रेन वाॅटर हार्वेस्टिंग गिरते भूजल को सुधारने का एक सस्ता, व्यावहारिक रगर उपाय है।
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देश की राजधानी नई और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी दिल्ली-एनसीआर में पानी की किल्लत साल दर साल बढ़ती जा रही है। ऐसा इस पूरे क्षेत्र में निजी बोरिंग और सरकारी नलकूपों के जरिये बेतहाशा पानी निकाले जाने के कारण भूजल स्तर में भारी गिरावट आने के कारण हो रहा है। इसे देखते हुए दिल्ली-एनसीआर में ग्राउंड वाटर लेवल को सुधारने के उपायों पर अब काम किया जा रहा है। ऐसी ही एक कोशिश के तहत दिल्ली एनसीआर की औद्योगिक नगरी के रूप में जाने जाने वाले फरीदाबाद में शुरू की गई है। इसके तहत एनआइटी के सेक्टर-52 में वर्षा के पानी को जमा कर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिये सीधा जमीन में भेजा जाएगा। खास बात यह है कि यह इस वर्षा जल संचय के लिए अलग से किसी ज़मीन की जरूरत नहीं होगी, बल्कि सेक्टर-52 के पार्कों में यह प्रणालियां स्थापित करके भूजल स्तर को ऊपर लाने का प्रयास किया जाएगा।
वर्षा के दिनों में लोगों की छतों, खाली जगहों और सड़कों पर काफी पानी जमा होता है। छतोंं पर बारिश का पानी जमा होने से जहां घरों में सीलन की समस्या पैदा होती है, वहीं सड़कों पर जलभराव से आवागमन बाधित होता है। छतों और सड़कों पर जमा होने वाले इस बारिश के पानी को अब पाइपों के माध्यम से पार्कों में लगाए जा रहे रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से जोड़ दिया जाएगा। इस सिस्टम के जरिये वर्षा जल छन कर जमीन के भीतर चला जाएगा। ज़्यादा से ज़्यादा वर्षा जल के संग्रह के लिए यह रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अलग-अलग जगहों पर लगाए जाएंगे।
इसके लिए जरूरी होगा कि छतों और सड़कों से आने वाले पानी की निकासी का सही आकलन करके पाइपों का नेटवर्क तैयार किया जाए। पाइपों के जरिए आने वाले पानी को सीधे जमीन में उतारने से पहले उसमें मौजूद पत्तियों, प्लास्टिक, मिट्टी और अन्य गंदगी को छानने की व्यवस्था भी करनी होगी। इसके लिए फिल्टर चैंबर और गाद जमा होने की जगह बनाई जा सकती है, ताकि रिचार्ज पिट में गंदगी न पहुंचे और सिस्टम लंबे समय तक प्रभावी ढंग से काम करता रहे। मानसून से पहले इन पाइपों और फिल्टर की सफाई भी जरूरी होगी। इस तरह बारिश के पानी को नालियों के जरिये बहकर बर्बाद होने से बचाकर भूजल भंडार को दोबारा भरने में इस्तेमाल किया जा सकेगा। हालांकि, सिस्टम की वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि स्थानीय मिट्टी पानी को कितनी तेजी से सोखती है और बारिश के दौरान कितना पानी इन संरचनाओं तक पहुंच पाता है।
फरीदाबाद का यह रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट ‘एक पंथ दो काज' की कहावत को चरितार्थ करने वाला है। क्योंकि, इससे वर्षा के जल को ज़मीन में भेज कर भूजल स्तर को सुधारने के साथ ही सेक्टर-52 में बारिश के मौसम में होने वाले जल भराव की समस्या का भी समाधान होगा। हर साल मानसून के दौरान शहर के कई पार्कों में जलभराव की समस्या सामने आती है, जिसमें पार्कों में निचले स्थानों पर पानी जमा होने से लोगों को परेशानी होती है। कई दिनों तक बारिश का पानी जमा रहने पर यहां मच्छरों के पनपने से डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। पार्क में आने वाले लोगों को खासकर इन बीमारियों का खतरा रहता है। ऐसे में सेक्टर-52 में प्रस्तावित रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट से वर्षा जल के बेहतर प्रबंधन के साथ ही जलभराव की समस्या का भी समाधान हो जाएगा। हालांकि, हर पार्क में एक जैसी व्यवस्था प्रभावी नहीं होगी। इसके लिए स्थानीय जमीन की बनावट, मिट्टी की जल सोखने की क्षमता, भूजल की गहराई और आसपास के क्षेत्र से आने वाले पानी की मात्रा का अध्ययन जरूरी है। जहां मिट्टी पानी को धीरे सोखती है, वहां केवल गड्ढा बना देना पर्याप्त नहीं होगा। इसी तरह, यदि पार्क में आसपास की सड़कों का गंदा पानी बिना उपचार के पहुंचता है, तो उसे सीधे जमीन में उतारना भूजल की गुणवत्ता के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। इसलिए वर्षा जल संचयन की संरचनाओं में उचित फिल्टर, गाद हटाने और नियमित निरीक्षण की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
बीते दिनों वार्ड-5 के पूर्व पार्षद जयवीर खटाना की ओर से तत्कालीन नगर निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा को भूजल स्तर बढ़ाने को लेकर यह प्रस्ताव सौपा गया था। इस प्रस्ताव को स्वीकृति देते हुए अब इसपर काम शुरू कर दिया गया है। इसके लिए सेक्टर-52 के पार्क में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए नगर निगम की ओर से टेंडर भी निकाल दिया गया है। हालांकि, शहरी स्थानीय निकाय का डब्ल्यूएस पोर्टल बंद होने के चलते इस योजना को तकनीकी रूप से मंजूरी मिलने में कुछ देरी हुई है। पर, अब मंजूरी के बाद निगम की ओर से टेंडर निकाल कर प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया है।
फरीदाबाद के एनआइटी स्थित सेक्टर-52 में प्रस्तावित परियोजना के लिए नगर निगम ने 96 लाख रुपये से अधिक का टेंडर जारी किया है। उपलब्ध टेंडर विवरण के अनुसार, यह काम वार्ड-5 के सेक्टर-52 में पार्कों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने और स्टॉर्म वाटर सिस्टम विकसित करने से संबंधित है। टेंडर 17 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित हुआ और इसके लिए 27 अक्टूबर तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यानी 22 अक्टूबर 2026 की स्थिति में यह परियोजना निविदा प्रक्रिया के चरण में है, इसे पूरा हो चुका काम नहीं माना जाना चाहिए।
ववर्षा जल संचय में बेकार बह जाने वाले बारिश को पानी को पाइपों के जरिये ज़मीन के भीतर पहुंचा कर भूमिगत जल स्रोतों को रिचार्ज किया जाता है।
फरीदाबाद में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए केवल सेक्टर-52 की परियोजना पर ही विचार नहीं हो रहा है। हरियाणा सरकार की ओर से अप्रैल 2026 में घोषित योजना के अनुसार, शहर के 50 सामुदायिक केंद्रों और पार्कों में पहले चरण में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की बात कही गई थी। इसके अलावा सरकारी इमारतों में भी ऐसी प्रणालियां स्थापित करने की योजना घोषित की गई। इन उपायों का उद्देश्य बारिश के पानी को सहेजना, भूजल रिचार्ज को बढ़ावा देना और मानसून के दौरान जलभराव की समस्या को कम करना है।
इस पहल का महत्व इसलिए भी है कि पार्क और सामुदायिक केंद्र जैसे सार्वजनिक स्थान वर्षा जल संचयन के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। यहां जमीन के नीचे रिचार्ज पिट, फिल्टर और जरूरत के अनुसार अन्य संरचनाएं बनाने की संभावना रहती है। यदि आसपास की सड़कों, छतों और पक्के हिस्सों से बहकर आने वाले बारिश के पानी को उचित फिल्टर के बाद इन संरचनाओं तक पहुंचाया जाए, तो उसका एक हिस्सा जमीन में समाया जा सकता है। हालांकि, इस योजना की वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने स्थानों पर काम पूरा होता है, कितनी मात्रा में पानी रिचार्ज होता है और संरचनाओं का नियमित रखरखाव कैसे किया जाता है।
फरीदाबाद में भूजल संकट की गंभीरता का अंदाजा केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) के की वर्ष 2024 की राष्ट्रीय भूजल संसाधन रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। बोर्ड आकलन के अनुसार, जिले में भूजल दोहन का स्तर 180.89 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसका अर्थ है कि सालाना भूजल निकासी, उस वर्ष उपयोग के लिए आंके गए सालाना भूजल संसाधन से काफी अधिक है। दूसरे शब्दों में कहें तो, जिले में भूजल की सालाना उपलब्धता से कहीं ज्यादा पानी निकाला जा रहा है। यह स्थिति भूजल के दीर्घकालिक इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। हालांकि, इस आंकड़े को यह नहीं समझना चाहिए कि जिले का हर हिस्सा एक समान संकट का सामना कर रहा है। अलग-अलग ब्लॉक और स्थानीय जलभृतों (एक्वीफर) की स्थिति में अंतर हो सकता है।
फरीदाबाद जैसे तेजी से शहरीकरण और औद्योगीकरण वाले शहर में घरेलू जरूरतों, उद्योगों और अन्य गतिविधियों के लिए पानी की मांग लगातार बनी रहती है। जब सतही जल स्रोतों से पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाती, तब भूजल पर निर्भरता बढ़ सकती है। दूसरी ओर, कंक्रीट की सड़कें, पक्के फर्श और इमारतें बारिश के पानी को जमीन में समाने से रोकती हैं। नतीजतन, एक तरफ जमीन से पानी निकालने का दबाव बढ़ता है और दूसरी तरफ प्राकृतिक रूप से भूजल भरने की प्रक्रिया बाधित होती है।
दिल्ली में भी भूजल की स्थिति सुधारने के लिए वर्षा जल संचयन और पहले से बने सिस्टम को दुरुस्त करने पर जोर दिया जा रहा है। इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें इस बात को समझा गया है कि जल संकट के समाधान के लिए केवल नए सिस्टम बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बेकार हो चुकी पुरानी संरचनाओं को पुनर्जीवित करना भी जरूरी है । जून 2026 में दिल्ली सरकार ने सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यापक पहल की घोषणा की थी।
इसके पहले चरण में दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को 500 नए वर्षा जल संचयन ढांचे बनाने और 1,000 खराब या काम नहीं कर रहे सिस्टम को दोबारा चालू करने का लक्ष्य दिया गया। इस अभियान में नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड और शिक्षा विभाग समेत विभिन्न सरकारी विभागों की इमारतों को शामिल करने की बात कही गई। साथ ही पुरानी संरचनाओं की सफाई, फिल्टर सामग्री को बदलना, पाइपों के जरिए बारिश के पानी की उचित निकासी और समय-समय पर तकनीकी जांच भी की जरूरत भी जताई गई है। अगर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की सफाई नहीं होती या उनमें गाद भर जाती है, तो वे बारिश के पानी को जमीन तक पहुंचाने में प्रभावी नहीं रह जाते। दिल्ली का यह अभियान एनसीआर के दूसरे शहरों के लिए भी उपयोगी उदाहरण हो सकता है, क्योंकि यहां भी तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्र और पक्की सतहें बारिश के पानी के प्राकृतिक रिसाव को प्रभावित करती हैं।
| स्थान / पहल | घोषित योजना या आंकड़ा | उद्देश्य / स्थिति |
|---|---|---|
| फरीदाबाद, सेक्टर-52 | ₹96 लाख से अधिक की अनुमानित लागत | पार्कों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग और स्टॉर्म वाटर सिस्टम बनाने के लिए टेंडर; 27 अक्टूबर 2026 अंतिम तिथि |
| फरीदाबाद, शहरव्यापी योजना | पहले चरण में 50 पार्कों और सामुदायिक केंद्रों में सिस्टम लगाने की घोषणा | वर्षा जल संचयन और जलभराव की समस्या कम करना |
| दिल्ली, सरकारी भवन | 500 नए सिस्टम और 1,000 पुराने सिस्टम बहाल करने की योजना | बारिश का पानी सहेजना और भूजल रिचार्ज बढ़ाना |
| राष्ट्रीय शहरी अभियान, अमृत 2.0 और कैच द रेन | 79 नगर निगमों में 1,99,278 रिचार्ज संरचनाओं के काम लिए गए; 738 शहरी स्थानीय निकायों में 73,036 संरचनाओं पर काम जारी होने की सूचना | शहरों में भूजल रिचार्ज, जल निकायों का पुनर्जीवन और जल सुरक्षा |
फरीदाबाद की यह पहल देश के शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन और भूजल प्रबंधन को बढ़ावा देने की व्यापक कोशिशों से जुड़ती है। आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की अमृत 2.0 योजना के तहत शहरों में जल निकायों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज जैसे कार्यों पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही जल शक्ति मंत्रालय की ‘जल संचय जन भागीदारी : कैच द रेन’ पहल में कम लागत वाली रिचार्ज संरचनाएं बनाने और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है। मंत्रालय की 13 जुलाई 2026 की जानकारी के अनुसार, देश के करीब 900 शहरी स्थानीय निकायों में कैच द रेन अभियान के तहत गतिविधियां चल रही थीं। इसी जानकारी में 79 नगर निगमों में 1,99,278 रिचार्ज संरचनाओं के कार्य लिए जाने और 738 शहरी स्थानीय निकायों में 73,036 संरचनाओं पर काम किए जाने का उल्लेख है। इन प्रयासों का उद्देश्य केवल बारिश का पानी बहने से रोकना नहीं, बल्कि स्थानीय जल स्रोतों को मजबूत करना और शहरों की जल सुरक्षा बढ़ाना भी है।
भूजल संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार की जल संचय जन भागीदारी पहल भी महत्वपूर्ण है। इसकी शुरुआत 6 सितंबर 2024 को हुई थी। इस अभियान के तहत कम लागत वाले रिचार्ज ढांचे बनाने, वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित करने और खराब पड़े बोरवेल को रिचार्ज के लिए उपयोगी बनाने पर जोर दिया गया। इसके दूसरे चरण में 2025 से भूजल के अत्यधिक दोहन वाले और गंभीर स्थिति वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया।
जल शक्ति मंत्रालय की 3 सितंबर 2026 की जानकारी के अनुसार, देश में इस पहल के तहत 1.58 करोड़ से अधिक कृत्रिम भूजल रिचार्ज संरचनाएं बनाई जा चुकी थीं। जून 2026 में इस पहल का दायरा बढ़ाकर इसे जल शक्ति अभियान : कैच द रेन के साथ एकीकृत किया गया। हालांकि, इन संरचनाओं की संख्या को भूजल स्तर में हुई वृद्धि का सीधा प्रमाण नहीं माना जा सकता। वास्तविक प्रभाव जानने के लिए यह देखना जरूरी है कि संरचनाएं कितनी प्रभावी हैं, उनमें कितना पानी पहुंचता है और उनके आसपास भूजल स्तर में समय के साथ क्या बदलाव आता है।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बेशक भूजल संकट को कम करने का एक महत्वपूर्ण और कारगर उपाय है, लेकिन यह अपने आप में समस्या का स्थायी और पूरा समाधान नहीं है। फरीदाबाद जैसे शहरों में भूजल दोहन का स्तर बहुत अधिक होने पर पानी के प्राकृतिक पुनर्भरण और निकासी के बीच संतुलन बनाना भी जरूरी है। यदि वर्षा जल संचयन के जरिए कुछ मात्रा में पानी जमीन में पहुंचाया जाए, लेकिन दूसरी ओर बोरवेल के जरिए पहले की तरह लगातार पानी निकाला जाता रहे, तो भूजल स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाएगा।
इसके लिए शहर में पानी की मांग और आपूर्ति का आकलन, भूजल निकासी की निगरानी, उपचारित अपशिष्ट जल का गैर-पेय कार्यों में पुनः उपयोग और पार्कों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों में वर्षा जल संचयन को एक साथ आगे बढ़ाना होगा। साथ ही, स्थानीय भूजल स्तर की नियमित निगरानी की जानी चाहिए, ताकि पता चल सके कि रिचार्ज संरचनाओं के आसपास पानी का स्तर वास्तव में सुधर रहा है या नहीं। फरीदाबाद में सेक्टर-52 की परियोजना को भी इसी व्यापक दृष्टिकोण के तहत देखा जाना चाहिए। यदि यह पायलट परियोजना तकनीकी रूप से सफल होती है और इसके परिणामों का व्यवस्थित आकलन किया जाता है, तो फरीदाबाद के अन्य सेक्टरों में भी इसी तरह की व्यवस्था विकसित करने का आधार तैयार हो सकता है। इस तरह पार्क केवल हरियाली और मनोरंजन के स्थान नहीं रहेंगे, बल्कि शहर के जल प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।
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