मुंबई महानगर में जलापूर्ति का का सबसे प्रमुख जल स्रोत मानी जाने वाली 7 झीलों में अच्छी बारिश के कारण करीब 90 % पानी भरने से BMC ने राहत की सांस ली है।
फोटो : विकी कॉमंस
मुंबई को जलापूर्ति करने वाली सातों झीलों के आसपास के इलाकों में अच्छी बारिश होने से ये सभी झीलें अच्छी तरह रिचार्ज हो गई हैं। इससे झीलों का कुल जल भंडार 90.06 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इनमें से चार झीलें पहले से ओवरफ्लो हो चुकी हैं। इससे मुंबई महानगर पालिका (BMC) के ने भी राहत की सांस ली है, क्योंकि बारिश ने मुंबईकरों के साल भर के पानी की चिंता खत्म कर दी है।
तुलसी झील (Tulsi Lake)
विहार झील (Vihar Lake)
तानसा झील (Tansa Lake)
मोदक सागर (Modak Sagar)
मुंबई महानगर पालिका (BMC) के अनुसार शहर को पीने का पानी 7 प्रमुख जलाशयों से मिलता है। इन सभी सात झीलों की कुल जल भंडारण क्षमता 1,447,363 मिलियन लीटर है। अच्छी बारिश होने के कारण इस समय इन जलाशयों में 13 लाख मिलियन लीटर से अधिक पानी जमा हो चुका है। इससे मुंबईकरों की साल भर को जलापूर्ति करने के लिए पानी की चिंता लगभग खत्म हो गई है। सामान्य परिस्थितियों में यही जलाशय मुंबई की लगभग 3,900–4,000 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) पेयजल आवश्यकता का अधिकांश हिस्सा पूरा करते हैं। मुंबई को जलापूर्ति करने वाले यह 7 प्रमुख जलाशय इस प्रकार हैं :
भातसा बांध मुंबई को पानी उपलब्ध कराने वाला सबसे बड़ा जलाशय है। यह ठाणे जिले के शहापुर क्षेत्र में भातसा नदी पर बना है और इसका जलग्रहण क्षेत्र लगभग 982 वर्ग किमी है। इसकी कुल जल भंडारण क्षमता लगभग 717,000 मिलियन लीटर (717 अरब लीटर) है। यहां से मुख्य रूप से दक्षिण मुंबई, पश्चिमी उपनगर, पूर्वी उपनगर तथा मुंबई के बड़े हिस्से को पेयजल आपूर्ति की जाती है। इस जलाशय से पानी पंपिंग स्टेशनों और भांडुप जल शोधन संयंत्र में ट्रीटमेंट करके शहर तक पहुंचाया जाता है।
अपर वैतरणा बांध यह जलाशय नासिक जिले के इगतपुरी क्षेत्र में वैतरणा नदी पर स्थित है। इसका जलग्रहण क्षेत्र लगभग 227 वर्ग किमी है और कुल जल भंडारण क्षमता लगभग 227,000 मिलियन लीटर (227 अरब लीटर) है। यहां का पानी सुरंगों और पाइपलाइनों के जरिए मुंबई के जलापूर्ति नेटवर्क से जोड़ा गया है। इससे मुख्य रूप से पश्चिमी और मध्य मुंबई के कई हिस्सों को पानी मिलता है तथा यह मानसून के बाद जल भंडार बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मिडल वैतरणा बांध यह अपेक्षाकृत नया जलाशय है। यह मुंबई से सटे ठाणे जिले के शहापुर के निकट वैतरणा नदी पर बनाया गया है। इसका जलग्रहण क्षेत्र लगभग 145 वर्ग किमी है और कुल जल भंडारण क्षमता लगभग 193,000 मिलियन लीटर (193 अरब लीटर) है। इस जलाशय से प्रतिदिन लगभग 455 मिलियन लीटर (MLD) अतिरिक्त पानी मुंबई को उपलब्ध कराया जाता है। इससे विशेष रूप से मुंबई के मध्य और पूर्वी इलाकों की जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिली है।
मोदक सागर बांध पहले इसे लोअर वैतरणा जलाशय के नाम से जाना जाता था। यह ठाणे जिले के शहापुर क्षेत्र में वैतरणा नदी पर स्थित है। इसका जलग्रहण क्षेत्र लगभग 158 वर्ग किमी और कुल जल भंडारण क्षमता लगभग 129,000 मिलियन लीटर (129 अरब लीटर) है। यह मुंबई की सबसे पुरानी प्रमुख जलापूर्ति परियोजनाओं में से एक है और यहां का पानी मुख्य रूप से दक्षिण मुंबई तथा मध्य मुंबई के इलाकों तक पहुंचाया जाता है।
तानसा झील तानसा नदी पर बना यह जलाशय ठाणे जिले के शहापुर क्षेत्र में स्थित है। इसका जलग्रहण क्षेत्र लगभग 139 वर्ग किमी है तथा कुल जल भंडारण क्षमता लगभग 145,000 मिलियन लीटर (145 अरब लीटर) है। सन 1892 में शुरू हुई यह परियोजना मुंबई की सबसे पुरानी जलापूर्ति योजनाओं में गिनी जाती है। आज भी यह दक्षिण मुंबई, मध्य मुंबई और कुछ उपनगरीय क्षेत्रों को महत्वपूर्ण मात्रा में पेयजल उपलब्ध कराती है।
विहार झील विहार झील मुंबई शहर की सीमा के भीतर स्थित है और इसका निर्माण 1860 के दशक में किया गया था। इसे मुंबई की जलापूर्ति से जुड़ा सबसे पुराना जलाशय माना जाता है। झील का जल क्षेत्र लगभग 7 वर्ग किमी है तथा इसकी जल भंडारण क्षमता लगभग 27,700 मिलियन लीटर (27.7 अरब लीटर) है। वर्तमान में इसका योगदान कुल जलापूर्ति में अपेक्षाकृत कम है, लेकिन यह आपातकालीन और पूरक स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण है। यह ठाणे के संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के निकट स्थित है और इसके आसपास संरक्षित वन क्षेत्र है।
तुलसी झील तुलसी झील भी संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित है और 1879 में इसका निर्माण हुआ था। इसका जल क्षेत्र लगभग 1.35 वर्ग किमी तथा कुल जल भंडारण क्षमता लगभग 8,000 मिलियन लीटर (8 अरब लीटर) है। यह मुंबई के कुल पेयजल का छोटा हिस्सा उपलब्ध कराती है, लेकिन इसकी गुणवत्ता सबसे अच्छी मानी जाती है क्योंकि इसका जलग्रहण क्षेत्र पूरी तरह संरक्षित वन क्षेत्र में है। इसका पानी मुख्य रूप से शहर के केंद्रीय जल वितरण तंत्र में मिलाकर विभिन्न इलाकों में भेजा जाता है।
| जलाशय | स्थान | जलग्रहण क्षेत्र | भंडारण क्षमता |
|---|---|---|---|
| भातसा | शहापुर, ठाणे | लगभग 982 वर्ग किमी | 717 अरब लीटर |
| अपर वैतरणा | इगतपुरी, नासिक | लगभग 227 वर्ग किमी | 227 अरब लीटर |
| मिडल वैतरणा | शहापुर, ठाणे | लगभग 145 वर्ग किमी | 193 अरब लीटर |
| मोदक सागर | शहापुर, ठाणे | लगभग 158 वर्ग किमी | 129 अरब लीटर |
| तानसा | शहापुर, ठाणे | लगभग 139 वर्ग किमी | 145 अरब लीटर |
| विहार | मुंबई | लगभग 7 वर्ग किमी (जल क्षेत्र) | 27.7 अरब लीटर |
| तुलसी | मुंबई | लगभग 1.35 वर्ग किमी (जल क्षेत्र) | 8 अरब लीटर |
मुंबई की जलापूर्ति पूरी तरह मानसूनी वर्षा पर निर्भर करती है। हर साल मानसून के दौरान इन सात जलाशयों में जमा पानी से ही पूरे वर्ष शहर की पेयजल जरूरत पूरी की जाती है। जल भंडारण 90 प्रतिशत के पार पहुंचने का अर्थ है कि सामान्य परिस्थितियों में अगले मानसून तक पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता काफी हद तक समाप्त हो जाती है। यदि मानसून के शेष दिनों में भी अच्छी बारिश जारी रहती है तो जलाशयों में पूरा भंडारण हो सकता है।
मुंबई महानगर पालिका के जल विभाग के अनुसार सातों जलाशयों में उपयोगी जल भंडारण क्षमता का अधिकांश हिस्सा भर चुका है। अगस्त और सितंबर में भी यदि जलग्रहण क्षेत्रों में सामान्य से अच्छी बारिश जारी रहती है, तो सभी जलाशय पूरी क्षमता से भर जाएंगे। इससे अगले वर्ष मानसून आने तक मुंबई की पेयजल आपूर्ति सुरक्षित बनी रहेगी। जलाशयों में तेजी से बढ़ते जल स्तर ने इस साल संभावित जल संकट की आशंकाओं को काफी हद तक कम कर दिया है। मनपा ने एहतियात के तौर पर शहर में 10 प्रतिशत जल कटौती लागू की थी। हालांकि अब जलाशयों में पानी का स्तर 90 प्रतिशत के पार पहुंचने से उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस कटौती को खत्म करने पर पुनर्विचार किया जा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय मनपा की समीक्षा और मौसम की आगे की स्थिति पर निर्भर करेगा। पर्याप्त जल भंडारण होने से शहर की पेयजल व्यवस्था फिलहाल मजबूत स्थिति में है। आगामी महीनों में पानी की उपलब्धता को लेकर किसी संकट की आशंका नहीं है।
बीएमसी का जलापूर्ति विभाग मानसून के दौरान सातों जलाशयों के जलस्तर और वर्षा की दैनिक निगरानी करता है। जलाशयों के भरने की गति के आधार पर शहर की जलापूर्ति की रणनीति तय की जाती है। यदि मानसून कमजोर रहता है तो पानी की कटौती लागू करनी पड़ सकती है, जबकि पर्याप्त भंडारण होने पर पूरे वर्ष निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करने में आसानी होती है।
मुंबई महानगर पालिका के जलापूर्ति विभाग के अनुसार, शहर को पानी उपलब्ध कराने वाली सात झीलों में से विहार, तुलसी, मोदक सागर और तानसा पहले ही ओवरफ्लो हो चुकी हैं। इन झीलों के भर जाने के बाद अतिरिक्त पानी नियंत्रित तरीके से छोड़ा जा रहा है। वहीं, भातसा, अपर वैतरणा और मिडल वैतरणा जलाशयों में भी जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इन तीनों में पर्याप्त भंडारण होने से आने वाले दिनों में इनके भी पूरी क्षमता तक भरने की संभावना जताई जा रही है।
पिछले कुछ वर्षों में कई बार मानसून की धीमी शुरुआत के कारण जुलाई तक जलाशयों में अपेक्षित मात्रा में पानी नहीं पहुंच पाया था, जिससे जल कटौती की आशंका पैदा हो गई थी। हालांकि इस वर्ष जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार और व्यापक वर्षा होने से जलाशयों में तेजी से पानी जमा हुआ है। अगस्त की शुरुआत में ही कुल भंडारण 90 प्रतिशत से ऊपर पहुंच जाना मुंबई के लिए बेहद सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यदि शेष मानसून भी सामान्य रहता है तो शहर को अगले वर्ष के मानसून तक पर्याप्त पेयजल उपलब्ध रहने की पूरी संभावना है।
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