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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Mon, 01/13/2020 - 22:17
नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह की बहाली 
भारत की लगभग सभी नदियों का मानसूनी प्रवाह लगभग अप्रभावित है, पर उनके गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी आ रही है। अर्थात समस्या केवल नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने की ही है। गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने के कारण छोटी तथा मंझौली नदियाँ मौसमी बनकर रह गई हैं। यह असर व्यापक है।

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Submitted by HindiWater on Sat, 01/25/2020 - 16:13
Source:
कुरुक्षेत्र, जनवरी, 2020
नए भारत की स्वास्थ्य सुविधाओं का रोडमैप
अगर हम विश्वस्तरीय स्वास्थ्य प्रणाली करना चाहते हैं, तो हमें पहले मेडिकल से जुड़ी शिक्षा में निवेश कर इसे विश्व-स्तर का बनाना होगा। सरकार ने इसी साल राष्ट्रीय मेडिकल परिषद अधिनियम 2019 पारित किया है। भारत में मेडिकल शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने के मकसद से यह कानून लाया गयाहै। कुशल नर्सिंग पेशेवरों की संख्या बढ़ाने के लिए भी इसी तरह के प्रयास किए जा रहे हैं।
Submitted by HindiWater on Sat, 01/25/2020 - 10:54
Source:
भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान, जोधपुर-342003
प्रतीकात्मक एग्री-वोल्टाइक प्रणाली
एग्री-वोल्टाइक प्रणाली का विचार भविष्य में खाद्य एवं ऊर्जा की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लाया गया, जिसमें एकल भू उपयोग तंत्र में फसल एवं बिजली, दोनों का उत्पादन किया जा सकता है। राजस्थान का पश्चिमी भाग सौर ऊर्जा के लिए बहुत ही उपयुक्त जगह है, जहाँ वर्ष में तकरीबन 300 दिन प्रचुर मात्रा में सूर्य का धूप मिलता है।
Submitted by HindiWater on Fri, 01/24/2020 - 17:02
Source:
माहवारी अपवित्र नहीं, प्राकृतिक है
स्कूल की घंटी बजते ही सभी बच्चे अपनी-अपनी कक्षाओं में दौड़ जाते हैं। सातवी कक्षा की स्वाति (काल्पनिक नाम) भी अपनी सहेलियों के साथ क्लास में पहुँच जाती है। परन्तु वह कक्षा में स्वयं को असहज महसूस करती है। उसका मन पढ़ाई में नहीं लग रहा है।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Mon, 01/27/2020 - 12:11
अपने पिता से मिली पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा को चरिचार्थ किया और चिपको आंदोलन की धरती पर मैती आंदोलन की शुरुआत की। उनका आंदोलन पहाड़ की पथरीली जमीन से निकलकर सात समुंदर पार तक अपनी खुशहाली के बीज रोप रहा है। जिसके लिए भारत सरकार द्वारा 26 जनवरी 2020 को उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 11:07
Source:
मीडिया महोत्सव-2020
गत वर्षों की भांति इस बार भी 22-23 फरवरी, 2020 (शनिवार-रविवार, चतुर्दशी-अमावस्या, कृष्ण पक्ष, माघ, विक्रम संवत 2076) को “भारत का अभ्युदय : मीडिया की भूमिका” पर केन्द्रित “मीडिया महोत्सव-2020” का आयोजन भोपाल में होना सुनिश्चित हुआ है l
Submitted by HindiWater on Thu, 01/16/2020 - 09:57
Source:
नर्मदा, गंगा, कोसी, पेरियार व अन्य नदी घाटियों पर विचार मंथन
कृपया आपके आने की खबर, सफरनामा, सहभागी व्यक्तियों के नाम, उम्र, संबंधित विशेष कार्य/अनुभव इत्यादि के साथ त्वरित भेजें। 30 जनवरी से पहले भेजने से नियोजन में सहूलियत होगी।
Submitted by HindiWater on Sat, 12/28/2019 - 15:14
Source:
पहाड़ और हम : हिमालय के युवाओं के लिए कार्यशाला
पहाड़ों में एक कहावत है कि ‘पहाड़ का पानी और जवानी कभी पहाड़ के काम नहीं आते। सुनने पर इसका सरल और सीधा मतलब लगता है कि पहाड़ों के युवा नौकरी के अवसर के लिए और पहाड़ों का पानी नदियों के रास्ते यहां से मैदानी इलाकों में चले जाता है – दोनों की ऊर्जा और उर्वरकता का फायदा किसी और को होता है।

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खासम-खास

नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह की बहाली 

Submitted by HindiWater on Mon, 01/13/2020 - 22:17
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह की बहाली 
भारत की लगभग सभी नदियों का मानसूनी प्रवाह लगभग अप्रभावित है, पर उनके गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी आ रही है। अर्थात समस्या केवल नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने की ही है। गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने के कारण छोटी तथा मंझौली नदियाँ मौसमी बनकर रह गई हैं। यह असर व्यापक है।

Content

नए भारत की स्वास्थ्य सुविधाओं का रोडमैप

Submitted by HindiWater on Sat, 01/25/2020 - 16:13
Source
कुरुक्षेत्र, जनवरी, 2020
नए भारत की स्वास्थ्य सुविधाओं का रोडमैप
अगर हम विश्वस्तरीय स्वास्थ्य प्रणाली करना चाहते हैं, तो हमें पहले मेडिकल से जुड़ी शिक्षा में निवेश कर इसे विश्व-स्तर का बनाना होगा। सरकार ने इसी साल राष्ट्रीय मेडिकल परिषद अधिनियम 2019 पारित किया है। भारत में मेडिकल शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने के मकसद से यह कानून लाया गयाहै। कुशल नर्सिंग पेशेवरों की संख्या बढ़ाने के लिए भी इसी तरह के प्रयास किए जा रहे हैं।

एग्री-वोल्टाइक प्रणाली: एकल भूमि उपयोग तंत्र में फसल एवं बिजली उत्पादन तथा वर्षा जल संरक्षण

Submitted by HindiWater on Sat, 01/25/2020 - 10:54
Source
भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान, जोधपुर-342003
प्रतीकात्मक एग्री-वोल्टाइक प्रणाली
एग्री-वोल्टाइक प्रणाली का विचार भविष्य में खाद्य एवं ऊर्जा की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लाया गया, जिसमें एकल भू उपयोग तंत्र में फसल एवं बिजली, दोनों का उत्पादन किया जा सकता है। राजस्थान का पश्चिमी भाग सौर ऊर्जा के लिए बहुत ही उपयुक्त जगह है, जहाँ वर्ष में तकरीबन 300 दिन प्रचुर मात्रा में सूर्य का धूप मिलता है।

माहवारी अपवित्र नहीं, प्राकृतिक है

Submitted by HindiWater on Fri, 01/24/2020 - 17:02
माहवारी अपवित्र नहीं, प्राकृतिक है
स्कूल की घंटी बजते ही सभी बच्चे अपनी-अपनी कक्षाओं में दौड़ जाते हैं। सातवी कक्षा की स्वाति (काल्पनिक नाम) भी अपनी सहेलियों के साथ क्लास में पहुँच जाती है। परन्तु वह कक्षा में स्वयं को असहज महसूस करती है। उसका मन पढ़ाई में नहीं लग रहा है।

प्रयास

मैती आंदोलन के जनक कल्याण सिंह रावत को मिला पद्मश्री

Submitted by HindiWater on Mon, 01/27/2020 - 12:11
अपने पिता से मिली पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा को चरिचार्थ किया और चिपको आंदोलन की धरती पर मैती आंदोलन की शुरुआत की। उनका आंदोलन पहाड़ की पथरीली जमीन से निकलकर सात समुंदर पार तक अपनी खुशहाली के बीज रोप रहा है। जिसके लिए भारत सरकार द्वारा 26 जनवरी 2020 को उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

नोटिस बोर्ड

मीडिया महोत्सव-2020

Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 11:07
मीडिया महोत्सव-2020
गत वर्षों की भांति इस बार भी 22-23 फरवरी, 2020 (शनिवार-रविवार, चतुर्दशी-अमावस्या, कृष्ण पक्ष, माघ, विक्रम संवत 2076) को “भारत का अभ्युदय : मीडिया की भूमिका” पर केन्द्रित “मीडिया महोत्सव-2020” का आयोजन भोपाल में होना सुनिश्चित हुआ है l

नर्मदा, गंगा, कोसी, पेरियार व अन्य नदी घाटियों पर विचार मंथन

Submitted by HindiWater on Thu, 01/16/2020 - 09:57
नर्मदा, गंगा, कोसी, पेरियार व अन्य नदी घाटियों पर विचार मंथन
कृपया आपके आने की खबर, सफरनामा, सहभागी व्यक्तियों के नाम, उम्र, संबंधित विशेष कार्य/अनुभव इत्यादि के साथ त्वरित भेजें। 30 जनवरी से पहले भेजने से नियोजन में सहूलियत होगी।

पहाड़ और हम : हिमालय के युवाओं के लिए कार्यशाला

Submitted by HindiWater on Sat, 12/28/2019 - 15:14
पहाड़ और हम : हिमालय के युवाओं के लिए कार्यशाला
पहाड़ों में एक कहावत है कि ‘पहाड़ का पानी और जवानी कभी पहाड़ के काम नहीं आते। सुनने पर इसका सरल और सीधा मतलब लगता है कि पहाड़ों के युवा नौकरी के अवसर के लिए और पहाड़ों का पानी नदियों के रास्ते यहां से मैदानी इलाकों में चले जाता है – दोनों की ऊर्जा और उर्वरकता का फायदा किसी और को होता है।

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