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अप्रैल माह में भारत के एक दर्जन से अधिक शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार हुआ वहीं मई माह में तापमान और भी अधिक बढ़ने की आशंका है। यानी कि यह साफ है कि आने वाले दो महीनों में देश भर में हीट स्ट्रोक के मामले बढ़ेंगे। अगर बीते दो वर्षों के आंकड़े उठाएं तो देखेंगे कि हर साल भारत में 40 से 50 हजार मामले हीट स्ट्रोक के आते है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर हीट स्ट्रोक क्या होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है?
आगे बढ़ने से पहले इसकी गंभीरता समझने की जरूरत है। जो लोग बिना किसी सुरक्षा के धूप में निकल जाते हैं, यह उनके लिए चेतावनी समान है -
2024 में देश में कुल 110 मौतें हीट स्ट्रोक से हुई थीं।
2025 में 84 लोगों की हीट स्ट्रोक की वजह से जान गई थी।
हर साल देश में 40 से 60 हजार मामले ही स्ट्रोक के आते है।
2026 में 26 अप्रैल को हीट स्ट्रोक के कारण साल की पहली मृत्यु हुई।
तेज़ धूप में निकलने पर जब सीधे सिर पर धूप पड़ती है, तब अचानक से शरीर का तापमान बढ़ जाता है। ऐसे में गला सूखने लगता है, माथा व शरीर के अन्य भाग गर्म हो जाते हैं और व्यक्ति अचानक बेहोश हो जाता है। आम तौर पर हीट स्ट्रोक में शरीर का तापमान 40°C या उससे अधिक हो जाता है। यदि समय रहते इसका इलाज नहीं किया गया तो यह शरीर को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। मौत भी हो सकती है।
हीट स्ट्रोक आम तौर पर ही हीटवेव यानि लू चलने के दौरान ही आता है। इसके लक्षणों को पहचानना जरूरी है, ताकि अगर आपके सामने किसी को हीट स्ट्रोक आये तो आप उसे तुरंत प्राथमिक चिकित्सा मुहैया करा सकें। हीट स्ट्रोक के मुख्य लक्षण निम्न हैं-
शरीर का तापमान अचानक बढ़ जाता है। माथा, हाथ-पैर गर्म हो जाते है।
मानसिक स्थिति बदल जाती है व्यक्ति का व्यवहार अचानक बदल जाता है।
व्यक्ति को कन्फ्यूजन, बेचैनी होने लगती है, त्वचा का रंग बदलने लगता है।
बोलने में लड़खड़ाना, चिड़चिड़ापन, भ्रम की स्थिति पैदा होना, दौरे पड़ना आदि होता है।
हीट स्ट्रोक में त्वचा छूने पर गर्म और सूखी लगती है। ऐसा डी-हाइड्रेजशन की वजह से होता है।
दिल की धड़कन यानि हार्ट रेट बढ़ जाता है। शरीर को ठंडा रखने के लिए दिल तेज़ी से धड़कता है।
सांसें कभी तेज़ और कभी हल्की होने लगती हैं और सिर में तेज़ दर्द होता है।
कई मामलों में जी मिचलाना और उल्टी आना भी देखा गया है।
अधिक लू लगने पर व्यक्ति को अचानक बेहोशी आ जाती है।
हीट स्ट्रोक एक गंभीर चिकित्सकीय स्थिति है, जिसमें व्यक्ति के शरीर का तापमान सामान्य से अधिक होता है। इसमें शरीर का तापमान पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो जाता है। जब किसी व्यक्ति को स्ट्रोक होता है तो -
शरीर के तापमान में अत्यधिक वृद्धि - सबसे पहला और मुख्य कारण, हीट स्ट्रोक के दौरान शरीर का आंतरिक तापमान बहुत तेजी से बढ़कर 40°C या उससे ऊपर चला जाता है। शरीर खुद को ठंडा रखने की क्षमता खो देता है।
शरीर के अंगों पर बुरा प्रभाव - अत्यधिक गर्मी के कारण शरीर के अंग जैसे मस्तिष्क, हृदय, गुर्दे और मांसपेशियां सूजने लगती है। यदि तापमान तुरंत कम न किया जाए, तो ये अंग स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकते है या काम करने में असमर्थ हो सकते है।
हाइपोवॉलेमिक शॉक का खतरा - तरल पदार्थों की भारी कमी से रक्तचाप (Blood Pressure) गिर सकता है, जिससे व्यक्ति शॉक में जा सकता है।
मस्तिष्क पर असर - इसमें भ्रम की स्थिति, बोलने में लड़खड़ाहट, अत्यधिक चिड़चिड़ापन, दौरा पड़ना या बेहोश हो जाना जैसे लक्षण दिखते है।
त्वचा का स्वरूप - इसमें त्वचा लाल, गर्म और पूरी तरह सूखी हो जाती है और पसीना आना बंद हो जाता है।
दिल की धड़कन - शरीर को ठंडा करने की कोशिश में दिल बहुत तेजी से धड़कने लगता है, जिससे हृदय पर दबाव बढ़ जाता है। इसके अलावा तेज सिरदर्द, जी मिचलाना और उल्टी लगातार होते रहती है।
हीट स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है, इसके लिए तुरंत चिकित्सालय जाने की जरुरत होती है, लेकिन उससे पहले निम्न उपाय किये जा सकते है।
कोशिश करे की व्यक्ति को धूप से हटाकर तुरंत किसी ठंडी जगह, छांव या एयर-कंडीशनर कमरे में ले जाएं।
शरीर से कपड़े हटा दें ताकि त्वचा को हवा लग सके।
व्यक्ति के शरीर पर ठंडा पानी छिड़कें या गिला कपडा पूरे शरीर को लपेट दें।
यदि संभव हो, तो बर्फ की पोटली को व्यक्ति की गर्दन, कांख और कमर के पास रखें। इन हिस्सों में रक्त वाहिकाएं त्वचा के करीब होती है, जिससे शरीर जल्दी ठंडा होता है।
यदि व्यक्ति पूरी तरह होश में है, तो उसे धीरे-धीरे ठंडा पानी, ORS, नींबू पानी या नारियल पानी पिलाएं।
यदि व्यक्ति बेहोश है या उसे उल्टी हो रही है, तो उसे कुछ भी पिलाने की कोशिश न करें, क्योंकि यह उसके फेफड़ों में जा सकता है।
प्यास लगने का इंतज़ार न करें, दिन भर भरपूर पानी पीते रहें। घर से बाहर निकलने से पहले या धूप से आने के बाद नींबू पानी, नारियल पानी, ओआरएस (ORS), ताजा फलों का रस लें।
हल्के रंग के, ढीले-ढाले और सूती कपड़े पहनें, बाहर निकलते समय टोपी, चश्मा और छाते का प्रयोग करें। अपने सिर और गर्दन को गीले या सूखे सूती कपड़े से ढककर रखें।
दोपहर 12:00 बजे से 4:00 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें।
एक बार में भारी भोजन करने के बजाय छोटे-छोटे अंतरालों पर हल्का और ताजा भोजन करें।
रोजाना अपनी डाइट में दो मौसमी फल और हरी सब्जी को शामिल करें।
यह तो हीट स्ट्रोक से बचने की कुछ टिप्स थीं, विस्तार से पढने के लिए यहां क्लिक करें।
हीट स्ट्रोक से बचने के लिए पारंपरिक भारतीय पेय पदार्थों को अपनाया जा सकता है , जिसमें -
आम पन्ना - कच्चे आम से बना यह पेय विटामिन-सी से भरपूर होता है और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बनाए रखता है, जो लू से बचाने में सबसे प्रभावी है।
बेल का शरबत - बेल का फल फाइबर और शीतलता प्रदान करने वाले गुणों से भरपूर होता है। यह पेट को ठंडा रखता है और पाचन तंत्र को गर्मी से बचाता है।
सत्तू का शरबत - भुने हुए चने के आटे (सत्तू) से बना यह पेय देसी प्रोटीन शेक कहलाता है। यह न केवल शरीर को हाइड्रेटेड रखता है बल्कि तुरंत ऊर्जा भी देता है।
छाछ - पुदीना और भुने हुए जीरे के साथ छाछ का सेवन शरीर की गर्मी को शांत करता है और प्रोबायोटिक्स के कारण प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है।
नींबू पानी - पानी, नमक और नींबू का मिश्रण शरीर में सोडियम और पोटेशियम के स्तर को बनाए रखता है, जिससे डिहाइड्रेशन नहीं होता।
जौ का पानी - जौ का पानी शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है और शरीर के आंतरिक तापमान को कम रखने में सहायक होता है।
नारियल पानी - यह प्राकृतिक रूप से इलेक्ट्रोलाइट्स और पोटेशियम का सबसे अच्छा स्रोत है, जो गर्मी में शरीर की तरल कमी को तुरंत पूरा करता है।
पुदीने का अर्क - पानी में पुदीने की पत्तियां मिलाकर पीने से शरीर को ताजगी मिलती है।
तरबूज और खीरा - इन फलों में 90% से अधिक पानी होता है। इसका सेवन शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने और पानी की कमी को रोकने का बेहतरीन तरीका है।
सौंफ का शरबत - सौंफ की तासीर बहुत ठंडी होती है। इसे पानी में भिगोकर या शरबत के रूप में लेने से शरीर में जलन और गर्मी से राहत मिलती है।
गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए और भी खाने पीने की चीजें हैं जो आप यहां क्लिक करके स्तार से पढ़ सकते हैं।
अपने घर को गर्मी से बचने के लिए कुछ तकनीक को अपनाया जा सकता है जिनमें -
कुल रूफटॉप तकनीक
बजरी और टार का इस्तेमाल
छत पर बागवानी
छत को ठंडा रखने वाला पेंट
घर के अंदर हवा के बहाव को बेहतर बनाएं। शाम के समय खिड़कियां खोलने से अंदर की गर्म हवा बाहर निकल जाती है और ताजी हवा कमरे के तापमान को संतुलित करती है।
खिड़कियों पर खस (Vetiver) के परदे लगाकर दोपहर की तीखी धूप को घर के अंदर आने से रोकें। खस के परदों को गीला रखने से घर में ठंडी हवा का संचार होता है।
छत पर सफेद चूने (Lime wash) की परत चढ़ाने से छत ठंडी रहती है और कम लागत में कूल रूफ जैसा लाभ मिलता है।
ये कुछ उपाए हैं जो आपको गर्मी से बचा सकते हैं, लेकिन अगर आप विस्तार से पढ़ना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें।
भारत में बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण हीट वेव एक गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरणीय चुनौती बन गया है। भारत में हीट वेव का स्वरूप पिछले 2 दशकों से बदला है। एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार केवल तापमान में वृद्धि नहीं हुई है, बल्कि तापमान भी तेजी से बदला है। हीट वेव की आवृत्ति, तीव्रता और अवधि में भी अभूतपूर्व बदलाव हुआ है।
भारत में हीटवेव का बदलता स्वरूप-
समय से पहले शुरुआत - वर्तमान समय में हीट वेव केवल मई जून तक सीमित नहीं है, बल्कि गर्मी के शुरुआती दिनों मार्च और अप्रैल में रिकॉर्ड तोड़ तापमान दर्ज कि जा रहा है। जिसे अर्ली हीट वेव कहा जाता है।
क्षेत्रीय विस्तार - पहले हीट वेव का विस्तार उत्तर- पश्चिम तक सीमित था, लेकिन अब तटीय क्षेत्रो और दक्षिण भारत में भी आर्द्र ऊष्मा का प्रकोप बढ़ा है। जो सूखे की तुलना में अधिक जानलेवा है।
रात का बढ़ता तापमान - शहरी क्षेत्रों में अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव के कारण रातें भी ठंडी नहीं हो पा रही हैं, जिससे मानव शरीर को गर्मी से उबरने का समय नहीं मिल पाता है।
उत्तर भारत में हीट वेव का प्रभाव भौगोलिक और वायुमंडलीय कारणों से होता है, मौसम विभाग के अनुसार इसके निम्न कारण हो सकते है -
भौगोलिक स्थिति के आधार पर - उत्तर भारत समुद्र से काफी दूर है, जिससे यहां तटीय क्षेत्रों की तरह समुद्र का ठंडा प्रभाव नहीं पहुंच पाता। यहाँ की हवा में नमी कम और शुष्कता अधिक होती है।
मरुस्थल- थार मरुस्थल और पाकिस्तान के गर्म रेतीले इलाकों से आने वाली गर्म शुष्क हवाएं मैदानी इलाकों के तापमान को तेजी से बढ़ाती है।
एंटी-साइक्लोनिक प्रेशर- वायुमंडल में उच्च दबाव की स्थिति गर्म हवा को जमीन के पास दबा देती है, जिससे ऊष्मा बाहर नहीं निकल पाती और हीट ट्रैप बन जाता है।
शहरीकरण - कंक्रीट के बढ़ते विस्तार के कारण अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव बढ़ रहा है, जो ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरों को अधिक गर्म बना रहा है।
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