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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

Content

किसान जितनी मौसम की मार झेल रहे हैं, उतनी ​ही कर्ज की भी : प्रीति चौधरी

Submitted by RuralWater on Sun, 02/07/2016 - 12:32
Author
मनोरमा


.गौरवशाली अतीत से समृद्ध बुन्देलखण्ड की धरती पिछले डेढ़ दशक से ज्यादा समय से सूखे की चपेट में है। यह धरती अब अपने अतीत की समृद्धि और शौर्यगाथाओं नहीं, बल्कि गरीबी, भुखमरी, कर्ज, पलायन और हर दूसरे दिन किसानों की आत्महत्याओं की कहानी सुनाती है।

अभी पिछले तीन-चार महीनों में ही लगभग हर दूसरे-तीसरे दिन बुन्देलखण्ड के किसी-न-किसी गाँव से किसान की आत्महत्या की खबर आती रही है और अप्रैल 2003 से मार्च 2015 तक यहाँ के लगभग 3280 किसानों ने आत्महत्या की है।

पिछले साल ओलावृष्टि और फिर सूखा ने हालात और खराब बना दिया। आमतौर पर बुन्देलखण्ड में औसत बारिश 1145.7 मिमी. तक होती है लेकिन पिछले मानसून में यहाँ केवल 643.2 मिमी. बारिश ही दर्ज हुई है और कुछ जिलों में तो केवल 484.1 मिमी. तक।

खेती + लाभ + खुशहाली = प्रेमसिंह

Submitted by RuralWater on Sat, 02/06/2016 - 12:22
Author
पूजा सिंह

.जल संकट, अल्प वर्षा, सूखा और तमाम प्राकृतिक तथा मानव जनित समस्याओं से ग्रस्त बुन्देलखण्ड में कुछ चेहरे ऐसे भी हैं जिनको देखकर भविष्य को लेकर आश्वस्ति होती है। ऐसे ही एक शख्स हैं बुन्देलखण्ड के बांदा जिले के बड़ोखर खुर्द गाँव के 51 वर्षीय किसान प्रेम सिंह।

उन्हें मुझसे सहानुभूति है, लेकिन गंगाजी से नहीं - स्वामी सानंद

Submitted by RuralWater on Mon, 02/01/2016 - 10:45
Author
अरुण तिवारी


स्वामी सानंद गंगा संकल्प संवाद का तीसरा कथन आपके समक्ष पठन-पाठन और प्रतिक्रिया के लिये प्रस्तुत है :


.30 सितम्बर, 2013 : हित तीन तरह के होते हैं : एक-भौतिक पक्ष, दूसरा-दैविक पक्ष, जो मन, इच्छा...थिंकिंग से जुड़ा और तीसरा आध्यात्मिक पक्ष; यह सुप्रीम होता है। जैसे जब मैं जेल के हॉस्पिटल वार्ड में था, तो कुछ कैदी, स्वयं को रोगी बताकर भर्ती हो जाते थे। डॉक्टर जानते थे कि दर्द नापने का कोई थर्मामीटर नहीं है। यह दर्द, एक मानसिक पक्ष है।

आध्यात्मिक पक्ष..जैसे आत्मा के बारे में क्लियरिटी.. भारतीय दर्शन में जैसा है, वह आध्यात्मिक पक्ष है। गंगाजी का भौतिक पक्ष - इसमें जो गंगा जी का रोगनाशक पक्ष है, इसे कौन कोई समझता है; आजीविका को समझते हैं। इसीलिये गंगाजी का दोहन करना चाहते हैं।

प्रयास

पहली बार बिजली से रोशन हुआ गांव, ग्रामीणों को मिला साफ पानी

Submitted by HindiWater on Thu, 07/11/2019 - 16:56
राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां।राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां। आज देश में जहां एक ओर शहरों को ‘‘स्मार्ट सिटी’’ और गांवों को ‘‘स्मार्ट गांव’’ बनाया जा रहा है, तो वहीं देश के करीब एक लाख गांव विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। यहां लोगों के पास जीवनयापन तक के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। ये लोग पीने के पानी से लेकर भोजन और बिजली तक के लिए मोहताज हैं। रोजगार के अभाव में बच्चें शिक्षा से वंचित हैं। नेता और मंत्री तो दूर गांव में अभी सड़क तक नहीं पहुंची है। पेयजल की पर्याप्त सुविधा न होने के कारण कई गांवों के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। विकास की पहुंच से दूर होने के कारण कोई इस गांव में शादी नहीं करता है, जिस कारण गांव में आखिरी शादी 22 साल पहले हुई थी। इन एक लाख गांवों पर न तो कभी दिल्ली के वातानुकुलित दफ्तरों में बैठकर योजनाएं तैयार करने वाली सरकार की नजर गई और न ही लाखों रुपये वेतन लेने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

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किसान जितनी मौसम की मार झेल रहे हैं, उतनी ​ही कर्ज की भी : प्रीति चौधरी

Submitted by RuralWater on Sun, 02/07/2016 - 12:32
Author
मनोरमा


.गौरवशाली अतीत से समृद्ध बुन्देलखण्ड की धरती पिछले डेढ़ दशक से ज्यादा समय से सूखे की चपेट में है। यह धरती अब अपने अतीत की समृद्धि और शौर्यगाथाओं नहीं, बल्कि गरीबी, भुखमरी, कर्ज, पलायन और हर दूसरे दिन किसानों की आत्महत्याओं की कहानी सुनाती है।

अभी पिछले तीन-चार महीनों में ही लगभग हर दूसरे-तीसरे दिन बुन्देलखण्ड के किसी-न-किसी गाँव से किसान की आत्महत्या की खबर आती रही है और अप्रैल 2003 से मार्च 2015 तक यहाँ के लगभग 3280 किसानों ने आत्महत्या की है।

पिछले साल ओलावृष्टि और फिर सूखा ने हालात और खराब बना दिया। आमतौर पर बुन्देलखण्ड में औसत बारिश 1145.7 मिमी. तक होती है लेकिन पिछले मानसून में यहाँ केवल 643.2 मिमी. बारिश ही दर्ज हुई है और कुछ जिलों में तो केवल 484.1 मिमी. तक।

खेती + लाभ + खुशहाली = प्रेमसिंह

Submitted by RuralWater on Sat, 02/06/2016 - 12:22
Author
पूजा सिंह

.जल संकट, अल्प वर्षा, सूखा और तमाम प्राकृतिक तथा मानव जनित समस्याओं से ग्रस्त बुन्देलखण्ड में कुछ चेहरे ऐसे भी हैं जिनको देखकर भविष्य को लेकर आश्वस्ति होती है। ऐसे ही एक शख्स हैं बुन्देलखण्ड के बांदा जिले के बड़ोखर खुर्द गाँव के 51 वर्षीय किसान प्रेम सिंह।

उन्हें मुझसे सहानुभूति है, लेकिन गंगाजी से नहीं - स्वामी सानंद

Submitted by RuralWater on Mon, 02/01/2016 - 10:45
Author
अरुण तिवारी


स्वामी सानंद गंगा संकल्प संवाद का तीसरा कथन आपके समक्ष पठन-पाठन और प्रतिक्रिया के लिये प्रस्तुत है :


.30 सितम्बर, 2013 : हित तीन तरह के होते हैं : एक-भौतिक पक्ष, दूसरा-दैविक पक्ष, जो मन, इच्छा...थिंकिंग से जुड़ा और तीसरा आध्यात्मिक पक्ष; यह सुप्रीम होता है। जैसे जब मैं जेल के हॉस्पिटल वार्ड में था, तो कुछ कैदी, स्वयं को रोगी बताकर भर्ती हो जाते थे। डॉक्टर जानते थे कि दर्द नापने का कोई थर्मामीटर नहीं है। यह दर्द, एक मानसिक पक्ष है।

आध्यात्मिक पक्ष..जैसे आत्मा के बारे में क्लियरिटी.. भारतीय दर्शन में जैसा है, वह आध्यात्मिक पक्ष है। गंगाजी का भौतिक पक्ष - इसमें जो गंगा जी का रोगनाशक पक्ष है, इसे कौन कोई समझता है; आजीविका को समझते हैं। इसीलिये गंगाजी का दोहन करना चाहते हैं।

प्रयास

पहली बार बिजली से रोशन हुआ गांव, ग्रामीणों को मिला साफ पानी

Submitted by HindiWater on Thu, 07/11/2019 - 16:56
राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां।राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां। आज देश में जहां एक ओर शहरों को ‘‘स्मार्ट सिटी’’ और गांवों को ‘‘स्मार्ट गांव’’ बनाया जा रहा है, तो वहीं देश के करीब एक लाख गांव विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। यहां लोगों के पास जीवनयापन तक के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। ये लोग पीने के पानी से लेकर भोजन और बिजली तक के लिए मोहताज हैं। रोजगार के अभाव में बच्चें शिक्षा से वंचित हैं। नेता और मंत्री तो दूर गांव में अभी सड़क तक नहीं पहुंची है। पेयजल की पर्याप्त सुविधा न होने के कारण कई गांवों के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। विकास की पहुंच से दूर होने के कारण कोई इस गांव में शादी नहीं करता है, जिस कारण गांव में आखिरी शादी 22 साल पहले हुई थी। इन एक लाख गांवों पर न तो कभी दिल्ली के वातानुकुलित दफ्तरों में बैठकर योजनाएं तैयार करने वाली सरकार की नजर गई और न ही लाखों रुपये वेतन लेने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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