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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

Content

वाटर माफिया हमारे भविष्य को ‘प्यासा’ कर रहे हैं

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/26/2019 - 14:27
Source
आईनेक्सट, 22 जून 2019
साल 2025 तक भारत भीषण जल संकट वाला देश बन जाएगा।साल 2025 तक भारत भीषण जल संकट वाला देश बन जाएगा। शहर में ज्यादातर वाटर प्लांट प्रशासन की निगरानी में नहीं हैं। ऐसे में इनकी गुणवत्ता की कोई चेकिंग नहीं हो पाती। कई प्लांट तो सिर्फ पानी ठंडा कर केन में भरके बेच देते हैं। वाटर प्यूरीफायर का प्रोसेस ही नहीं फाॅलो होता है। ऐसे में लोग जिस पानी को प्यूरीफाइड मानकर पीते हैं वो ठंडा होता है लेकिन शुद्ध नहीं। ऐसे वाटर माफियाओं पर लगाम लगाने के लिए सीधे कोई कानून नहीं है। रजिस्टर्ड न हो पाने के कारण ये प्रशासन और जिम्मेदार लोगों की नजर में भी नहीं आ पाते। जो नजर में आते भी हैं, वो बाहरी रास्तों से हल निकालकर अपना काम चला लेते हैं।

भारत इस समय सूखे के भयावह दौर से गुजर रहा है

Submitted by UrbanWater on Tue, 06/25/2019 - 16:12
जल संस्कृति वाला देश पानी की कमी से जूझ रहा है।जल संस्कृति वाला देश पानी की कमी से जूझ रहा है। जल संस्कृति वाला भारत देश पिछले कुछ समय से पानी की भारी कमी से जूझ रहा है। भूजल स्तर तेजी से कम होता जा रहा है। जहां पांच से दस मीटर खोदने पार पानी मिलता था, आज वहां तीन सौ मीटर खोदने पर भी पानी नहीं मिल रहा है। नौले, धारे, तालाब, झील और नदियां अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। पानी की कमी के कारण खेती प्रभावित हो रही है। इस वर्ष तो स्थिति में सुधार आने के बजाए समस्या और विकट हो गई है। दरअसल एसपीआई की सकारात्मक मात्रा औसत बारिश से अधिक और नकारात्मक मात्रा औसत से कम बारिश होने का संकेत देते हैं।

प्रसिद्ध सरसईनावर वेटलैंड के सूखने से सारस पानी-पानी का मोहताज 

Submitted by UrbanWater on Mon, 06/24/2019 - 16:05
Author
दिनेश शाक्य
राज्य पक्षी सारस के सामने पानी का संकट खडा हो गया है।राज्य पक्षी सारस के सामने पानी का संकट खडा हो गया है। सरसईनावर के वेटलैंड क्षेत्र राजकीय पक्षी सारस के लिए संरक्षित है। सारस समेत कई प्रजाति के पक्षियों के संरक्षण के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। वेटलैंड क्षेत्र में पानी के लिए कोई साधन नहीं है। रजबहा का पानी भी सरसईनावर तक नहीं पहुंचता है। दरअसल, रजबहे से वेटलैंड तक पानी पहुंचाने वाली नालियों पर अतिक्रमण है। पानी न होने से क्षेत्र से सारस और अन्य पक्षी मैनपुरी जनपद के वेटलैंड को पलायन कर गए हैं। पानी के अभाव में पौधे भी सूखने लगे हैं। परिसर के पास पानी की टंकी भी बनी है, उससे भी पानी झील क्षेत्र में नहीं लाया जा रहा है।

प्रयास

बुन्देलखण्ड के बलवीर ने सूखी नदी को किया लबालब

Submitted by HindiWater on Wed, 06/26/2019 - 15:52
Source
पत्रिका

बंदेलखंड के बलवीर ने सूखी नदी को किया लबालब। बंदेलखंड के बलवीर ने सूखी नदी को किया लबालब।

बूंद बूंद पानी को मोहताज बुंदेलखंड के आधुनिक भगीरथ ने अपने निजी नलकूप से पानी डाल दम तोड़ती सालों से सूखी पड़ी चंद्रावल नदी को जीवंत कर इतिहास रच दिया है। कबरई विकास खंड के बन्नी गांव में रहने वाले बुजुर्ग किसान बलवीर नामक भगीरथ के कठिन मेहनत और लगन के चलते आसपास के गांवों के जलस्तर में तेजी से बढ़ोत्तरी होने लगी है।

नोटिस बोर्ड

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

गंगा की जय, सरकार झुकी, मातृसदन के आत्मबोधानंद का अनशन विराम

Submitted by UrbanWater on Sat, 05/04/2019 - 17:50

गंगा अविरलता के लिए चल रहे आत्मबोधानंद के अनशन का फिलहाल विराम  गंगा अविरलता के लिए चल रहे आत्मबोधानंद के अनशन का फिलहाल विराम

गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए 194 दिनों से अनशन कर रहे हरिद्वार के मातृ सदन के आत्माबोधानंद ने नेशनल क्लीन मिशन फाॅर गंगा के निदेशक के लिखित आश्वासन के बाद अपने अनशन को विराम दे दिया है। हालांकि मातृ सदन ने ये भी कहा है कि लिखित आश्वासन के अनुरूप अगर काम नहीं हुआ तो मातृ सदन गंगा की अविरलता के लिए फिर से अनशन पर बैठेगा।

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समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

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वाटर माफिया हमारे भविष्य को ‘प्यासा’ कर रहे हैं

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/26/2019 - 14:27
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आईनेक्सट, 22 जून 2019
साल 2025 तक भारत भीषण जल संकट वाला देश बन जाएगा।साल 2025 तक भारत भीषण जल संकट वाला देश बन जाएगा। शहर में ज्यादातर वाटर प्लांट प्रशासन की निगरानी में नहीं हैं। ऐसे में इनकी गुणवत्ता की कोई चेकिंग नहीं हो पाती। कई प्लांट तो सिर्फ पानी ठंडा कर केन में भरके बेच देते हैं। वाटर प्यूरीफायर का प्रोसेस ही नहीं फाॅलो होता है। ऐसे में लोग जिस पानी को प्यूरीफाइड मानकर पीते हैं वो ठंडा होता है लेकिन शुद्ध नहीं। ऐसे वाटर माफियाओं पर लगाम लगाने के लिए सीधे कोई कानून नहीं है। रजिस्टर्ड न हो पाने के कारण ये प्रशासन और जिम्मेदार लोगों की नजर में भी नहीं आ पाते। जो नजर में आते भी हैं, वो बाहरी रास्तों से हल निकालकर अपना काम चला लेते हैं।

भारत इस समय सूखे के भयावह दौर से गुजर रहा है

Submitted by UrbanWater on Tue, 06/25/2019 - 16:12
जल संस्कृति वाला देश पानी की कमी से जूझ रहा है।जल संस्कृति वाला देश पानी की कमी से जूझ रहा है। जल संस्कृति वाला भारत देश पिछले कुछ समय से पानी की भारी कमी से जूझ रहा है। भूजल स्तर तेजी से कम होता जा रहा है। जहां पांच से दस मीटर खोदने पार पानी मिलता था, आज वहां तीन सौ मीटर खोदने पर भी पानी नहीं मिल रहा है। नौले, धारे, तालाब, झील और नदियां अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। पानी की कमी के कारण खेती प्रभावित हो रही है। इस वर्ष तो स्थिति में सुधार आने के बजाए समस्या और विकट हो गई है। दरअसल एसपीआई की सकारात्मक मात्रा औसत बारिश से अधिक और नकारात्मक मात्रा औसत से कम बारिश होने का संकेत देते हैं।

प्रसिद्ध सरसईनावर वेटलैंड के सूखने से सारस पानी-पानी का मोहताज 

Submitted by UrbanWater on Mon, 06/24/2019 - 16:05
Author
दिनेश शाक्य
राज्य पक्षी सारस के सामने पानी का संकट खडा हो गया है।राज्य पक्षी सारस के सामने पानी का संकट खडा हो गया है। सरसईनावर के वेटलैंड क्षेत्र राजकीय पक्षी सारस के लिए संरक्षित है। सारस समेत कई प्रजाति के पक्षियों के संरक्षण के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। वेटलैंड क्षेत्र में पानी के लिए कोई साधन नहीं है। रजबहा का पानी भी सरसईनावर तक नहीं पहुंचता है। दरअसल, रजबहे से वेटलैंड तक पानी पहुंचाने वाली नालियों पर अतिक्रमण है। पानी न होने से क्षेत्र से सारस और अन्य पक्षी मैनपुरी जनपद के वेटलैंड को पलायन कर गए हैं। पानी के अभाव में पौधे भी सूखने लगे हैं। परिसर के पास पानी की टंकी भी बनी है, उससे भी पानी झील क्षेत्र में नहीं लाया जा रहा है।

प्रयास

बुन्देलखण्ड के बलवीर ने सूखी नदी को किया लबालब

Submitted by HindiWater on Wed, 06/26/2019 - 15:52
Source
पत्रिका

बंदेलखंड के बलवीर ने सूखी नदी को किया लबालब। बंदेलखंड के बलवीर ने सूखी नदी को किया लबालब।

बूंद बूंद पानी को मोहताज बुंदेलखंड के आधुनिक भगीरथ ने अपने निजी नलकूप से पानी डाल दम तोड़ती सालों से सूखी पड़ी चंद्रावल नदी को जीवंत कर इतिहास रच दिया है। कबरई विकास खंड के बन्नी गांव में रहने वाले बुजुर्ग किसान बलवीर नामक भगीरथ के कठिन मेहनत और लगन के चलते आसपास के गांवों के जलस्तर में तेजी से बढ़ोत्तरी होने लगी है।

नोटिस बोर्ड

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

गंगा की जय, सरकार झुकी, मातृसदन के आत्मबोधानंद का अनशन विराम

Submitted by UrbanWater on Sat, 05/04/2019 - 17:50

गंगा अविरलता के लिए चल रहे आत्मबोधानंद के अनशन का फिलहाल विराम  गंगा अविरलता के लिए चल रहे आत्मबोधानंद के अनशन का फिलहाल विराम

गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए 194 दिनों से अनशन कर रहे हरिद्वार के मातृ सदन के आत्माबोधानंद ने नेशनल क्लीन मिशन फाॅर गंगा के निदेशक के लिखित आश्वासन के बाद अपने अनशन को विराम दे दिया है। हालांकि मातृ सदन ने ये भी कहा है कि लिखित आश्वासन के अनुरूप अगर काम नहीं हुआ तो मातृ सदन गंगा की अविरलता के लिए फिर से अनशन पर बैठेगा।

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