चंडीगढ़ की लाइफलाइन कही जाने वाली सुखना लेक अब रामसर साइट बन गई है।
स्रोत : विकी कॉमंस
चंडीगढ़ की मशहूर सुखना झील और उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की सौज झील के रूप में देश को दो नए रामसर स्थल मिल गए हैं। इसके साथ ही भारत में रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 103 हो गई है, जबकि सबसे ज़्यादा आबादी वाले राज्य यूपी में रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 15 अक्टूबर को बताया कि चंडीगढ़ की सुखना झील और उत्तर प्रदेश की सौज झील को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों (वेटलैंड) की रामसर सूची में शामिल कर लिया गया है। पर्यावरण मंत्री ने एक्स पर पोस्ट कर इस बारे में बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि देश के समृद्ध आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र (Wetland ecosystem) के संरक्षण के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है। साथ ही यह सरकार द्वारा आर्द्रभूमियों को दिए जा रहे महत्व को भी दर्शाती है।
सौज झील उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में है। मैनपुरी अब दो रामसर साइट वाला जिला बन गया है। इससे पहले समान पक्षी विहार को भी रामसर साइट का दर्जा मिल चुका है। पहले नई रामसर साइट बनने वाली सौज झील की बात करते हैं। यह गंगा के मैदानी क्षेत्र में स्थित एक उथली झील है, जिसके चारों ओर कृषि भूमि है। रामसर कन्वेंशन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह झील आसपास की आर्द्रभूमियों के व्यापक तंत्र का हिस्सा है और निकटवर्ती समान पक्षी विहार के साथ मिलकर इस क्षेत्र में जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस तरह सौज झील का महत्व केवल अपने जलक्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के प्राकृतिक आवासों के बीच पारिस्थितिक संपर्क बनाए रखने में भी है।
सौज झील में कमल (Nelumbo nucifera) और जंगली गन्ने (Saccharum spontaneum) जैसी आर्द्रभूमि से जुड़ी वनस्पतियां पाई जाती हैं। ये वनस्पतियां पक्षियों और दूसरे जीवों को भोजन, आश्रय तथा प्रजनन के लिए अनुकूल स्थान उपलब्ध कराती हैं। रामसर कन्वेंशन के अनुसार, यहां नियमित रूप से 30 हजार से अधिक जलपक्षी पाए जाते हैं। इनमें संकटग्रस्त सारस क्रेन और ग्रेटर स्पॉटेड ईगल जैसी प्रजातियां भी शामिल हैं। इस महत्व के कारण सौज झील को बर्डलाइफ इंटरनेशनल ने महत्वपूर्ण पक्षी एवं जैव विविधता क्षेत्र (आईबीए) के रूप में भी पहचाना है।
रामसर का दर्जा मिलने से सौज झील के संरक्षण को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। हालांकि, इस पहचान को दीर्घकालीन संरक्षण में बदलने के लिए झील के जलक्षेत्र, आसपास की कृषि भूमि और पक्षियों के प्राकृतिक आवासों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। आधिकारिक जानकारी में यहां मछली पकड़ने पर मौसमी प्रतिबंध, बारीक जालों के इस्तेमाल पर रोक और मवेशियों की पहुंच नियंत्रित करने जैसे प्रबंधन उपाय प्रस्तावित किए गए हैं।
मैनपुरी जिले में स्थित समान पक्षी विहार को 2 दिसंबर 2019 को रामसर स्थल घोषित किया गया था। लगभग 526.3 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली यह आर्द्रभूमि गंगा के बाढ़ मैदान में बनी एक मौसमी ऑक्सबो झील है। यहां मानसूनी वर्षा और आसपास के जलप्रवाह से पानी पहुंचता है। यह क्षेत्र प्रवासी और स्थानीय जलपक्षियों के लिए महत्वपूर्ण आवास है। आर्द्रभूमि भूजल पुनर्भरण, घरेलू और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता तथा बाढ़ के प्रभाव को कम करने जैसी पारिस्थितिक सेवाएं भी देती है। अब सौज झील को रामसर का दर्जा मिलने से मैनपुरी में अंतरराष्ट्रीय महत्व की दो आर्द्रभूमियां हो गई हैं।
सौज झील को रामसर स्थल घोषित किए जाने के साथ उत्तर प्रदेश में इनकी संख्या बढ़कर 14 हो गई है। राज्य में अब गंगा नदी के एक बड़े हिस्से से लेकर प्राकृतिक झीलों, मौसमी आर्द्रभूमियों और पक्षी अभयारण्यों तक विविध प्रकार के आर्द्र पारिस्थितिक तंत्रों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल चुकी है। इनमें ऊपरी गंगा नदी, हैदरपुर आर्द्रभूमि, बखीरा वन्यजीव अभयारण्य, समान पक्षी विहार और सूर सरोवर जैसे स्थल शामिल हैं। इनकी अहमियत केवल प्रवासी पक्षियों के ठहरने और भोजन पाने तक सीमित नहीं है। आर्द्रभूमियां मछलियों और दूसरे जलीय जीवों को आवास देती हैं, भूजल के पुनर्भरण में योगदान करती हैं और वर्षा के अतिरिक्त पानी को अपने भीतर समेटकर बाढ़ के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकती हैं। कई जगहों पर इनसे स्थानीय लोगों को मछली पालन, पशुओं के चारे और सिंचाई के लिए पानी जैसे लाभ भी मिलते हैं।
उत्तर प्रदेश में रामसर स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने का सिलसिला 2005 में ऊपरी गंगा नदी से शुरू हुआ था। इसके बाद 2019 में कई पक्षी अभयारण्यों और झीलों को यह दर्जा मिला। 2020 में सूर सरोवर और 2021 में हैदरपुर आर्द्रभूमि तथा बखीरा वन्यजीव अभयारण्य इस सूची में शामिल हुए। वर्ष 2026 में पटना पक्षी विहार, शेखा झील पक्षी विहार और जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य यानी सुरहा ताल के शामिल होने के बाद सौज झील राज्य का 14वां रामसर स्थल बनी है।
रामसर का दर्जा इन आर्द्रभूमियों के संरक्षण की दिशा में अहम कदम है, लेकिन वास्तविक सफलता उनके जलस्रोतों को बनाए रखने, प्रदूषण और अतिक्रमण को नियंत्रित करने तथा पक्षियों के प्राकृतिक आवासों की रक्षा करने पर निर्भर करेगी। खासकर गंगा के मैदानी इलाकों में स्थित आर्द्रभूमियों के लिए जलप्रवाह और आसपास की भूमि के उपयोग का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। नीचे उत्तर प्रदेश के 14 रामसर स्थलों की जानकारी गई है -
| क्रम | रामसर स्थल | जिला | क्षेत्रफल (हेक्टेयर) | कब बना (नामांकन की तारीख) |
|---|---|---|---|---|
| 1 | ऊपरी गंगा नदी | हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा व संभल क्षेत्र | 26590 | 8 नवंबर 2005 |
| 2 | नवाबगंज पक्षी अभयारण्य | उन्नाव | 225 | 19 सितंबर 2019 |
| 3 | पार्वती अर्गा पक्षी अभयारण्य | गोंडा | 722 | 2 दिसंबर 2019 |
| 4 | समान पक्षी विहार | मैनपुरी | 526.3 | 2 दिसंबर 2019 |
| 5 | समसपुर पक्षी अभयारण्य | रायबरेली | 799.4 | 3 अक्टूबर 2019 |
| 6 | सैंडी पक्षी अभयारण्य | हरदोई | 309 | 26 सितंबर 2019 |
| 7 | सरसई नावर झील | इटावा | 161.3 | 19 सितंबर 2019 |
| 8 | सूर सरोवर (कीठम झील) | आगरा | 431 | 21 अगस्त 2020 |
| 9 | हैदरपुर आर्द्रभूमि | मुजफ्फरनगर व बिजनौर क्षेत्र | 6908 | 13 अप्रैल 2021 |
| 10 | बखीरा वन्यजीव अभयारण्य | संत कबीर नगर | 2894 | 29 जून 2021 |
| 11 | पटना पक्षी अभयारण्य | एटा | 108.86 | 4 दिसंबर 2025 |
| 12 | शेखा झील पक्षी अभयारण्य | अलीगढ़ | 40.31 | 19 जनवरी 2026 |
| 13 | जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) | बलिया | 3432.93 | 19 जनवरी 2026 |
| 14 | सौज झील | मैनपुरी | अक्टूबर 2026 | |
नोट : तारीखें रामसर स्थल के आधिकारिक नामांकन की तारीख हैं, न कि जरूरी तौर पर उस दिन की जब सरकार ने इसकी घोषणा की थी। पुराने स्थलों के लिए रामसर कन्वेंशन और भारत सरकार के आर्द्रभूमि पोर्टल के आंकड़ों को आधार बनाया गया है।
यूपी में एक नए रामसर स्थल की घोषणा के बाद अब राज्य में पर्यटन विकास की संभावनाएं और प्रबल हो गई हैं। प्रशासन द्वारा पहले से ही यहां कई विकास कार्य कराए जा चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने से यहां पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। यह उपलब्धि प्रदेश की पर्यावरणीय विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सुरहा ताल को रामसर स्थल का दर्जा मिलने से उत्तर प्रदेश को निम्नलिखित लाभ मिलने की संभावना है -
अंतरराष्ट्रीय संरक्षण परियोजनाओं में सहयोग बढ़ेगा।
इको-टूरिज्म को प्रोत्साहन मिलेगा।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
पर्यावरणीय जागरूकता और अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।
क्षेत्र में सतत विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी।
रामसर स्थल, रामसर कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियां होती हैं। यह पर्यावरण संधि 1971 में हुई थी। आर्द्रभूमियों के संरक्षण के उद्देश्य से शुरू किया गया था।दुनिया भर में आर्द्रभूमियों के नुकसान रोकना और शेष आर्द्रभूमियों का विवेकपूर्ण उपयोग एवं बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना ही इस पहल का मकसद है। किसी आर्द्रभूमि को रामसर स्थल घोषित करने पर संबंधित देश उसके संरक्षण के लिए प्रबंधन व्यवस्था स्थापित करने और उसकी निगरानी करने की प्रतिबद्धता जताते हैं। वर्तमान में दुनिया के 170 से अधिक देश इससे जुड़े हैं और 2100 से अधिक वेटलैंड सूचीबद्ध हैं। भारत में अब तक 103 वेटलैंड इस सूची में शामिल हो चुके हैं, जिनमें अब चंडीगढ़ की सुखना झील और मैनपुरी की सौज झील भी शामिल हो गई है।
हाल ही में बलिया का जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार (सुरहा ताल) भारत का 100वां रामसर स्थल बना था। 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की इस वेटलैंड को यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई थी। करीब साढ़े तीन दशक पहले 1991 में स्थापित जय प्रकाश नारायण पक्षी विहार में सर्दियों के मौसम में साइबेरिया सहित विभिन्न देशों से आने वाले प्रवासी पक्षियों का यहां बड़ा जमावड़ा देखने को मिलता है, जो इसे पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। यह उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में स्थित बलिया शहर से लगभग 17 किलोमीटर दूर बसंतपुर के समीप स्थित सुरहा ताल को देश व प्रदेश के प्रमुख आर्द्रभूमि क्षेत्रों में गिना जाता रहा है। सुरहा ताल लगभग 24.9 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। बरसात के मौसम में इसका दायरा तकरीबन दोगुना बढ़ कर बढ़कर 42 वर्ग किलोमीटर से भी अधिक का हो जाता है। प्रचुर मात्रा में पानी की उपलब्धता रहने के कारण यह वर्षभर जलयुक्त रहने वाला क्षेत्र है, जो क्षेत्रीय जलचक्र को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसी कारण इसे देश के सौवें रामसर स्थल के रूप में न केवल राष्ट्रीय, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण मानचित्र पर स्थान मिला है।
जैव विविधता से समृद्ध यह प्राकृतिक जलाशय गंगा और सरयू नदी के खादर क्षेत्र में स्थित है। यानी यह उन निचले बाढ़ मैदानों में स्थित है जहां गंगा और सरयू द्वारा लाई गई नई जलोढ़ मिट्टी और बाढ़ का प्रभाव रहता है। यह एक बड़े इलाके में प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भूगोल में खादर (Khadar) नदी द्वारा हर वर्ष या समय-समय पर बाढ़ के दौरान जमा की गई नई जलोढ़ मिट्टी (new alluvium) वाला क्षेत्र होता है। यह नदी के बिल्कुल निकट स्थित निचला मैदान होता है, जहां बाढ़ का पानी नियमित रूप से पहुंचता है। इसके विपरीत बांगर (Bhangar) पुरानी जलोढ़ मिट्टी वाला अपेक्षाकृत ऊंचा क्षेत्र होता है, जहां सामान्यतः बाढ़ का पानी नहीं पहुंचता।
उत्तर प्रदेश में कई प्राकृतिक और मानव निर्मित जलाशयों की पहचान कर उन्हें संरक्षित वेटलैंड के रूप में विकसित करने की पहल में तेजी देखने को मिल रही है। इसका मकसद जैव विविधता संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को बढ़ावा देना है। चित्रकूट के दो तालाबों का चयन इसी व्यापक संरक्षण अभियान का हिस्सा माना जा सकता है। चित्रकूट के दो तालाबों को संरक्षित वेटलैंड घोषित करने से पहले इस वर्ष यूपी के दो पक्षी विहारों को राष्ट्रीय स्तर का रामसर स्थल घोषित किया जा चुका है।
बीते फरवरी माह के अंतिम सप्ता में उत्तर प्रदेश के एटा जिले के जलेसर के पास स्थित पटना पक्षी विहार (Patna Bird Sanctuary) को रामसर स्थल का दर्ज़ा दिया गया था। यह कदम एशियन वाटरबर्ड सेंसस–26 की पहली गणना में पटना बर्ड सेंचुरी में प्रवासी पक्षियों की रिकार्ड मौजूदगी दर्ज किए जाने के बाद उठाया गया था।
इस तरह यह पक्षी विहार उत्तर प्रदेश का 11वां रामसर स्थल बन गया और इसके साथ ही उत्तर प्रदेश का यह छोटा सा जिला पर्यावरण और पर्यटन के वर्ल्ड मैप पर आ गया। इस बारे में विस्तृत जानकारी के लिए आप हाल ही में प्रकाशित हमारी स्टोरी रामसर स्थल 'पटना पक्षी विहार' : उत्तर प्रदेश में प्रकृति का छोटा सा स्वर्ग पढ़ सकते हैं। इसके अलावा अप्रैल में अलीगढ़ के शेखा पक्षी विहार (Shekha Bird Sanctuary) को अंतरराष्ट्रीय रामसर साइट का दर्ज़ा मिल गया। र्द्रभूमि प्राधिकरण द्वारा तैयार की गई रामसर सूचना पत्रक (आरआईएस) के आधार पर यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इसी के तहत रामसर सचिवालय ने शेखा पक्षी विहार को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि घोषित कर दिया है। इसके साथ ही यह उत्तर प्रदेश का 12वां रामसर स्थल बन गया।
आप हाल ही में प्रकाशित हमारी स्टोरी अलीगढ़ का शेखा पक्षी विहार बना अंतरराष्ट्रीय रामसर साइट, यूपी में इको टूरिज़्म को मिलेगा बढ़ावा को पढ़कर इस बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यूपी के इन दो रामसर स्थल के अलावा इस साल (2026) रामसर स्थल का दर्ज़ा प्राप्त करने वाले स्थलों में गुजरात के कच्छ ज़िले में स्थित छारी-ढांड आर्द्रभूमि भी शामिल है, जिसे 31 जनवरी 2026 को रामसर स्थल घोषित किया गया।
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