कच्चे तालाब में डुबा दिये साढ़े आठ लाख

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दैनिक जागरण, 13 अप्रैल 2018

देहरादून। चकराता ब्लॉक की बेगी ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत कच्चे तालाब निर्माण के नाम पर साढ़े आठ लाख रुपए की वित्तीय अनियमितता सामने आई है। पूर्व प्रधान ने कुछ कार्य दूसरी ग्राम पंचायत में करा दिये तो कुछ कार्य हुये नहीं और उसके नाम पर भुगतान हो गया। अब जिलाधिकारी की ओर से पूर्व प्रधान को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जवाब आने के बाद वसूली की कार्रवाई की जाएगी।

बेगी निवासी फकीर चन्द ने जिलाधिकारी से इस सम्बन्ध में शिकायत की थी कि वर्ष 2007 से 2010 के मध्य विभिन्न कार्यों में बड़ी वित्तीय गड़बड़ी की गई है। इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर जाँच शुरू कराई थी। जाँच में सामने आया कि पूर्व ग्राम प्रधान ने छह ऐसी जगह तालाब निर्माण कराया, जो क्षेत्र उक्त पंचायत में आता ही नहीं था। इस पर चार लाख 27 हजार रुपए खर्च किये गये।

इसके अलावा पाँच मामले ऐसे हैं, जहाँ तालाब निर्माण दिखाया, लेकिन जाँच के दौरान वहाँ कुछ भी नही मिला। साथ ही निर्माण सामग्री ढुलान के नाम पर भी फर्जी भुगतान किया गया। जिन लोगों को भुगतान होना दर्शाया गया है, उन्होंने भी जाँच समिति को लिखित में दिया है कि उन्होंने ऐसा कोई काम किया ही नहीं। आरोप है कि खाते से पैसा निकालने के लिये उनके फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया।

मुख्य विकास अधिकारी जी.एस. रावत ने बताया कि उप जिलाधिकारी चकराता से कार्यस्थल चिन्हित करने के लिये पत्र लिखा गया था। चकराता तहसील के राजस्व उप निरीक्षक ने जाँच की और रिपोर्ट दी कि कौन-कौन से कार्यस्थल उक्त पंचायत क्षेत्र से बाहर हैं। मनरेगा के नियमानुसार दूसरे क्षेत्र में काम नहीं कराया जा सकता। नोटिस जारी करने के 20 दिन के भीतर पूर्व प्रधान को जवाब देना होगा। अगर कोई जवाब नहीं आता तो माना जाएगा कि उन्हें आरोप मान्य हैं।

बंजारवाला ग्राम प्रधान को भी नोटिस

हिण्डन सेवा - सरकार और समाज का अनूठा संगम

Author: 
रमन त्यागी

हिंडन की सफाईहिंडन की सफाईकल नहीं आज और आज नहीं अब.......इसी भाव के साथ डॉ. प्रभात कुमार ने जुलाई 2017 को हिण्डन नदी को बदहाली से उबारने का साहसी निर्णय लिया था। उस निर्णय का प्रतिफल था ‘निर्मल हिण्डन कार्यक्रम’ का जन्म। लगभग एक वर्ष के अपने सफर में निर्मल हिण्डन कार्यक्रम ने हिण्डन सेवा के रूप में समाज और सरकार के समन्वय का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया।

हिण्डन सेवा का कार्य इस सोच के साथ प्रारम्भ किया गया था कि हिण्डन व उसकी सहायक नदियों को समाज के सहयोग से गन्दगी मुक्त किया जाएगा। इस कार्य के लिये सभी आमंत्रित थे। किसी पर कोई दबाव नहीं था पर सेवा में लोग भाग लें इसके लिये आग्रह जरूर किया गया था। इस आग्रह पर समाज ने भी निराश नहीं किया और उठ खड़ा हुआ हिण्डन सेवा के लिये। साथ बैठे, बात हुई, रणनीति बनी और हिण्डन सेवा प्रारम्भ हो गई।

22 अप्रैल का दिन इस बात का साक्षी बना जब सरकार और समाज के नुमाइंदे उल्लास के साथ हिण्डन को गंदगीमुक्त करने के उद्देश्य से उसमें कूद पड़े। सेवा का यह कार्य पुरा महादेव के निकट से बहती हिण्डन नदी से प्रारम्भ हुआ। नदी मेरठ और बागपत जनपद की सीमा रेखा है। इसके पूर्वी दिशा में मेरठ तथा पश्चिम में बागपत जनपद हैं।

दोनों जनपदों की सीमा पर हिण्डन नदी की सेवा का कार्य एक साथ प्रारम्भ किया गया। मेरठ व बागपत दोनों ही जनपदों के प्रशासनिक अधिकारी, गाँवों के प्रधान, बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, स्वयंसेवक व राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ता जुट पड़े नदी सेवा में।

भयंकर प्रदूषण के कारण जिस हिण्डन नदी के निकट खड़ा होना भी दूभर था उत्साह से लबरेज लोगों ने एक ही दिन में उसके करीब एक किलोमीटर हिस्से की सफाई कर दी।

बढ़ती कार्बन डाइऑक्साइड से फसलों में बढ़ सकता है कीट प्रकोप

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इंडिया साइंस वायर, 11 मई, 2018

डॉ. गुरु प्रसन्ना पांडीडॉ. गुरु प्रसन्ना पांडी वातावरण में लगातार बढ़ रही कार्बन डाइऑक्साइड के कारण फसल उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, पर इसके साथ ही फसलों के लिये हानिकारक कीटों की आबादी में भी बढ़ोत्तरी हो सकती है।

धान की फसल और उसमें लगने वाले भूरा फुदका कीट पर कार्बन डाइऑक्साइड की बढ़ी हुई मात्रा के प्रभावों का अध्ययन करने के बाद कटक स्थित राष्ट्रीय चावल अनुसन्धान संस्थान और नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान के वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुँचे हैं।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि वर्ष 2050 में कार्बन डाइऑक्साइड 550 पीपीएम और वर्ष 2100 में 730–1020 पीपीएम तक पहुँच जाएगी। भविष्य में फसलों और कीटों दोनों के अनुकूलन पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।

भूरा फुदका कीट अध्ययन के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड की अलग-अलग दो तरह की मात्राओं क्रमशः 390 से 392 पीपीएम और 578 से 584 पीपीएम के वातावरण में चावल की पूसा बासमती-1401 किस्म को बरसात के मौसम के दौरान 2.5 मीटर ऊँचे और तीन मीटर चौड़े ऊपर से खुले हुए कक्ष में नियंत्रित परिस्थितियों में उगाया गया था। समयानुसार पौधों को भूरा फुदका (ब्राउन प्लांट हापर) कीट, जिसका वैज्ञानिक नाम नीलापर्वता लुजेन्‍स है, से संक्रमित कराया गया।

स्वच्छ पर्यावरण के लिये विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार

Author: 
उमाशंकर मिश्र
Source: 
इंडिया साइंस वायर, 10 मई, 2018

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित प्रदर्शनी में भाग लेते बच्चेविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित प्रदर्शनी में भाग लेते बच्चे नई दिल्ली। कचरा प्रबन्धन, दूषित जल शोधन, प्रदूषण नियंत्रण, हरित और सौर ऊर्जा के उपयोग समेत विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी आधारित कुछ ऐसे प्रयोग हैं, जो स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चत करने में मददगार हो सकते हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित एक प्रदर्शनी में इसी तरह के प्रयोगों पर आधारित तकनीकी एवं वैज्ञानिक नवाचारों को दर्शाया गया है।

इस प्रदर्शनी का उद्घाटन 7 मई को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने किया। नई दिल्ली के टेक्नोलॉजी भवन में लगी इस प्रदर्शनी का बृहस्पतिवार को अन्तिम दिन था। इस प्रदर्शनी को देखने के लिये हर रोज बड़ी संख्या में लोग पहुँच रहे थे, जिनमें स्कूली बच्चों की संख्या सबसे अधिक थी। स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत चल रहे स्वच्छता पखवाड़े के दौरान पर्यावरण की स्वच्छता में योगदान देने वाली प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शनी में पोस्टर्स और मॉडल्स के जरिये प्रदर्शित किया गया।

समझें नदियों की भाषा


जंगल ही वास्तव में नदियों को बचाने के यंत्र हैं। वृक्षारोपण करते समय बहुत सावधानी से प्रजातियों का चयन किया जाना चाहिए ताकि नदियों को संरक्षित करने में हमें सहायता मिल सके। उन्होंने 6वीं सदी में वाराहमिहिर द्वारा लिखी वराहसंहिता का उल्लेख भी किया जिसमें भूजल और वृक्षों पर आधारित अनेक लक्षणों का विवरण उपलब्ध है। यह ग्रन्थ नदी संरक्षण पर काम करने वाले लोगों के लिये पथ प्रदर्शक का काम कर सकती है। भोपाल के सप्रे संग्रहालय में 17 अप्रैल को नदी मित्रों का जमावड़ा लगा था। मौका था मध्य प्रदेश के नर्मदा कछार की सूखती नदियों को फिर से अविरल बनाने पर चिन्तन का। चिन्तन दो घंटे तक जारी रहा जिसमें वन विभाग के अफसर, बाँध निर्माण से जुड़े सिविल इंजीनियर, भूवैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता और मीडिया से जुड़े लोगों ने भाग लिया।

चिन्तन का लब्बोलुआब था नदियों को समग्रता में समझकर ही उन्हें संरक्षित किया जा सकता है। और इस कार्य में सबको अपनी सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी। एकांगी सोच नदियों के पुनर्जीवन का आधार नहीं हो सकती। बैठक की अध्यक्षता भारतीय वन सेवा के पूर्व अतिरिक्त मुख्य वन संरक्षक विनायक सिलेकर ने की और अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों ने अपनी बातें रखीं।

नारायणबगड़ में बादल फटा कुमाऊँ में दो लोगों की मौत

Source: 
अमर उजाला, 03 मई 2018

उत्तरकाशी जिले में जगह-जगह भूस्खलन होने से गंगोत्री एवं यमुनोत्री राजमार्ग करीब चार घंटे अवरुद्ध रहा। हालांकि बीआरओ और राजमार्ग खंड द्वारा जल्द ही मलबा हटाकर यातायात बहाल कर दिया गया। जौनसार बावर में तीन घरों की छत उड़ने के साथ ही 74 गाँवों की बत्ती गुल हो गई। उधर, देहरादून में कई जगह पेड़ गिरने से यातायात बाधित रहा। कई होर्डिंग्स और दुकानों के बोर्ड हवा में उड़ गए।

पर्यावरण संरक्षण के लिये पहल शुरू

Source: 
अमर उजाला, 25 अप्रैल 2018

वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन, निर्माण की गतिविधियाँ, खुले में कूड़ा जलाना और सड़क की धूल। प्रदूषण के इन कारकों को दूर करने के लिये पुरानी गाड़ियों को चरणबद्ध रूप से हटाने का तंत्र विकसित करना होगा। वाहनों के प्रदूषण की जाँच करनी होगी। ई-रिक्शा, ई-कार, ई-बस, ई-बाइक को बढ़ावा देना होगा। भीड़भाड़ वाले इलाकों में वाहनों का प्रवेश रोकना होगा। खुले में कचरे को जलाने पर प्रतिबन्ध लगाना होगा और रात में सफाई का इन्तजाम करना होगा। देहरादूनः शहर में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिये एक कारगर रणनीति बनाने की बाद हुई है। इसके लिये पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल बनाया गया है। इसके साथ ही परिवहन, नगर विकास, वन, लोक निर्माण, पुलिस आदि विभागों को इसमें शामिल किया जाएगा। इस सिलसिले में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने मंगलवार को सचिवालय में अधिकारियों संग बैठक की।

बैठक में प्रस्तुतीकरण के जरिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव एसपी सुबुद्धि ने मॉनिटरिंग की वर्तमान स्थिति से सभी को अवगत कराया। बताया कि वर्तमान में प्रदूषण की मॉनिटरिंग पीएम (पार्टिकुलेट मैटर) 2.5, पीएम 10, एसओएक्स (सल्फर अॉक्साइड), एनओएक्स (नाइट्रोजन अॉक्साइड) के आधार पर की जा रही है। घंटाघर, रायपुर, हिमालयन ड्रग और आईएसबीटी पर स्टेशन बनाए गए हैं। खासतौर से प्रदूषण के चार कारक पाये गए हैं।

अब गाँव-गाँव होंगे क्लाइमेट मैनेजर

Author: 
अरविंद पांडेय
Source: 
दैनिक जागरण, 17 मार्च, 2018

मंत्रालय से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक योजना के तहत प्रत्येक गाँव से कम से कम एक युवा को इस प्रशिक्षण प्रोग्राम में शामिल किया जाएगा। इसके लिये पंचायतों से ही प्रस्ताव माँगे जाएँगे। पंचायतों की माँग के मुताबिक, यह संख्या बढ़ भी सकती है।

मोजेक इण्डिया फाउंडेशन द्वारा कृषि वैज्ञानिक का सम्मान

Source: 
मोजेक इण्डिया फाउंडेशन

कृषि ज्योति परियोजना की 10वीं सालगिरह


अलवर के रामगढ़ ब्लॉक के गाँव मिलकपुर में सरकारी उच्च माध्यमिक स्कूल समेत कई स्कूलों की नवीनीकरण किया गया है। स्कूल नवीनीकरण परियोजना के सफलतापूर्वक पूरा होने पर आज अलवर में भी एक बड़े सामुदायिक समारोह का आयोजन भी किया गया है। स्कूल में कई ढाँचागत सुधार किये गए हैं जिसमें स्कूल की चारदीवारी की ऊँचाई बढ़ाना, लड़कियों और लड़कों के लिये अलग-अलग शौचालयों की व्यवस्था, कमरों व रसोई घर की मरम्मत और पीने के पानी की सुविधा शामिल है।