बाणासुर सागर बांध करमनाथोडु नदी पर बनाया गया है, जो कबिनी नदी की एक सहायक नदी है।
फोटो: अजय मोहन
केरलम में 44 नदियां हैं। इनमें 41 पश्चिम की ओर और तीन पूर्व की ओर बहती हैं।
पेरियार, भरतपुझा, पंबा और चालियार राज्य की चार मध्यम श्रेणी की नदियां हैं। राष्ट्रीय मानक के अनुसार केरलम में कोई बड़ी नदी नहीं है।
भारी मानसूनी बारिश के बावजूद गर्मियों में पानी की कमी, नदी प्रदूषण, खारे पानी का प्रवेश और बाढ़ राज्य की प्रमुख जल चुनौतियां हैं।
केरलम की नदियों को पश्चिमी घाट, बांधों, भूजल, बैकवाटर, आर्द्रभूमि और समुद्र से जोड़कर देखना जरूरी है।
केरलम में बारिश भरपूर होती है। पश्चिमी घाट से निकलने वाली अनेक नदियां, झीलें, बैकवाटर और आर्द्रभूमियां राज्य की जल व्यवस्था का आधार हैं। इसके बावजूद यहां पानी की स्थिति हर मौसम और हर इलाके में एक जैसी नहीं रहती। मानसून में कुछ नदी घाटियों में बाढ़ आती है, जबकि गर्मियों में कई जगह पानी की कमी और खारे पानी के प्रवेश की समस्या सामने आती है।
केरलम की नदियां दूसरे राज्यों की कई बड़ी नदियों की तुलना में छोटी हैं। उनका बहाव तेज है और समुद्र तक की दूरी भी कम है। इसलिए भारी बारिश होने या बांधों से पानी छोड़े जाने पर निचले इलाकों में जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। नदी में जमा तलछट और तटीय जल की स्थिति भी इसके बहाव को प्रभावित करती है।
केरलम वन विभाग के अनुसार राज्य में 44 नदियां हैं। इनमें 41 पश्चिम की ओर बहकर लक्षद्वीप सागर में मिलती हैं। कबानी, भवानी और पांबर नाम की तीन नदियां पूर्व की ओर बहती हैं और कावेरी नदी तंत्र से जुड़ती हैं।
राष्ट्रीय वर्गीकरण के अनुसार केरलम में कोई बड़ी नदी नहीं है। पेरियार, भरतपुझा, पंबा और चालियार को मध्यम श्रेणी में रखा गया है। बाकी नदियां छोटी हैं। ज्यादातर नदियों का उद्गम पश्चिमी घाट में है। ऊंचाई वाले इलाकों में ये नदियां तेज ढाल से बहती हैं। मैदानी और तटीय इलाकों में पहुंचकर कई नदियां बैकवाटर और झीलों से जुड़ती हुई समुद्र तक पहुंचती हैं।
| बेसिन का आकार | प्रमुख नदी बेसिन |
|---|---|
| 1,000 वर्ग किमी से अधिक | भरतपुझा, मुवाट्टुपुझा, पेरियार, वलपट्टनम, चालियार, करुवन्नूर, चालक्कुडी, मीनाचिल, पंबा, अचनकोविल, कल्लडा और कबानी |
| 500–1,000 वर्ग किमी | कुट्टियाडी, मणिमाला, इथिक्करा, वामनपुरम, करमना और भवानी |
| 100–500 वर्ग किमी | शिरिया, मोग्राल, चित्तारी, नीलेश्वरम, कव्वायी, पेरुवंबा, थलास्सेरी, माहे, तिरूर, कीचेरी, पुझक्कल, पल्लीक्कल, पांबर सहित अन्य मध्यम आकार के बेसिन |
| 100 वर्ग किमी से छोटे बेसिन | मंजेश्वरम, उप्पला, रामपुरम, कल्लायी, अयिरूर सहित छोटे तटीय बेसिन |
जिस पूरे इलाके का बारिश का पानी बहकर किसी मुख्य नदी और उसकी सहायक धाराओं में पहुंचता है, उसे नदी बेसिन कहा जाता है। केरलम में बेसिनों का आकार अपेक्षाकृत छोटा है, लेकिन घनी आबादी, खेती, पहाड़ी ढाल और तटीय भूगोल के कारण उनका महत्व बहुत अधिक है।
| नदी | उद्गम स्थल | अनुमानित लंबाई | केरल के प्रमुख क्षेत्र/जिले | कहाँ मिलती है |
|---|---|---|---|---|
| मंजेश्वरम | बालेपुनी पहाड़ियां, केरल-कर्नाटक सीमा | 16 किमी | कासरगोड | उप्पला कायल/अरब सागर |
| उप्पला | वीरकंबा पहाड़ियां, कर्नाटक | 50 किमी | कासरगोड | अरब सागर |
| शिरिया | अनेगुंडी रिजर्व फॉरेस्ट, कर्नाटक | 67 किमी | कासरगोड | अरब सागर |
| मोग्राल | करडका क्षेत्र की पहाड़ियां, कासरगोड | 34 किमी | कासरगोड | अरब सागर |
| चंद्रगिरि | पश्चिमी घाट, कर्नाटक | 105 किमी | कासरगोड | अरब सागर |
| चित्तारी | इरिया क्षेत्र, कासरगोड | 25 किमी | कासरगोड | अरब सागर |
| नीलेश्वरम | पश्चिमी घाट की पहाड़ियां | 46 किमी | कासरगोड | अरब सागर |
| करियांगोड | पश्चिमी घाट/कोडगु क्षेत्र, कर्नाटक | 64 किमी | कासरगोड, कन्नूर | अरब सागर |
| कव्वायी | चीमेनी क्षेत्र की पहाड़ियां | 31 किमी | कासरगोड, कन्नूर | कव्वायी बैकवाटर |
| पेरुवंबा | पेकुन्नु वन क्षेत्र | 51 किमी | कासरगोड, कन्नूर | अरब सागर |
| रामपुरम | परियारम पहाड़ियां | 19 किमी | कन्नूर | अरब सागर |
| कुप्पम | पश्चिमी घाट, कर्नाटक | 82 किमी | कन्नूर | वलपट्टनम नदी/अरब सागर |
| वलपट्टनम | पश्चिमी घाट, कर्नाटक | 110 किमी | कन्नूर | अरब सागर |
| अंजारकंडी | पश्चिमी घाट की तलहटी | 48 किमी | कन्नूर | अरब सागर |
| थलास्सेरी | कन्नूर की पहाड़ियां | 28 किमी | कन्नूर | अरब सागर |
| माहे | पश्चिमी घाट | 54 किमी | कन्नूर, कोझिकोड | अरब सागर |
| कुट्टियाडी | पश्चिमी घाट | 74 किमी | कोझिकोड | अरब सागर |
| कोरापुझा | अगलापुझा और पूनूरपुझा जलधाराओं का तंत्र | 40 किमी | कोझिकोड | अरब सागर |
| कल्लायी | चेरुकुलत्तूर क्षेत्र | 22 किमी | कोझिकोड | अरब सागर |
| चालियार | पश्चिमी घाट/नीलगिरि क्षेत्र | 169 किमी | वायनाड, मलप्पुरम, कोझिकोड | अरब सागर |
| कदलुंडी | पश्चिमी घाट | 130 किमी | मलप्पुरम | अरब सागर |
| तिरूर | मलप्पुरम का पहाड़ी क्षेत्र | 48 किमी | मलप्पुरम | अरब सागर |
| भरतपुझा | पश्चिमी घाट, तमिलनाडु-केरल क्षेत्र | 209 किमी | पालक्काड, त्रिशूर, मलप्पुरम | अरब सागर |
| कीचेरी | मचाड पहाड़ियां | 51 किमी | त्रिशूर | अरब सागर |
| पुझक्कल | त्रिशूर का पहाड़ी क्षेत्र | 29 किमी | त्रिशूर | अरब सागर |
| करुवन्नूर | मनाली और कुरुमाली नदी तंत्र | 48 किमी | त्रिशूर | अरब सागर |
| चालक्कुडी | अनामलाई क्षेत्र, पश्चिमी घाट | 130 किमी | पालक्काड, त्रिशूर, एर्नाकुलम | पेरियार/अरब सागर तंत्र |
| पेरियार | शिवगिरि पहाड़ियां, पश्चिमी घाट | 244 किमी | इडुक्की, एर्नाकुलम | अरब सागर |
| मुवाट्टुपुझा | थोडुपुझा, कोठमंगलम और कलियार नदी तंत्र | 121 किमी | इडुक्की क्षेत्र, एर्नाकुलम, कोट्टायम | वेम्बनाड झील |
| मीनाचिल | पश्चिमी घाट | 78 किमी | कोट्टायम | वेम्बनाड झील |
| मणिमाला | पश्चिमी घाट | 90 किमी | कोट्टायम, पथानमथिट्टा | वेम्बनाड-कुट्टनाड जल तंत्र |
| पंबा | पुलाचीमलाई पहाड़ियां, पश्चिमी घाट | 176 किमी | इडुक्की, पथानमथिट्टा, अलप्पुझा | वेम्बनाड झील |
| अचनकोविल | पश्चिमी घाट | 128 किमी | पथानमथिट्टा, कोल्लम, अलप्पुझा | पंबा/कुट्टनाड जल तंत्र |
| पल्लीक्कल | पश्चिमी घाट की तलहटी | 42 किमी | पथानमथिट्टा, कोल्लम | अरब सागर |
| कल्लडा | पश्चिमी घाट | 121 किमी | पथानमथिट्टा, कोल्लम, तिरुवनंतपुरम क्षेत्र | अष्टमुडी झील |
| इथिक्करा | पश्चिमी घाट की तलहटी | 56 किमी | कोल्लम, तिरुवनंतपुरम | अरब सागर |
| अयिरूर | दक्षिणी केरल की पहाड़ियां | 17 किमी | तिरुवनंतपुरम, कोल्लम | अरब सागर |
| वामनपुरम | पश्चिमी घाट | 88 किमी | तिरुवनंतपुरम, कोल्लम | अरब सागर |
| मामोम | तिरुवनंतपुरम का पहाड़ी क्षेत्र | 27 किमी | तिरुवनंतपुरम, कोल्लम | अरब सागर |
| करमना | अगसत्यमलाई क्षेत्र, पश्चिमी घाट | 68 किमी | तिरुवनंतपुरम | अरब सागर |
| नेय्यार | अगसत्यमलाई क्षेत्र, पश्चिमी घाट | 56 किमी | तिरुवनंतपुरम | अरब सागर |
| कबानी (कबिनी) | वायनाड की पहाड़ियां/पश्चिमी घाट | 56.6 किमी (केरल में) | वायनाड | कावेरी नदी |
| भवानी | नीलगिरि-पश्चिमी घाट क्षेत्र | 37.5 किमी (केरल में) | पालक्काड | कावेरी नदी |
| पांबर | इडुक्की के पश्चिमी घाट | 25 किमी (केरल में) | इडुक्की | अमरावती → कावेरी नदी |
पेरियार केरलम की सबसे लंबी नदी है। इसका जलग्रहण क्षेत्र पश्चिमी घाट से इडुक्की और एर्नाकुलम के कई इलाकों तक फैला है। नदी और इसकी परियोजनाएं जलविद्युत, सिंचाई और पेयजल आपूर्ति में भूमिका निभाती हैं। पेरियार के निचले हिस्से में औद्योगिक और शहरी गतिविधियों के कारण पानी की गुणवत्ता भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
भरतपुझा को नीला नदी भी कहा जाता है। यह पालक्काड दर्रे और दक्षिण मालाबार के कई क्षेत्रों से होकर अरब सागर में मिलती है। नदी और इसकी सहायक धाराएं खेती, सिंचाई और स्थानीय जल स्रोतों से जुड़ी हैं। इस बेसिन में मालमपुझा, वालायर, मंगलम और पोथुंडी जैसी सिंचाई परियोजनाएं हैं।
पंबा पश्चिमी घाट से निकलकर निचले इलाकों में पहुंचती है और कुट्टनाड-वेम्बनाड जल तंत्र से जुड़ती है। इसका धार्मिक महत्व भी है, क्योंकि सबरीमला यात्रा पंबा से जुड़ी है। निचले इलाकों में पंबा का पानी खेतों, नहरों, बैकवाटर और आर्द्रभूमियों तक पहुंचता है। इसलिए कुट्टनाड की खेती और जल प्रबंधन में इस नदी की अहम भूमिका है।
चालियार 169 किलोमीटर लंबी नदी है। यह पश्चिमी घाट से निकलकर मलप्पुरम और कोझिकोड क्षेत्र की ओर बहती है। नदी स्थानीय जल जरूरतों, खेती और तटीय पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण है।
केरलम की नदी व्यवस्था को समझने में वेम्बनाड झील और उसका जलग्रहण क्षेत्र खास महत्व रखते हैं। पंबा, मीनाचिल, मणिमाला, अचनकोविल और मुवाट्टुपुझा जैसी नदियां इस बड़े जल तंत्र से जुड़ी हैं। केंद्रीय जल आयोग की 2018 की केरलम बाढ़ रिपोर्ट में वेम्बनाड झील में दस नदियों से पानी पहुंचने का उल्लेख है।
केरलम की करमनाथोडु नदी
इसलिए इन नदियों को केवल अलग-अलग जलधाराओं के रूप में नहीं देखा जा सकता। ऊपरी इलाकों में भारी बारिश, भूस्खलन, बांधों से छोड़ा गया पानी और नदी में बढ़ी तलछट का असर नीचे कुट्टनाड और वेम्बनाड तक पहुंच सकता है। निचले इलाकों से पानी कितनी तेजी से निकल पाएगा, यह समुद्र के जलस्तर और निकासी की स्थिति पर भी निर्भर करता है।
केरलम की सभी छोटी नदियां किसी बड़ी नदी की सहायक नदी नहीं हैं। इनमें से कई का अपना अलग जलग्रहण क्षेत्र है और वे सीधे बैकवाटर या समुद्र में मिलती हैं। इसलिए नीचे केवल प्रमुख नदी प्रणालियों से जुड़ी चुनिंदा सहायक नदियां दी गई हैं।
| मुख्य नदी | प्रमुख सहायक नदियां/जलधाराएं | प्रमुख जिला/क्षेत्र | किस नदी/जल तंत्र का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| मंजेश्वरम | पावुरी (Pavuri) | कासरगोड | मंजेश्वरम नदी तंत्र |
| उप्पला | उप्पला (Uppala) | कासरगोड | उप्पला नदी तंत्र |
| शिरिया | कल्लाजेथोडु, कन्यनथोडु, एरामट्टीहोले, कुंबला | कासरगोड | शिरिया नदी तंत्र |
| मोग्राल | बेट्टीपाडी, मुलियार | कासरगोड | मोग्राल नदी तंत्र |
| चंद्रगिरि | पयस्विनी, चंद्रगिरि | कासरगोड | चंद्रगिरि नदी तंत्र |
| चित्तारी | कलनाड, बेकल, चित्तारी | कासरगोड | चित्तारी नदी तंत्र |
| नीलेश्वरम | आर्यंगल थोडु, बैगोटे होले | कासरगोड | नीलेश्वरम नदी तंत्र |
| करियांगोड | मुंडोर, पडियामाला होले, अरियाकडवु होले | कासरगोड, कन्नूर | करियांगोड नदी तंत्र |
| कव्वायी | आधिकारिक तालिका में उल्लेख नहीं | कासरगोड, कन्नूर | कव्वायी नदी तंत्र |
| पेरुवंबा | मचरुथोडे, मथामंगलम, चालाचल, मुक्कुट्टेनकराचल, नितारिंगापुझा | कासरगोड, कन्नूर | पेरुवंबा नदी तंत्र |
| रामपुरम | आधिकारिक तालिका में उल्लेख नहीं | कन्नूर | रामपुरम नदी तंत्र |
| कुप्पम | पक्कट्टुपोया, अलाकुट्टाथोडे, कुट्टिकोलपुझा, मुक्कुट्टाथोडु, चिरियाथोडु | कन्नूर | कुप्पम नदी तंत्र |
| वलपट्टनम | श्रीकंदापुरम, वलियापुझा, वेनिपुझा, अरालमपुझा | कन्नूर | वलपट्टनम नदी तंत्र |
| अंजारकंडी | कप्पुथोडु, इडुंबाथोडु | कन्नूर | अंजारकंडी नदी तंत्र |
| थलास्सेरी | धर्मदामपुझा | कन्नूर | थलास्सेरी नदी तंत्र |
| माहे | आधिकारिक तालिका में उल्लेख नहीं | कन्नूर, कोझिकोड | माहे नदी तंत्र |
| कुट्टियाडी | ओनिपुझा, थोट्टिलपालमपुझा, कडियांगाडुपुझा, मनथिलपुझा, मडप्पल्लीपुझा | कोझिकोड | कुट्टियाडी नदी तंत्र |
| कोरापुझा | अगलापुझा, पन्नूरपुझा | कोझिकोड | कोरापुझा नदी तंत्र |
| कल्लायी | आधिकारिक तालिका में उल्लेख नहीं | कोझिकोड | कल्लायी नदी तंत्र |
| चालियार | चालिपुझा, पुन्नापुझा, करिमपुझा, चेरुपुझा, कांजिरापुझा, कुरुंबनपुझा, वडापुरमपुझा, इरुथिल्लीपुझा | कोझिकोड, मलप्पुरम, वायनाड | चालियार नदी तंत्र |
| कदलुंडी | ओलिपुझा, वेलियार | मलप्पुरम | कदलुंडी नदी तंत्र |
| तिरूर | वल्लिलापुझा | मलप्पुरम | तिरूर नदी तंत्र |
| भरतपुझा | गायत्रीपुझा, चित्तूरपुझा, कलपथिपुझा, थूथापुझा | मलप्पुरम, त्रिशूर, पालक्काड | भरतपुझा नदी तंत्र |
| कीचेरी | चुंडलथोडु | त्रिशूर | कीचेरी नदी तंत्र |
| पुझक्कल | पराथोडु, पूमलाथोडु, नडुथोडु, कट्टाचिराथोडु | त्रिशूर | पुझक्कल नदी तंत्र |
| करुवन्नूर | मनाली, कुरुमाली, चिमोनी, मुप्पिली | त्रिशूर | करुवन्नूर नदी तंत्र |
| चालक्कुडी | परंबिकुलम, कुरियारकुट्टी, शोलयार, कराप्पारा, अनाकायम | त्रिशूर, पालक्काड, एर्नाकुलम | चालक्कुडी नदी तंत्र |
| पेरियार | मुथिरापुझा, पेरिंजाकुट्टी, इडमलयार, मंगलापुझा | इडुक्की, एर्नाकुलम | पेरियार नदी तंत्र |
| मुवाट्टुपुझा | कलियार, थोडुपुझा, कोठमंगलम | एर्नाकुलम, कोट्टायम | मुवाट्टुपुझा नदी तंत्र |
| मीनाचिल | कडापुझा, मिनाडामार, कलाथुकडवु | कोट्टायम | मीनाचिल नदी तंत्र |
| मणिमाला | कोकयार, एलक्कलथोडु | कोट्टायम, पथानमथिट्टा | मणिमाला नदी तंत्र |
| पंबा | कक्कियार, अरुदई, कक्काडार, कल्लार, पंबी, पंबियार | पथानमथिट्टा, इडुक्की, अलप्पुझा | पंबा नदी तंत्र |
| अचनकोविल | आधिकारिक तालिका में उल्लेख नहीं | पथानमथिट्टा, कोल्लम, अलप्पुझा | अचनकोविल नदी तंत्र |
| पल्लीक्कल | आधिकारिक तालिका में उल्लेख नहीं | पथानमथिट्टा, कोल्लम | पल्लीक्कल नदी तंत्र |
| कल्लडा | कुलथुपुझा, चेंदुरुनी, कल्थुरुथी | पथानमथिट्टा, कोल्लम, तिरुवनंतपुरम | कल्लडा नदी तंत्र |
| इथिक्करा | वट्टापरंबु, कुडुमनथोडु, वट्टमथोडु, कुलंजेथोडु | कोल्लम, तिरुवनंतपुरम | इथिक्करा नदी तंत्र |
| अयिरूर | आधिकारिक तालिका में उल्लेख नहीं | तिरुवनंतपुरम, कोल्लम | अयिरूर नदी तंत्र |
| वामनपुरम | आधिकारिक तालिका में उल्लेख नहीं | तिरुवनंतपुरम, कोल्लम | वामनपुरम नदी तंत्र |
| मामोम | आधिकारिक तालिका में उल्लेख नहीं | तिरुवनंतपुरम, कोल्लम | मामोम नदी तंत्र |
| करमना | कवियार, अट्टैयार, वैयापादिर, टोडियार | तिरुवनंतपुरम | करमना नदी तंत्र |
| नेय्यार | कल्लार, करवालियार | तिरुवनंतपुरम | नेय्यार नदी तंत्र |
| कबानी (कबिनी) | मानंतवाडी, पनामरम, बावेलिपुझा, नूलपुझा | वायनाड | कावेरी नदी तंत्र |
| भवानी | सिरुवानी, वरयार | पालक्काड | कावेरी नदी तंत्र |
| पांबर | इराविकुलम, मायलाडी, तीर्थमाला, चेंगलार | इडुक्की | कावेरी नदी तंत्र |
केरलम की नदियां खेती, पेयजल, सिंचाई, जलविद्युत, मत्स्य संसाधन और स्थानीय आजीविका से जुड़ी हैं। पेरियार पर जलविद्युत और सिंचाई परियोजनाएं हैं। भरतपुझा पालक्काड और मलप्पुरम के कृषि क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि पंबा और उससे जुड़ी नदियां कुट्टनाड की खेती और जल निकासी व्यवस्था से जुड़ी हैं।
नदियों का संबंध बैकवाटर और अंतर्देशीय जल परिवहन से भी है। केरलम आर्थिक समीक्षा 2017 के अनुसार राज्य की नदियां, झीलें, मुहाने और बैकवाटर अंतर्देशीय जल परिवहन का आधार हैं।
| क्षेत्र | नदियों की भूमिका | प्रमुख उदाहरण |
|---|---|---|
| पेयजल | शहरों, कस्बों और गांवों की जलापूर्ति | पेरियार और मुवाट्टुपुझा से कोच्चि क्षेत्र की जलापूर्ति, अन्य नदियों से स्थानीय जलापूर्ति |
| खेती और सिंचाई | खेतों तक पानी पहुंचाना और कृषि के लिए जल उपलब्ध कराना | पेरियार और भरतपुझा बेसिन की सिंचाई परियोजनाएं, पंबा-कुट्टनाड की खेती |
| जलविद्युत | ऊंचाई और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में बिजली उत्पादन | पेरियार बेसिन का इडुक्की जलाशय तंत्र और अन्य जलविद्युत परियोजनाएं |
| मत्स्य पालन | नदियों, जलाशयों, मुहानों और खारे-मीठे पानी के क्षेत्रों में मत्स्य संसाधन | वेम्बनाड, अष्टमुडी, नदियां और जलाशय |
| आजीविका | मछली पालन, खेती, नाव संचालन और पानी से जुड़ी दूसरी गतिविधियों से रोजगार | कुट्टनाड, बैकवाटर और नदी-तटीय बस्तियां |
| अंतर्देशीय परिवहन | नदियों, नहरों और बैकवाटर के रास्ते लोगों और सामान की आवाजाही | वेम्बनाड और उससे जुड़ी नहरें तथा पश्चिमी तट की जलमार्ग प्रणाली |
| पर्यटन | नौका विहार, बैकवाटर और नदी-आधारित पर्यटन | अलप्पुझा, कुमारकोम, वेम्बनाड और अष्टमुडी |
| धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन | तीर्थ, धार्मिक परंपराओं और स्थानीय सांस्कृतिक जीवन से संबंध | पंबा और सबरीमला, भरतपुझा/नीला की सांस्कृतिक परंपरा |
| बाढ़ और जल निकासी | मानसूनी पानी को ऊपरी क्षेत्रों से निचले इलाकों, बैकवाटर और समुद्र की ओर ले जाना | पंबा, मीनाचिल, मणिमाला और अचनकोविल से जुड़ा वेम्बनाड-कुट्टनाड तंत्र |
| पारिस्थितिकी | जलीय जीवों, आर्द्रभूमियों और नदी-मुहानों के लिए आवास और मीठे पानी का स्रोत | वेम्बनाड-कोल, अष्टमुडी और अन्य नदी-बैकवाटर तंत्र |
केरलम में मानसून के दौरान कम समय में बहुत अधिक बारिश हो सकती है। ऐसे में बाढ़ का खतरा केवल बारिश की मात्रा से तय नहीं होता। जलाशयों और नदियों में पहले से कितना पानी है और निचले इलाकों से पानी कितनी तेजी से निकल सकता है, यह भी महत्वपूर्ण है। 2018 की बाढ़ के बाद जलाशय संचालन, बाढ़ पूर्वानुमान और नदी बेसिन स्तर पर योजना पर अधिक ध्यान दिया गया।
केरलम आर्थिक समीक्षा 2025 के अनुसार पेरियार, मणिमाला, चालकुडी, पंबा और अचनकोविल बेसिनों को बाढ़ पूर्व चेतावनी व्यवस्था के शुरुआती चरण के लिए चुना गया। पेरियार और चालकुडी में यह व्यवस्था राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना (National Hydrology Project) के तहत स्थापित की जा चुकी है।
अधिक बारिश होने का अर्थ यह नहीं है कि पानी पूरे साल समान रूप से उपलब्ध रहेगा। केरलम की कई नदियां छोटी हैं और उनकी ढाल तेज है। मानसून में मिलने वाले पानी का बड़ा हिस्सा नदियों के जरिए तेजी से निचले इलाकों और समुद्र की ओर बह जाता है। इस कारण बारिश के कुछ महीने बाद कई जगह नदी प्रवाह और स्थानीय जल स्रोतों में पानी कम हो सकता है।
केरलम राज्य योजना बोर्ड भी भारी बारिश के बावजूद राज्य में गर्मियों के दौरान पानी की कमी की समस्या का उल्लेख करता है। मीनाचिल बेसिन के बारे में केरलम सिंचाई विभाग ने गर्मियों में जल की कमी और खारे पानी के प्रवेश, दोनों को चुनौती माना है।
सीवेज, शहरी कचरा, औद्योगिक गतिविधियां और दूसरी मानवीय गतिविधियां कई नदी-खंडों की जल गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी नदी प्रदूषित है। निगरानी में जिन हिस्सों में प्रदूषण मिलता है, उन्हें ‘प्रदूषित नदी-खंड’ के रूप में दर्ज किया जाता है।
केरलम आर्थिक समीक्षा 2024 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 2022 की सूची के आधार पर राज्य में 18 प्रदूषित नदी-खंड दर्ज हैं। इनमें करमना, नेय्यार, वामनपुरम, पंबा, मणिमाला, पेरियार, चालकुडी और कदलुंडी सहित अन्य नदी-खंड शामिल हैं। उस सूची में केरलम का कोई नदी-खंड सबसे गंभीर प्राथमिकता श्रेणी–I (Priority I) या प्राथमिकता श्रेणी–II (Priority II) में नहीं था। करमना का संबंधित हिस्सा Priority III में, नेय्यार और वामनपुरम के हिस्से Priority IV में और बाकी दर्ज हिस्से Priority V में थे।
भारी बारिश और भूस्खलन के बाद मिट्टी, पत्थर और दूसरी सामग्री नदियों में पहुंचती है। हर जगह इसका असर एक जैसा नहीं होता। लेकिन ज्यादा तलछट जमा होने पर नदी उथली हो सकती है और उसके बहाव का रास्ता भी बदल सकता है।
केरलम इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट वेम्बनाड में मिलने वाली पंबा, मीनाचिल, मणिमाला, अचनकोविल और मुवाट्टुपुझा नदियों में तलछट के आकलन की जरूरत बताती है। इसलिए किसी बाढ़ के लिए केवल तलछट को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। अलग-अलग नदियों और उनके हिस्सों में इसके असर का वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है।
समुद्र और बैकवाटर के पास स्थित नदियों के निचले हिस्सों में गर्मियों के दौरान खारा पानी ऊपर की ओर बढ़ सकता है। नदी में मीठे पानी का प्रवाह कम होने पर इसका खतरा बढ़ जाता है। इससे पेयजल स्रोत और खेती प्रभावित हो सकते हैं। मीनाचिल बेसिन में सिंचाई विभाग ने गर्मियों की जल कमी के साथ खारे पानी के प्रवेश को दर्ज किया है।
केरलम की कई नदियों पर जलविद्युत, सिंचाई और जल आपूर्ति से जुड़ी परियोजनाएं हैं। जलाशय पानी जमा करते हैं और बाढ़ प्रबंधन में मदद कर सकते हैं। लेकिन बांध से पानी कब और कितना छोड़ा जाता है, इसका असर नदी के निचले हिस्से के बहाव पर पड़ता है।
इसलिए पानी छोड़ते समय जलाशय की सुरक्षा के साथ नीचे बसे इलाकों की जरूरत और नदी के प्राकृतिक बहाव को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
| पहल | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|
| समेकित नदी बेसिन प्रबंधन (Integrated River Basin Management) | पूरे नदी बेसिन के स्तर पर जल उपलब्धता, अलग-अलग उपयोग, बाढ़ जोखिम और पारिस्थितिकी को साथ लेकर प्रबंधन करना |
| राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना (National Hydrology Project) | वर्षा, नदी प्रवाह, जलस्तर और दूसरे जल संबंधी आंकड़ों की निगरानी और उपलब्धता बेहतर करना |
| बाढ़ पूर्वानुमान और पूर्व चेतावनी व्यवस्था | बाढ़ के खतरे की समय रहते जानकारी देकर आपदा की तैयारी और प्रतिक्रिया बेहतर करना |
| रूम फॉर रिवर (Room for River) | नदी और उसके बाढ़ क्षेत्र का अध्ययन कर बाढ़ के पानी को सुरक्षित जगह देने और जोखिम कम करने के उपाय तलाशना |
| जलाशय संचालन नियम (Rule Curves) | मानसून के दौरान जलाशयों में पानी के स्तर और पानी छोड़ने के संचालन को व्यवस्थित करना |
| आपात कार्ययोजना (Emergency Action Plan) | बांध से जुड़ी आपात स्थिति में चेतावनी, जिम्मेदारी और जरूरी कार्रवाई की व्यवस्था तय करना |
| आर्द्रभूमि का समेकित प्रबंधन | वेम्बनाड-कोल और अष्टमुडी जैसी आर्द्रभूमियों के संरक्षण, जल गुणवत्ता, जैव विविधता और टिकाऊ उपयोग पर काम करना |
केरलम में नदी प्रबंधन अब केवल बांध और सिंचाई परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। नदी बेसिन प्रबंधन, बाढ़ की पूर्व चेतावनी, जल आंकड़ों की निगरानी, जलाशयों के संचालन और आर्द्रभूमियों के संरक्षण को भी इसमें शामिल किया जा रहा है। राज्य में चल रही कुछ प्रमुख पहल इस प्रकार हैं।
केरलम जल संसाधन विभाग ने पंबा नदी बेसिन के लिए समेकित नदी बेसिन प्रबंधन योजना तैयार की है। इसका उद्देश्य पानी की उपलब्धता, बाढ़ के खतरे और नदी की पारिस्थितिकी को साथ लेकर योजना बनाना है। राज्य योजना बोर्ड की नदी बेसिन नियोजन रिपोर्ट भी अलग-अलग विभागों के बजाय बेसिन स्तर पर समन्वित योजना की जरूरत बताती है।
केरलम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार प्रमुख बांधों के लिए जलाशय संचालन नियम और आपात कार्ययोजनाएं तैयार की गई हैं। बांध का जलस्तर ऑरेंज अलर्ट तक पहुंचने या जलग्रहण क्षेत्र में अत्यधिक बारिश का पूर्वानुमान होने पर अलग-अलग विभाग मिलकर बांध संचालन की निगरानी करते हैं
| नदी/बेसिन | प्रमुख बांध, जलाशय और परियोजनाएं |
|---|---|
| पेरियार | इडुक्की जलाशय तंत्र, मुल्लापेरियार बांध, इडमलयार बांध, भूतथानकेट्टू बैराज |
| भरतपुझा | मालमपुझा, वालायर, मंगलम, पोथुंडी, चुल्लियार और कांजीरापुझा परियोजनाएं |
| पंबा | पंबा सिंचाई परियोजना, कक्की जलाशय और मनियार बैराज |
| कल्लडा | कल्लडा सिंचाई परियोजना और कल्लडा (परप्पार/तेनमला) बांध व जलाशय |
| नेय्यार | नेय्यार बांध और सिंचाई परियोजना |
| कुट्टियाडी | कुट्टियाडी सिंचाई परियोजना और पेरुवन्नामूझी जलाशय |
केरलम में नदी संरक्षण का अर्थ केवल नदी की सफाई या किनारे पर निर्माण रोकना नहीं है। पश्चिमी घाट से निकलने वाली नदियां रास्ते में जंगलों, खेतों, शहरों, बांधों, भूजल, बैकवाटर और आर्द्रभूमियों से जुड़ते हुए समुद्र तक पहुंचती हैं।
इसलिए ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में जंगल, मिट्टी और छोटी धाराओं की स्थिति पर निगरानी जरूरी है। निचले हिस्से में सीवेज, औद्योगिक प्रदूषण, खारे पानी का प्रवेश, तटीय निर्माण और आर्द्रभूमि की जल धारण क्षमता पर ध्यान देना होगा।
वेम्बनाड इसका स्पष्ट उदाहरण है। वेम्बनाड से जुड़ी नदियों का प्रबंधन अलग-अलग करने से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती। इसके लिए नदी के बहाव, बांधों से छोड़े जाने वाले पानी, निचले इलाकों की जल धारण क्षमता और समुद्र तक पानी की निकासी, इन सभी को साथ देखना जरूरी है।
बाढ़ पूर्व चेतावनी, बांधों के संचालन नियम और पंबा की समेकित नदी बेसिन प्रबंधन योजना की दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं। लंबे समय के लिए नदी, भूजल, जलग्रहण क्षेत्र, बांध, आर्द्रभूमि और तट को जोड़कर जल प्रबंधन की योजना बनानी होगी।
केरलम की जल सुरक्षा केवल ज्यादा पानी जमा करने से तय नहीं होगी। जरूरी यह भी है कि मानसून के पानी का बेहतर इस्तेमाल हो, नदियों का प्राकृतिक बहाव बना रहे और पानी की गुणवत्ता तथा तटीय जल तंत्र सुरक्षित रहें।
केरलम वन विभाग: भौगोलिक स्वरूप
अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग: केरलम पर्यावरण सांख्यिकी संकलन 2014-15
केरलम राज्य योजना बोर्ड: आर्थिक समीक्षा 2024
केरलम राज्य योजना बोर्ड: आर्थिक समीक्षा 2025
केरलम सिंचाई विभाग: नदी बेसिन मानचित्र
पंबा नदी बेसिन के लिए समेकित नदी बेसिन प्रबंधन योजना
केरलम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण: बांध प्रबंधन
केंद्रीय जल आयोग: केरलम बाढ़ 2018 रिपोर्ट
केरलम इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान: वेम्बनाड नदी तलछट अध्ययन
केरलम वन विभाग: आर्द्रभूमियां
लेटेस्ट अपडेट्स के लिए हमारे व्हाट्सऐप चैनल को फॉलो करें