पत्तियों या भूसी से मिट्टी को ढकना, छोटी मेड़ और खाइयां बनाना, बारिश का पानी जमा करना और ड्रिप सिंचाई शामिल हैं। इनका मकसद पानी को बहने से रोकना और मिट्टी में नमी बनाए रखना है।

उसके आसपास की मिट्टी, पेड़ से गिरने वाली पत्तियां, नारियल की भूसी और खेत में बनाई गई छोटी जल-संरक्षण संरचनाएं भी पानी को रोकने और मिट्टी में नमी बनाए रखने में भूमिका निभाती हैं।

पेड़, मिट्टी, जैविक अवशेष और जल-संरक्षण संरचनाएं मिलकर एक ऐसी व्यवस्था बनाते हैं, जो बारिश के पानी को जल्दी बह जाने से रोकती है। 

मिट्टी को ढककर बचाई जा सकती है नमी

नारियल की पत्तियां पेड़ के ऊपर एक छतरी बनाती हैं। पेड़ से गिरने वाली सूखी पत्तियां जमीन को ढक सकती हैं। इन्हें खेत से हटाने के बजाय वहीं छोड़ दिया जाए तो ये प्राकृतिक मल्च का काम करती हैं। मल्च की परत मिट्टी को तेज धूप और हवा के सीधे संपर्क से बचाती है। इससे पानी का वाष्पीकरण कम होता है और मिट्टी में नमी बनी रहती है। 

Coconut Development Board (CDB) के तकनीकी साहित्य में नारियल बागानों में सूखी पत्तियों, नारियल की भूसी और दूसरी जैविक सामग्री से मल्चिंग करने की सलाह दी गई है। बोर्ड के अनुसार, मल्च को तने से थोड़ा दूर रखना चाहिए, ताकि नमी के साथ सड़न का खतरा न बढ़े।

ICAR-Central Plantation Crops Research Institute (ICAR-CPCRI) के 2024 के दस्तावेज के एक अध्ययन के अनुसार भूसी और पत्तियों के संयुक्त इस्तेमाल वाले उपचार में मिट्टी की नमी सबसे अधिक दर्ज की गई। केवल भूसी या केवल पत्तियों का इस्तेमाल भी बिना मल्च वाले भूखंड की तुलना में बेहतर रहा।

इन नतीजों से संकेत मिलता है कि नारियल बागान में जैविक अवशेषों को खेत में ही रखने से मिट्टी की नमी बनाए रखने में मदद मिल सकती है। यह तरीका खास तौर पर उन इलाकों में मददगार है जहां मानसून के बाद कई महीनों तक बारिश कम होती है।

हालांकि मल्चिंग करते समय कुछ सावधानियां जरूरी हैं। सूखी पत्तियों या भूसी को तने से सटाकर नहीं रखना चाहिए। इससे नमी के कारण तने में सड़न का खतरा बढ़ सकता है। इससे नमी के कारण तने में सड़न का खतरा बढ़ सकता है। सामग्री को पेड़ के चारों ओर समान रूप से फैलाना और समय-समय पर उसकी स्थिति देखना बेहतर है। यानी पानी बचाने की शुरुआत हमेशा सिंचाई से नहीं होती। कई बार मिट्टी को ढक देना ही पहला और सबसे आसान कदम होता है।

नारियल की भूसी खेत के काम आ सकती है

नारियल की भूसी को अक्सर प्रसंस्करण के बाद बचा हुआ अवशेष समझ लिया जाता है। लेकिन खेत में इसका एक उपयोगी काम हो सकता है। इसे पेड़ के आसपास मल्च की तरह बिछाया जा सकता है। इससे मिट्टी ढकी रहती है और पानी के वाष्पीकरण को कम करने में मदद मिलती है।

भूसी को खेत में बनाई गई खाइयों में भी रखा जा सकता है। इससे बारिश के पानी को कुछ देर रोकने और मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है। CDB के अनुसार, नारियल की भूसी अपने वजन के करीब 3 से 5 गुना तक पानी सोख कर रख सकती है। बोर्ड पेड़ों के आसपास भूसी बिछाने और इसे खाइयों में इस्तेमाल करने की सलाह देता है।

भूसी से रेशा निकालने के बाद बचने वाला कोयर पिथ भी नमी बनाए रखने में उपयोगी है। CDB के अनुसार, यह अपने वजन से करीब पांच गुना तक नमी बनाए रख सकता है और मिट्टी में पानी रोककर रखने की क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।

हालांकि भूसी का इस्तेमाल सिंचाई का विकल्प नहीं है। इसका फायदा मिट्टी, बारिश, पेड़ की उम्र और इस्तेमाल की गई मात्रा पर निर्भर करेगा। इसलिए इसे स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए मल्च या खाइयों में इस्तेमाल करना बेहतर है। नारियल की खेती की यह छोटी-सी सीख महत्वपूर्ण है। जिसे हम खेत का अवशेष समझते हैं, वही मिट्टी में नमी बचाने के काम आ सकता है।

बारिश का पानी खेत में रोकना क्यों जरूरी है

भारी बारिश का मतलब यह नहीं है कि खेत में पूरे साल पानी बना रहेगा। अगर बारिश का पानी तेजी से बहकर बाहर निकल जाए, तो कुछ दिनों या हफ्तों बाद वही जमीन सूख सकती है। तेज बहाव के साथ उपजाऊ मिट्टी भी बह जाती है।

नारियल के बागानों में यह समस्या खासकर ढलान वाली जमीन पर होती है। ऐसे इलाकों में कंटूर ट्रेंच, हाफ-मून बंड और कैच पिट जैसी छोटी संरचनाएं बनाई जाती हैं। ये बारिश के पानी के बहाव को धीमा करती हैं और उसे जमीन में समाने का समय देती हैं। कंटूर ट्रेंच ढलान के समानांतर बनाई जाती है, जबकि हाफ-मून बंड और कैच पिट पेड़ के आसपास पानी को कुछ देर रोकने में मदद करते हैं।

ICAR-CPCRI के अनुसार, नारियल की भूसी से भरी खाइयां, हाफ-मून बंड और कैच पिट मिट्टी और पानी के संरक्षण में उपयोगी रहे हैं। संस्थान ने सतही बहाव और छत से मिलने वाले वर्षाजल को जमा करके बाद में सिंचाई में इस्तेमाल करने के उदाहरण भी दर्ज किए हैं।

कासरगोड और तमिलनाडु के तिरुप्पुर स्थित नारियल बागानों में भी ट्रेंच, मल्चिंग और हाफ-मून बंड जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि इनका असर हर जगह एक जैसा नहीं होता। यह खेत की मिट्टी, ढलान, बारिश और पानी की निकासी पर निर्भर करता है। इसलिए ऐसी संरचनाएं बनाने से पहले खेत में पानी के प्राकृतिक बहाव को समझना जरूरी है।

बारिश के पानी को खेत से जल्दी बाहर निकालना ही हमेशा सही रास्ता नहीं है। कई जगह उसे कुछ देर रोकना और जमीन में समाने देना भी उतना ही जरूरी है।

सिंचाई में पानी की बर्बादी रोकना

नारियल की भूसी से भरी खाइयां, हाफ-मून बंड और कैच पिट मिट्टी और पानी के संरक्षण में उपयोगी होते हैं।

नारियल को कम पानी में उगने वाली फसल मानना ठीक नहीं होगा। इसकी पानी की जरूरत मिट्टी के प्रकार, मौसम, पेड़ की उम्र और स्थानीय जलवायु के अनुसार बदलती है। इसलिए सिंचाई की कोई एक मात्रा हर बागान पर लागू नहीं की जा सकती। पानी बचाने का बेहतर तरीका है सिंचाई की मात्रा और समय को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तय करना और पानी को सीधे पेड़ की जड़ वाले क्षेत्र तक पहुंचाना।

ICAR-CPCRI के अनुसार, कासरगोड की परिस्थितियों में दिसंबर से मई के बीच नारियल के पेड़ों में ड्रिप सिंचाई को खुले पैन वाष्पीकरण के लगभग 66 प्रतिशत के स्तर पर देने से 34 प्रतिशत पानी की बचत दर्ज की गई।

ड्रिप सिंचाई में पानी पाइप और एमिटर के जरिए धीरे-धीरे पेड़ के जड़ क्षेत्र में पहुंचता है। इससे पूरे खेत की सतह पर पानी फैलाने की जरूरत कम होती है और वाष्पीकरण तथा अनावश्यक बहाव से होने वाली बर्बादी घट सकती है। हालांकि इसका लाभ तभी मिलेगा, जब सिस्टम का रखरखाव ठीक हो, एमिटर बंद न हों और सिंचाई का समय स्थानीय मौसम के अनुसार तय किया जाए।

नारियल में ड्रिप सिंचाई पर प्रकाशित शोध-समीक्षाओं में भी अलग-अलग जलवायु और मिट्टी की परिस्थितियों में पानी की बचत तथा उपज पर सकारात्मक प्रभाव दर्ज किए गए हैं। इन अध्ययनों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ड्रिप सिंचाई की प्रभावशीलता पेड़ की उम्र, मिट्टी की जल-धारण क्षमता, सिंचाई की मात्रा और प्रबंधन पद्धति पर निर्भर करती है।

हर बागान में सिंचाई की जरूरत अलग होती है। इसलिए ड्रिप सिंचाई के साथ मिट्टी की नमी पर भी नजर रखना जरूरी है। नारियल की पत्तियां, भूसी और कोयर पिथ जैसी जैविक सामग्री मिट्टी को ढककर नमी के नुकसान को कम कर सकती है।

इसका मतलब है कि पानी बचाने के लिए केवल ड्रिप सिंचाई लगाना पर्याप्त नहीं है। ड्रिप सिंचाई, मिट्टी की नमी की निगरानी और जैविक मल्चिंग, इन तीनों को साथ अपनाने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

जल संरक्षण का मतलब सिर्फ कम पानी देना नहीं है। सही मात्रा में, सही समय पर और सीधे जड़ क्षेत्र में पानी पहुंचाना भी इसका अहम हिस्सा है।

गोवा में ICAR-CCARI ने नारियल आधारित सिल्वोपाश्चर प्रणाली में कई तरह की चारा प्रजातियों को शामिल कर एक मॉडल विकसित किया है। इसके साथ वर्षाजल संचयन की संरचनाएं भी बनाई गई हैं।

नारियल के साथ दूसरी फसलें भी

नारियल के पेड़ों के बीच की जमीन को खाली छोड़ना जरूरी नहीं है। स्थानीय जलवायु, मिट्टी और बाजार की स्थिति के अनुसार वहां केला, अनानास, काली मिर्च, अदरक, हल्दी, चारा और दूसरी फसलें उगाई जा सकती हैं।

ICAR-CPCRI ने नारियल आधारित बहुस्तरीय और बहुफसली खेती के कई मॉडल विकसित किए हैं। इन मॉडलों में नारियल की ऊंची छतरी के नीचे अलग-अलग तरह की फसलों को जगह दी जाती है। संस्थान के अनुसार ऐसी प्रणालियों में जमीन, धूप, पानी और पोषक तत्वों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।

बहुफसली खेती में नारियल की ऊंची छतरी के नीचे दूसरी फसलें जमीन की अलग-अलग परतों और उपलब्ध जगह का इस्तेमाल करती हैं। इससे खेत की जमीन लंबे समय तक वनस्पति से ढकी रहती है। ऐसी ढकी हुई मिट्टी पर धूप और हवा का सीधा असर कम पड़ता है, जिससे नमी के तेजी से उड़ने और बारिश के पानी के बहाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, यह लाभ हर जगह अपने-आप नहीं मिलता। फसलों का चुनाव स्थानीय वर्षा, सिंचाई की उपलब्धता, पेड़ों की दूरी और मिट्टी की स्थिति के आधार पर करना पड़ता है। बहुत घनी फसलें लगाने से नारियल और सहफसलों के बीच पानी, रोशनी और पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा भी बढ़ सकती है। इसलिए बहुफसली मॉडल को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तैयार करना जरूरी है।

ICAR की एक हालिया पहल में नारियल आधारित प्रणालियों में अलग-अलग चारा फसलों और वनस्पतियों को शामिल करने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य एक ही खेत से भोजन, चारा, जैविक पदार्थ और आय के कई स्रोत तैयार करना है।

गोवा में ICAR-CCARI ने नारियल आधारित सिल्वोपाश्चर प्रणाली में कई तरह की चारा प्रजातियों को शामिल कर एक मॉडल विकसित किया है। इसके साथ वर्षाजल संचयन की संरचनाएं भी बनाई गई हैं।

इस तरह नारियल आधारित खेती हमें यह समझने में मदद करती है कि खेत में पानी बचाने के लिए सिर्फ सिंचाई की मात्रा कम करना पर्याप्त नहीं है। मिट्टी को ढककर रखना, जैविक अवशेषों को खेत में लौटाना, वर्षाजल को रोकना और अलग-अलग फसलों का सोच-समझकर चुनाव करना, ये सभी उपाय एक-दूसरे से जुड़े हैं।

इससे एक व्यापक सीख निकलती है कि खेत में पानी बचाने के लिए सिर्फ पानी पर नहीं, पूरी खेती की बनावट पर ध्यान देना पड़ता है।

एक किसान ने इन तरीकों को खेत में कैसे अपनाया?

इन तकनीकों की उपयोगिता केवल शोध संस्थानों तक सीमित नहीं है। केरल के किसान फ्रांसिस का खेत दिखाता है कि ये उपाय जमीन पर कैसे काम आ सकते हैं। उनके खेत में कंटूर टेरेसिंग, मल्चिंग, नारियल के बेसिन में कोयर पिथ का इस्तेमाल, भूसी को जमीन में दबाना और पानी जमा करने वाले गड्ढे जैसी तकनीकें अपनाई गईं। इन उपायों का उद्देश्य मिट्टी में नमी बनाए रखना, बारिश के पानी को खेत में रोकना और नारियल की उत्पादकता सुधारना था।

इस उदाहरण में खास बात यह है कि किसान ने किसी एक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय कई छोटे उपायों को एक साथ अपनाया। खेत की ढलान और पानी के बहाव को ध्यान में रखकर संरचनाएं बनाई गईं, जबकि नारियल की भूसी और कोयर पिथ जैसे स्थानीय अवशेषों का इस्तेमाल नमी बचाने के लिए किया गया।

ऐसे उदाहरण यह दिखाते हैं कि जल संरक्षण हमेशा बड़ी और महंगी परियोजना से शुरू नहीं होता। कई बार यह खेत में मौजूद सामग्री, फसल अवशेष और छोटी-छोटी संरचनाओं से शुरू हो सकता है।

नारियल की असली सीख: पानी को खेत में टिकाना

जल संरक्षण की बात होते ही हमारे सामने अक्सर बांध, तालाब और बड़े जलाशय आते हैं। नारियल आधारित खेती एक दूसरी तस्वीर दिखाती है।

यहां पानी बचाने की शुरुआत मिट्टी की सतह से होती है। सूखी पत्तियां मिट्टी को ढकती हैं। भूसी पानी रोकती है। छोटी खाइयां बहाव धीमा करती हैं। मेड़ पानी को खेत में रोकती है। वर्षाजल संचयन अतिरिक्त पानी को बाद के लिए बचा सकता है। ड्रिप सिंचाई पानी को जरूरत की जगह तक पहुंचाती है।

ICAR-CPCRI के अनुसार नारियल बागानों में मल्चिंग, भूसी से भरी खाइयां, कैच पिट, हाफ-मून बंड और ड्रिप सिंचाई जैसे उपाय मिट्टी की नमी और पानी के इस्तेमाल को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। 

इनमें से कोई भी उपाय अकेले जल संकट का समाधान नहीं है। लेकिन साथ मिलकर ये मिट्टी की नमी बचाने, पानी के बहाव और कटाव को कम करने और सिंचाई के पानी का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद कर सकते हैं।

नारियल का सबसे बड़ा जल-संदेश शायद यही है कि पानी बचाने का मतलब सिर्फ पानी कम खर्च करना नहीं है।
असली सवाल यह है कि जो पानी हमारे पास आता है, उसे हम खेत में कितनी देर तक रोक पाते हैं।

शायद यही नारियल की सबसे बड़ी सीख है। वह बताता है कि जल संरक्षण किसी एक तकनीक का नाम नहीं, बल्कि पेड़, मिट्टी, पानी और खेती को एक साथ देखने की सोच है।

नारियल और पानी: 5 बातें जो शायद आप नहीं जानते

  • 3-5 गुना: नारियल की भूसी अपने वजन के करीब 3 से 5 गुना तक पानी सोखकर रख सकती है।

  • करीब 5 गुना: कोयर पिथ अपने वजन से करीब पांच गुना तक नमी बनाए रख सकता है।

  • 34% बचत: कासरगोड के एक अध्ययन में ड्रिप सिंचाई से 34% पानी की बचत दर्ज हुई।

  • मल्च का काम: सूखी नारियल पत्तियां खेत में छोड़ने पर मिट्टी को ढकने और नमी बचाने में मदद करती हैं।

  • छोटी संरचनाएं, बड़ा काम: कंटूर ट्रेंच और कैच पिट बारिश के पानी को बहने के बजाय जमीन में समाने का समय देते हैं।

नारियल के पेड़ के 250 उपयोग

नारियल का पेड़ कितना उपयोगी होता है ये बात आप इसके उपयोगों की सूची को देख कर समझ जाएंगे -

नारियल के संपूर्ण ताड़, जड़, वृक्षारोपण और पर्यावरणीय उपयोग

क्रमांकसंपूर्ण ताड़, वृक्षारोपण और पर्यावरणीय उपयोगक्रमांकजड़ के उपयोग
1खाद्य उत्पादन करने वाली फसल21पारंपरिक चिकित्सा
2वाणिज्यिक बागान फसल22पेचिश का पारंपरिक उपचार
3छोटे किसानों की आजीविका के लिए फसल23दस्त का पारंपरिक उपचार
4घर के बगीचे में उगाई गई फसल24पेट की बीमारियों का पारंपरिक उपचार
5कृषि वानिकी घटक25पेट दर्द का पारंपरिक उपचार
6अंतरफसलों के लिए छाया26मूत्र संबंधी शिकायतों का पारंपरिक उपचार
7चरागाह के लिए हल्की छाया27मूत्र में रक्त आने का पारंपरिक उपचार
8पवन अवरोधक28गुर्दे की बीमारियों का पारंपरिक उपचार
9तटीय पवन संरक्षण29खांसी का पारंपरिक उपचार
10तटीय स्थिरीकरण30माउथवॉश
11मृदा अपरदन नियंत्रण31दांत साफ करने की सामग्री
12रेत के टीलों का स्थिरीकरण32टूथब्रश का विकल्प
13भूदृश्य रोपण33रंग उत्पादन
14बगीचे की सजावट34पेय पदार्थ तैयार करना
15सड़क के किनारे वृक्षारोपण35भूनने के बाद कॉफी का विकल्प
16सीमावर्ती वृक्षारोपण36ईंधन
17गृहस्थी संरक्षण37लकड़ी
18उष्णकटिबंधीय समुद्र तट भूनिर्माण38जड़ का काढ़ा
19बायोमास का स्रोत39पारंपरिक एंटीसेप्टिक
20कुटीर उद्योगों के लिए कच्चा माल40पारंपरिक हर्बल औषधियाँ

नारियल की पत्ती, पत्रक, मध्य शिरा, कांटा, डंठल, नारियल के भीतरी भाग, गुठली के उपयोग

क्रमांकपत्ती, वृष और पत्रक के उपयोगक्रमांकपत्ती की मध्य शिरा / कांटा / डंठल / स्पैथ / आवरण / पत्ती सामग्रीक्रमांकनारियल का भीतरी भाग / गुठली / नारियल तेल की खली
41छत की छप्पर91झाडू141ताजा नारियल का गूदा
42दीवार की छप्पर92हाथ की झाड़ू142कच्चा खाना
43अस्थायी छत93घरेलू झाड़ू143पकी हुई सब्जी
44बाड़ लगाना94बगीचे की झाड़ू144करी सामग्री
45गोपनीयता स्क्रीन95ब्रश के हैंडल145चटनी
46दीवार के पैनलों96डंडे146नारियल चावल
47मैट97छतों के लिए ढांचा147मिठाई की सामग्री
48तल मैट98दीवारों के लिए ढांचा148मीठे व्यंजन
49सोने की चटाई99निर्माण समर्थन149बेकरी सामग्री
50टोकरी100छोटी हिस्सेदारी150हलवाई की दुकान
51खरीदारी की टोकरियाँ101बगीचे के समर्थन151नारियल की कतरन
52भंडारण टोकरियाँ102बाड़ लगाने की सामग्री152नारियल के चिप्स
53पानी निकालने वाली टोकरियाँ103ईंधन153सूखा नारियल
54पाउच104लकड़ी154कसा हुआ नारियल
55चावल पकाने के पैकेट105जलना155नारियल पाउडर
56पुसो रैपिंग106सजावटी छड़ें156नारियल का आटा
57केतुपट लपेटना107शिल्प की छड़ें157नारियल क्रीम
58खाद्य पदार्थ लपेटना108टोकरी ढांचा158नारियल का दूध
59खाना पकाने के लिए सीख109मैट फ्रेमवर्क159नारियल दूध पाउडर
60जलना110ट्रे फ्रेमवर्क160नारियल क्रीम पाउडर
61आग जलाने वाले तीर111टॉर्च के हैंडल161नारियल का मक्खन
62जलाकर112पारंपरिक उपकरण162नारियल का पेस्ट
63सजावटी मशालें113ग्रामीण उपकरण163नारियल का स्प्रेड
64शादी की सजावट114घरेलू उपकरण164नारियल दही के व्यंजन
65शादी के तंबू115स्विच165डेयरी-विकल्प उत्पाद
66त्योहार की सजावट116हल्के संरचनात्मक घटक166पौधों से प्राप्त क्रीम
67धार्मिक सजावट117अस्थायी खंभे167पौधों से प्राप्त दूध
68कार्यक्रम की सजावट118सजावटी ढाँचे168आइसक्रीम सामग्री
69स्टेज की सजावट119हस्तशिल्प सामग्री169चॉकलेट सामग्री
70बैठक-कक्ष की सजावट120कृषि हिस्सेदारी170बिस्किट सामग्री
71चढ़ाई-फ्रेम सजावट121खाद्य पदार्थ लपेटना171केक सामग्री
72हाथ के पंखे122परोसने की सामग्री172पेस्ट्री सामग्री
73सजावटी पंखे123प्लेटें173भरावन सामग्री
74फलों की ट्रे124ट्रे174स्वाद बढ़ाने वाली सामग्री
75परोसने की ट्रे125सजावटी वस्तुएँ175खाद्य सजावट
76प्लेटें126हस्तशिल्प176पशुओं का चारा
77भोजन परोसने वाली शीट127कैप्स177दुग्ध पशु चारा
78छत के पैनल128हेलमेट178सुअर का चारा
79अस्थायी आश्रय स्थल129बैग के घटक179मुर्गी पालन का चारा
80ग्रामीण झोपड़ियाँ130स्ट्रैप सामग्री180मछली का चारा
81बगीचे की स्क्रीन131पारंपरिक जूते के घटक181पशुधन प्रोटीन/ऊर्जा पूरक
82हस्तशिल्प132अस्थायी कंटेनर182खोपरा का चूरा
83बुने हुए आभूषण133कृषि आवरण183नारियल केक
84टोपी134नर्सरी सामग्री184फ़ीड सामग्री
85कैप्स135त्योहार की सजावट185जैविक खाद
86थैलियों136धार्मिक सजावट186मृदा संशोधन
87हैंडबैग137हस्तशिल्प आभूषण187खाद सामग्री
88उपयोगिता बैग138खिलौने बनाना188कृषि उर्वरक सामग्री
89कागज/लुगदी सामग्री139हल्का पैकेजिंग189बायोमास फीडस्टॉक
90पत्तों से बनी हस्तशिल्प सामग्री140घरेलू उपयोग की वस्तुएँ190औद्योगिक निष्कर्षण अवशेष

नारियल के पेड़ के ताने, फूल, व रेशे के उपयोग

क्रमांकतना/डंठल का उपयोगक्रमांकफूल, नारियल का रेशा
191घर का निर्माण206नारियल का रस
192संरचनात्मक बीम207तोडी / पाम वाइन
193छत के सहारे208नारियल का सिरका
194दीवार के सहारे209नारियल की चीनी
195फाउंडेशन समर्थन करता है210शराब उत्पादन
196बाड़ के खंभे211धार्मिक उपयोग
197पुल निर्माण212पारंपरिक चिकित्सा
198ग्रामीण झोपड़ियाँ213औपचारिक सजावट
199फर्श के तख्ते214सांस्कृतिक पेशकश
200दीवार के पैनल215नारियल के रेशे का धागा
201फर्नीचर216नारियल की रस्सी
202दरवाजे / खिड़की 217नारियल की चटाई
203पोशिश218गद्दे की भराई
204कंटेनर219ब्रश / झाडू
205छोटी नावों/कैनो के पुर्जे220नाव की सीलिंग

खोपरा, नारियल के तेल व कच्चे नारियल के उपयोग

क्रमांकखोपरा और नारियल का तेलक्रमांककच्चा नारियल और नारियल पानी
221खाद्य नारियल तेल236ताज़ा पेय
222खाना पकाने का तेल237हाइड्रेटिंग पेय
223मार्जरीन238नारियल से बना खुदरा पेय पदार्थ
224आइसक्रीम 239पैकेटबंद नारियल पानी
225चॉकलेट/बेकरी उत्पाद240नारियल पानी का पाउडर
226फार्मास्युटिकल फॉर्मूलेशन241सिरका / जेली उत्पाद
227त्वचा क्रीम242पादप ऊतक संवर्धन माध्यम
228मालिश का तेल243बीज भंडारण माध्यम
229साबुन / डिटर्जेंट / शैम्पू फॉर्मूलेशन244पौध वृद्धि अनुप्रयोग
230डिटर्जेंट245पारंपरिक औषधि तैयारियाँ
231मोमबत्ती निर्माण246गुर्दे के पारंपरिक उपचार
232वसायुक्त अल्कोहल उत्पादन247पारंपरिक औषधियाँ
233ग्लिसरीन उत्पादन248मिठाई की सामग्री
234पर्सनल केयर उत्पाद 249खाद्य प्रसंस्करण सामग्री
235जैव ईंधन250औद्योगिक पेय घटक

लेटेस्ट अपडेट्स के लिए हमारे व्हाट्सऐप चैनल को फॉलो करें

SCROLL FOR NEXT