बाणासुर सागर बांध करमनाथोडु नदी पर बनाया गया है, जो कबिनी नदी की एक सहायक नदी है।

 

फोटो: अजय मोहन

नदी और तालाब

केरलम की प्रमुख नदियां: नदी बेसिन, जल संसाधन और प्रबंधन की चुनौतियां

Author : डॉ. कुमारी रोहिणी

  • केरलम में 44 नदियां हैं। इनमें 41 पश्चिम की ओर और तीन पूर्व की ओर बहती हैं।

  • पेरियार, भरतपुझा, पंबा और चालियार राज्य की चार मध्यम श्रेणी की नदियां हैं। राष्ट्रीय मानक के अनुसार केरलम में कोई बड़ी नदी नहीं है।

  • भारी मानसूनी बारिश के बावजूद गर्मियों में पानी की कमी, नदी प्रदूषण, खारे पानी का प्रवेश और बाढ़ राज्य की प्रमुख जल चुनौतियां हैं।

  • केरलम की नदियों को पश्चिमी घाट, बांधों, भूजल, बैकवाटर, आर्द्रभूमि और समुद्र से जोड़कर देखना जरूरी है।

केरलम में बारिश भरपूर होती है। पश्चिमी घाट से निकलने वाली अनेक नदियां, झीलें, बैकवाटर और आर्द्रभूमियां राज्य की जल व्यवस्था का आधार हैं। इसके बावजूद यहां पानी की स्थिति हर मौसम और हर इलाके में एक जैसी नहीं रहती। मानसून में कुछ नदी घाटियों में बाढ़ आती है, जबकि गर्मियों में कई जगह पानी की कमी और खारे पानी के प्रवेश की समस्या सामने आती है।

केरलम की नदियां दूसरे राज्यों की कई बड़ी नदियों की तुलना में छोटी हैं। उनका बहाव तेज है और समुद्र तक की दूरी भी कम है। इसलिए भारी बारिश होने या बांधों से पानी छोड़े जाने पर निचले इलाकों में जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। नदी में जमा तलछट और तटीय जल की स्थिति भी इसके बहाव को प्रभावित करती है।

केरलम की नदी-प्रणाली

केरलम वन विभाग के अनुसार राज्य में 44 नदियां हैं। इनमें 41 पश्चिम की ओर बहकर लक्षद्वीप सागर में मिलती हैं। कबानी, भवानी और पांबर नाम की तीन नदियां पूर्व की ओर बहती हैं और कावेरी नदी तंत्र से जुड़ती हैं।

राष्ट्रीय वर्गीकरण के अनुसार केरलम में कोई बड़ी नदी नहीं है। पेरियार, भरतपुझा, पंबा और चालियार को मध्यम श्रेणी में रखा गया है। बाकी नदियां छोटी हैं। ज्यादातर नदियों का उद्गम पश्चिमी घाट में है। ऊंचाई वाले इलाकों में ये नदियां तेज ढाल से बहती हैं। मैदानी और तटीय इलाकों में पहुंचकर कई नदियां बैकवाटर और झीलों से जुड़ती हुई समुद्र तक पहुंचती हैं।

केरलम के प्रमुख नदी बेसिन

बेसिन का आकारप्रमुख नदी बेसिन
1,000 वर्ग किमी से अधिकभरतपुझा, मुवाट्टुपुझा, पेरियार, वलपट्टनम, चालियार, करुवन्नूर, चालक्कुडी, मीनाचिल, पंबा, अचनकोविल, कल्लडा और कबानी
500–1,000 वर्ग किमीकुट्टियाडी, मणिमाला, इथिक्करा, वामनपुरम, करमना और भवानी
100–500 वर्ग किमीशिरिया, मोग्राल, चित्तारी, नीलेश्वरम, कव्वायी, पेरुवंबा, थलास्सेरी, माहे, तिरूर, कीचेरी, पुझक्कल, पल्लीक्कल, पांबर सहित अन्य मध्यम आकार के बेसिन
100 वर्ग किमी से छोटे बेसिनमंजेश्वरम, उप्पला, रामपुरम, कल्लायी, अयिरूर सहित छोटे तटीय बेसिन

जिस पूरे इलाके का बारिश का पानी बहकर किसी मुख्य नदी और उसकी सहायक धाराओं में पहुंचता है, उसे नदी बेसिन कहा जाता है। केरलम में बेसिनों का आकार अपेक्षाकृत छोटा है, लेकिन घनी आबादी, खेती, पहाड़ी ढाल और तटीय भूगोल के कारण उनका महत्व बहुत अधिक है।

केरलम की प्रमुख नदियों की सूची

नदीउद्गम स्थलअनुमानित लंबाईकेरल के प्रमुख क्षेत्र/जिलेकहाँ मिलती है
मंजेश्वरमबालेपुनी पहाड़ियां, केरल-कर्नाटक सीमा16 किमीकासरगोडउप्पला कायल/अरब सागर
उप्पलावीरकंबा पहाड़ियां, कर्नाटक50 किमीकासरगोडअरब सागर
शिरियाअनेगुंडी रिजर्व फॉरेस्ट, कर्नाटक67 किमीकासरगोडअरब सागर
मोग्रालकरडका क्षेत्र की पहाड़ियां, कासरगोड34 किमीकासरगोडअरब सागर
चंद्रगिरिपश्चिमी घाट, कर्नाटक105 किमीकासरगोडअरब सागर
चित्तारीइरिया क्षेत्र, कासरगोड25 किमीकासरगोडअरब सागर
नीलेश्वरमपश्चिमी घाट की पहाड़ियां46 किमीकासरगोडअरब सागर
करियांगोडपश्चिमी घाट/कोडगु क्षेत्र, कर्नाटक64 किमीकासरगोड, कन्नूरअरब सागर
कव्वायीचीमेनी क्षेत्र की पहाड़ियां31 किमीकासरगोड, कन्नूरकव्वायी बैकवाटर
पेरुवंबापेकुन्नु वन क्षेत्र51 किमीकासरगोड, कन्नूरअरब सागर
रामपुरमपरियारम पहाड़ियां19 किमीकन्नूरअरब सागर
कुप्पमपश्चिमी घाट, कर्नाटक82 किमीकन्नूरवलपट्टनम नदी/अरब सागर
वलपट्टनमपश्चिमी घाट, कर्नाटक110 किमीकन्नूरअरब सागर
अंजारकंडीपश्चिमी घाट की तलहटी48 किमीकन्नूरअरब सागर
थलास्सेरीकन्नूर की पहाड़ियां28 किमीकन्नूरअरब सागर
माहेपश्चिमी घाट54 किमीकन्नूर, कोझिकोडअरब सागर
कुट्टियाडीपश्चिमी घाट74 किमीकोझिकोडअरब सागर
कोरापुझाअगलापुझा और पूनूरपुझा जलधाराओं का तंत्र40 किमीकोझिकोडअरब सागर
कल्लायीचेरुकुलत्तूर क्षेत्र22 किमीकोझिकोडअरब सागर
चालियारपश्चिमी घाट/नीलगिरि क्षेत्र169 किमीवायनाड, मलप्पुरम, कोझिकोडअरब सागर
कदलुंडीपश्चिमी घाट130 किमीमलप्पुरमअरब सागर
तिरूरमलप्पुरम का पहाड़ी क्षेत्र48 किमीमलप्पुरमअरब सागर
भरतपुझापश्चिमी घाट, तमिलनाडु-केरल क्षेत्र209 किमीपालक्काड, त्रिशूर, मलप्पुरमअरब सागर
कीचेरीमचाड पहाड़ियां51 किमीत्रिशूरअरब सागर
पुझक्कलत्रिशूर का पहाड़ी क्षेत्र29 किमीत्रिशूरअरब सागर
करुवन्नूरमनाली और कुरुमाली नदी तंत्र48 किमीत्रिशूरअरब सागर
चालक्कुडीअनामलाई क्षेत्र, पश्चिमी घाट130 किमीपालक्काड, त्रिशूर, एर्नाकुलमपेरियार/अरब सागर तंत्र
पेरियारशिवगिरि पहाड़ियां, पश्चिमी घाट244 किमीइडुक्की, एर्नाकुलमअरब सागर
मुवाट्टुपुझाथोडुपुझा, कोठमंगलम और कलियार नदी तंत्र121 किमीइडुक्की क्षेत्र, एर्नाकुलम, कोट्टायमवेम्बनाड झील
मीनाचिलपश्चिमी घाट78 किमीकोट्टायमवेम्बनाड झील
मणिमालापश्चिमी घाट90 किमीकोट्टायम, पथानमथिट्टावेम्बनाड-कुट्टनाड जल तंत्र
पंबापुलाचीमलाई पहाड़ियां, पश्चिमी घाट176 किमीइडुक्की, पथानमथिट्टा, अलप्पुझावेम्बनाड झील
अचनकोविलपश्चिमी घाट128 किमीपथानमथिट्टा, कोल्लम, अलप्पुझापंबा/कुट्टनाड जल तंत्र
पल्लीक्कलपश्चिमी घाट की तलहटी42 किमीपथानमथिट्टा, कोल्लमअरब सागर
कल्लडापश्चिमी घाट121 किमीपथानमथिट्टा, कोल्लम, तिरुवनंतपुरम क्षेत्रअष्टमुडी झील
इथिक्करापश्चिमी घाट की तलहटी56 किमीकोल्लम, तिरुवनंतपुरमअरब सागर
अयिरूरदक्षिणी केरल की पहाड़ियां17 किमीतिरुवनंतपुरम, कोल्लमअरब सागर
वामनपुरमपश्चिमी घाट88 किमीतिरुवनंतपुरम, कोल्लमअरब सागर
मामोमतिरुवनंतपुरम का पहाड़ी क्षेत्र27 किमीतिरुवनंतपुरम, कोल्लमअरब सागर
करमनाअगसत्यमलाई क्षेत्र, पश्चिमी घाट68 किमीतिरुवनंतपुरमअरब सागर
नेय्यारअगसत्यमलाई क्षेत्र, पश्चिमी घाट56 किमीतिरुवनंतपुरमअरब सागर
कबानी (कबिनी)वायनाड की पहाड़ियां/पश्चिमी घाट56.6 किमी (केरल में)वायनाडकावेरी नदी
भवानीनीलगिरि-पश्चिमी घाट क्षेत्र37.5 किमी (केरल में)पालक्काडकावेरी नदी
पांबरइडुक्की के पश्चिमी घाट25 किमी (केरल में)इडुक्कीअमरावती → कावेरी नदी

पेरियार: केरलम की सबसे लंबी नदी

पेरियार केरलम की सबसे लंबी नदी है। इसका जलग्रहण क्षेत्र पश्चिमी घाट से इडुक्की और एर्नाकुलम के कई इलाकों तक फैला है। नदी और इसकी परियोजनाएं जलविद्युत, सिंचाई और पेयजल आपूर्ति में भूमिका निभाती हैं। पेरियार के निचले हिस्से में औद्योगिक और शहरी गतिविधियों के कारण पानी की गुणवत्ता भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।

भरतपुझा: दक्षिण मालाबार की नदी

भरतपुझा को नीला नदी भी कहा जाता है। यह पालक्काड दर्रे और दक्षिण मालाबार के कई क्षेत्रों से होकर अरब सागर में मिलती है। नदी और इसकी सहायक धाराएं खेती, सिंचाई और स्थानीय जल स्रोतों से जुड़ी हैं। इस बेसिन में मालमपुझा, वालायर, मंगलम और पोथुंडी जैसी सिंचाई परियोजनाएं हैं।

पंबा: कुट्टनाड और वेम्बनाड से जुड़ी नदी

पंबा पश्चिमी घाट से निकलकर निचले इलाकों में पहुंचती है और कुट्टनाड-वेम्बनाड जल तंत्र से जुड़ती है। इसका धार्मिक महत्व भी है, क्योंकि सबरीमला यात्रा पंबा से जुड़ी है। निचले इलाकों में पंबा का पानी खेतों, नहरों, बैकवाटर और आर्द्रभूमियों तक पहुंचता है। इसलिए कुट्टनाड की खेती और जल प्रबंधन में इस नदी की अहम भूमिका है।

चालियार: उत्तरी केरलम की प्रमुख नदी

चालियार 169 किलोमीटर लंबी नदी है। यह पश्चिमी घाट से निकलकर मलप्पुरम और कोझिकोड क्षेत्र की ओर बहती है। नदी स्थानीय जल जरूरतों, खेती और तटीय पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण है।

वेम्बनाड से जुड़ा नदी तंत्र

केरलम की नदी व्यवस्था को समझने में वेम्बनाड झील और उसका जलग्रहण क्षेत्र खास महत्व रखते हैं। पंबा, मीनाचिल, मणिमाला, अचनकोविल और मुवाट्टुपुझा जैसी नदियां इस बड़े जल तंत्र से जुड़ी हैं। केंद्रीय जल आयोग की 2018 की केरलम बाढ़ रिपोर्ट में वेम्बनाड झील में दस नदियों से पानी पहुंचने का उल्लेख है।

केरलम की करमनाथोडु नदी

इसलिए इन नदियों को केवल अलग-अलग जलधाराओं के रूप में नहीं देखा जा सकता। ऊपरी इलाकों में भारी बारिश, भूस्खलन, बांधों से छोड़ा गया पानी और नदी में बढ़ी तलछट का असर नीचे कुट्टनाड और वेम्बनाड तक पहुंच सकता है। निचले इलाकों से पानी कितनी तेजी से निकल पाएगा, यह समुद्र के जलस्तर और निकासी की स्थिति पर भी निर्भर करता है।

केरलम की प्रमुख सहायक नदियां और जलधाराएं

केरलम की सभी छोटी नदियां किसी बड़ी नदी की सहायक नदी नहीं हैं। इनमें से कई का अपना अलग जलग्रहण क्षेत्र है और वे सीधे बैकवाटर या समुद्र में मिलती हैं। इसलिए नीचे केवल प्रमुख नदी प्रणालियों से जुड़ी चुनिंदा सहायक नदियां दी गई हैं।

मुख्य नदीप्रमुख सहायक नदियां/जलधाराएंप्रमुख जिला/क्षेत्रकिस नदी/जल तंत्र का हिस्सा
मंजेश्वरमपावुरी (Pavuri)कासरगोडमंजेश्वरम नदी तंत्र
उप्पलाउप्पला (Uppala)कासरगोडउप्पला नदी तंत्र
शिरियाकल्लाजेथोडु, कन्यनथोडु, एरामट्टीहोले, कुंबलाकासरगोडशिरिया नदी तंत्र
मोग्रालबेट्टीपाडी, मुलियारकासरगोडमोग्राल नदी तंत्र
चंद्रगिरिपयस्विनी, चंद्रगिरिकासरगोडचंद्रगिरि नदी तंत्र
चित्तारीकलनाड, बेकल, चित्तारीकासरगोडचित्तारी नदी तंत्र
नीलेश्वरमआर्यंगल थोडु, बैगोटे होलेकासरगोडनीलेश्वरम नदी तंत्र
करियांगोडमुंडोर, पडियामाला होले, अरियाकडवु होलेकासरगोड, कन्नूरकरियांगोड नदी तंत्र
कव्वायीआधिकारिक तालिका में उल्लेख नहींकासरगोड, कन्नूरकव्वायी नदी तंत्र
पेरुवंबामचरुथोडे, मथामंगलम, चालाचल, मुक्कुट्टेनकराचल, नितारिंगापुझाकासरगोड, कन्नूरपेरुवंबा नदी तंत्र
रामपुरमआधिकारिक तालिका में उल्लेख नहींकन्नूररामपुरम नदी तंत्र
कुप्पमपक्कट्टुपोया, अलाकुट्टाथोडे, कुट्टिकोलपुझा, मुक्कुट्टाथोडु, चिरियाथोडुकन्नूरकुप्पम नदी तंत्र
वलपट्टनमश्रीकंदापुरम, वलियापुझा, वेनिपुझा, अरालमपुझाकन्नूरवलपट्टनम नदी तंत्र
अंजारकंडीकप्पुथोडु, इडुंबाथोडुकन्नूरअंजारकंडी नदी तंत्र
थलास्सेरीधर्मदामपुझाकन्नूरथलास्सेरी नदी तंत्र
माहेआधिकारिक तालिका में उल्लेख नहींकन्नूर, कोझिकोडमाहे नदी तंत्र
कुट्टियाडीओनिपुझा, थोट्टिलपालमपुझा, कडियांगाडुपुझा, मनथिलपुझा, मडप्पल्लीपुझाकोझिकोडकुट्टियाडी नदी तंत्र
कोरापुझाअगलापुझा, पन्नूरपुझाकोझिकोडकोरापुझा नदी तंत्र
कल्लायीआधिकारिक तालिका में उल्लेख नहींकोझिकोडकल्लायी नदी तंत्र
चालियारचालिपुझा, पुन्नापुझा, करिमपुझा, चेरुपुझा, कांजिरापुझा, कुरुंबनपुझा, वडापुरमपुझा, इरुथिल्लीपुझाकोझिकोड, मलप्पुरम, वायनाडचालियार नदी तंत्र
कदलुंडीओलिपुझा, वेलियारमलप्पुरमकदलुंडी नदी तंत्र
तिरूरवल्लिलापुझामलप्पुरमतिरूर नदी तंत्र
भरतपुझागायत्रीपुझा, चित्तूरपुझा, कलपथिपुझा, थूथापुझामलप्पुरम, त्रिशूर, पालक्काडभरतपुझा नदी तंत्र
कीचेरीचुंडलथोडुत्रिशूरकीचेरी नदी तंत्र
पुझक्कलपराथोडु, पूमलाथोडु, नडुथोडु, कट्टाचिराथोडुत्रिशूरपुझक्कल नदी तंत्र
करुवन्नूरमनाली, कुरुमाली, चिमोनी, मुप्पिलीत्रिशूरकरुवन्नूर नदी तंत्र
चालक्कुडीपरंबिकुलम, कुरियारकुट्टी, शोलयार, कराप्पारा, अनाकायमत्रिशूर, पालक्काड, एर्नाकुलमचालक्कुडी नदी तंत्र
पेरियारमुथिरापुझा, पेरिंजाकुट्टी, इडमलयार, मंगलापुझाइडुक्की, एर्नाकुलमपेरियार नदी तंत्र
मुवाट्टुपुझाकलियार, थोडुपुझा, कोठमंगलमएर्नाकुलम, कोट्टायममुवाट्टुपुझा नदी तंत्र
मीनाचिलकडापुझा, मिनाडामार, कलाथुकडवुकोट्टायममीनाचिल नदी तंत्र
मणिमालाकोकयार, एलक्कलथोडुकोट्टायम, पथानमथिट्टामणिमाला नदी तंत्र
पंबाकक्कियार, अरुदई, कक्काडार, कल्लार, पंबी, पंबियारपथानमथिट्टा, इडुक्की, अलप्पुझापंबा नदी तंत्र
अचनकोविलआधिकारिक तालिका में उल्लेख नहींपथानमथिट्टा, कोल्लम, अलप्पुझाअचनकोविल नदी तंत्र
पल्लीक्कलआधिकारिक तालिका में उल्लेख नहींपथानमथिट्टा, कोल्लमपल्लीक्कल नदी तंत्र
कल्लडाकुलथुपुझा, चेंदुरुनी, कल्थुरुथीपथानमथिट्टा, कोल्लम, तिरुवनंतपुरमकल्लडा नदी तंत्र
इथिक्करावट्टापरंबु, कुडुमनथोडु, वट्टमथोडु, कुलंजेथोडुकोल्लम, तिरुवनंतपुरमइथिक्करा नदी तंत्र
अयिरूरआधिकारिक तालिका में उल्लेख नहींतिरुवनंतपुरम, कोल्लमअयिरूर नदी तंत्र
वामनपुरमआधिकारिक तालिका में उल्लेख नहींतिरुवनंतपुरम, कोल्लमवामनपुरम नदी तंत्र
मामोमआधिकारिक तालिका में उल्लेख नहींतिरुवनंतपुरम, कोल्लममामोम नदी तंत्र
करमनाकवियार, अट्टैयार, वैयापादिर, टोडियारतिरुवनंतपुरमकरमना नदी तंत्र
नेय्यारकल्लार, करवालियारतिरुवनंतपुरमनेय्यार नदी तंत्र
कबानी (कबिनी)मानंतवाडी, पनामरम, बावेलिपुझा, नूलपुझावायनाडकावेरी नदी तंत्र
भवानीसिरुवानी, वरयारपालक्काडकावेरी नदी तंत्र
पांबरइराविकुलम, मायलाडी, तीर्थमाला, चेंगलारइडुक्कीकावेरी नदी तंत्र

केरलम की नदियों का सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व

केरलम की नदियां खेती, पेयजल, सिंचाई, जलविद्युत, मत्स्य संसाधन और स्थानीय आजीविका से जुड़ी हैं। पेरियार पर जलविद्युत और सिंचाई परियोजनाएं हैं। भरतपुझा पालक्काड और मलप्पुरम के कृषि क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि पंबा और उससे जुड़ी नदियां कुट्टनाड की खेती और जल निकासी व्यवस्था से जुड़ी हैं।

नदियों का संबंध बैकवाटर और अंतर्देशीय जल परिवहन से भी है। केरलम आर्थिक समीक्षा 2017 के अनुसार राज्य की नदियां, झीलें, मुहाने और बैकवाटर अंतर्देशीय जल परिवहन का आधार हैं।

क्षेत्रनदियों की भूमिकाप्रमुख उदाहरण
पेयजलशहरों, कस्बों और गांवों की जलापूर्तिपेरियार और मुवाट्टुपुझा से कोच्चि क्षेत्र की जलापूर्ति, अन्य नदियों से स्थानीय जलापूर्ति
खेती और सिंचाईखेतों तक पानी पहुंचाना और कृषि के लिए जल उपलब्ध करानापेरियार और भरतपुझा बेसिन की सिंचाई परियोजनाएं, पंबा-कुट्टनाड की खेती
जलविद्युतऊंचाई और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में बिजली उत्पादनपेरियार बेसिन का इडुक्की जलाशय तंत्र और अन्य जलविद्युत परियोजनाएं
मत्स्य पालननदियों, जलाशयों, मुहानों और खारे-मीठे पानी के क्षेत्रों में मत्स्य संसाधनवेम्बनाड, अष्टमुडी, नदियां और जलाशय
आजीविकामछली पालन, खेती, नाव संचालन और पानी से जुड़ी दूसरी गतिविधियों से रोजगारकुट्टनाड, बैकवाटर और नदी-तटीय बस्तियां
अंतर्देशीय परिवहननदियों, नहरों और बैकवाटर के रास्ते लोगों और सामान की आवाजाहीवेम्बनाड और उससे जुड़ी नहरें तथा पश्चिमी तट की जलमार्ग प्रणाली
पर्यटननौका विहार, बैकवाटर और नदी-आधारित पर्यटनअलप्पुझा, कुमारकोम, वेम्बनाड और अष्टमुडी
धार्मिक और सांस्कृतिक जीवनतीर्थ, धार्मिक परंपराओं और स्थानीय सांस्कृतिक जीवन से संबंधपंबा और सबरीमला, भरतपुझा/नीला की सांस्कृतिक परंपरा
बाढ़ और जल निकासीमानसूनी पानी को ऊपरी क्षेत्रों से निचले इलाकों, बैकवाटर और समुद्र की ओर ले जानापंबा, मीनाचिल, मणिमाला और अचनकोविल से जुड़ा वेम्बनाड-कुट्टनाड तंत्र
पारिस्थितिकीजलीय जीवों, आर्द्रभूमियों और नदी-मुहानों के लिए आवास और मीठे पानी का स्रोतवेम्बनाड-कोल, अष्टमुडी और अन्य नदी-बैकवाटर तंत्र

केरलम की नदियों के सामने प्रमुख चुनौतियां

1. बाढ़ और अत्यधिक बारिश

केरलम में मानसून के दौरान कम समय में बहुत अधिक बारिश हो सकती है। ऐसे में बाढ़ का खतरा केवल बारिश की मात्रा से तय नहीं होता। जलाशयों और नदियों में पहले से कितना पानी है और निचले इलाकों से पानी कितनी तेजी से निकल सकता है, यह भी महत्वपूर्ण है। 2018 की बाढ़ के बाद जलाशय संचालन, बाढ़ पूर्वानुमान और नदी बेसिन स्तर पर योजना पर अधिक ध्यान दिया गया।

केरलम आर्थिक समीक्षा 2025 के अनुसार पेरियार, मणिमाला, चालकुडी, पंबा और अचनकोविल बेसिनों को बाढ़ पूर्व चेतावनी व्यवस्था के शुरुआती चरण के लिए चुना गया। पेरियार और चालकुडी में यह व्यवस्था राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना (National Hydrology Project) के तहत स्थापित की जा चुकी है।

2. गर्मियों में पानी की कमी

अधिक बारिश होने का अर्थ यह नहीं है कि पानी पूरे साल समान रूप से उपलब्ध रहेगा। केरलम की कई नदियां छोटी हैं और उनकी ढाल तेज है। मानसून में मिलने वाले पानी का बड़ा हिस्सा नदियों के जरिए तेजी से निचले इलाकों और समुद्र की ओर बह जाता है। इस कारण बारिश के कुछ महीने बाद कई जगह नदी प्रवाह और स्थानीय जल स्रोतों में पानी कम हो सकता है।

केरलम राज्य योजना बोर्ड भी भारी बारिश के बावजूद राज्य में गर्मियों के दौरान पानी की कमी की समस्या का उल्लेख करता है। मीनाचिल बेसिन के बारे में केरलम सिंचाई विभाग ने गर्मियों में जल की कमी और खारे पानी के प्रवेश, दोनों को चुनौती माना है।

3. नदी प्रदूषण

सीवेज, शहरी कचरा, औद्योगिक गतिविधियां और दूसरी मानवीय गतिविधियां कई नदी-खंडों की जल गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी नदी प्रदूषित है। निगरानी में जिन हिस्सों में प्रदूषण मिलता है, उन्हें ‘प्रदूषित नदी-खंड’ के रूप में दर्ज किया जाता है।

केरलम आर्थिक समीक्षा 2024 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 2022 की सूची के आधार पर राज्य में 18 प्रदूषित नदी-खंड दर्ज हैं। इनमें करमना, नेय्यार, वामनपुरम, पंबा, मणिमाला, पेरियार, चालकुडी और कदलुंडी सहित अन्य नदी-खंड शामिल हैं। उस सूची में केरलम का कोई नदी-खंड सबसे गंभीर प्राथमिकता श्रेणी–I (Priority I) या प्राथमिकता श्रेणी–II (Priority II) में नहीं था। करमना का संबंधित हिस्सा Priority III में, नेय्यार और वामनपुरम के हिस्से Priority IV में और बाकी दर्ज हिस्से Priority V में थे।

4. तलछट और नदी की क्षमता

भारी बारिश और भूस्खलन के बाद मिट्टी, पत्थर और दूसरी सामग्री नदियों में पहुंचती है। हर जगह इसका असर एक जैसा नहीं होता। लेकिन ज्यादा तलछट जमा होने पर नदी उथली हो सकती है और उसके बहाव का रास्ता भी बदल सकता है।

केरलम इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट वेम्बनाड में मिलने वाली पंबा, मीनाचिल, मणिमाला, अचनकोविल और मुवाट्टुपुझा नदियों में तलछट के आकलन की जरूरत बताती है। इसलिए किसी बाढ़ के लिए केवल तलछट को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। अलग-अलग नदियों और उनके हिस्सों में इसके असर का वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है।

5. खारे पानी का प्रवेश

समुद्र और बैकवाटर के पास स्थित नदियों के निचले हिस्सों में गर्मियों के दौरान खारा पानी ऊपर की ओर बढ़ सकता है। नदी में मीठे पानी का प्रवाह कम होने पर इसका खतरा बढ़ जाता है। इससे पेयजल स्रोत और खेती प्रभावित हो सकते हैं। मीनाचिल बेसिन में सिंचाई विभाग ने गर्मियों की जल कमी के साथ खारे पानी के प्रवेश को दर्ज किया है।

6. बांध और नदी प्रवाह

केरलम की कई नदियों पर जलविद्युत, सिंचाई और जल आपूर्ति से जुड़ी परियोजनाएं हैं। जलाशय पानी जमा करते हैं और बाढ़ प्रबंधन में मदद कर सकते हैं। लेकिन बांध से पानी कब और कितना छोड़ा जाता है, इसका असर नदी के निचले हिस्से के बहाव पर पड़ता है।

इसलिए पानी छोड़ते समय जलाशय की सुरक्षा के साथ नीचे बसे इलाकों की जरूरत और नदी के प्राकृतिक बहाव को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

नदी प्रबंधन की प्रमुख पहलें

पहलमुख्य उद्देश्य
समेकित नदी बेसिन प्रबंधन (Integrated River Basin Management)पूरे नदी बेसिन के स्तर पर जल उपलब्धता, अलग-अलग उपयोग, बाढ़ जोखिम और पारिस्थितिकी को साथ लेकर प्रबंधन करना
राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना (National Hydrology Project)वर्षा, नदी प्रवाह, जलस्तर और दूसरे जल संबंधी आंकड़ों की निगरानी और उपलब्धता बेहतर करना
बाढ़ पूर्वानुमान और पूर्व चेतावनी व्यवस्थाबाढ़ के खतरे की समय रहते जानकारी देकर आपदा की तैयारी और प्रतिक्रिया बेहतर करना
रूम फॉर रिवर (Room for River)नदी और उसके बाढ़ क्षेत्र का अध्ययन कर बाढ़ के पानी को सुरक्षित जगह देने और जोखिम कम करने के उपाय तलाशना
जलाशय संचालन नियम (Rule Curves)मानसून के दौरान जलाशयों में पानी के स्तर और पानी छोड़ने के संचालन को व्यवस्थित करना
आपात कार्ययोजना (Emergency Action Plan)बांध से जुड़ी आपात स्थिति में चेतावनी, जिम्मेदारी और जरूरी कार्रवाई की व्यवस्था तय करना
आर्द्रभूमि का समेकित प्रबंधनवेम्बनाड-कोल और अष्टमुडी जैसी आर्द्रभूमियों के संरक्षण, जल गुणवत्ता, जैव विविधता और टिकाऊ उपयोग पर काम करना

केरलम में नदी प्रबंधन अब केवल बांध और सिंचाई परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। नदी बेसिन प्रबंधन, बाढ़ की पूर्व चेतावनी, जल आंकड़ों की निगरानी, जलाशयों के संचालन और आर्द्रभूमियों के संरक्षण को भी इसमें शामिल किया जा रहा है। राज्य में चल रही कुछ प्रमुख पहल इस प्रकार हैं।

केरलम जल संसाधन विभाग ने पंबा नदी बेसिन के लिए समेकित नदी बेसिन प्रबंधन योजना तैयार की है। इसका उद्देश्य पानी की उपलब्धता, बाढ़ के खतरे और नदी की पारिस्थितिकी को साथ लेकर योजना बनाना है। राज्य योजना बोर्ड की नदी बेसिन नियोजन रिपोर्ट भी अलग-अलग विभागों के बजाय बेसिन स्तर पर समन्वित योजना की जरूरत बताती है।

केरलम के प्रमुख बांध, जलाशय और सिंचाई परियोजनाएं

केरलम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार प्रमुख बांधों के लिए जलाशय संचालन नियम और आपात कार्ययोजनाएं तैयार की गई हैं। बांध का जलस्तर ऑरेंज अलर्ट तक पहुंचने या जलग्रहण क्षेत्र में अत्यधिक बारिश का पूर्वानुमान होने पर अलग-अलग विभाग मिलकर बांध संचालन की निगरानी करते हैं

नदी/बेसिनप्रमुख बांध, जलाशय और परियोजनाएं
पेरियारइडुक्की जलाशय तंत्र, मुल्लापेरियार बांध, इडमलयार बांध, भूतथानकेट्टू बैराज
भरतपुझामालमपुझा, वालायर, मंगलम, पोथुंडी, चुल्लियार और कांजीरापुझा परियोजनाएं
पंबापंबा सिंचाई परियोजना, कक्की जलाशय और मनियार बैराज
कल्लडाकल्लडा सिंचाई परियोजना और कल्लडा (परप्पार/तेनमला) बांध व जलाशय
नेय्यारनेय्यार बांध और सिंचाई परियोजना
कुट्टियाडीकुट्टियाडी सिंचाई परियोजना और पेरुवन्नामूझी जलाशय

बेहतर नदी प्रबंधन के लिए आगे क्या जरूरी है?

केरलम में नदी संरक्षण का अर्थ केवल नदी की सफाई या किनारे पर निर्माण रोकना नहीं है। पश्चिमी घाट से निकलने वाली नदियां रास्ते में जंगलों, खेतों, शहरों, बांधों, भूजल, बैकवाटर और आर्द्रभूमियों से जुड़ते हुए समुद्र तक पहुंचती हैं।

इसलिए ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में जंगल, मिट्टी और छोटी धाराओं की स्थिति पर निगरानी जरूरी है। निचले हिस्से में सीवेज, औद्योगिक प्रदूषण, खारे पानी का प्रवेश, तटीय निर्माण और आर्द्रभूमि की जल धारण क्षमता पर ध्यान देना होगा।

वेम्बनाड इसका स्पष्ट उदाहरण है। वेम्बनाड से जुड़ी नदियों का प्रबंधन अलग-अलग करने से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती। इसके लिए नदी के बहाव, बांधों से छोड़े जाने वाले पानी, निचले इलाकों की जल धारण क्षमता और समुद्र तक पानी की निकासी, इन सभी को साथ देखना जरूरी है।

बाढ़ पूर्व चेतावनी, बांधों के संचालन नियम और पंबा की समेकित नदी बेसिन प्रबंधन योजना की दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं। लंबे समय के लिए नदी, भूजल, जलग्रहण क्षेत्र, बांध, आर्द्रभूमि और तट को जोड़कर जल प्रबंधन की योजना बनानी होगी।

केरलम की जल सुरक्षा केवल ज्यादा पानी जमा करने से तय नहीं होगी। जरूरी यह भी है कि मानसून के पानी का बेहतर इस्तेमाल हो, नदियों का प्राकृतिक बहाव बना रहे और पानी की गुणवत्ता तथा तटीय जल तंत्र सुरक्षित रहें।

प्रमुख आधिकारिक संदर्भ

केरलम वन विभाग: भौगोलिक स्वरूप

अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग: केरलम पर्यावरण सांख्यिकी संकलन 2014-15

केरलम राज्य योजना बोर्ड: आर्थिक समीक्षा 2024

केरलम राज्य योजना बोर्ड: आर्थिक समीक्षा 2025

केरलम सिंचाई विभाग: नदी बेसिन मानचित्र

पंबा नदी बेसिन के लिए समेकित नदी बेसिन प्रबंधन योजना

केरलम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण: बांध प्रबंधन

केंद्रीय जल आयोग: केरलम बाढ़ 2018 रिपोर्ट

केरलम इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान: वेम्बनाड नदी तलछट अध्ययन

केरलम वन विभाग: आर्द्रभूमियां

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