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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Mon, 01/13/2020 - 22:17
नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह की बहाली 
भारत की लगभग सभी नदियों का मानसूनी प्रवाह लगभग अप्रभावित है, पर उनके गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी आ रही है। अर्थात समस्या केवल नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने की ही है। गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने के कारण छोटी तथा मंझौली नदियाँ मौसमी बनकर रह गई हैं। यह असर व्यापक है।

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Submitted by HindiWater on Tue, 12/24/2019 - 14:44
Source:
कुरुक्षेत्र, दिसम्बर, 2019
बांस उद्योग-ग्रामीण आजीविका का स्रोत
भारत सरकार ने अप्रैल 2018 में पुनर्गठित राष्ट्रीय बांस विभाग को स्वीकृति दी। साथ ही, बांस क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए पौधारोपण सामग्री से लेकर बागवानी, संग्रह सुविधा कायम करने, समेकन, प्रसंस्करण, विपणन,सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमों, कौशल विकास और ब्रांड कायम करने जैसी पहल के बारे में क्लस्टर दृष्टिकोण अपनाते हुए सम्पूर्ण मूल्य-श्रृंखला विकसित करने पर ध्यान केन्द्रित किया गया है।
Submitted by HindiWater on Fri, 12/20/2019 - 16:05
Source:
कुरुक्षेत्र, दिसम्बर 2019
कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने हेतु योजनाएं
आजादी के 73 साल पूरे होने पर देश ने कई मामलों में मुख्यतः कृषि व ग्रामीण क्षेत्र के विकास में, लम्बी छलांग लगाई है। आज देश कृषि-आधारित उद्योगों का जाल बिछाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कृषि-आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सड़क, बिजली, पानी, आसान ऋण, सस्ती व तेज इंटरनेट सेवा की व्यवस्था मजबूत की जा रही है।
Submitted by HindiWater on Fri, 12/20/2019 - 10:28
Source:
कांठा, क्रिकेटर और एक लोटा जल
इस वर्ष 2019 में इस सम्मान के प्राप्तकर्ता मुस्तकीम को 60 हज़ार रुपए की धनराशि, शाल और सम्मान चिन्ह भेंट किया गया; डब्लयूडब्लयूएफ (WWF) ने नदी कार्य के लिए आर्थिक सहयोग का वचन किया, सो अलग।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Thu, 01/23/2020 - 11:33
लेविस पुग
लेविस पुग का जन्म पांस दिसंबर 1969 को इंग्लैंड के प्लाईमाउथ में हुआ था। बचपन से ही पर्यावरण के प्रति काफी लगाव होने के साथ ही तैराकी में काफी रूचि थी। अपनी इस रूचि को जीवन का अहम हिस्सा बनाया और वर्ष 1986 में पहली बार 17 वर्ष की आयु में तैराकी की। इसी के एक महीने बाद पुग ने राॅबेल आइलैंड से केपटाउन तक तैराकी की थी।

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 11:07
Source:
मीडिया महोत्सव-2020
गत वर्षों की भांति इस बार भी 22-23 फरवरी, 2020 (शनिवार-रविवार, चतुर्दशी-अमावस्या, कृष्ण पक्ष, माघ, विक्रम संवत 2076) को “भारत का अभ्युदय : मीडिया की भूमिका” पर केन्द्रित “मीडिया महोत्सव-2020” का आयोजन भोपाल में होना सुनिश्चित हुआ है l
Submitted by HindiWater on Thu, 01/16/2020 - 09:57
Source:
नर्मदा, गंगा, कोसी, पेरियार व अन्य नदी घाटियों पर विचार मंथन
कृपया आपके आने की खबर, सफरनामा, सहभागी व्यक्तियों के नाम, उम्र, संबंधित विशेष कार्य/अनुभव इत्यादि के साथ त्वरित भेजें। 30 जनवरी से पहले भेजने से नियोजन में सहूलियत होगी।
Submitted by HindiWater on Sat, 12/28/2019 - 15:14
Source:
पहाड़ और हम : हिमालय के युवाओं के लिए कार्यशाला
पहाड़ों में एक कहावत है कि ‘पहाड़ का पानी और जवानी कभी पहाड़ के काम नहीं आते। सुनने पर इसका सरल और सीधा मतलब लगता है कि पहाड़ों के युवा नौकरी के अवसर के लिए और पहाड़ों का पानी नदियों के रास्ते यहां से मैदानी इलाकों में चले जाता है – दोनों की ऊर्जा और उर्वरकता का फायदा किसी और को होता है।

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खासम-खास

नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह की बहाली 

Submitted by HindiWater on Mon, 01/13/2020 - 22:17
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह की बहाली 
भारत की लगभग सभी नदियों का मानसूनी प्रवाह लगभग अप्रभावित है, पर उनके गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी आ रही है। अर्थात समस्या केवल नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने की ही है। गैर-मानसूनी प्रवाह के घटने के कारण छोटी तथा मंझौली नदियाँ मौसमी बनकर रह गई हैं। यह असर व्यापक है।

Content

बांस उद्योग-ग्रामीण आजीविका का स्रोत

Submitted by HindiWater on Tue, 12/24/2019 - 14:44
Source
कुरुक्षेत्र, दिसम्बर, 2019
बांस उद्योग-ग्रामीण आजीविका का स्रोत
भारत सरकार ने अप्रैल 2018 में पुनर्गठित राष्ट्रीय बांस विभाग को स्वीकृति दी। साथ ही, बांस क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए पौधारोपण सामग्री से लेकर बागवानी, संग्रह सुविधा कायम करने, समेकन, प्रसंस्करण, विपणन,सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमों, कौशल विकास और ब्रांड कायम करने जैसी पहल के बारे में क्लस्टर दृष्टिकोण अपनाते हुए सम्पूर्ण मूल्य-श्रृंखला विकसित करने पर ध्यान केन्द्रित किया गया है।

कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने हेतु योजनाएं

Submitted by HindiWater on Fri, 12/20/2019 - 16:05
Source
कुरुक्षेत्र, दिसम्बर 2019
कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने हेतु योजनाएं
आजादी के 73 साल पूरे होने पर देश ने कई मामलों में मुख्यतः कृषि व ग्रामीण क्षेत्र के विकास में, लम्बी छलांग लगाई है। आज देश कृषि-आधारित उद्योगों का जाल बिछाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कृषि-आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सड़क, बिजली, पानी, आसान ऋण, सस्ती व तेज इंटरनेट सेवा की व्यवस्था मजबूत की जा रही है।

कांठा नदी को जीवित करने में जुटे शामली के मुस्तकीम

Submitted by HindiWater on Fri, 12/20/2019 - 10:28
Author
अरुण तिवारी
कांठा, क्रिकेटर और एक लोटा जल
इस वर्ष 2019 में इस सम्मान के प्राप्तकर्ता मुस्तकीम को 60 हज़ार रुपए की धनराशि, शाल और सम्मान चिन्ह भेंट किया गया; डब्लयूडब्लयूएफ (WWF) ने नदी कार्य के लिए आर्थिक सहयोग का वचन किया, सो अलग।

प्रयास

लेविस पुग ने अंटार्कटिका की पिघलती बर्फ के बीच तैरकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

Submitted by HindiWater on Thu, 01/23/2020 - 11:33
लेविस पुग
लेविस पुग का जन्म पांस दिसंबर 1969 को इंग्लैंड के प्लाईमाउथ में हुआ था। बचपन से ही पर्यावरण के प्रति काफी लगाव होने के साथ ही तैराकी में काफी रूचि थी। अपनी इस रूचि को जीवन का अहम हिस्सा बनाया और वर्ष 1986 में पहली बार 17 वर्ष की आयु में तैराकी की। इसी के एक महीने बाद पुग ने राॅबेल आइलैंड से केपटाउन तक तैराकी की थी।

नोटिस बोर्ड

मीडिया महोत्सव-2020

Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 11:07
मीडिया महोत्सव-2020
गत वर्षों की भांति इस बार भी 22-23 फरवरी, 2020 (शनिवार-रविवार, चतुर्दशी-अमावस्या, कृष्ण पक्ष, माघ, विक्रम संवत 2076) को “भारत का अभ्युदय : मीडिया की भूमिका” पर केन्द्रित “मीडिया महोत्सव-2020” का आयोजन भोपाल में होना सुनिश्चित हुआ है l

नर्मदा, गंगा, कोसी, पेरियार व अन्य नदी घाटियों पर विचार मंथन

Submitted by HindiWater on Thu, 01/16/2020 - 09:57
नर्मदा, गंगा, कोसी, पेरियार व अन्य नदी घाटियों पर विचार मंथन
कृपया आपके आने की खबर, सफरनामा, सहभागी व्यक्तियों के नाम, उम्र, संबंधित विशेष कार्य/अनुभव इत्यादि के साथ त्वरित भेजें। 30 जनवरी से पहले भेजने से नियोजन में सहूलियत होगी।

पहाड़ और हम : हिमालय के युवाओं के लिए कार्यशाला

Submitted by HindiWater on Sat, 12/28/2019 - 15:14
पहाड़ और हम : हिमालय के युवाओं के लिए कार्यशाला
पहाड़ों में एक कहावत है कि ‘पहाड़ का पानी और जवानी कभी पहाड़ के काम नहीं आते। सुनने पर इसका सरल और सीधा मतलब लगता है कि पहाड़ों के युवा नौकरी के अवसर के लिए और पहाड़ों का पानी नदियों के रास्ते यहां से मैदानी इलाकों में चले जाता है – दोनों की ऊर्जा और उर्वरकता का फायदा किसी और को होता है।

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