पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर राज्य (जिसे कांगलेइपाक भी कहा जाता है) में इम्फाल घाटी का मैदानी इलाका
फोटो: हाओरेइमा | CC BY-SA 4.0 (विकिमीडिया कॉमन्स)
मणिपुर की नदियां मुख्य रूप से मणिपुर और बराक नदी बेसिन से जुड़ी हैं।
मणिपुर नदी बेसिन की आठ प्रमुख नदियां इंफाल, इरिल, नम्बुल, सेक्मई, चकपी, वांगजिंग, थौबल और खुगा हैं।
बराक पश्चिमी मणिपुर की प्रमुख नदी है, जबकि लोकटक झील मणिपुर घाटी की नदी और आर्द्रभूमि व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बाढ़, मिट्टी का कटाव, गाद, नदी प्रदूषण और नदी तट कटाव राज्य की प्रमुख जल प्रबंधन चुनौतियां हैं।
मणिपुर की जल व्यवस्था पहाड़ियों, बीच में स्थित घाटी, नदियों, लोकटक झील और दूसरी आर्द्रभूमियों से मिलकर बनी है। राज्य का अधिकांश हिस्सा पहाड़ी है। इन पहाड़ियों से निकलने वाली नदियां घाटी और मैदानी इलाकों की ओर बहती हैं और खेती, सिंचाई, पेयजल और स्थानीय जल जरूरतों से जुड़ी हैं।
मणिपुर की नदी व्यवस्था की खास बात यह है कि राज्य की नदियां अलग-अलग नदी प्रणालियों से जुड़ती हैं। मध्य घाटी की नदियां मणिपुर नदी प्रणाली के जरिए आगे म्यांमार की चिंदविन नदी प्रणाली तक पहुंचती हैं। पश्चिमी हिस्से की बराक और उसकी सहायक नदियां असम की ओर बहती हैं। पूर्वी हिस्से की कुछ छोटी नदियां और जलधाराएं यू (Yu) नदी बेसिन से जुड़ी हैं।
मणिपुर के जल संसाधन विभाग के अनुसार राज्य का क्षेत्रफल 22,327 वर्ग किलोमीटर है। इसमें करीब 20,507 वर्ग किलोमीटर पहाड़ी इलाका और 1,820 वर्ग किलोमीटर समतल घाटी है। राज्य की दो प्रमुख नदी प्रणालियां मणिपुर और बराक नदी बेसिन हैं। लोकटक झील भी मणिपुर की जल व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मणिपुर में दो प्रमुख नदी बेसिन हैं। पहला है मणिपुर नदी बेसिन और दूसरा है बराक नदी बेसिन। दोनों की भौगोलिक स्थिति और बहाव की दिशा अलग है।
मणिपुर नदी बेसिन का जलग्रहण क्षेत्र करीब 6,332 वर्ग किलोमीटर है। राज्य के जल संसाधन विभाग के अनुसार इस बेसिन की आठ प्रमुख नदियां इंफाल, इरिल, नम्बुल, सेक्मई, चकपी, वांगजिंग, थौबल और खुगा हैं। ये नदियां आसपास की पहाड़ियों से निकलती हैं और घाटी की ओर बहती हैं।
बराक नदी बेसिन का मणिपुर में जलग्रहण क्षेत्र करीब 9,042 वर्ग किलोमीटर बताया गया है। इरांग, माकू और तुइवई इसकी प्रमुख सहायक नदियों में शामिल हैं। पश्चिमी मणिपुर में जिरी और लेइमाताक जैसी नदियां भी बराक नदी प्रणाली का हिस्सा हैं।
| नदी बेसिन | राज्य में मुख्य क्षेत्र | प्रमुख नदियां/जलधाराएं |
|---|---|---|
| मणिपुर नदी बेसिन | मध्य और दक्षिणी मणिपुर घाटी | इंफाल, इरिल, थौबल, सेक्मई, चकपी, नम्बुल, खुगा, मणिपुर |
| बराक नदी बेसिन | पश्चिमी मणिपुर | बराक, जिरी, माकू, इरांग, लेइमाताक, तुइवई |
| यू नदी बेसिन | पूर्वी मणिपुर | चामू, खुनौ और दूसरी छोटी धाराएं |
| लान्ये नदी बेसिन | उत्तरी मणिपुर का एक हिस्सा | उत्तरी पहाड़ी क्षेत्रों की जलधाराएं |
मणिपुर की राज्य आपदा प्रबंधन योजना (State Disaster Management Plan) के अनुसार, मणिपुर घाटी के 6,332 वर्ग किलोमीटर जलग्रहण क्षेत्र को नौ हिस्सों में बांटा गया है। इनमें इरिल का जलग्रहण क्षेत्र 1,260 वर्ग किलोमीटर, थौबल का 920, चकपी का 660 और इंफाल का 560 वर्ग किलोमीटर है। इसके अलावा लोकटक झील में गिरने वाली नदी प्रणालियों का जलग्रहण क्षेत्र लगभग 980 वर्ग किलोमीटर है।
मणिपुर में कई छोटी-बड़ी नदियां और पहाड़ी जलधाराएं हैं। राज्य की सभी नदियों की कोई एक निश्चित आधिकारिक संख्या उपलब्ध नहीं है।
| नदी | उद्गम स्थल | मणिपुर के प्रमुख क्षेत्र/जिले | कहां मिलती है |
|---|---|---|---|
| बराक | मणिपुर की पहाड़ियां, माओ के दक्षिण में, सेनापति | सेनापति, नोनी और पश्चिमी मणिपुर | आगे असम और बांग्लादेश में सुरमा-कुशियारा/मेघना नदी प्रणाली |
| इरांग | उत्तरी-पश्चिमी मणिपुर का पहाड़ी क्षेत्र | नोनी तथा आसपास का पहाड़ी क्षेत्र | बराक नदी |
| लेइमाताक | पश्चिमी मणिपुर का पहाड़ी क्षेत्र | नोनी | इरांग नदी |
| इंफाल | सेनापति की पहाड़ियां | कांगपोकपी, इंफाल घाटी, इंफाल पश्चिम, थौबल क्षेत्र | आगे मणिपुर नदी प्रणाली |
| इरिल | मणिपुर घाटी के उत्तर-पूर्व की पहाड़ियां | कांगपोकपी/इंफाल पूर्व और घाटी क्षेत्र | इंफाल नदी |
| थौबल | उखरुल की पहाड़ी शृंखलाएं | उखरुल, थौबल | इंफाल नदी |
| नम्बुल | मणिपुर घाटी के पश्चिम की पहाड़ियां | इंफाल पश्चिम, इंफाल शहर, बिष्णुपुर | लोकटक झील |
| सेक्मई | घाटी के आसपास की पहाड़ियां | इंफाल घाटी और आसपास का क्षेत्र | मणिपुर नदी प्रणाली |
| चकपी | दक्षिण-पूर्वी मणिपुर की पहाड़ियां | चंदेल क्षेत्र | मणिपुर नदी |
| वांगजिंग | उखरुल की पहाड़ियां | थौबल | लूशी पाट (Loushi Pat) क्षेत्र |
| खुगा | चुराचांदपुर क्षेत्र की पहाड़ियां | चुराचांदपुर और दक्षिणी घाटी | मणिपुर नदी |
| जिरी | पश्चिमी मणिपुर की पहाड़ियां | जिरीबाम और पश्चिमी मणिपुर | बराक नदी |
| माकू/माकरू | पश्चिमी मणिपुर की पहाड़ियां | पश्चिमी पहाड़ी क्षेत्र | बराक नदी |
| तुइवई | मणिपुर-मिजोरम पहाड़ी क्षेत्र | दक्षिण-पश्चिमी मणिपुर | बराक नदी |
*बराक, इरांग, माकरू और लेइमाताक की लंबाई संबंधी जानकारी मणिपुर सरकार की Noney District Survey Report से ली गई है। रिपोर्ट बराक की 564 किमी लंबाई को उद्गम से असम की दिशा में आगे के हिस्से के संदर्भ में देती है। इरांग की स्रोत से संगम तक लंबाई लगभग 160 किमी और माकरू की लगभग 80 किमी बताई गई है। इसलिए इन आंकड़ों को मणिपुर के भीतर बहने वाली लंबाई नहीं समझा जाना चाहिए।
बराक पश्चिमी मणिपुर की प्रमुख नदी है। इसका उद्गम सेनापति जिले में माओ के दक्षिण की मणिपुर पहाड़ियों में बताया गया है। जिरी, माकरू, इरांग और तुइवई जैसी नदियां इसकी नदी प्रणाली से जुड़ी हैं। मणिपुर से निकलने के बाद बराक असम की ओर बहती है और आगे सुरमा-कुशियारा तथा मेघना नदी प्रणाली से जुड़ती है।
इंफाल मणिपुर घाटी की प्रमुख नदियों में है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार इसका उद्गम कांगपोकपी के पास होता है। आगे इरिल और थौबल नदियां इसमें मिलती हैं। दक्षिण की ओर खुगा के मिलने के बाद यह मणिपुर नदी के रूप में आगे बहती है।
थौबल मणिपुर घाटी की प्रमुख नदियों में है। इसका जलग्रहण क्षेत्र लगभग 920 वर्ग किलोमीटर है और यह आगे इंफाल नदी में मिलती है। थौबल नदी पर बहुउद्देशीय परियोजना बनाई गई है, जो सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत से जुड़ी है।
नम्बुल इंफाल शहर से गुजरने वाली प्रमुख नदी है। यह आगे लोकटक झील में गिरती है। इंफाल के शहरी क्षेत्र से गुजरते हुए नम्बुल में सीवेज और ठोस कचरा पहुंचता है।
मणिपुर की नदी व्यवस्था को समझने में लोकटक झील और उसका जलग्रहण क्षेत्र खास महत्व रखते हैं। राज्य की आपदा प्रबंधन योजना के अनुसार लोकटक में गिरने वाली नदी प्रणालियों का जलग्रहण क्षेत्र लगभग 980 वर्ग किलोमीटर है। नम्बुल सहित कई छोटी नदियां और जलधाराएं झील से जुड़ी हैं।
ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से आने वाली गाद और प्रदूषण का असर लोकटक तक पहुंच सकता है। इसलिए झील के प्रबंधन में उससे जुड़ी नदियों और पूरे जलग्रहण क्षेत्र को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
मणिपुर की सभी छोटी नदियां किसी एक मुख्य नदी की सहायक नदी नहीं हैं। कुछ नदियां झीलों और दूसरी जलधाराओं के जरिए बड़ी नदी प्रणालियों से जुड़ती हैं। इसलिए नीचे केवल प्रमुख नदी प्रणालियों से जुड़ी चुनिंदा सहायक नदियां दी गई हैं।
| मुख्य नदी | प्रमुख सहायक नदी/जलधारा | उद्गम/प्रमुख क्षेत्र | मुख्य नदी से संबंध |
|---|---|---|---|
| बराक | इरांग | पश्चिमी/उत्तर-पश्चिमी मणिपुर की पहाड़ियां | बराक में मिलती है |
| बराक | माकू/माकरू | पश्चिमी पहाड़ी क्षेत्र | बराक में मिलती है |
| बराक | तुइवई | दक्षिण-पश्चिमी पहाड़ी क्षेत्र | बराक में मिलती है |
| बराक | जिरी | पश्चिमी मणिपुर | बराक में मिलती है |
| इरांग | लेइमाताक | नोनी का पहाड़ी क्षेत्र | इरांग में मिलती है |
| इरांग | तुइपिलुई | नोनी क्षेत्र | इरांग में मिलती है |
| इंफाल | इरिल | उत्तर-पूर्वी पहाड़ी क्षेत्र | इंफाल में मिलती है |
| इंफाल | थौबल | उखरुल की पहाड़ियां | इंफाल में मिलती है |
| मणिपुर नदी | खुगा | चुराचांदपुर क्षेत्र | मणिपुर नदी में मिलती है |
| मणिपुर नदी | चकपी | दक्षिण-पूर्वी पहाड़ी क्षेत्र | मणिपुर नदी में मिलती है |
मणिपुर की नदियां खेती, सिंचाई, पेयजल, जलविद्युत, मत्स्य संसाधन और स्थानीय आजीविका से जुड़ी हैं। थौबल, खुगा और सिंगदा जैसी परियोजनाएं सिंचाई और जलापूर्ति में भूमिका निभाती हैं। लोकटक और उससे जुड़ी जल व्यवस्था मत्स्य संसाधन और जलविद्युत के लिए भी महत्वपूर्ण है।
| क्षेत्र | नदियों की भूमिका | प्रमुख उदाहरण |
|---|---|---|
| पेयजल | शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जल उपलब्ध कराना | इंफाल घाटी की नदियां; सिंगदा परियोजना सिंचाई के साथ जलापूर्ति से भी जुड़ी है |
| खेती और सिंचाई | खेतों तक पानी पहुंचाना और घाटी में कृषि को सहारा देना | थौबल, खुगा और मणिपुर नदी बेसिन की सिंचाई परियोजनाएं |
| जलविद्युत | नदियों और जलाशयों के पानी से बिजली उत्पादन | लोकटक जलविद्युत परियोजना; बराक और इरांग बेसिन में जलविद्युत की संभावनाएं |
| मत्स्य संसाधन | नदियों, झीलों और आर्द्रभूमियों में मछली संसाधन उपलब्ध कराना | लोकटक झील और उससे जुड़ी नदी-आर्द्रभूमि प्रणाली; बराक और इरांग क्षेत्र |
| आजीविका | मछली पालन, खेती और नदी-आर्द्रभूमि से मिलने वाले दूसरे संसाधनों के जरिए रोजगार | लोकटक के आसपास के समुदाय और नदी घाटियों की ग्रामीण आबादी |
| जैव विविधता | नदियों, झीलों और आर्द्रभूमियों से जुड़े जलीय और स्थलीय जीवों के लिए आवास | लोकटक झील–केइबुल लामजाओ क्षेत्र और बराक बेसिन |
| बाढ़ और जल निकासी | पहाड़ियों से आने वाले वर्षाजल को घाटी से बाहर निकालने की प्राकृतिक व्यवस्था | इंफाल, इरिल, थौबल और मणिपुर नदी प्रणाली |
मणिपुर में नदियों और जलाशयों पर सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत से जुड़ी कई परियोजनाएं विकसित की गई हैं।
| नदी/बेसिन | प्रमुख बांध, जलाशय और परियोजनाएं |
|---|---|
| थौबल नदी | थौबल बहुउद्देशीय परियोजना (Maphou Dam/Thoubal Multipurpose Project) |
| खुगा नदी | खुगा बहुउद्देशीय परियोजना (Khuga Multipurpose Project) |
| सिंगदा नदी/मणिपुर बेसिन | सिंगदा बांध और जलाशय (Singda Dam) |
| लोकटक–मणिपुर नदी प्रणाली | लोकटक जलविद्युत परियोजना (Loktak Hydroelectric Project), इथाई बैराज (Ithai Barrage) |
| बराक नदी बेसिन | तिपाईमुख बहुउद्देशीय परियोजना (Tipaimukh Multipurpose Project) — प्रस्तावित |
इनमें लोकटक पावर स्टेशन की स्थापित क्षमता 105 मेगावाट है।
मणिपुर घाटी चारों ओर से पहाड़ियों से घिरी है। भारी बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों से पानी तेजी से घाटी में आता है। इससे इंफाल, इरिल, थौबल और दूसरी नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है। नदियों के तटबंध टूटने पर निचले क्षेत्रों में बाढ़ और जलभराव की समस्या बढ़ती है।
पहाड़ी क्षेत्रों में तेज ढलान और भारी बारिश के कारण मिट्टी का कटाव होता है। इसके साथ बहकर आने वाली मिट्टी नदियों, झीलों और आर्द्रभूमियों में जमा होती है। बारिश के साथ पहाड़ियों से बहकर आने वाली मिट्टी और गाद नदियों के रास्ते नीचे के इलाकों और लोकटक क्षेत्र तक पहुंचती है।
शहरी क्षेत्रों से गुजरने वाली नदियों पर सीवेज और ठोस कचरे का दबाव है। नम्बुल इसका प्रमुख उदाहरण है। यह नदी इंफाल से होकर लोकटक झील में गिरती है। इसलिए नदी में पहुंचने वाला प्रदूषण आगे लोकटक की जल गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकता है।
बरसात में तेज प्रवाह पहाड़ी और घाटी दोनों क्षेत्रों की नदियों के किनारों को प्रभावित करता है। मणिपुर में बाढ़ नियंत्रण और नदी तट संरक्षण इसलिए जल संसाधन विभाग के प्रमुख कामों में शामिल हैं।
मणिपुर में नदी प्रबंधन केवल तटबंध बनाने या बाढ़ के समय राहत तक सीमित नहीं है। इसमें नदी पुनर्जीवन, आर्द्रभूमि संरक्षण, जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और जल संबंधी आंकड़ों की निगरानी जैसे काम भी शामिल हैं।
| पहल | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|
| नम्बुल नदी का पुनर्जीवन और संरक्षण (NRCP) | प्रदूषण नियंत्रण और जल गुणवत्ता सुधार |
| लोकटक आर्द्रभूमि की समेकित प्रबंधन योजना | लोकटक झील और जलग्रहण क्षेत्र का संरक्षण |
| लोकटक जलग्रहण क्षेत्र संरक्षण | मिट्टी का कटाव और गाद कम करना |
| बाढ़ प्रबंधन एवं सीमा क्षेत्र कार्यक्रम (FMBAP) | बाढ़ जोखिम और नुकसान कम करना |
| नदी तट संरक्षण और बाढ़ सुरक्षा | कटाव और तट टूटने से बचाव |
| जल निगरानी और आंकड़ा व्यवस्था | नदी प्रवाह, जलस्तर और वर्षा की निगरानी |
| बांध और बैराज सुरक्षा | जल संरचनाओं की सुरक्षा और रखरखाव |
मणिपुर सरकार के 2025-26 के बजट में नम्बुल नदी के पुनर्जीवन और संरक्षण तथा लोकटक आर्द्रभूमि की समेकित प्रबंधन योजना के लिए प्रावधान किया गया है। राज्य में राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना (National Hydrology Project) के तहत जल संबंधी आंकड़ों और निगरानी की व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।
मणिपुर में नदी प्रबंधन का अर्थ केवल नदी की सफाई या तटबंध बनाना नहीं है। पहाड़ियों से निकलने वाली नदियां जंगलों, खेतों, शहरों, झीलों और आर्द्रभूमियों से जुड़ती हैं। इसलिए नदी के साथ उसके पूरे जलग्रहण क्षेत्र को देखना जरूरी है।
ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में मिट्टी के कटाव और गाद को कम करने, शहरी क्षेत्रों में सीवेज और ठोस कचरे को नदियों तक पहुंचने से रोकने और बाढ़ के दौरान नदी प्रवाह, जलस्तर तथा बारिश की निगरानी बेहतर करने की जरूरत है।
लोकटक और उससे जुड़ी नदियां दिखाती हैं कि नदी, झील और जलग्रहण क्षेत्र को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। मणिपुर की जल सुरक्षा के लिए इन प्राकृतिक जल प्रणालियों के बीच संबंध को ध्यान में रखकर प्रबंधन करना जरूरी है।
प्रमुख प्रामाणिक स्रोत
मणिपुर जल संसाधन विभाग - राज्य के नदी बेसिन और जल संसाधन
मणिपुर जल संसाधन विभाग - सिंचाई और बहुउद्देशीय परियोजनाएं
केंद्रीय जल समिति(CWC) - भारत के जल संसाधनों का आकलन 2024
राज्य आपदा प्रबंधन योजना, मणिपुर सरकार
जापानी सरकार - नोनी जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट, मणिपुर सरकार
वन एवं पर्यावरण बजट 2025-26, मणिपुर सरकार
एनएचपीसी - लोक पावर स्टेशन, मणिपुर सरकार
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