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खासम-खास

Submitted by UrbanWater on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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Submitted by HindiWater on Tue, 07/27/2021 - 11:35
Source:
रिपोर्ट-अंकित तिवारी
मिलिए 12 हज़ार गायों को बचाने वाले गौरक्षक से
अब तक हजारों गायों का  इलाज कर चुके प्रशांत बताते है कि वह अपने जिले में एक एनिमल इमरजेंसी सेवा भी संचालित करते है जिसमें वह हाइवे में बीमार और सड़क दुर्घटना में चोटिल  गायों को रेस्क्यू कर उनका निशुल्क  इलाज करते है और तब तक उसे छोड़ते नही जब तक वह पूरी तरह स्वास्थ्य ना हो जाए। प्रशांत आगे कहते है कि उनकी संस्था हर साल गायों के इलाज पर  8 से 10 लाख रुपए खर्च करती है । और उन्हें ये पूरा ख़र्चा आमजन के सहयोग से प्राप्त होता है। 
Submitted by HindiWater on Mon, 07/26/2021 - 15:01
Source:
स्वस्थ गंगा: अविरल गंगा: निर्मल गंगा
अगस्त 2009 में यमुना, महानदी, गोमती और दामोदर की सफाई को जोड़कर गंगा एक्सन प्लान (द्वितीय ) प्रारंभ किया गया। जुलाई 2013 की केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल की रिपोर्ट बताती है कि गंगोत्री से लेकर डायमण्ड हार्बर तक समूची गंगा मैली है। इसके अतिरिक्त, हिमालयीन इलाके की जल विद्युत योजनाओं द्वारा रोके पानी और मैदानी इलाकों में सिंचाई, उद्योगों और पेयजल के लिये, विभिन्न स्रोतों से उठाये पानी के कारण गंगा तक के प्रवाह पर संकट के बादल हैं।  कहा जा सकता है कि सन 1986 में प्रारंभ किये गंगा एक्शन प्लान का नजरिया सीमित था पर हालिया विमर्शों तथा सामाजिक संगठनों के सुझावों के कारण, गंगा नदी तंत्र से जुड़े गंभीर मुद्दों की समझ बेहतर हुई है। अनेक नये और प्रासंगिक आयाम सामने आये हैं। योजना प्रबन्धकों की समझ बेहद परिष्कृत हुई है।
Submitted by HindiWater on Mon, 07/26/2021 - 12:59
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मन की बात
पीएम मोदी का बचपन जहाँ गुजरा कभी वहां था सूखा आज बदल गई पूरी तस्वीर 
प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा भारत के सांस्कृतिक जीवन में, हमारे दैनिक जीवन में, रचा बसा हुआ है। वहीं, बारिश और मानसून हमेशा से हमारे विचारों, हमारी फिलोसोसोफी और हमारी सभ्यता को आकार देते आए हैं। ऋतुसंहार और मेघदूत में महाकवि कालिदास ने वर्षा को लेकर बहुत ही सुंदर वर्णन किया है। साहित्य प्रेमियों के बीच ये कवितायें आज भी बेहद लोकप्रिय हैं। ऋग्वेद के पर्जन्य सुक्तम में भी वर्षा के सौन्दर्य का खूबसूरती से वर्णन है। इसी तरह, श्रीमद् भागवत में भी काव्यात्मक रूप से पृथ्वी, सूर्य और वर्षा के बीच के संबंधों को विस्तार दिया गया है।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Fri, 07/09/2021 - 11:44
पानी की किल्लत से जूझ रहे ग्रामीणों ने नई तरकीब निकाली
जिला देहरादून के जनजातीय क्षेत्र जौनसार में गर्मी का मौसम आते ही  यहां के लोगो को पानी कि किल्लत से जूझना पड़ता है आज हम आपको जनजातीय क्षेत्र जौनसार के कालसी ब्लॉक अंतर्गत एक गांव गांगरो की तस्वीरें दिख रहे है जहां पानी की समस्या से लोगो को रोज़ जूझना पड़ता है जिसे देखते हुए सड़क पर एक हैंड पंप की व्यवस्था की गई क्योंकि गांव में  जो परंपरागत जल स्रोत है वो यहां रह रहे करीब एक हजार लोगों को पानी की पूर्ति नही कर पा रहा है 

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।
Submitted by HindiWater on Thu, 06/10/2021 - 12:03
Source:
मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।
Submitted by HindiWater on Wed, 04/21/2021 - 14:24
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विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे ।

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खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by UrbanWater on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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मिलिए 12 हज़ार गायों को बचाने वाले गौरक्षक से

Submitted by HindiWater on Tue, 07/27/2021 - 11:35
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रिपोर्ट-अंकित तिवारी
मिलिए 12 हज़ार गायों को बचाने वाले गौरक्षक से
अब तक हजारों गायों का  इलाज कर चुके प्रशांत बताते है कि वह अपने जिले में एक एनिमल इमरजेंसी सेवा भी संचालित करते है जिसमें वह हाइवे में बीमार और सड़क दुर्घटना में चोटिल  गायों को रेस्क्यू कर उनका निशुल्क  इलाज करते है और तब तक उसे छोड़ते नही जब तक वह पूरी तरह स्वास्थ्य ना हो जाए। प्रशांत आगे कहते है कि उनकी संस्था हर साल गायों के इलाज पर  8 से 10 लाख रुपए खर्च करती है । और उन्हें ये पूरा ख़र्चा आमजन के सहयोग से प्राप्त होता है। 

स्वस्थ गंगा: अविरल गंगा: निर्मल गंगा

Submitted by HindiWater on Mon, 07/26/2021 - 15:01
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कृष्ण गोपाल व्यास
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स्वस्थ गंगा: अविरल गंगा: निर्मल गंगा
अगस्त 2009 में यमुना, महानदी, गोमती और दामोदर की सफाई को जोड़कर गंगा एक्सन प्लान (द्वितीय ) प्रारंभ किया गया। जुलाई 2013 की केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल की रिपोर्ट बताती है कि गंगोत्री से लेकर डायमण्ड हार्बर तक समूची गंगा मैली है। इसके अतिरिक्त, हिमालयीन इलाके की जल विद्युत योजनाओं द्वारा रोके पानी और मैदानी इलाकों में सिंचाई, उद्योगों और पेयजल के लिये, विभिन्न स्रोतों से उठाये पानी के कारण गंगा तक के प्रवाह पर संकट के बादल हैं।  कहा जा सकता है कि सन 1986 में प्रारंभ किये गंगा एक्शन प्लान का नजरिया सीमित था पर हालिया विमर्शों तथा सामाजिक संगठनों के सुझावों के कारण, गंगा नदी तंत्र से जुड़े गंभीर मुद्दों की समझ बेहतर हुई है। अनेक नये और प्रासंगिक आयाम सामने आये हैं। योजना प्रबन्धकों की समझ बेहद परिष्कृत हुई है।

पीएम मोदी का बचपन जहाँ गुजरा कभी वहां था सूखा आज बदल गई पूरी तस्वीर 

Submitted by HindiWater on Mon, 07/26/2021 - 12:59
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मन की बात
पीएम मोदी का बचपन जहाँ गुजरा कभी वहां था सूखा आज बदल गई पूरी तस्वीर 
प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा भारत के सांस्कृतिक जीवन में, हमारे दैनिक जीवन में, रचा बसा हुआ है। वहीं, बारिश और मानसून हमेशा से हमारे विचारों, हमारी फिलोसोसोफी और हमारी सभ्यता को आकार देते आए हैं। ऋतुसंहार और मेघदूत में महाकवि कालिदास ने वर्षा को लेकर बहुत ही सुंदर वर्णन किया है। साहित्य प्रेमियों के बीच ये कवितायें आज भी बेहद लोकप्रिय हैं। ऋग्वेद के पर्जन्य सुक्तम में भी वर्षा के सौन्दर्य का खूबसूरती से वर्णन है। इसी तरह, श्रीमद् भागवत में भी काव्यात्मक रूप से पृथ्वी, सूर्य और वर्षा के बीच के संबंधों को विस्तार दिया गया है।

प्रयास

पानी की किल्लत से जूझ रहे ग्रामीणों ने नई तरकीब निकाली

Submitted by HindiWater on Fri, 07/09/2021 - 11:44
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पानी की किल्लत से जूझ रहे ग्रामीणों ने नई तरकीब निकाली
जिला देहरादून के जनजातीय क्षेत्र जौनसार में गर्मी का मौसम आते ही  यहां के लोगो को पानी कि किल्लत से जूझना पड़ता है आज हम आपको जनजातीय क्षेत्र जौनसार के कालसी ब्लॉक अंतर्गत एक गांव गांगरो की तस्वीरें दिख रहे है जहां पानी की समस्या से लोगो को रोज़ जूझना पड़ता है जिसे देखते हुए सड़क पर एक हैंड पंप की व्यवस्था की गई क्योंकि गांव में  जो परंपरागत जल स्रोत है वो यहां रह रहे करीब एक हजार लोगों को पानी की पूर्ति नही कर पा रहा है 

नोटिस बोर्ड

गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग का आयोजन 

Submitted by HindiWater on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार

Submitted by HindiWater on Thu, 06/10/2021 - 12:03
media-dialogue-:jalvayu-sankat-or-bihar
मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता

Submitted by HindiWater on Wed, 04/21/2021 - 14:24
vishva-prithvi-divas-2021:corona-sankat-k-beach-paryavaraniya-chinta
 विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे ।

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